इलेक्टोरल बॉन्ड: बीजेपी, कांग्रेस और अन्य कई दलों ने क्यों नहीं बताए चंदा देने वालों के नाम?

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- Author, उमंग पोद्दार
- पदनाम, क़ानूनी मामलों के बीबीसी संवाददाता
भारत के निर्वाचन आयोग ने इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से मिली जानकारी रविवार को अपनी वेबसाइट पर अपलोड की.
सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड की संवैधानिकता पर सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग से कहा था कि वह सभी राजनीतिक दलों से इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर जानकारियां जुटाए.
चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों से जानकारी लेनी थी कि उसे कौन-सा बॉन्ड किसने दिया, बॉन्ड कितनी राशि का था, यह राशि किस ख़ाते में और किस तारीख़ को डाली गई.
साल 2018 में इलेक्टोरल बॉन्ड लाए जाने से सितंबर 2023 तक की यह जानकारी निर्वाचन आयोग ने सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपी थी. अब इसे चुनाव आयोग ने अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है.
कुछ दलों ने तो पूरी जानकारी सौंपी है कि किसने उन्हें कितने रुपये के बॉन्ड दिए और उन्हें कब भुनाया गया, जबकि कई दलों ने सिर्फ़ यह बताया है कि किस बॉन्ड से उन्हें कितने रुपये मिले.
किसने क्या जानकारी दी?
बड़ी राजनीतिक पार्टियों में एआईएडीएमके, डीएमके और जनता दल (सेक्युलर) ने यह जानकारी मुहैया करवाई है कि उन्हें किसने इलेक्टोरल बॉन्ड के ज़रिये चंदा दिया.
जबकि सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट और महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी जैसी अपेक्षाकृत छोटी पार्टियों ने ये बताया है कि उन्हें इलेक्टोरल बॉन्ड के ज़रिए जो चंदा मिला वो कहां से मिला.
वहीं, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और जम्मू कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 2019 तक चंदा देने वालों का ही ब्योरा दिया है. जब नवंबर 2023 में इन दलों ने अपडेटेड जानकारी चुनाव आयोग को सौंपी तो उसमें चंदा देने वालों की जानकारी नहीं दी.
इनके अलावा अधिकतर पार्टियों ने चंदा देने वालों के बारे में जानकारी नहीं दी है.
उन्होंने सिर्फ़ यह बताया है कि कितनी राशि का बॉन्ड था और उसे कब भुनाया. कुछ मामलों में उन्होंने इसे खरीदे जाने और प्राप्त करने की तिथि के बारे में भी बताया है.
बीजेपी और कांग्रेस भी बॉन्ड से चंदा देने वालों का नाम चुनाव आयोग न सौंपने वाले दलों में शामिल हैं.

क्यों दान देने वाले का नाम नहीं बताया?
अप्रैल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा था कि वह राजनीतिक दलों को चंदा देने वालों और उनसे मिली रकम की जानकारी जुटाए.
उस समय कई विश्लेषकों ने कहा था कि इस आदेश से इलेक्टोरल बॉन्ड के सम्बंध में पूरी जानकारी नहीं मिलेगी क्योंकि ये धारक बॉन्ड होते हैं और इनमें इस बात का ज़िक्र नहीं होता कि किसने इन्हें खरीदा है.
जानकारों का कहना था कि ऐसे में कोई भी पार्टी कह सकती है कि उसे नहीं पता किसने उसे कौन सा बॉन्ड दिया और फिर यह तर्क एक तरह से ठीक भी होगा.
अब पार्टियों की ओर से सौंपे गए ब्यौरे में इसी तर्क की झलक मिल रही है.

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पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने 2019 में अपने जवाब में कहा था कि ये बॉन्ड 'धारक' वाले बॉन्ड हैं (यानी इसका कोई पंजीकृत स्वामी नहीं है) और इनके ऊपर खरीदने वालों की जानकारी नहीं छपी है.
टीएमसी का ये भी कहना था कि ये बॉन्ड उसके ऑफ़िस के पते पर भेजे गए थे या फिर वहां रखे बक्से में डाले गए थे या हमारी पार्टी का समर्थन करने वालों ने गोपनीय रहने की इच्छा से किसी और के माध्यम से भेजे थे.
तृणमूल कांग्रेस का कहना था कि "ऐसे में हमारे पास इन बॉन्ड को खरीदने वालों की जानकारी नहीं है."
इसके अलावा, टीएमसी ने यह भी कहा था कि "बॉन्ड जारी करने वाले स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, जो इन्हें स्वीकार और जमा करता है, उसके पास इस तरह की जानकारी हो सकती है."
बीजेपी और कांग्रेस ने क्या कहा था?

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2023 में दिए जवाब में भारतीय जनता पार्टी ने विभिन्न क़ानूनों में राजनीतिक दलों द्वारा चुनावी बॉन्ड से संबंधित जानकारियां देने से जुड़े प्रावधानों का हवाला दिया था.
बीजेपी ने कहा था कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुसार, राजनीतिक दलों को हर साल इलेक्टोरल बॉन्ड से मिली रकम का ब्योरा ही सार्वजनिक करना होता है, न कि यह जानकारी देनी होती है कि उसे बॉन्ड कहां से मिले.
बीजेपी का यह भी कहना था कि इनकम टैक्स एक्ट के तहत भी पार्टी को सिर्फ़ इतनी ही जानकारी देनी होती है.
उसका कहना था कि क़ानून के तहत पार्टी को इलेक्टोरल बॉन्ड देने वालों के नाम और अन्य जानकारियां रखना ज़रूरी नहीं था, इसलिए उसने अपने पास यह ब्योरा नहीं रखा है.
वाईएसआर कांग्रेस समेत कई अन्य पार्टियों ने भी इलेक्टोरल बॉन्ड दान करने वालों की जानकारी न देते हुए ऐसे ही कारण बताए थे.
कांग्रेस और बीजू जनता दल जैसी पार्टियों ने कोई स्पष्ट वजह नहीं बताई कि वो क्यों बॉन्ड से चंदा देने वालों की जानकारी नहीं दे पा रहीं.
इन दलों ने सिर्फ़ यही बताया कि कब उन्होंने बॉन्ड को भुनाया और कितनी रकम उनके खाते में आई.
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