ईरान ने दी अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले की धमकी, इसराइल हाई अलर्ट पर

ईरान में हो रहे प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सैन्य हस्तक्षेप की चेतावनी के जवाब में ईरान ने भी धमकी दी है.

ईरान ने कहा है कि किसी भी अमेरिकी हमले की सूरत में इसराइल और क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे "वैध लक्ष्य" बन जाएंगे.

बीबीसी अरबी के अनुसार, रविवार को ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाग़र ग़लीबाफ़ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान बीते कुछ सालों में सरकार के ख़िलाफ़ सबसे बड़े प्रदर्शनों का सामना कर रहा है.

ईरानी सरकारी टेलीविज़न ने संसदीय सत्र का सीधा प्रसारण किया. विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और इरानियन रिवॉल्यूशनरी गॉर्ड्स (आईआरजी), ख़ासकर बासिज वॉलंटियर फ़ोर्सेज़ की ओर से "सख़्ती" बरतने के लिए बाग़र ग़लीबाफ़ ने उनकी तारीफ़ की.

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उन्होंने कहा कि ये बल इन प्रदर्शनों से 'कड़ाई से' निपटेंगे और 'गिरफ्तार किए गए सभी लोगों' को दंडित करेंगे.

संसद के अध्यक्ष ने अमेरिकी सेना और इसराइल के ख़िलाफ़ पहले हमला करने की सीधी धमकी जारी की.

इस्लामी गणराज्य इसराइल को मान्यता नहीं देता और उसे क़ब्ज़ाई गई फलस्तीनी ज़मीन मानता है.

ग़लीबाफ़ ने कहा, "ईरान पर हमले की स्थिति में, इसराइल के क़ब्ज़े वाले क्षेत्र और इस क्षेत्र में स्थित सभी अमेरिकी सैन्य ठिकाने, अड्डे और जहाज हमारे लिए वैध लक्ष्य होंगे. हम न केवल (हमले के बाद) जवाबी कार्रवाई करेंगे, बल्कि ख़तरे का ठोस संकेत मिलने पर भी कार्रवाई करेंगे."

ईरानी समाचार एजेंसी तसनीम ने बाग़र ग़लीबाफ़ के हवाले से कहा कि ईरान वर्तमान में अमेरिका और इसराइल के ख़िलाफ़ चार मोर्चों पर लड़ रहा है. ये मोर्चे हैं- आर्थिक, बौद्धिक, सैन्य और आतंकवाद.

अमेरिका की चेतावनी

अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में सोशल मीडिया पर कई पोस्ट किए, जिनमें उन्होंने लिखा: "ईरानी जनता के लिए- आपका लंबा दुःस्वप्न ख़त्म होने वाला है."

उन्होंने कहा, "उनकी हिम्मत और उत्पीड़न को खत्म करने के उनके दृढ़ संकल्प को अमेरिकी राष्ट्रपति ने सराहा है."

उन्होंने उसी पोस्ट में आगे लिखा, "मदद आ रही है."

इससे पहले उन्होंने कहा था, "शासन के नेतृत्व से- महान ईरानी जनता के ख़िलाफ़ आपकी क्रूरता का जवाब ज़रूर दिया जाएगा."

ट्रंप भी हस्तक्षेप की मंशा जता चुके हैं. उन्होंने कुछ दिन पहले ट्रुथ सोशल पर लिखा, "ईरान इस क़दर आज़ादी की तरफ़ देख रहा है, जैसा शायद पहले कभी नहीं देखा गया. अमेरिका उनकी मदद के लिए तैयार है."

'न्यूयॉर्क टाइम्स' और 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' ने अज्ञात अमेरिकी अधिकारियों का हवाला देते हुए शनिवार शाम को दावा किया कि ट्रंप को ईरान पर हमला करने के लिए सैन्य विकल्प पेश किए गए थे, लेकिन उन्होंने अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया है.

इस बीच रॉयटर्स ने इसराइल के तीन जानकार सूत्रों ने हवाले से कहा कि ईरान में अमेरिका के किसी भी संभावित हस्तक्षेप की आशंका में इसराइल हाई अलर्ट पर है.

