मुज़फ़्फ़रनगर लोकसभा सीट से संजीव बालियान की हार पर बीजेपी में क्यों मचा घमासान

संजीव बालियान और संगीत सोम

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    • Author, अभिनव गोयल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो बीजेपी नेता एक बार फिर आमने-सामने हैं. दोनों नेताओं के बीच की अदावत अब खुलकर सामने आ रही है.

राज्य में पार्टी के ख़राब प्रदर्शन ने सिर्फ अंदरूनी कलह को नहीं बल्कि जाट बनाम ठाकुर की लड़ाई को भी तेज़ कर दिया है.

पूर्व केंद्रीय मंत्री और दो बार के सांसद संजीव बालियान इस बार भी मुज़फ़्फ़रनगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़े थे.

उन्हें समाजवादी पार्टी के हरेंद्र मलिक ने करीब 24 हजार वोटों से हरा दिया. इस हार के लिए उन्होंने बिना नाम लिए अपनी ही पार्टी के एक नेता को 'जयचंद', 'विभीषण' और 'शिखंडी' तक बता दिया है.

इलाके की राजनीति पर नज़र रखने वाले जानकारों का कहना है कि उनका इशारा सरधना के पूर्व विधायक और बीजेपी नेता संगीत सोम की तरफ़ है. संगीत सोम भी संजीव बालियान पर हमलावर है. वे न सिर्फ़ संजीव बालियान बल्कि राष्ट्रीय लोकदल की भूमिका पर भी सवाल उठा रहे हैं. इस लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोकदल ने बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा है.

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क्या है पूरा मामला

संजीव बालियान चुनाव हारे

सवाल यह भी है कि क्या इस लड़ाई ने बीजेपी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी कमज़ोर करने का काम किया है?

उत्तर प्रदेश में बीजेपी को इस आम चुनाव में अच्छा खासा नुकसान हुआ है. बीजेपी कुल 80 में से सिर्फ़ 35 सीटें ही जीत पाई है.

हारने वाली सीटों में एक मुज़फ़्फ़रनगर भी शामिल है.

यहां 2019 में संजीव बालियान को 5 लाख 73 हजार 780 वोट पड़े थे, जो इस बार घटकर 4 लाख 46 हजार 49 रह गए हैं.

यानी पिछली बार के मुकाबले इस बार उन्हें करीब 1 लाख 27 हजार वोट कम पड़े हैं.

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हारने के एक हफ़्ते बाद संजीव बालियान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की.

उन्होंने अपनी हार के तीन प्रमुख कारण गिनाए, जिसमें एक को लेकर पार्टी में लड़ाई शुरू हो गई है.

संगीत सोम का नाम लिए बिना उन्होंने कहा, "शिखंडी ने छिपकर वार किया. जयचंदों का कुछ नहीं हो सकता."

बालियान ने कहा, "सपा प्रत्याशी को लोकसभा चुनाव लड़वाया. लोकसभा चुनाव में जो जयचंद की भूमिका में रहे, उनके ख़िलाफ़ पार्टी कार्रवाई करेगी."

संगीत सोम ने क्या कहा?

संगीत सोम

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संजीव बालियान के आरोपों के बाद संगीत सोम ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की.

उन्होंने मुज़फ़्फ़रनगर सीट पर हार के लिए संजीव बालियान को ही जिम्मेदार ठहराया.

संगीत सोम ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी सरधना विधानसभा के लोगों ने समाजवादी पार्टी की टक्कर में वोट डाले हैं.

उन्होंने कहा, "मुज़फ़्फ़रनगर और खतौली ऐसी विधानसभा है जहां विपरीत परिस्थितियों में भी बीजेपी 30-40 हजार वोट के अंतर से जीतती है, लेकिन इस बार मुज़फ़्फ़रनगर में ये अंतर करीब 800 वोटों का और खतौली में करीब 2 हजार वोट का ही रहा."

