सुनेत्रा पवार को जानिए, जिन्हें महाराष्ट्र का डिप्टी सीएम बनाए जाने की है चर्चा

    • Author, प्राची कुलकर्णी
    • पदनाम, बीबीसी मराठी के लिए

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख अजित पवार के असामयिक निधन से महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है.

उनके जाने के बाद इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को अब उपमुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए.

अजित पवार की एनसीपी के नेता नरहरि जिरवाल ने पार्टी के सर्वोच्च नेता अजित पवार को विदाई देने के बाद उत्तराधिकारी के बारे में एक महत्वपू्र्ण बयान दिया है.

नरहरि जिरवाल ने कहा, "अजित पवार का उत्तराधिकारी सुनेत्रा भाभी को होना चाहिए. सभी को लगता है कि अब सुनेत्रा अजित पवार ही राष्ट्रवादी पार्टी की बागडोर संभालेंगी. "

एनसीपी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रफुल्ल पटेल ने कहा, "विधानसभा नेता और उपमुख्यमंत्री पद अजित दादा के पास हैं. हमें इस पर कल फ़ैसला लेना होगा. हमने मुख्यमंत्री को बता दिया है कि हम जल्द ही फ़ैसला लेंगे. इसके लिए हमें अपनी पार्टी के विधायकों को बुलाकर उनसे चर्चा करनी होगी और जनभावना को ध्यान में रखते हुए सही फ़ैसला लेना होगा."

उन्होंने कहा, "सुनेत्रा पवार के नाम पर कोई चर्चा नहीं हुई है. लेकिन पार्टी का फ़ैसला विधायकों का फ़ैसला होता है और हम भी यही मानते हैं कि हमें सही फ़ैसला लेना चाहिए. हमें सुनेत्रा भाभी, पार्थ पवार और जय पवार से बात करनी होगी. हम भी यही सोचते हैं. हम चाहते हैं कि सही फ़ैसला लिया जाए."

कुल मिलाकर, राजनीतिक हलकों में अजित पवार के उत्तराधिकारी को लेकर बहस जारी है, वहीं सुनेत्रा पवार के नाम पर चर्चा तेज़ हो गई है.

राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार कई सालों से सक्रिय राजनीति से दूर रहीं, लेकिन वह हमेशा बारामती के चुनावी अभियानों में पर्दे के पीछे से प्रेरक शक्ति बनी रहीं.

अपने बेटे पार्थ पवार के मावल से लोकसभा चुनाव लड़ने के बाद सुनेत्रा पवार ने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना शुरू किया. साल 2024 में. उन्होंने अपनी ननद सुप्रिया सुले के ख़िलाफ़ लोकसभा चुनाव लड़ा. इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा और बाद में वह राज्यसभा सांसद बनीं.

उनके सांसद बनने के बाद पवार परिवार में कुल तीन सांसद और दो विधायक हुए. लेकिन अजित पवार के निधन के बाद आगे क्या होगा? इस मुद्दे पर चर्चा के बीच, यह मांग उठ रही है कि अजित पवार के राजनीतिक खाते राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के पास रखे जाएं और पार्टी का नेतृत्व सुनेत्रा पवार को सौंप दिया जाए.

सास-ससुर की राजनीतिक विरासत

सुनेत्रा पवार धाराशिव ज़िले की रहने वाली हैं. वह एनसीपी के वरिष्ठ नेता पद्मसिंह पाटिल की बहन हैं. सुनेत्रा पवार का बचपन धाराशिव के टेर में बीता.

सुनेत्रा पवार ये कहती रही हैं कि राजनीति और सामाजिक कार्य के प्रति उनका जुनून उनके पिता से उनमें आया, जो एक स्वतंत्रता सेनानी और गांव के रसूखदार व्यक्तियों में से थे. उन्होंने ये भी बताया है कि उनका बचपन घर-घर जाकर लोगों से मिलते हुए बीता.

