रूस: वागनर ग्रुप से जुड़े भाड़े के सैनिक अब कहां हैं?

वागनर समूह, रूस, पुतिन

इमेज स्रोत, Getty Images

    • Author, इलिया बाराबानोव और अनसतासिया लोतारेवा
    • पदनाम, बीबीसी रूसी सेवा

24 अगस्त 2024 को रूस की प्राइवेट आर्मी कहे जाने वाले वागनर ग्रुप के प्रमुख रहे येवगेनी प्रिगोज़िन की मौत को एक साल पूरे हो रहे हैं.

प्रिगोज़िन की मौत के एक साल बाद भी अब तक ये पूरी तरह साफ़ नहीं है कि इस ग्रुप से जुड़े भाड़े के लड़ाकों या सैनिकों का क्या हुआ?

ये लड़ाके यूक्रेन, सीरिया और अफ़्रीका के कुछ हिस्सों में सक्रिय थे.

बीबीसी रूसी सेवा ने इस ग्रुप के पूर्व लड़ाकों और दूसरे संबंधित व्यक्तियों से बात की.

हमने ये समझना चाहा कि प्रिगोज़िन की प्लेन क्रैश में मौत और रूस से हुए समझौते के बाद इस ग्रुप के लड़ाकों का आख़िर क्या हुआ?

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
इमेज कैप्शन, बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

वो लड़ाका जो भागने में कामयाब हुआ?

सितंबर 2023. नीली आँखों वाला एक युवक इस्तांबुल एयरपोर्ट के चेक-इन काउंटर पर खड़ा था.

किफ़ाया ओढे़ ये युवक लीबिया जाने की कोशिश कर रहा था. मकसद था कि किसी दूसरे अफ़्रीकी देश में नई नौकरी मिल जाए.

ये युवक वागनर ग्रुप का लड़ाका रहा है.

अरबों रुपये की कंपनियों, प्रोजेक्ट्स पर इस ग्रुप का नियंत्रण रहा. ये ग्रुप सीरिया, माली, मध्य अफ्रीका, सूडान और लीबिया में सक्रिय रहा. रूस ने यूक्रेन पर जब आक्रमण किया तो वागनर ग्रुप के लड़ाकों की अहम भूमिका थी.

ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने अनुमान लगाया था कि यूक्रेन में वागनर ग्रुप के क़रीब 50 हज़ार लड़ाके थे.

बीबीसी रूसी सेवा की हासिल की एक लिस्ट के मुताबिक़, इन लड़ाकों में से क़रीब 20 हज़ार की बखमूत में हुई जंग के दौरान मौत हो गई थी. इनमें से ज़्यादातर पूर्व कैदी थे.

प्रिगोज़िन ने मई 2023 में हथियारों की कमी के लिए रूसी रक्षा मंत्रालय पर आरोप लगाते हुए युद्ध के मोर्चे पर मौजूद अपने लड़ाकों को वापस बुला लिया था.

हालांकि किफ़ाया पहना युवक इससे बचकर निकलने में कामयाब रहा.

भागने के बाद इस युवक को टेलीग्राम पर एक संदेश मिला. इस संदेश में युवक को ''इंसाफ़ के लिए मार्च'' में शामिल होने को कहा गया.

रूस के राष्ट्रपति पुतिन

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, रूस के राष्ट्रपति पुतिन

पुतिन के ख़िलाफ़ ही बग़ावत

यूक्रेन के ख़िलाफ़ जंग में सक्रिय वागनर ग्रुप एक समय पुतिन के ख़िलाफ़ हो गया था.

वागनर ग्रुप ने पुतिन के ख़िलाफ़ जब आक्रामक रुख़ अपनाया था, तो इसमें शामिल लड़ाकों में ये युवक भी शामिल था जो अब रूस से बाहर जा चुका है.

इस युवक ने आख़िरी बार प्रिगोज़िन को तब देखा था, जब वो सेल्फी के लिए पोज़ देने के बाद कार से कहीं जा रहे थे.

वागनर ग्रुप ने मॉस्को की तरफ कूच करने का एलान किया था.

हालांकि बाद में इस कूच को रोक दिया गया.

तब पुतिन के साथ ये समझौता हुआ था कि वागनर ग्रुप के लड़ाके रूसी सेना में शामिल हो सकते हैं या फिर प्रिगोज़िन के साथ बेलारूस जा सकते हैं.

