शिवाजी प्रतिमा मामले में पीएम मोदी की माफ़ी स्वीकार करने से विपक्ष का इनकार, फडनवीस क्या बोले?

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महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग ज़िले के राजकोट क़िले में छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति गिरने के मामले को लेकर रविवार को विपक्षी गठबंधन ने विरोध प्रदर्शन किया.
विपक्ष ने कहा कि पीएम मोदी ने इस मामले में माफ़ी मांगी है लेकिन उनकी माफ़ी "अहंकार से भरी" है. कांग्रेस ने भी इसे भ्रष्टाचार का उदाहरण बताया और कहा कि शिवाजी महाराज के नाम पर किए गए आधे-अधूरे माफ़ीनामे को वो स्वीकार नहीं करेंगे.
वहीं बीजेपी नेता और प्रदेश के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने विपक्ष के इस विरोध प्रदर्शन को राजनीतिक करार दिया और कहा कि महाविकास अघाड़ी और कांग्रेस ने "कभी भी शिवाजी महाराज का सम्मान नहीं किया".
इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप मुख्यमंत्री अजित पवार माफ़ी मांग चुके हैं.

तेज़ हवाओं और भारी बारिश के बीच छत्रपति शिवाजी की 35 फ़ुट की ये मूर्ति 26 अगस्त को ढह गई थी. पीएम मोदी ने क़रीब 8 महीने पहले नौसेना दिवस के मौके़ पर 4 दिसंबर, 2023 को इसका अनावरण किया था.
इस मूर्ति को लगाने का उद्देश्य शिवाजी की मराठा नौसेना और समुद्री सीमाओं की रक्षा की उनकी कोशिशों के प्रति सम्मान दिखाना था.
लेकिन इस मूर्ति के गिरने के बाद विपक्षी महाविकास अघाड़ी ने सत्ताधारी बीजेपी-शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट)-एनसीपी (अजित पवार गुट) गठबंधन पर निशाना साधा था और माफ़ी की मांग की थी.

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पीएम की माफ़ी में अहंकार- उद्धव ठाकरे

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रविवार को विपक्षी महाविकास अघाड़ी (उद्धव ठाकरे की शिव सेना, कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी) ने साउथ मुंबई के हुतात्मा चौक से लेकर गेटवे ऑफ़ इंडिया तक पैदल मार्च निकाला. इस विरोध प्रदर्शन को जोड़े मारो (जूता मारो) आंदोलन नाम दिया गया था.
प्रदर्शन में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे समेत विपक्षी गठबंधन की तीनों पार्टियों के बड़े नेता शामिल हुए. नेताओं ने मूर्ति गिरने को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की आलोचना की.
उद्धव ठाकरे ने पीएम नरेंद्र मोदी की माफ़ी को "अहंकार से भरा" बताया. जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने इसे भ्रष्टाचार का एक उदाहरण बताया.
गेटवे ऑफ़ इंडिया में एकत्रित हुए लोगों को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा, "क्या आपको माफ़ी (पीएम मोदी ने मूर्ति गिरने पर माफ़ी मांगी थी) में अहंकार दिखाई दिया? इसमें अहंकार दिख रहा था. एक उप मुख्यमंत्री हंस रहे थे."
उद्धव ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र के लोग एक महान योद्धा के अपमान को सहन नहीं करेंगे.
उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री किस बात के लिए माफ़ी मांग रहे थे? उस प्रतिमा के लिए जिसका अनावरण उन्होंने ही आठ महीने पहले किया था? इसमें हुए भ्रष्टाचार के लिए? एमवीए काडर को उन्हें हराने के लिए मिलकर काम करना चाहिए जिन्होंने शिवाजी महाराज का अपमान किया. शिवाजी की मूर्ति का गिरना महाराष्ट्र की आत्मा का अपमान है."
इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद मनोज कुमार झा ने भी बयान दिया है.
उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "मैं पीएम मोदी के ही शब्दों का इस्तेमाल कर रहा हूं. कोलकाता या बंगाल में आपने किसी पुल या फ्लाईओवर के गिरने पर कहा था कि ये एक्ट ऑफ़ गॉड नहीं, एक्ट ऑफ़ फ्रॉड है. छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का गिरना भी एक्ट ऑफ़ फ्रॉड है."
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माफ़ी स्वीकार नहीं- कांग्रेस
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर मूर्ति गिरने के बाद और इससे पहले की तस्वीरें पोस्ट कीं.
पार्टी ने लिखा, "महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा सिर्फ़ 8 महीने में ढह गई. ये महायुति सरकार (बीजेपी, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी) के भ्रष्टाचार का सबूत है, 'मराठा गौरव' का अपमान है."
पार्टी ने पीएम मोदी पर मामले को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया और लिखा, "लेकिन... पीएम नरेंद्र मोदी कड़े कदम उठाने की जगह" माफ़ी मांग कर "मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं."
"हम छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर किए गए आधे-अधूरे माफ़ीनामे को स्वीकार नहीं करेंगे. महाराष्ट्र की जनता नरेंद्र मोदी और महायुति को कभी माफ़ नहीं करेगी."
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उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस क्या बोले?
महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को राजनीति करार दिया.
उन्होंने कहा, "ये जो आज आंदोलन हो रहा है ये पूरी तरह से राजनीतिक आंदोलन है. महाविकास अघाड़ी और कांग्रेस ने कभी भी शिवाजी महाराज का सम्मान नहीं किया."
फडणवीस ने बयान में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी का नाम लेते हुए कहा, "आप मुझे पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी का लाल किले से दिया गया कोई भी ऐसा भाषण बताइए जिसमें इन्होंने शिवाजी के बारे में बात की हो."
जवाहरलाल नेहरू पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि "यहां तक कि नेहरू जी ने अपनी किताब डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया में छत्रपति शिवाजी महाराज का पूरा अपमान किया है. क्या कांग्रेस पार्टी कभी इसकी माफ़ी मांगेगी?"
पीएम मोदी ने मांगी थी माफ़ी