उन्होंने कहा, "चरथावल और बुढ़ाना विधानसभा बालियान जी का घर हैं. ये दोनों क्यों हारे? उन्हें चिंतन मनन करना चाहिए… बुढ़ाना के सोरम गांव को बालियान जी अपना घर मानते हैं. यहां बड़े बड़े नेताओं ने सभाएं की, उसके बाद भी यहां हार हुई… मेरी जिम्मेदारी सरधना की थी, वहां लोगों ने बहुत अच्छा वोट दिया है."

एक सवाल के जवाब में संगीत सोम ने कहा, "मुझे नहीं लगता है कि आरएलडी के आने से बीजेपी को फ़ायदा हुआ है. जो सीटें हम जीत रहे थे हम उन्हें भी हार गए."

मुज़फ़्फ़रनगर में बालियान को नुकसान

संजीव बालियान को कितना नुकसान

मुज़फ़्फ़रनगर लोकसभा में पांच विधानसभाएं आती हैं, जिसमें बुढ़ाना, चरथावल, मुज़फ़्फ़रनगर, खतौली और सरधना शामिल हैं.

चुनाव आयोग के मुताबिक़, लोकसभा चुनाव 2019 में संजीव बालियान ने मुज़फ़्फ़रनगर की पांच विधानसभाओं में से बुढ़ाना और चरथावल छोड़कर तीन पर बढ़त दर्ज की थी. वहीं इस बार सिर्फ़ मुज़फ़्फ़रनगर और खतौली पर ही सिमट गए हैं.

अगर संगीत सोम की सरधना विधानसभा की बात करें तो 2019 में संजीव बालियान को यहां से 1 लाख 17 हज़ार 530 वोट मिले थे, वहीं, इस बार उन्हें 80 हज़ार 781 वोट मिले हैं. यानी पिछले बार की तुलना में उन्हें 36 हज़ार 749 वोट कम पड़े हैं.

वहीं, संजीव बालियान की हार का अंतर करीब 24 हज़ार है. अगर अकेली सरधना विधानसभा में उन्हें पिछली बार जितना वोट मिलता तो वे आसानी से चुनाव जीत सकते थे.

हालांकि दूसरी विधानसभा क्षेत्रों में भी उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है.

नेताओं की आपसी लड़ाई से पार्टी को नुक़सान

कितना नुकसान पश्चिमी यूपी में

संजीव बालियान और संगीत सोम ने इसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट बनाम ठाकुर की लड़ाई बना दिया, जिससे ना सिर्फ़ बीजेपी को मुज़फ़्फ़रनगर बल्कि कई सीटों पर नुक़सान उठाना पड़ा.

साल 2019 में बीजेपी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 26 सीटों में से जहां 18 सीटें जीती थीं, वहीं इस बार यह संख्या घटकर 12 पर आ गई.

इसके उलट समाजवादी पार्टी जहां 4 सीटों पर थी, वह बढ़कर 10 पर पहुंच गई. चुनावी नतीजों के आंकड़े बताते हैं कि राष्ट्रीय लोकदल को दो सीटों पर जीत ज़रूर मिली लेकिन उसका फ़ायदा बीजेपी को नहीं हुआ.

मुज़फ़्फ़रनगर के स्थानीय पत्रकार नाम न बताने की शर्त पर कहते हैं, "सरधना के खेड़ा गांव में ठाकुरों की महापंचायत हुई थी, इसमें ठाकुरों ने एलान किया था कि वे सहारनपुर, कैराना और मुज़फ़्फ़रनगर में बीजेपी को वोट नहीं करेंगे."

वे कहते हैं, "ये एक बड़ी वजह है कि सहारनपुर में ठाकुरों ने बड़ी संख्या में कांग्रेस के उम्मीदवार इमरान मसूद और कैराना में समाजवादी पार्टी की इकरा चौधरी को वोट दिया और दोनों ने करीब 70 हजार के अंतर से अपनी जीत दर्ज की."