एक इसराइली सूत्र के अनुसार, शनिवार को फ़ोन पर हुई बातचीत में इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ईरान में अमेरिकी हस्तक्षेप की संभावना पर चर्चा की.

शुक्रवार को प्रकाशित 'द इकोनॉमिस्ट' के साथ एक साक्षात्कार में, नेतन्याहू ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने इसराइल पर हमला किया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.

विरोध प्रदर्शनों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "इसके अलावा, मुझे लगता है कि हमें इंतज़ार करना चाहिए और देखना चाहिए कि ईरान के अंदर क्या होता है."

हिंसक झड़पों वाले वीडियो

ईरान के राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख अहमद रजा रादान ने रविवार को देश भर में पिछले दो हफ्तों से चल रहे विरोध आंदोलन के कई प्रमुख व्यक्तियों की गिरफ़्तारी की घोषणा की है.

रादान ने सरकारी टेलीविज़न पर कहा, "पिछले शनिवार की शाम को, दंगों में शामिल कई प्रमुख लोगों को गिरफ़्तार किया गया, जिन्हें कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दंडित किया जाएगा."

हालांकि उन्होंने गिरफ़्तार लोगों की संख्या या उनकी पहचान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी.

शनिवार शाम को प्रदर्शनकारी आदेशों की परवाह न करते हुए सड़कों पर उतरे, जबकि ऐसी खबरें थीं कि पिछले तीन दिनों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में सैकड़ों लोग या तो मारे गए या घायल हुए हैं.

अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के संगठन एचआरएएनए ने मरने वालों की संख्या 116 बताई है.

बीबीसी ने दस्तावेजी वीडियो फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों की जांच की है जिसमें पता चला है कि सरकार ने दमन तेज़ कर दिया है क्योंकि इंटरनेट पर प्रतिबंध जारी है.

शनिवार शाम के एक वीडियो में, प्रदर्शनकारियों को तेहरान के गीशा इलाके की सड़कों पर प्रदर्शन करते देखा गया.

बीबीसी की फैक्ट-चेकिंग सेवा ने ऐसे कई वीडियो को सत्यापित किया है और पुष्टि की है जिसमें दिखता है कि ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद की वकीलाबाद स्ट्रीट पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़प हुई.

फुटेज में नकाबपोश प्रदर्शनकारी कूड़ेदानों के पीछे छिपते और आग लगाते हुए दिखाई दिए, जबकि दूर सुरक्षा बलों का एक कॉलम दिखाई दिया. एक जलता हुआ वाहन भी दिखाई दिया. इस वाहन के बस होने का अनुमान है.

इन क्लिप्स में भारी गोलीबारी की आवाज़ और बर्तनों के टकराने जैसी आवाजें सुनाई देती हैं, जबकि लेज़र की एक हरी रोशनी दिखाई देती है.

बीबीसी द्वारा सत्यापित राजधानी तेहरान के अन्य वीडियो में पश्चिमी तेहरान के पूनाक स्क्वायर में प्रदर्शनकारियों की एक बड़ी भीड़ और बर्तनों को पीटने की आवाजें सुनाई दे रही थीं. इस सप्ताह विरोध प्रदर्शनों के मुख्य केंद्रों में से यह एक था.

तेहरान के उत्तर-पूर्व में स्थित हेरावी इलाके में फ़िल्माए गए एक अन्य वीडियो क्लिप की पुष्टि बीबीसी पर्शियन और बीबीसी वेरिफाई ने की है.

इसमें प्रदर्शनकारियों की भीड़ को एक सड़क पर मार्च करते हुए देखा जा सकता है, जिसमें लोग मौलवियों के अधिकारों को ख़त्म करने की मांग कर रहे हैं.

शनिवार देर रात सरकारी टेलीविज़न पर गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी ने ज़ोर देकर कहा कि "तोड़फोड़" की घटनाएं कम हो रही हैं.

शाह के बेटे ने ईरान वापसी पर क्या कहा

रविवार की सुबह ईरान के निर्वासित शाह के बेटे रजा पहलवी ने एक्स प्लेटफ़ॉर्म पर एक वीडियो पोस्ट किया.

