अजित पवार की एंट्री से महाराष्ट्र में शिंदे गुट के विधायकों में बढ़ रही है बेचैनी

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- Author, दीपाली जगताप
- पदनाम, बीबीसी मराठी संवाददाता
महाराष्ट्र में पिछले दिनों एक नाटकीय घटनाक्रम में एनसीपी का बड़ा गुट अजित पवार के नेतृत्व में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल हो गया.
ज़ाहिर है इसमें बड़ी भूमिका गठबंधन में शामिल भारतीय जनता पार्टी की रही है.
यही वजह है कि एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री हैं, सरकार के मुखिया हैं लेकिन उनके गुट के विधायक उनसे ही नाराज़ हैं.
इस नाराज़गी के बीच भी शिंदे गुट की शिवसेना के विधायकों का दावा है कि 17 जुलाई से शुरू होने वाले मॉनसून सत्र से पहले शिंदे मंत्रिमंडल का विस्तार होगा.
इसी विस्तार को लेकर शिंदे गुट में बेचैनी देखी जा रही है. शिंदे गुट के विधायकों ने एक साल पहले उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर भाजपा के साथ सरकार बनाई थी.
तब कई वरिष्ठ विधायकों को मंत्री पद देने का वादा किया गया था.
लेकिन एक साल बीतने के बाद भी इन लोगों को मंत्री पद के लिए इंतज़ार करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर अजित पवार बीते दो जुलाई को अपने नौ विधायकों के साथ मंत्री पद की शपथ ले चुके हैं.
ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि आगामी 17 जुलाई से पहले शिंदे मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हुआ तो क्या स्थिति होगी?
इस बारे में शिंदे गुट के पार्टी व्हिप भरत गोगावले ने कहा, “हम अपने विधायकों से चर्चा करेंगे और फ़ैसला करेंगे. मंत्री नहीं बनने की सूरत में जय महाराष्ट्र करेंगे.”
बीबीसी मराठी से बात करते हुए भरत गोगावले ने सीधे तौर पर चेतावनी दी कि हम ‘जय महाराष्ट्र’ करेंगे. वास्तव में इसका संदेश क्या है और क्या अजित पवार के सरकार में शामिल होने के बाद शिंदे गुट का महत्व कम हो गया है? इसी सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश हम कर रहे हैं.
'...तो करेंगे जय महाराष्ट्र'

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क़रीब एक साल पहले शिव सेना के 40 विधायकों ने एकनाथ शिंदे के साथ मिलकर बीजेपी के साथ सरकार बनाई थी. लेकिन क़ानूनी प्रक्रिया में फंसे होने के चलते शिंदे गुट को अब तक मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया जा सका है.
अजित पवार के गठबंधन में आने के बाद यह संभावना जताई जा रही है कि वित्त विभाग सहित कई अहम विभाग एनसीपी के अजित पवार गुट के पास चले जाएंगे.
इस आशंका के चलते भी शिंदे गुट के विधायकों की नाराज़गी बढ़ी हुई है.
बीबीसी मराठी से बात करते हुए शिंदे गुट के पार्टी व्हिप भरत गोगावले ने कहा, ''अब रुकने की कोई संभावना नहीं है क्योंकि विधायक फ़ैसले के क़रीब हैं. उन्हें जल्द से जल्द फ़ैसला चाहिए इसलिए मुझे लगता है कि सत्र से पहले कैबिनेट का विस्तार किया जाएगा.''
राज्य विधानमंडल का मॉनसून सत्र 17 जुलाई से शुरू हो रहा है. अगर विस्तार पहले नहीं हुआ तो विधायक क्या करेंगे?
इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, 'हमारे विधायकों को कहना है कि फ़ैसला नहीं होने पर वे जय महाराष्ट्र करेंगे.”
'जय महाराष्ट्र करेंगे' का सही अर्थ क्या है? इसका सीधा जवाब तो गोगावले नहीं देते हैं लेकिन महाराष्ट्र में जय महाराष्ट्र का इस्तेमाल लोग बाय-बाय करने के लिए करते हैं.
क्या आप अजित पवार के सरकार में आने से नाख़ुश हैं?
इस पर वे सीधा जवाब तो नहीं देते हैं लेकिन उन्होंने कहा, ''कभी-कभी हमें मेथी की सब्जी या भिंडी की सब्जी पसंद नहीं आती है, लेकिन डॉक्टर कहते हैं कि इन्हें खाना पड़ेगा तो हम खाते हैं.''
बीते दो जुलाई को अजित पवार सहित नौ मंत्रियों ने शपथ ली थी. अभी तक उन्हें विभागों का आवंटन नहीं किया गया है. इन मंत्रियों में रायगढ़ की विधायक अदिति तटकरे भी शामिल हैं.
अब भरत गोगावले अदिति तटकरे के रायगढ़ ज़िले की संरक्षक मंत्री बनाने के ख़िलाफ़ हैं.
भरत गोगावले ने यह भी कहा कि रायगढ़ के संरक्षक मंत्री का पद शिव सेना को मिलना चाहिए.
मंत्रिमंडल विस्तार का इंतज़ार कर रहे विधायकों में से एक संजय शिरसाट ने कहा कि मुख्यमंत्री से चर्चा हुई है और उन्होंने स्पष्ट किया है कि जल्दी ही इस पर फ़ैसला होगा.
लेकिन रविवार की देर रात तक की कई बैठकों के बाद भी सोमवार तक मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर एकनाथ शिंदे, अजित पवार और देवेंद्र फड़णवीस के बीच आपसी सहमति नहीं बन सकी है.

