उत्तराखंड में कश्मीरी शॉल बेचने वाले युवकों की पिटाई का पूरा मामला क्या है?

    • Author, आसिफ़ अली
    • पदनाम, देहरादून से बीबीसी हिन्दी के लिए

उत्तराखंड के देहरादून ज़िले में दो कश्मीरी शॉल विक्रेताओं पर हुए हमले के बाद राज्य पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ़्तार कर लिया है.

पुलिस का कहना है कि देहरादून के विकासनगर इलाके में 20 वर्षीय मोहम्मद दानिश और 18 वर्षीय ताबिश के साथ कुछ स्थानीय लोगों ने मारपीट की. दानिश और ताबिश दोनों सगे भाई हैं.

युवकों का दावा है कि धार्मिक पहचान और जम्मू-कश्मीर से होने के कारण उन पर हमला किया गया.

घटना के बाद युवकों के रिश्तेदारों और स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों ने विकासनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई. स्थानीय पुलिस ने फ़िलहाल इस मामले में संजय यादव नाम के एक शख़्स को गिरफ़्तार किया है.

अभियुक्त संजय यादव की पत्नी ने दावा किया कि दोनों लड़कों ने उनके साथ बदतमीज़ी की और विरोध करने पर उनके पति के साथ मारपीट भी की.

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शॉल विक्रेताओं पर हुए हमले की घटना को लेकर बात की है.

उमर अब्दुल्ला के ऑफ़िस की ओर जारी बयान में कहा गया है कि 'पुष्कर सिंह धामी ने एफ़आईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया है.'

क्या है पूरा मामला?

दानिश और ताबिश जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा ज़िले के वारसुन गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता मोहम्मद यासीन गनी फेरी लगाकर कश्मीरी शॉल बेचने का काम करते हैं. ये परिवार हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब में किराए के मकान में रह रहा है.

कश्मीर के स्कूलों में सर्दी की छुट्टियों की वजह से दोनों भाई अपने पिता के पास आए हुए हैं. घटना वाले दिन जब ये दोनों देहरादून के विकासनगर में फेरी लगाने पहुँचे तो उनके पिता साथ नहीं थे.

युवकों का कहना है कि वे विकासनगर के डाकपत्थर रोड स्थित एक दुकान से कुछ सामान ख़रीदने गए, तभी दुकानदार और वहां मौजूद कुछ लोगों ने उनपर धार्मिक टिप्पणियां कीं.

उन्होंने इसपर आपत्ति की जिसके लोगों ने उनपर हमला कर दिया गया. इस हमले में दानिश के हाथ और ताबिश के सिर में चोट लगी है. ताबिश अभी दसवीं में पढ़ते हैं और सर्दियों की छुट्टियों में बड़े भाई के साथ यहां आए हुए थे.

घटना के बारे में ताबिश बताते हैं, "मैं आमतौर पर फेरी पर नहीं जाता हूँ और ज़्यादातर घर पर ही रहता हूँ. पिता किसी काम से अंबाला गए हुए थे, बड़े भाई ने उस दिन फेरी पर चलने को कहा. यह हमारी ज़िंदगी की पहली फेरी थी. हमने विकासनगर इलाके में फेरी लगाई और कुछ सामान भी बेचा."

ताबिश ने बताया कि उन दोनों को घर से निकले काफी देर हो चुकी थी और भूख लगने लगी थी. दोनों एक दुकान खाने का सामान लेने गए लेकिन दुकानदार ने उनकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया. इसके बाद दोनों भाई आपस में कश्मीरी में बात करने लगे.

युवकों ने और क्या बताया

ताबिश बताते हैं कि दुकानदार ने उनकी बातचीत सुन ली और नाराज़ होकर उनसे पूछा कि वे आपस में क्या खुसर-फुसर कर रहे हैं. जब उन्होंने कहा कि वे अपनी भाषा में बात कर रहे हैं, तो दुकानदार ने जवाब दिया, "यह कश्मीर नहीं है, यहां कश्मीरी नहीं चलेगी."

ताबिश का कहना है कि जब दुकानदार को पता चला कि वे मुसलमान हैं, उसका रवैया और आक्रामक हो गया.

ताबिश के मुताबिक, जब वे वहां से जाने लगे और अपने सामान की गठरी उठाने के लिए हाथ बढ़ाया, तो दुकानदार ने वह गठरी भी नीचे फेंक दी. उन्होंने दुकानदार से कहा कि यही उनकी रोज़ी-रोटी है और वे उससे इज़्ज़त से बात कर रहे हैं, इसलिए उनसे भी सम्मान से बात की जाए.

ताबिश का आरोप है कि इसी दौरान दुकानदार हाथ में डंडा लेकर लौट आया और मारपीट शुरू कर दी. युवकों का दावा है कि दुकानदार ने मौके पर मौजूद अपने साथियों को भी उन्हें मारने के लिए उकसाया और धार्मिक पहचान का ज़िक्र करते हुए हमला किया.