पश्चिमी यूपी की सीटें

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इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन के चलते भी लोगों में संजीव बालियान के प्रति गुस्सा दिखाई दिया.

किसान आंदोलन के समय कई गांवों ने संजीव बालियान का बहिष्कार किया था.

वहीं लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार हेमंत तिवारी कहते हैं, "ठाकुरों की नाराज़गी का जो शिगूफा छेड़ा था, उसमें इन दो नेताओं की आपसी लड़ाई ने आग में घी डालने का काम किया. इसका संदेश पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वी यूपी तक गया."

हेमंत तिवारी कहते हैं, "पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में बहुत सारे ठाकुर वोट डालने नहीं गए. मछलीशहर में बहुत ठाकुर रहते हैं. वहां वोट नहीं पड़े. पूर्वी यूपी में ब्राह्मण और ठाकुरों की पारंपरिक लड़ाई रहती है लेकिन 2014 के बाद से बीजेपी ने दोनों को साध लिया था, लेकिन इस बार यह नाराज़गी घातक साबित हुई है."

कहां से शुरू हुई लड़ाई

संजीव बालियान

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समाप्त

संजीव बालियान और संगीत सोम के आपसी रिश्ते काफी समय से ख़राब हैं. राजनीति के जानकार मानते हैं कि 2022 में संगीत सोम का सरधना से चुनाव हारना, इस खटास की एक महत्वपूर्ण कड़ी है.

हेमंत तिवारी कहते हैं, "संगीत सोम का इलाका, संजीव बालियान के संसदीय क्षेत्र में आता है. संगीत को लगता है कि संजीव बालियान और उनके लोगों ने उन्हें चुनाव हराया था. इसी हार का बदला अब उन्होंने लोकसभा चुनाव में लिया है."

मुज़फ़्फ़रनगर के स्थानीय पत्रकार बताते हैं कि दोनों नेताओं के बीच लड़ाई की शुरुआत और भी पहले यानी साल 2019 के लोकसभा चुनाव के समय से ही शुरू हो गई थी.

वह बताते हैं, "2019 के लोकसभा चुनाव में संजीव बालियान ने आरएलडी के अजीत सिंह के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ा था. इस चुनाव में उन्होंने संगीत सोम की जगह समाजवादी पार्टी के अतुल प्रधान का साथ लिया था और जीत दर्ज की थी."

"एक तरह से अतुल प्रधान का अहसान संजीव बालियान पर चढ़ गया और जब 2022 के विधानसभा चुनाव में अतुल, संगीत सोम के ख़िलाफ़ खड़े हुए तो संजीव बालियान ने अतुल का साथ दिया. संगीत सोम ने पार्टी में इसकी शिकायत भी की, हालांकि संजीव बालियान का पाला मजबूत था तो उनकी सुनवाई नहीं हुई और यहां से यह लड़ाई बहुत मजबूत हो गई."

वे कहते हैं, "उत्तर प्रदेश में कई ऐसी घटनाएं हुई जिससे ये माहौल बनाया गया कि ठाकुर नाराज हैं. एक ठाकुर नेता पूर्ण सिंह ने सहारनपुर के शाकुंभरी देवी से पदयात्रा शुरू की और सभाएं करते हुए वे मुज़फ़्फ़रनगर पहुंचे. उन्होंने एलान किया कि ठाकुर इस बार बीजेपी को वोट नहीं देंगे."

हालांकि मुज़फ़्फ़रनगर सिर्फ़ अकेली ऐसी सीट नहीं है जहां बीजेपी नेताओं ने पार्टी की हार के लिए अपने ही नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है. पश्चिमी यूपी से बाहर रामपुर, फ़ैज़ाबाद, मेरठ, इलाहाबाद, कौशांबी जैसी सीटों पर भी इसी तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं.

इस रिपोर्ट में मुजफ्फरनगर से अमित सैनी ने सहयोग किया है.

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