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इससे लग रहा है कि यह मामला आसानी से सुलझता नहीं दिख रहा है. शिंदे गुट के विधायकों के उद्धव ठाकरे सरकार में सबसे ज़्यादा शिकायत अजित पवार से ही रही थी.
इन लोगों का आरोप था कि वित्त मंत्री के तौर पर अजित पवार शिव सेना विधायकों को फंड नहीं दे रहे हैं.
अब इस मुद्दे पर उद्धव ठाकरे समूह, शिंदे गुट के नेताओं पर तंज कस रहे हैं. राज्य के पूर्व मंत्री और ठाकरे समूह के नेता आदित्य ठाकरे ने इस संबंध में ट्वीट किया है.
उन्होंने लिखा है, ''आठ दिन पहले नौ मंत्रियों ने मंत्री पद की शपथ ली थी. उनके पास अधिकार तो है लेकिन वे काम नहीं कर सकते क्योंकि उनकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं है. इस बीच, ग़द्दार भी एक साल से कैबिनेट विस्तार का इंतज़ार कर रहे हैं. अब उन्हें अपनी असली क़ीमत पता चलेगी.”
चूंकि विधायक बड़े पैमाने पर नाराज़ हैं, इसलिए पिछले कुछ दिनों से मुख्यमंत्री के इस्तीफ़े की भी चर्चा हो रही है. लेकिन इस चर्चा को सरकार के मंत्री उदय सामंत ने ख़ारिज कर दिया.
उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, ''मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के इस्तीफ़ा देने का सवाल ही नहीं उठता, किसी को दिन में सपना नहीं देखना चाहिए. एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री हैं और मुख्यमंत्री ही रहेंगे. विकास के मुद्दे पर तीन पार्टियां एक साथ आई हैं.”
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वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अभय देशपांडे कहते हैं कि गठबंधन में किसी तीसरे दल के आने से यह बेचैनी स्वाभाविक है.
उन्होंने कहा, ''कैबिनेट में पहले से ही 29 मंत्री हैं. ज़्यादा से ज़्यादा 14 मंत्री और होंगे. बीजेपी और शिंदे गुट को भी कुछ हिसाब-किताब छोड़ना पड़ेगा. इसके अलावा उन्हें कुछ मंत्रियों का हिसाब भी देना होगा. बीजेपी में भी बेचैनी है लेकिन बात सिर्फ़ इतनी है कि दिख नहीं रही है.'
“अजित पवार का गुट जो विभाग मांग रहा है, उनमें सामाजिक कल्याण शामिल है. यह मुख्यमंत्री के पास है, वे यह विभाग उन्हें दे सकते हैं. ऊर्जा, ग्रामीण विकास, सहकारिता, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति भाजपा के पास हैं. इससे बीजेपी को कुछ विभाग छोड़ने पड़ेंगे. इससे दोनों तरफ असुविधा होगी.”
“शिंदे गुट के विधायक अधिक आक्रामक हैं. लेकिन एकनाथ शिंदे ने यह भी कहा है कि वे ज़्यादा उम्मीद न करें. ऐसा नहीं लगता कि कोई बड़ा विस्फोट होगा. इसका कारण यह है कि विधायकों को सत्ता में रहते हुए मिलने वाली निधि भी उनके लिए महत्वपूर्ण होती है.”
कैसे होगा कैबिनेट विस्तार?