पद्मसिंह पाटिल और शरद पवार की दोस्ती की वजह से सुनेत्रा और अजित पवार का विवाह हुआ. साल 1980 में शादी के बाद सुनेत्रा बारामती आ गईं. उस समय अजित पवार ने भी राजनीति में कदम नहीं रखा था. अजित पवार ने राजनीतिक करियर शुरू किया और उस समय शुरुआती कुछ सालों तक सुनेत्रा ने घर संभाला. इस दौरान सुनेत्रा ने अजित पवार के दूध के कारोबार में मदद की.

साल 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद शरद पवार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनेकर लौटे. तब अजित पवार और सुनेत्रा पवार मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास यानी वर्षा बंगले में उनके साथ रहने लगे. उस समय देश में कंप्यूटर क्रांति अपने चरम पर थी. सुनेत्रा ने कंप्यूटर सीखने की ज़िद की और उन्होंने इस ज़िद को पूरा भी किया.

पवार के काटेवाड़ी गांव से सामाजिक कार्य की शुरुआत

सुनेत्रा पवार के सामाजिक कार्य की शुरुआत काटेवाड़ी से हुई. जब अजित पवार सतारा के गार्डियन मिनिस्टर थे, तब सुनेत्रा पवार महाबलेश्वर की यात्रा पर गईं और लौटते समय उन्होंने उन्हें एक ऐसा गांव दिखाया जहां संत गाडगे बाबा ग्राम स्वच्छता अभियान चल रहा था. इससे प्रेरणा लेकर काटेवाड़ी परियोजना की शुरुआत की गई.

इस बारे में बात करते हुए सुनेत्रा पवार कहती हैं, "मैंने सभी दलों के लोगों की एक बैठक बुलाई. जब मैंने बैठक बुलाई, तो सभी को लगा कि क्या होगा. लेकिन जब मैंने अपनी राय रखी, तो सबकी प्रतिक्रिया अलग-अलग थी. लोगों ने पूछा, 'क्या आप किसी बड़ी गृहिणी की तरह प्रदर्शनी लगाकर गांव की सफ़ाई करना चाहती हैं?' लेकिन मैं लगातार आती रही और उसके बाद लोगों को भी इसकी गंभीरता का एहसास हुआ."

उस समय, काटेवाड़ी में 80 प्रतिशत लोगों के पास शौचालय तक नहीं थे. वहीं से, और निर्मलग्राम और फिर ग्राम स्वच्छता अभियान के माध्यम से, सुनेत्रा पवार के सामाजिक कार्य की शुरुआत हुई.

इसके बाद उन्होंने राज्य के 86 गांवों में निर्मलग्राम अभियान का नेतृत्व किया. इसके माध्यम से उन्होंने 'निर्मलग्राम स्वयं सहायता' आंदोलन चलाया. काटेवाड़ी को न केवल निर्मलग्राम बनाया गया, बल्कि इसे एक आदर्श और पर्यावरण-अनुकूल गांव में भी तब्दील किया गया.

बारामती में महिलाओं को रोज़गार देने के लिए उन्होंने एक टेक्सटाइल पार्क भी शुरू किया था. इस टेक्सटाइल पार्क में लगभग 15 हज़ार महिलाएं काम कर रही हैं. सुनेत्रा पवार साल 2006 से ही इस टेक्सटाइल पार्क की अध्यक्ष हैं. इसके साथ ही वह विद्या प्रतिष्ठान नाम के एक शैक्षणिक संस्थान की ट्रस्टी के तौर पर भी कार्यरत हैं. उन्हें अपने कामों के लिए कई पुरस्कार भी मिले हैं.

सुनेत्रा अकेले ही इस विद्या प्रतिष्ठान संस्था का कामकाज संभालती हैं, जहां हज़ारों छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं.

उन्होंने पर्यावरण के क्षेत्र में भी काम करना शुरू किया और 'एनवायरनमेंटल फ़ोरम ऑफ़ इंडिया' नामक एक संगठन की स्थापना की. इस संगठन के माध्यम से वह जल संरक्षण और वृक्षारोपण पर काम करती हैं. उनका संगठन पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करने का काम भी करता है.

