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पाकिस्तानी एयरलाइंस के कई विमान पैसे नहीं होने के कारण रोके गए
पाकिस्तान की राष्ट्रीय विमानन सेवा पीआईए बंद होने की कगार पर पहुँच गई है.
पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) पर इतना क़र्ज़ हो गया है कि उसे अपनी 31 में से 14 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद करनी पड़ी हैं.
कई खाड़ी देशों में ईंधन के लिए भुगतान न कर पाने की वजह से पीआईए के विमानों को उड़ने से रोक दिया गया.
पीआईए के डायरेक्टर ने कहा है कि अगर इमरजेंसी फ़ंड मुहैया न कराया गया तो इस राष्ट्रीय विमानन सेवा पर किसी भी समय ताला लग सकता है.
वहीं, पीआईए के प्रवक्ता ने कहा है कि एयरलाइन ने बैंकों से कुछ फंड जोड़ा है, लेकिन इससे मदद मिलने में अभी समय लगेगा.
बीते सप्ताह ही पीआईए ने ये बताया था कि बोइंग और एयरबस सितंबर के मध्य तक विमानों के कल-पुर्ज़ों की सप्लाई पर रोक लगा सकती है.
कारण ये था कि पाआईए इन कंपनियों को पिछले बकाया का भुगतान नहीं कर पा रही है.
पाकिस्तान की मौजूदा सरकार इन पब्लिक सेक्टर कंपनियों के निजीकरण की योजना पहले ही पेश कर चुकी है. हालाँकि, इसको लेकर भी सरकार की आलोचना हो रही है.
लोगों का कहना है कि पहले से आर्थिक बदहाली से जूझती कंपनियों को कोई भी बिना किसी फ़ायदे के क्यों ख़रीदेगा.
विपक्षी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) ने भी एक रिपोर्ट के हवाले से पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) गठबंधन की मौजूदा सरकार पर अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने का आरोप लगाया है.
पाकिस्तान अपने सबसे गंभीर आर्थिक संकट से गुज़र रहा है.
इसी साल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से तीन अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज को मंज़ूरी मिलने के बाद वो डिफॉल्टर होने से बचा है.
पीआईए का आर्थिक संकट
सरकारी विमानन कंपनी पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस कॉर्प को क़रीब छह कंपनियों को तुरंत 10 करोड़ डॉलर यानी 830 करोड़ रुपए के आसपास का भुगतान करना है.
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में पीआईए के प्रवक्ता अब्दुल्लाह ख़ान के हवाले से लिखा है कि पीआईए वेतन और एयरपोर्ट चार्ज तक का भुगतान नहीं कर पा रही है.
बुधवार को ही पीआईए ने कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दीं. इससे पहले कंपनी ने कम से कम पाँच एयरबस ए320 जेट की उड़ानें रोकी थीं.
जियो न्यूज़ की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से ये बताया गया है कि विमानन कंपनी पाकिस्तान स्टेट ऑयल (पीएसओ) को ईंधन आपूर्ति के लिए भुगतान नहीं कर सकी.
इस वजह से कंपनी को कई उड़ानें रद्द करनी पड़ीं.
इनमें दो कराची-मस्कट (ओमान की राजधानी) की उड़ानें और दो कराची से फ़ैसलाबाद, इस्लामाबाद से लाहौर की उड़ानें शामिल हैं.
पीआईए पर कर्ज़ बढ़ने की एक वजह उसके अकाउंट फ़्रीज़ होने को भी बताया जा रहा है.
एआरवाई की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के फे़डरल बोर्ड ऑफ़ रेवेन्यू (एफ़बीआर) ने आठ अरब रुपए के टैक्स का भुगतान न किए जाने की वजह से पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस के 13 बैंक खाते फ़्रीज़ कर दिए थे.
एफ़बीआर ने कहा था कि पीआईए ने अगस्त महीने में ही दो अरब रुपए के बकाया का भुगतान करने का वादा किया था लेकिन वो अपना वादा पूरा नहीं कर सका.
अब समझौते के अनुसार, पीआईए को 2.5 अरब रुपए का भुगतान इस महीने करना है.
सऊदी-दुबई में रोकी गईं पीआईए की उड़ानें
पाकिस्तान टुडे की एक रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि ईंधन के लिए भुगतान न कर पाने की वजह से ही पीआईए की उड़ानें दम्मम और दुबई के हवाईअड्डों पर रोक दी गई.
हालाँकि, बाद में पीआईए की ओर से लिखित में आश्वासन मिलने के बाद इन उड़ानों को जाने दिया गया.
अधिकारी ने ये भी कहा कि इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) ने 35 लाख डॉलर की इमर्जेंसी पेमेंट मिलने के बाद पीआईए की उड़ानें बहाल की.
इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि पीआईए ने सरकार से जल्द से जल्द फ़ंड जारी करने के लिए कहा है.
सात सितंबर को पीआईए ने कहा कि उसने लीज़ पर चल रहे 13 में से पाँच विमानों का संचालन रोक दिया है.
पीआईए ने इन हालात से निपटने के लिए सरकार से 22.9 अरब रुपए के इमरजेंसी बेलआउट पैकेज की मांग की थी.
हालाँकि, इकोनॉमिक कॉर्डिनेशन कमेटी (ईसीसी) ने इस प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया.
पीआईए के निजीकरण की योजना और आलोचना
पिछले महीने ही पाकिस्तान सरकार ने बताया था कि वो घाटे में चल रही पाआईए के निजीकरण की तैयारी में है. इसके लिए एक उच्च स्तरीय कैबिनेट कमिटी भी गठित की गई.
