मनमोहन सिंह के साथ काम करने वालों और क़रीबी लोगों ने उन्हें किस तरह से याद किया

इमेज स्रोत, Getty Images
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का 92 साल की उम्र में निधन हो गया है. उनके निधन पर दुनियाभर से शोक संदेश आ रहे हैं.
मनमोहन सिंह को एक बड़े अर्थशास्त्री और कम बोलने वाले नेताओं में गिना जाता था. उन्होंने मुश्किल समय में भारत का नेतृत्व किया था.
जब वो नरसिम्हा राव के कार्यकाल में वित्त मंत्री बनाए गए थे, उस वक़्त भी भारत की अर्थव्यवस्था गंभीर हालात से गुज़र रही थी. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते हुए भी वैश्विक आर्थिक मंदी और महंगाई बड़ी समस्या थी.
मनमोहन सिंह के निधन पर उनके साथ काम करने वालों और उनके क़रीबी लोगों ने भी उन्हें याद किया है.

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान उनके मीडिया सलाहकार रहे हरीश खरे ने अंग्रेज़ी अख़बार द टेलीग्राफ़ (ऑनलाइन) के लिए लिखे एक लेख में उन्हें याद किया है.
हरीश खरे ने लिखा है, "मनमोहन सिंह के 10 साल के कार्यकाल में उन पर मीडिया के तीखे, यहां तक कि अनुचित हमले हुए, इसके बावजूद उन्होंने मीडिया के स्वतंत्र संस्थान को कभी अपमानित नहीं किया और वह मानते थे कि स्वतंत्र और निष्पक्ष मीडिया लोकतांत्रिक व्यवस्था को चलाने के लिए ज़रूरी था."
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री असीम अरुण एसपीजी में रहते हुए साल 2004 में मनमोहन सिंह की सुरक्षा में तैनात किए गए थे. पूर्व प्रधानमंत्री के निधन पर असीम अरुण ने अपने एक्स अकाउंट पर उन्हें याद किया है.

इमेज स्रोत, @asim_arun
मनमोहन सिंह की पुरानी कार
असीम अरुण ने लिखा है, "मैं 2004 से लगभग तीन साल उनका बॉडीगार्ड रहा. एसपीजी में पीएम की सुरक्षा का सबसे अंदरूनी घेरा होता है - क्लोज़ प्रोटेक्शन टीम, जिसका नेतृत्व करने का अवसर मुझे मिला था. एआईजी सीपीटी वो व्यक्ति है जो पीएम से कभी भी दूर नहीं रह सकता. यदि एक ही बॉडीगार्ड रह सकता है तो साथ यह बंदा होगा. ऐसे में उनके साथ उनकी परछाई की तरह साथ रहने की ज़िम्मेदारी थी मेरी."
उन्होंने मनमोहन सिंह के साथ एक पुरानी तस्वीर भी साझा की है.
"डॉक्टर साहब की अपनी एक ही कार थी - मारुति 800, जो पीएम हाउस में चमचमाती काली बीएमडब्ल्यू के पीछे खड़ी रहती थी. मनमोहन सिंह जी बार-बार मुझे कहते- असीम, मुझे इस कार में चलना पसंद नहीं, मेरी गड्डी तो यह है (मारुति)."
"मैं समझाता कि सर यह गाड़ी आपके ऐश्वर्य के लिए नहीं है, इसके सिक्योरिटी फीचर्स ऐसे हैं जिसके लिए एसपीजी ने इसे लिया है. लेकिन जब कारकेड मारुति के सामने से निकलता तो वे हमेशा मन भर उसे देखते. जैसे संकल्प दोहरा रहे हो कि मैं मिडिल क्लास व्यक्ति हूं और आम आदमी की चिंता करना मेरा काम है. करोड़ों की गाड़ी पीएम की है, मेरी तो यह मारुति है."
'मनमोहन सिंह ऐसी आलोचना के हक़दार नहीं थे'