किफ़ाया पहने इस युवक ने कहा- ये वो पल था जब मुझे समझ आ गया कि वागनर ग्रुप में मेरा करियर ख़त्म हो गया है.

वो बोले, ''इस डील में ढुलमुल रवैया बरता जाने लगा और कुछ बेलारूस गए, कुछ कहीं और. कुछ भी तय नहीं था. तब मैंने ख़ुद के लिए फ़ैसला किया.''

वागनर ग्रुप के प्रमुख प्रिगोज़िन

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, वागनर ग्रुप के प्रमुख प्रिगोज़िन

23 अगस्त 2023- जब बदल गया वागनर ग्रुप

दो महीने बाद 23 अगस्त 2023 को मॉस्को के उत्तरी इलाके में प्रिगोज़िन की प्राइवेट जेट क्रैश होने से मौत हो गई. इस क्रैश में प्रिगोज़िन समेत वागनर समूह के कई और सदस्य मारे गए थे.

रूस ने इस मामले में किसी तरह की भूमिका होने की अफवाहों को ख़ारिज किया. हालांकि वागनर ग्रुप के लड़ाकों समेत कई लोगों को इस पर भरोसा नहीं है.

वागनर ग्रुप छोड़ चुके युवक ने कहा- जब उन्होंने प्रिगोज़िन की हत्या कर दी तो मेरे लिए रूस में कुछ बचा नहीं था.

तब इस युवक ने अपने विकल्पों की तलाश की.

किफ़ाया पहने शख़्स के पास वैध पासपोर्ट था. कुछ बचत थी और जंग का अनुभव था. वो सीरिया जाना चुनता है. अतीत में वो यहां लड़ चुका था.

बीबीसी रूसी सेवा से दो सूत्रों ने कहा कि सीरिया में जो लड़ाके थे, उनको रूसी सेना में शामिल होने का ऑफर दिया गया था.

वागनर ग्रुप के एक पूर्व लड़ाके ने कहा- लड़ाकों के सामने दो विकल्प थे. सेना से जुड़ो या भाड़ में जाओ.

वागनर समूह के प्रिगोज़िन

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, वागनर समूह के प्रिगोज़िन

लड़ाकों ने क्या चुना

एक पूर्व लड़ाके ने बताया कि वो इस ऑफर को स्वीकार नहीं करना चाहते थे और दो महीने तक मामले में चुप रहे. फिर भी उन्हें रुपये मिलते रहे.

जब वो अफ्रीका जाकर नौकरी करना चुनते हैं तो किसी ने उन्हें नहीं रोका.

इसी दौर में उत्तरी अफ़्रीका जाने वाले लोगों में रूस के डिप्टी डिफेंस मिनिस्टर युनूस बेक येवकुरोव भी शामिल थे.

युनूस के साथ रूसी इंटेलिजेंस सर्विस के कुछ शीर्ष अधिकारी भी थे. ये लोग उन देशों में गए, जहां वागनर ग्रुप सक्रिय था. जैसे- लीबिया, बुर्किना फासो, मीला, नीजेर.

ब्रिटेन के थिंक टैंक रॉयल यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के मुताबिक़- युनूस ने कहा कि वागनर ग्रुप के साथ पहले से जो वादे किए गए हैं, उनका सम्मान किया जाएगा लेकिन अब बातचीत सीधा रूस के रक्षा मंत्रालय के साथ होगी.

इस रिपोर्ट में कहा गया कि अफ्रीका में वागनर ग्रुप अब सरकारों को सैन्य मदद मुहैया कराते हैं. इसमें इस्लामिक और अन्य घुसपैठियों के ख़िलाफ़ मदद करना भी शामिल है. बदले में ये रणनीतिक तौर पर अहम प्राकृतिक संसाधनों की चाहत रखते हैं.

रूसी सैनिक

इमेज स्रोत, EPA

रूस के हित और वागनर ग्रुप

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

माली, नीजेर और बुर्किना फासो में बीते सालों में सेना ने सत्ता संभाली है. इन देशों ने फ्रांस के साथ दूरियां बनाई हैं और रूस से क़रीबियां बढ़ाई हैं.

हालांकि ब्रितानी थिंक टैंक की रिपोर्ट कहती है कि रूस की रुचि लीथियम, गोल्ड और यूरेनियम जैसे चीज़ों में है.