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इससे पहले 30 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के पालघर में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था, "मैं इस घटना पर सिर झुका कर माफ़ी मांगता हूं. हमारे लिए शिवाजी आराध्य देव हैं."
उन्होंने यह बयान पालघर ज़िले में वधावन बंदरगाह परियोजना के शिलान्यास समारोह के दौरान दिया था.
मोदी ने कहा था, "छत्रपति शिवाजी महाराज ना केवल हमारे लिए एक महान व्यक्ति हैं, बल्कि वह हमारे आदर्श हैं. मैं उस मूर्ति के चरणों में झुक रहा हूं और अब उनसे माफ़ी मांग रहा हूं."
पीएम से पहले 29 अगस्त को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने माफ़ी मांगी थी. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि वह शिवाजी महाराज के चरणों में सौ बार सिर रखने को तैयार हैं.
सीएम शिंदे ने कहा था, "शिवाजी महाराज हमारे भगवान हैं, हमारी पहचान हैं. इस मामले का राजनीतिकरण ना करें. वो माफ़ी की मांग कर रहे हैं, लेकिन मैं एक बार नहीं, बल्कि सौ बार छत्रपति शिवाजी महाराज के चरणों में अपना सिर रखने के लिए तैयार हूं. मुझे इससे कम महसूस नहीं होगा क्योंकि छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे आदर्श हैं."
महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार भी माफ़ी मांग चुके हैं.
लातूर ज़िले में एक सार्वजनिक बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था, "मैं महाराष्ट्र के 13 करोड़ लोगों से माफ़ी मांगता हूं. छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे भगवान हैं और ये घटना हम सभी के लिए झटका है कि उनकी प्रतिमा एक साल के भीतर ढह गई."
जांच समिति का गठन
छत्रपति शिवाजी की मूर्ति ढहने के मामले में 29 अगस्त को राज्य सरकार ने जांच के लिए नौसेना के नेतृत्व में एक संयुक्त समिति बनाई थी.
नौसेना ने बताया है कि इस समिति में राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ-साथ नौसेना के अधिकारी और तकनीकी जानकार शामिल होंगे.
वहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस मामले में एक दूसरी समिति की भी घोषणा की है. ये समिति मूर्ति की जगह पर जल्द से जल्द एक और मूर्ति लगाने के लिए काम करेगी.
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कह चुके हैं कि मूर्ति तेज़ हवाओं के कारण गिरी थी.
प्रतिमा के केवल आठ महीनों के भीतर ढह जाने के बाद, इसकी काम की गुणवत्ता और इसके अनावरण में जल्दबाज़ी को लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की है.
सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्षी महाविकास अघाड़ी के बीच इस मुद्दे पर खींचतान जारी है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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