पोस्ट में उन्होंने संदेश भी लिखा, "जान लीजिए कि आप अकेले नहीं हैं. दुनिया भर में आपके साथी नागरिक गर्व से आपका नाम लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं. ख़ासतौर पर स्वतंत्र विश्व के नेता के रूप में राष्ट्रपति ट्रंप ने आपकी बहादुरी को क़रीब से देखा है और आपकी मदद करने की अपनी मंशा ज़ाहिर की है."

उन्होंने लिखा, "मैं आप सभी से कहता हूं कि आप अपने दोस्तों और परिवार के साथ समूहों में शहरों की मुख्य सड़कों पर जाएं. रास्ते में एक-दूसरे से या लोगों की भीड़ से अलग न हों, और ऐसी गलियों में न जाएं जहां आपकी जान को ख़तरा हो."

अमेरिका में रहने वाले पहलवी ने लोगों से सड़कों पर उतरने का आह्वान किया है और कहा है कि वह देश लौटने की तैयारी कर रहे हैं.

उन्होंने आगे कहा, "मुझे पता है कि मैं जल्द ही आपके साथ होऊंगा."

उन्होंने कहा कि इस्लामी गणराज्य "सैनिकों की गंभीर कमी" का सामना कर रहा है और "सशस्त्र और सुरक्षा बलों के कई सदस्यों ने अपने पद छोड़ दिए हैं या दमनकारी आदेशों को मानने से इनकार कर दिया है."

हालांकि बीबीसी उनके इन दावों की पुष्टि करने में असमर्थ रहा.

इंटरनेट बंद

इंटरनेट निगरानी संगठन नेटब्लॉक्स ने रविवार को बताया कि ईरान भर में 60 घंटे से अधिक समय से इंटरनेट सेवा बाधित है.

संगठन ने एक बयान में कहा, "यह सेंसरशिप देश के भविष्य के लिए एक अहम पल में ईरानियों की सुरक्षा और भलाई के लिए सीधा ख़तरा है."

एक विशेषज्ञ ने बीबीसी पर्शियन को बताया कि मौजूदा इंटरनेट बंदी तीन साल पहले "महिला, जीवन, स्वतंत्रता" आंदोलन के दौरान लगाए गए बंद से कहीं अधिक गंभीर है.

इंटरनेट शोधकर्ता अली रज़ा मनाफ़ी ने कहा कि ईरान में किसी भी रूप में इंटरनेट तक पहुंच अब "लगभग पूरी तरह से बंद" हो गई है.

उन्होंने आगे कहा कि बाहरी दुनिया से जुड़ने का एकमात्र संभावित तरीका स्टारलिंक सेवा है, लेकिन उन्होंने लोगों से सावधान रहने को कहा, क्योंकि सरकार इन पर कड़ी नज़र बनाए हुए है.

बीबीसी और अधिकांश अन्य अंतरराष्ट्रीय समाचार संगठन भी ईरान के अंदर से रिपोर्टिंग करने में असमर्थ हैं, जिससे जानकारी प्राप्त करना और उसकी पुष्टि करना मुश्किल हो जाता है.

'प्रदर्शनकारी ख़ुदा के दुश्मन'

ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने शनिवार को कहा था कि विरोध प्रदर्शन करने वाले किसी भी व्यक्ति को "खुदा का दुश्मन" माना जाएगा, जोकि मृत्युदंड के योग्य अपराध है.

भारी महंगाई दर के कारण विरोध प्रदर्शन शुरू हुए और ईरान के सभी प्रांतों के 100 से अधिक शहरों और कस्बों में फैल गए.

प्रदर्शनकारी अब ईरान के सर्वोच्च नेता, आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के धार्मिक शासन को ख़त्म करने की मांग कर रहे हैं.

ख़ामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को "खुश करने" की कोशिश करने वाले "उपद्रवियों का समूह" बताया था.

ये विरोध प्रदर्शन 2022 के उस विद्रोह के बाद से सबसे व्यापक हैं जो महसा अमीनी की मौत के बाद भड़क उठा था.

महसा अमीनी एक युवा कुर्द महिला थीं जिन्हें हिजाब ठीक से न पहनने के कारण ईरान की मॉरल पुलिस ने हिरासत में ले लिया था और बाद में उनकी मौत हो गई थी.

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