रूसी रक्षा मंत्रालय की ओर से 2023 के अंत में अफ्रीकन कोर के लिए नियुक्ति संबंधी एलान किए गए.

किफ़ाया पहना ये पूर्व लड़ाका कहता है- मेरे दिमाग में जो अफ्रीकी देश था, मैं वहां पहुंच गया.

वो कहते हैं- किराए के सैनिक का काम किसी दूसरे काम जैसा ही है. मुझे यूक्रेन या बेलारूस से बेहतर अफ़्रीका लगा.

इस लड़ाके के कई पूर्व साथी रूसी रक्षा मंत्रालय के साथ काम करने लगे हैं और नई बनाई गई यूनिट में तैनात भी हो गए हैं.

हालांकि प्रिगोज़िन से जुड़े रहे एक सूत्र ने बीबीसी से बताया कि उनके बेटे पावेल अब भी अपना असर बनाए हुए हैं.

सूत्र ने बताया- पावेल को अपनी पिता की विरासत को अफ्रीका में संभालने की अनुमति रूस की ओर से मिली हुई है. हालांकि एक शर्त ये है कि इससे रूस के हित प्रभावित ना हों.

शुरुआत में ऐसे अनुमान लगाए जा रहे थे कि पावेल वागनर सैन्य ग्रुप नेशनल गार्ड के तहत चला रहे हैं न कि रक्षा मंत्रालय के तहत.

व्लादिमीर पुतिन

इमेज स्रोत, EPA

इमेज कैप्शन, व्लादिमीर पुतिन

भर्तियों के विज्ञापन

ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने फरवरी में कहा था- वागनर ग्रुप से जुड़ी तीन टुकड़ियों को रोसग्वार्डिया में तैनात किया गया. पहले ऐसी संभावनाएं थीं कि इनको यूक्रेन या अफ्रीका में तैनात किया जाएगा.

इस मामले में पावेल की भूमिका के बारे में आधिकारिक तौर पर जानकारी उपलब्ध नहीं है. इस संबंध में बीबीसी के पूछे सवालों का पावेल ने जवाब नहीं दिया है.

वागनर लड़ाकों के बारे में आधिकारिक तौर पर कम ही जानकारी उपलब्ध है. साथ ही स्पष्ट तौर पर ये भी नहीं पता कि अब उन्हें नौकरी पर कौन रख रहा है?

हालांकि इन लड़ाकों के आधिकारिक टेलीग्राम चैनल पर अब भी भर्तियों से जुड़े विज्ञापन पोस्ट किए जा रहे हैं. इसमें मिशन को ''किसी दूर स्थान'' पर बताया जाता है.

वागनर ग्रुप के सहारे रूस अपने अंतरराष्ट्रीय लक्ष्यों को साध रहा है और ऐसा करके वो प्रतिबंधों से भी बचा जा रहा है. वो ऐसे किसी काम में ख़ुद के शामिल होने की बात से भी इनकार कर पा रहा है.

हालांकि कई पूर्व लड़ाकों ने अब तक अपनी स्थिति साफ नहीं की है या न तो रूसी रक्षा मंत्रालय का विरोध किया है.

यूक्रेन पर आक्रमण के बाद रूसी सेना ने ऐसा ख़ुफिया तंत्र बनाया जिसमें लड़ाके भी शामिल हैं, इसे रेडट नाम दिया गया है.

'रेडियो फ्री यूरोप' ने अक्तूबर 2023 में अपनी जांच में पाया कि रेडट पीएमसी बैनर के तहत 20 अलग स्थानों पर भर्तियां की जा रही हैं.

इस जांच में पता चला कि रेडट रूसी सेना इंटेलिजेंस की तरफ से चलाई जाने वाली ''फेक प्राइवेट मिलिट्री'' कंपनी है.

रेडट के आधिकारिक दस्तावेज़ों को बीबीसी खोज नहीं पाई है. कई सूत्रों का कहना है कि ये रूसी रक्षा मंत्रालय से संबंधित है.

रेडट और रूस ने बीबीसी के सवालों का जवाब नहीं दिया है.

वागनर समूह का एक लड़ाका

इमेज स्रोत, EPA

इमेज कैप्शन, वागनर समूह का एक लड़ाका

कहां- कहां हो सकते हैं वागनर के लड़ाके

बीबीसी ने वागनर ग्रुप के उन पूर्व लड़ाकों से बात की है, जो मेडवेटी-बियर्स- 81वीं स्पेशल ऑपरेशन ब्रिगेड में शामिल हो चुके हैं.