2019 के चुनाव और पारिवारिक विवाद

साल 2019 के चुनावों में पार्थ पवार ने मवाल से लोकसभा चुनाव लड़ा और पवार परिवार के भीतर विवाद को लेकर चर्चा शुरू हो गई.

पार्थ के चुनाव लड़ने के विरोध को लेकर पवार परिवार में मतभेदों की चर्चा थी. इसी पृष्ठभूमि में सुनेत्रा पवार ने बाद के विधानसभा चुनावों में पुणे मिरर को एक इंटरव्यू दिया था.

इस इंटरव्यू में सुनेत्रा पवार ने कहा था, "जब भी मैं विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार करती हूं, मेरी ननद (सुप्रिया सुले) और मेरे बच्चे मेरे साथ होते हैं. अजित पवार दो बार प्रचार करने आते हैं. बारामती के लोगों को यह बताने की ज़रूरत नहीं है कि उन्होंने क्या किया है. पवार की वजह से ही बारामती आज इस स्थिति में है. मौजूदा हालात (2019 से) अलग हैं. पवार को निशाना बनाया जा रहा है, इसलिए उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज किए गए हैं. कोई भी आरोप साबित नहीं हो रहा है. इसका जवाब जनता देगी."

उन्होंने कहा, "मैं कभी किसी विवाद के केंद्र में नहीं रही. अगर मुझे कुछ चाहिए होता, तो मैं मांग सकती थी. अगर मेरे बच्चे राजनीति में आना चाहते, तो मैं उन्हें इसके लिए तैयार करती. लेकिन व्यक्तिगत रूप से मुझे राजनीति में कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं है."

बारामती की 'भाभी' और राजनीति

हालांकि सुनेत्रा पवार सामाजिक कार्यों के ज़रिए बारामती में सक्रिय थीं, लेकिन जब बात राजनीति की होती तो वह अजित पवार के लिए चुनाव अभियान के ज़रिए या फिर कोई दूसरे अचानक पड़े कामों के माध्यम से ही इसमें सक्रिय थीं.

अजित पवार नियमित रूप से हर हफ़्ते बारामती आते थे, विकास कार्यों पर ध्यान देते थे. वहीं सुनेत्रा पवार मुख्य रूप से क्षेत्र में जनसंपर्क का काम संभालती हैं. इसी वजह से बारामती क्षेत्र में उन्हें 'भाभी' कहा जाता है.

इससे पहले वह राजनीति में सीधे तौर पर सक्रिय नहीं थीं. लेकिन अजित पवार के लिए बारामती में चुनाव प्रचार की योजना बनाने और दौरा कराने की मुख्य ज़िम्मेदारी उन्हीं की थी. गांवों का दौरा, सभाएं, दौरो और महत्वपूर्ण लोगों से मुलाक़ात का ज़िम्मा भी उन्हीं का था.

समीकरण यह था कि जब शरद पवार, सुप्रिया सुले और अजित पवार पूरे राज्य में चुनाव प्रचार कर रहे होंगे, तो वह चुनाव प्रचार की शुरुआत और अंतर के लिए बारामती आएंगे और बाकी समय परिवार चुनाव प्रचार करता रहेगा.

पार्टी और परिवार में विभाजन

लेकिन पार्थ पवार के चुनाव लड़ने के साथ ही पवार परिवार के भीतर विवाद की चर्चा शुरू हो गई.

ऐसी चर्चा थी कि सुनेत्रा पवार इस बात पर अड़ी थीं कि पार्थ पवार चुनाव लड़ें. उसी समय पवार के दूसरे पोते और राजेंद्र पवार के बेटे रोहित पवार ने भी राजनीति में एंट्री की थी.

उन्होंने ज़िला परिषद सदस्य और फिर कर्जत से विधायक के रूप में चुनाव लड़ा था. उस समय यह दावा किया गया था कि रोहित पवार की मां सुनंदा पवार और पार्थ पवार की मां सुनेत्रा पवार के बीच विवाद था. लेकिन सुनेत्रा ने इसका हमेशा खंडन किया.