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विधानसभा की 288 सीटों के मुताबिक़, महाराष्ट्र सरकार में अधिकतम 43 सदस्यों का मंत्रिमंडल हो सकता है. फ़िलहाल बीजेपी के पास 10 और शिंदे की शिवसेना के पास 10 मंत्री पद हैं.
जबकि अजित पवार की एनसीपी के पास नौ मंत्री पद हैं. इसके चलते अब सिर्फ़ 14 मंत्री पद बचे हैं. इसमें भी भविष्य की राजनीति को देखते हुए इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि बीजेपी कुछ मंत्री पद खाली रखे.
यानी यह देखना अहम होगा कि 10-12 मंत्री पदों में से बीजेपी और शिव सेना को कितने मंत्री पद मिलते हैं.
वरिष्ठ पत्रकार सुधीर सूर्यवंशी कहते हैं, ''मौजूदा हालात को देखते हुए इसकी संभावना नहीं है कि शिंदे के हिस्से के विधायकों को 4-5 से ज़्यादा मंत्री पद मिलेंगे.''
राजनीतिक गलियारे में इस बात की चर्चा भी है कि बीजेपी, शिंदे के कुछ मौजूदा मंत्रियों के काम से संतुष्ट नहीं हैं.
इसके चलते शंभूराज देसाई, संजय राठौड़, अब्दुल सत्तार और तानाजी सावंत जैसे कुछ मंत्रियों के विभाग भी बदलने की उम्मीद है. कुछ मंत्रियों ने हाल ही में इस संबंध में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात भी की है.

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वर्तमान में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास सामान्य प्रशासन, शहरी विकास, सूचना और प्रौद्योगिकी, सूचना और जनसंपर्क, लोक निर्माण (सार्वजनिक परियोजनाएं), परिवहन, सामाजिक न्याय और विशेष सहायता, राहत और पुनर्वास, आपदा प्रबंधन और मृदा विभाग हैं.
इसके अलावा जल संरक्षण, पर्यावरण और पर्यावरण संरक्षण और अल्पसंख्यक विभाग भी उनके ज़िम्मे है.
वहीं उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस के पास गृह, वित्त और योजना, क़ानून और न्याय, जल संसाधन, आवास, ऊर्जा और अन्य विभाग हैं.
वरिष्ठ नेता और मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल के पास राजस्व, पशुपालन और डेयरी विकास विभाग हैं. भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल के पास उच्च और तकनीकी शिक्षा, कपड़ा और संसदीय मामलों के विभाग हैं.
इसके अलावा, सुधीर मुनगंटीवार के पास वन और सांस्कृतिक कार्यों का मंत्रालय है. गिरीश महाजन के पास ग्रामीण विकास और पंचायत राज, चिकित्सा शिक्षा और खेल विभाग हैं.
वरिष्ठ पत्रकार सुधीर सूर्यवंशी कहते हैं, ''स्पष्ट है कि अजित पवार के आने से शिंदे गुट के विधायकों में बेचैनी या असमंजस है. उनका महत्व कम हो गया है. शपथ ग्रहण समारोह स्थगित होने से उनमें असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
उनके सामने यह भी सवाल है कि वे किस चेहरे के साथ विधानसभा क्षेत्र में जाएंगे. अब जब वह अजित पवार के साथ सरकार में हैं, जिनकी उन्होंने कड़ी आलोचना की थी, तो यह भी सवाल है कि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों के सामने क्या कहेंगे.''
उन्होंने यह भी कहा कि शिंदे गुट के विधायकों के लिए यह एक राजनीतिक समस्या लगती है.
अयोग्यता की लटकती तलवार?

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पूरे मामले में क़ानूनी प्रक्रिया का पहलू भी है. एकनाथ शिंदे समेत सभी विधायक सत्ता में हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के मुताबिक विधानसभा अध्यक्ष इन विधायकों की अयोग्यता पर फ़ैसला लेंगे.
आठ जुलाई को राहुल नार्वेकर ने इस मामले में शिंदे गुट के 14 विधायकों को नोटिस जारी किया है. विधायकों को अपना पक्ष रखने के लिए सात दिन का समय दिया गया है.
सोमवार मीडिया से बात करते हुए राहुल नार्वेकर ने कहा, “विधानमंडल सचिवालय में दायर की गई याचिकाओं के संबंध में सचिवालय ने विधायकों को फिर से नोटिस भेजा है.
इन सभी विधायकों से अपना लिखित बयान देने को कहा गया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा है कि राजनीतिक दल को सचेतक नियुक्त करने का अधिकार है.
इस वजह से जब तक यह पता नहीं चल जाता कि राजनीतिक दल किसका है, यह तय करना मुश्किल है. सबसे पहले हमें यह सोचना होगा कि मूल राजनीतिक दल का मालिक कौन है.”
शिव सेना में बग़ावत के बाद दलबदल निषेध क़ानून के तहत पहले 14 और फिर सभी 40 विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए उद्धव ठाकरे के गुट की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी.
कोर्ट के यह स्पष्ट करने के बाद कि इस संबंध में फ़ैसला लेने का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष को है. अब यह मामला विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के पास है.
इस संबंध में बात करते हुए संजय शिरसाट ने कहा, ''विधानसभा अध्यक्ष द्वारा 7 जुलाई 2023 को भेजा गया नोटिस मुझे 10 जुलाई को मिला है. हमें अपना मामला पेश करने के लिए सात दिन का समय दिया गया है. हम लोग समय बढ़ाने का अनुरोध करेंगे. इसके लिए क़ानूनी सलाह ले रहे हैं.”
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