इंटेलिजेंस रिसर्चर और पश्चिम अफ्रीका से सुरक्षा विशेषज्ञ नोमेड साहेलिन के मुताबिक़, वो रेडट के साथ जुड़े हुए हैं और अपने आपको भले ही स्पेशल ब्रिगेड कहते हों लेकिन वो एक प्राइवेट मिलिट्री कंपनी की तरह हैं.

अगस्त 2023 में सेना समर्थक सोशल मीडिया पेज पर इस यूनिट में भर्ती के लिए विज्ञापन पोस्ट किए गए.

इन विज्ञापनों में लिखा गया- हमें पायलट, टेक्नीशियन चाहिए. एमआई-8, एमआई-24 हेलिकॉप्टर चाहिए.

इसमें लिखा था- ''छह महीने का अनुबंध होगा और महीने के 2500 डॉलर दिए जाएंगे, साथ में कुछ सुख सुविधाएं. उम्र 22 से 50 साल. क्राइमिया आइए. हम ट्रेनिंग, कपड़े भी मुहैया करवाएंगे.''

इस विज्ञापन में क्राइमिया जाने की बात कही गई थी लेकिन नोमेड का कहना है कि इसका मुख्यालय बुर्किना फासो में बनाया गया है और सैलरी 2500 से 4000 डॉलर के बीच दी जाएगी.

वागनर ग्रुप के पूर्व लड़ाकों के साथ हुई बातचीत के आधार पर बीबीसी ने पाया कि कई लड़ाकों ने अफ्रीका में रहना चुना, इनमें बुर्किना फासो भी शामिल है.

इन पूर्व लड़ाकों का एक संभावित ठिकाना चेचन्या हो सकता है.

प्रिगोज़िन के साथ पुतिन. तस्वीर साल 2010 की है.

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, प्रिगोज़िन के साथ पुतिन. तस्वीर साल 2010 की है

''सब कुछ वागनर जैसा होगा''

अप्रैल महीने में चेचन्या के नेता रमज़ान कदयोरोव ने कहा था कि लड़ाकों में से क़रीब 3000 अखमत के स्पेशल फोर्स ग्रुप में शामिल हो गए हैं. ये जानकारी रूसी न्यूज़ एजेंसी तास ने दी है.

वागनर समूह से जुड़ी जानी-मानी हस्ती एलेक्ज़ेंडर कुज़नेतसोव को 'रेटीबर' के नाम से भी पुकारा जाता है.

वो एक वीडियो में कहते दिखते हैं- ''सब कुछ वागनर जैसा ही होगा. कोई कागजी कार्यवाही या कुछ और नहीं. हमारा काम करने का तरीका पहले जैसा ही रहेगा. कुछ नहीं बदलेगा.''

3000 लड़ाकों के अखमत जाने के दावे की बीबीसी पुष्टि नहीं कर पाया है.

सैन्य गतिविधियों पर नज़र रखने वाले रिसर्च प्रोजेक्ट बेलारुस्की हाजुन के मुताबिक़- बेलारूस जाने वाले लड़ाकों की संख्या 100 से कम है, ये लोग वहां की सेना को ट्रेनिंग देने का काम कर रहे हैं.

28 जुलाई को माली में वागनर के लड़ाकों के होने की ख़बर आई थी.

जब वागनर पीएमसी के टेलीग्राम चैनल पर एक बयान जारी किया गया और बताया गया कि कुछ लड़ाके मारे गए हैं और इनमें एक कमांडर भी शामिल है. हालांकि मरने वालों की संख्या नहीं बताई गई थी.

रूस समर्थक कई टेलीग्राम चैनल से बताया गया कि कई दर्जन वागनर लड़ाके मारे गए हैं. ये अफ्रीका में इस ग्रुप का सबसे बड़ा नुकसान हो सकता है.

किराए के सैनिकों के बारे में माना जाता है कि ये अफ्रीकन कोर का हिस्सा हैं. लेकिन इस बारे में रूसी रक्षा मंत्रालय की ओर से आधिकारिक बयान नहीं आया है.

किफ़ाया पहने शख़्स ने तब से हमारे संदेश का जवाब नहीं दिया है. उनकी मां के सोशल मीडिया पेज पर श्रद्धांजलि देती एक पोस्ट दिखी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)