पिछले साल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में फूट पड़ गई थी. अजित पवार ने बीजेपी के साथ सरकार में जाकर उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. तब से ही यह स्पष्ट हो गया कि फूट केवल पार्टी नहीं बल्कि परिवार के भीतर भी थी.

सीधे चुनावी मैदान में

बीते लोकसभा चुनाव का प्रचार शुरू होते ही सुनेत्रा पवार सक्रिय दिखने लगीं. उन्होंने शुरुआत अलग-अलग सभाओं और कार्यक्रमों से की. बाद में उनका प्रचार रथ बारामती में घूमने लगा.

इसके बाद यह स्पष्ट हो गया कि बारामती में चुनाव पवार बनाम पवार होगा. सुनेत्रा पवार ने बारामती लोकसभा क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों का दौरा किया.

सुनेत्रा पवार ने अपने निर्वाचन क्षेत्र के सभी महत्वपू्र्ण लोगों से मुलाकात की. हर जगह उन्होंने भावुक भाषण देते हुए कहा, "आपने दादा (अजित पवार) की पत्नी के रूप में मुझे स्वीकार, लेकिन साथ में मुझे सुनेत्रा भाभी के तौर पर भी स्वीकार किया."

चुनाव को चुनौती

पहली बार चुनाव लड़ रहीं सुनेत्रा पवार के लिए यह चुनाव निश्चित रूप से आसान नहीं था. उनके सामने चुनौती उनकी ननद सुप्रिया सुले थीं.

पिछले पंद्रह वर्षों से सांसद रहीं सुप्रिया सुले की संसद में उनके काम के लिए हमेशा प्रशंसा की गई है. हालांकि, गांव में जनसंपर्क के मामले में कुछ हद तक कमज़ोर रहने के लिए उन्हें आलोचना भी झेलनी पड़ी.

सुनेत्रा पवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनका पारिवारिक विरोध था. एक तरफ़ अजित पवार भावनात्मक चुनौती पेश कर रहे थे, तो दूसरी तरफ़ अजित पवार के अपने ही भाई श्रीनिवार पवार उनके ख़िलाफ़ बोल रहे थे. दोनों ही बारामती क्षेत्र में ज़ोर-आजमाइश कर रहे थे.

पवार परिवार से अजित पवार, सुनेत्रा पवार, जय पवार और पार्थ पवार एक साथ चुनाव प्रचार करते नज़र आए. वहीं, दूसरी ओर बाकी पूरा पवार परिवार था.

सुनेत्रा पवार चुनाव प्रचार के दौरान मतदाताओं से भावुक अपील करती रहीं, "बारामती में हर व्यक्ति हमारे परिवार का सदस्य है. इसलिए मैं जहां भी जाती हूं, मुझे वही प्यार मिलता है. यह प्यार मेरे लिए बहुत मायने रखता है."

इस चुनाव में शरद पवार ने सुनेत्रा को 'बाहरी' कहकर आलोचना की थी. उस समय सुनेत्रा इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भी भावुक हो गई थीं.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता प्रफ़ुल्ल पटेल के हटने से खाली हुई राज्यसभा सीट पर चुनाव हुए थे. सुनेत्रा पवार ने लोकसभा चुनाव हारने के बाद 13 जून 2024 को राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल किया और बाद में सांसद बनीं.

एनसीपी के विभाजन के बाद सुनेत्रा पवार को परिवार की शादियों के मौके पर पूरे पवार फ़ैमिली के साथ देखा गया था. उसके बाद पहले नगर निगम और फिर ज़िला परिषद चुनावों के दौरान, दोनों खेमे पुणे में साथ नज़र आए.

ज़िला परिषद चुनावों में सभी उम्मीदवार घड़ी चिह्न पर चुनाव लड़ रहे थे. अजित पवार इस चुनाव प्रचार के लिए बारामती आ रहे थे, लेकिन उसी दौरान विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई.

बीबीसी के लिए कलेक्टिवन्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.