उनके मुताबिक इस हमले में दुकानदार, उसकी पत्नी और दो अन्य लोग शामिल थे.

मारपीट में घायल युवकों के मामा अब्दुल राशिद मीर ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया कि परिवार साल 2008 से लगातार यहां आ रहा है.

वह कहते हैं, "हमारे बाप-दादा भी यहां आकर इसी तरह कश्मीरी कपड़े बेचते रहे हैं और अब हम भी वही काम कर रहे हैं. लेकिन उत्तराखंड में हमारे साथ जो हुआ, उससे बहुत अफ़सोस हो रहा है."

अभियुक्त की पत्नी ने क्या बताया?

पुलिस ने इस मामले में संजय यादव को गिरफ़्तार कर लिया है.

उनकी पत्नी रीना यादव ने बीबीसी हिन्दी को बताया, "जब वे दो लड़के दुकान पर सामान लेने आए तब मैं ही दुकान पर थी. जब उन्होंने अपनी भाषा में मुझसे सामान मांगा, तो मैं उनकी भाषा समझ नहीं पाई. क्योंकि वह कुछ अलग सी भाषा बोल रहे थे. मैंने उनसे पूछा कि- भैया क्या बोल रहे हो? जिसके बाद उन्होंने कुछ भद्दा कमेंट किया और गाली दी."

रीना यादव ने दावा किया, "इसके बाद वे हमारी दुकान के काउंटर की तरफ़ आए और मेरा हाथ पकड़ते हुए बदतमीज़ी की. मेरे पति ने उनसे मेरा हाथ छुड़वाया और उन्हें पीछे हटने को कहा."

"हमने उनसे कहा भी कि हमें कोई सामान नहीं देना है, तुम यहां से जाओ. जिसके बाद भी वे वहां से नहीं हटे. बल्कि उन्होंने कहा कि अब हम यहां से नहीं जाएंगे, जो करना है कर लो."

डॉक्टर ने क्या बताया?

विकासनगर उप ज़िला चिकित्सालय की डॉक्टर सृष्टि ने बीबीसी हिन्दी को बताया कि बुधवार करीब चार बजे दो लड़कों- दानिश और ताबिश का केस अस्पताल में आया था.

उन्होंने कहा, "हमने यहां उन दोनों के मेडिकल तैयार किए थे. ताबिश 17-18 साल के बीच की आयु का लड़का था और उसको सिर में चोट लगी थी. हमने उसके सिर की चोट में टांके लगाए थे और न्यूरो ओपिनियन के मद्देनज़र सीटी स्कैन के लिए देहरादून के दून अस्पताल रेफ़र किया था."

डॉक्टर ने बताया, "इसके साथ ताबिश की जांघ के पिछले हिस्से में भी चोट लगी थी. दानिश के बाएं हाथ और एक टांग में चोट लगी थी. दानिश के लिए हमने एक्स-रे कराने को कहा था क्योंकि उसको सूजन थी. उन दोनों की चोटों के आधार पर हमने उनका मेडिकल बनाया था. इस केस से जुड़ी पुलिस इनफ़ोर्मेशन हमने पुलिस को भी भेज दी थी."

पुलिस करेगी सीसीटीवी की जांच

पुलिस का कहना है कि दोनों भाइयों की तहरीर और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मामले में अलग-अलग धाराओं के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया है.

उन्होंने बताया कि मामले में नामजद मुख्य अभियुक्त संजय यादव को हिरासत में लिया गया है.

पुलिस अब सीसीटीवी फ़ुटेज इकट्ठा कर रही है.

एसएसपी ने कहा कि मामले में आगे की पूछताछ और छानबीन जारी है और जांच पूरी होने के बाद संजय यादव को अदालत में पेश किया जाएगा.

सीएम अब्दुल्लाह ने क्या कहा?

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने गुरुवार को इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हाल के दिनों में हुए हमलों की यह श्रृंखला, जिसमें हिमाचल प्रदेश की घटनाएं और अब यह ताज़ा मामला शामिल है, पूरी तरह अस्वीकार्य है और ऐसी घटनाएं रुकनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में जहां भी ज़रूरी होगा, उनकी सरकार हस्तक्षेप करेगी और इन घटनाओं को रोकने के लिए हर क़दम उठाएगी. अब्दुल्ला ने उम्मीद जताई कि केंद्रीय गृह मंत्रालय दूसरे राज्यों में ऐसे मामलों को रोकने के लिए क़दम उठाएगा.

उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से तत्काल हस्तक्षेप करने, सख़्त धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराने और सभी दोषियों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई की मांग की.

उत्तराखंड में पिछले दिनों त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की मौत भी एक ऐसे ही विवाद के बाद सामने आई थी, जिसने नस्लीय और क्षेत्रीय भेदभाव को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी थी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिवन्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.