वित्त मंत्री इशाक़ डार की अगुवाई में कैबिनेट कमिटी ऑफ़ प्राइवेटाइज़ेशन में इस पर फ़ैसला भी हुआ.
इसी साल की शुरुआत में पाकिस्तान ने इस्लामाबाद सहित अपने तीन बड़े हवाईअड्डों का संचालन भी आउटसोर्स यानी किसी और कंपनी को सौंपने का निर्णय लिया था.
अधिकारियों के हवाले से समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने बताया था कि पाकिस्तान इस्लामाबाद, कराची और लाहौर के हवाईअड्डों के संचालन के लिए क़तर से संपर्क में है.
पिछले सप्ताह पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवर-उल-हक़ काकर ने पीआईए के पुनर्गठन पर चर्चा की.
कुछ लोग पीआईए के निजीकरण की आलोचना भी कर रहे हैं.
एक यूज़र ने ट्विटर पर लिखा है कि घाटे में चल रहे पाकिस्तान स्टील मिल, पीआईए, पाकिस्तान रेलवे और पावर सेक्टर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियां (DISCOs) का कुल घाटा एक साल में कम से कम 300 अरब रुपए का है.
ऐसे में जो लोग इन समूहों के निजीकरण की पैरवी करते हैं वो ये बताएं कि बिना किसी इंसेटिव के ख़रीदार क्यों रुचि दिखाएँगे.
वो लिखते हैं, "क्या आप एक घाटे में चल रहे व्यवसाय को ख़रीदेंगे और हर साल अपने कमाए अरबों-खरब रुपए सिर्फ़ इस उम्मीद में निवेश कर सकते हैं कि एक दिन आप मुनाफ़ा कमाएँगे?"
आर्थिक मामलों के जानकार नजम अली पीआईए के निजीकरण के लिए एक प्लान भी बताते हैं.
वो कहते हैं,"सरकार को 51 फ़ीसदी हिस्सेदारी बेच देनी चाहिए और 49 फ़ीसदी हिस्सेदारी तब तक अपने पास रखनी चाहिए जब तक कोई संगठन मुनाफ़ा न कमाने लगे."
एक विमान क्रैश ने पीआईए पर बढ़ाया बोझ
पाकिस्तान के वित्त और राजस्व मंत्री इशाक़ डार ने बीते महीने संसद को बताया था कि पीआईए सालाना करीब 71 अरब रुपए का घाटा झेल रही है. उन्होंने कहा कि एयरलाइन को यूनाइटेड किंगडम की उड़ानों से हर साल 59 अरब रुपए की कमाई होती थी, जो करीब तीन साल से बंद है.
दरअसल, 22 मई 2020 को पीआईए की उड़ान संख्या पीके-8303 कराची में क्रैश हुई. इसके बाद जाँच बैठाई गई और उसमें कई परतें खुली.
उस समय पाकिस्तान के नागरिक उड्ड्यन मंत्री ग़ुलाम सरवर ख़ान ने संसद में बताया कि पीआईए के 150 पायलटों के पास फर्ज़ी लाइसेंस हैं.
फ़र्ज़ी लाइसेंस की बात खुलने के बाद यूरोपीय संघ और ब्रिटेन में पीआईए की उड़ानों के लाइसेंस को रद्द कर दिया.
पीआईए पर क्यों आई ये आफ़त?
पीआईए ने इसी साल विमानन सेवा के इस हाल में पहुंचने के वजहें बताई थीं.
डॉलर के मुक़ाबले गिरते पाकिस्तानी रुपए की वजह से पीआईए के सामने चुनौतियाँ बढ़ती गईं. साथ ही ब्याज़ दरों में असामान्य बढ़ोतरी भी पीआईए को इस हाल में ले आया.
पीआईए के सीईओ एयर वाइस मार्शन आमिर हयात ने बताया कि पुराना चलता आ रहा कर्ज़ और उस पर ब्याज़ की देनदारी ने विमानन सेवा की माली हालत को और बिगाड़ा.
अगर ऐसा ही चलता रहा तो मौजूदा वित्त वर्ष में ये घाटा बढ़कर 112 अरब पाकिस्तानी रुपए तक पहुँच जाएगा. उन्होंने कहा कि अगर पीआईए का जल्द से जल्द पुनर्गठन नहीं हुआ तो 2030 तक ये घाटा दोगुने से भी अधिक होगा. अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बढ़ते तेल के दाम भी पीआईए के लिए चुनौती बने.
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के अनुसार पीआईए को पक्षियों के विमान से टकराने की वजह से भी लाखों रुपए का नुक़सान झेलना पड़ा है. इस वजह से उसके सात विमान क्षतिग्रस्त हुए.
कैसे बना पीआईए
भारत और पाकिस्तान के बँटवारे से पहले 23 अक्तूबर को ओरियंट एयरवेज़ लिमिटेड नाम से एक निजी एयरलाइन कंपनी का जन्म हुआ.
ओरियंट ने 1947 में रंगून (अब यंगून) से कलकत्ता (अब कोलकाता) तक विमान सेवा शुरू की.
शुरू में कंपनी के पास न तो कुशल पायलट थे और न ही इंजीनियर. हालाँकि, बँटवारे के बाद इस विमानन सेवा से सफ़र करने वालों की संख्या हर साल दोगुनी होती गई.
ओरियंट पूरी तरह से निजी कंपनी थी, इसलिए संसाधनों और पूंजी की कमी से जूझती रही.
हालाँकि, साल 1951 आते-आते पाकिस्तान सरकार ने राष्ट्रीय विमानन कंपनी के गठन का निर्णय लिया और ओरियंट को इसमें शामिल होने के लिए कहा.
इसी मर्जर से 10 जनवरी 1955 को पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस का जन्म हुआ.
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