इमेज स्रोत, Getty Images
प्रधानमंत्री कार्यालय में उनके साथ प्रधान सचिव और फिर एडवाइज़र के तौर पर काम कर चुके टीके नायर ने उन्हें याद करते हुए कहा है, "मनमोहन सिंह का निधन देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है. वो भारत के सबसे बेहतरीन प्रधानमंत्री में से एक थे जिन्होंने मुश्किल हालात में देश का नेतृत्व किया."
टीके नायर के मुताबिक़, "वह कम और विनम्रता से बोलने वाले इंसान थे. उन्होंने कभी इस बात की परवाह नहीं की कि मीडिया में उन्हें किस तरह बताया जाता है और लोग उनके बारे में क्या विचार रखते हैं. उनकी जो आलोचना की गई, ज़्यादातर मौक़ों पर वो इसके हक़दार नहीं थे.''
मनमोहन सिंह को याद करते हुए भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने लिखा है, "यह भारत के लिए बड़ा नुक़सान है और मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है."
कौशिक बसु मनमोहन सिंह के साथ काम कर चुके हैं, उन्होंने एक्स पर एक अन्य पोस्ट में लिखा है, "डॉ. मनमोहन सिंह पर दो सटीक टिप्पणियाँ- ओबामा ने उन्हें "असाधारण रूप से सभ्य व्यक्ति" बताया और ली कुआन यू के मुताबिक़ भारतीय अर्थव्यवस्था को गति मनमोहन सिंह से मिली."
ली कुआन यू सिंगापुर के पूर्व प्रधानमंत्री थे.
मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते उनके मीडिया सलाहकार के तौर पर काम कर चुके पत्रकार पंकज पचौरी ने श्रद्धांजलि देते हुए लिखा है, "सिंह परिवार को मेरा शोक संदेश. ईश्वर उन्हें इस अपूरणीय क्षति को सहने का साहस दे."
पंकज पचौरी ने मनमोहन सिंह के साथ कुछ पुरानी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर साझा की है और लिखा है , "कई यादें, कई विचार."
जब फ्लाइट में काटा था जन्मदिन का केक

इमेज स्रोत, Getty Images
मनमोहन सिंह को याद करते हुए उनके चचेरे भाई अमरजीत कोहली ने कहा है, "वो विभाजन के बाद भारत आए थे. वो बहुत ही अच्छे विद्यार्थी थे. उन्हें इस बात की परवाह नहीं की कि ज़िदगी में कितने संघर्ष हैं और अपनी पढ़ाई पूरी की.''
अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में वरिष्ठ पत्रकार ऋतु सरीन ने मनमोहन सिंह के दौर की कुछ यादों को साझा किया है. उन्होंने लिखा है, " मैं 22 मई 2004 के दोपहर बाद का समय याद करती हूं जब कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के तौर पर उनके नाम की घोषणा की थी और उनके घर के बाहर सुरक्षा बढ़ाई जा रही थी."
ऋतु सरीन ने लिखा है उस वक़्त मनमोहन सिंह ने कहा था, "मुझे आगे अपने काम में हर किसी की मदद की ज़रूरत होगी."
ऋतु सरीन ने लिखा है कि मनमोहन सिंह साल 2009 से स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे थे, जब उन्हें एम्स में अचानक हार्ट से जुड़ी एक सर्जरी करानी पड़ी थी, हालांकि यह उनकी दूसरी सर्जरी थी.
उन्होंने लिखा है कि डॉक्टर मनमोहन सिंह विदेशों की लंबी यात्रा पसंद नहीं करते थे. इसमें अपवाद के तौर पर उनके अमेरिकी दौरे रहे, जहां वो अक्सर संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने जाते थे.
ऐसे ही एक दौरे से वापसी के दौरान 26 सितंबर 2011 को फ्लाइट में ही उन्होंने अपने जन्मदिन का केक काटा था.
ऋतु सरीन लिखती हैं, "मनमोहन सिंह डायबिटिक थे और उनके लिए फ्लाइट में शुगर फ्री केक लाया जा रहा था. लेकिन उन्होंने विनम्रता से उड़ान के दौरान किसी भी समारोह से इनकार किया था."
"बाद में जब वो उड़ान के दौरान मीडिया की तरफ़ आए तो उनकी टीम के एक सदस्य ने मुझसे कहा कि उन्हें जन्मदिन मनाने के लिए राज़ी करने की कोशिश करें. मनमोहन सिंह विनम्रता से शर्माते हुए इसके लिए तैयार हुए और हम सबके बीच उनके जन्मदिन का केक काटा गया था."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित












