अमन सहरावत: पेरिस ओलंपिक में कुश्ती में कांस्य पदक जीतने वाले कौन हैं?

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भारतीय रेसलर अमन सहरावत ने मेंस फ़्रीस्टाइल 57 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक जीत लिया है.
इसी के साथ इस ओलंपिक में भारत के पदकों की संख्या छह हो गई है.
कांस्य पदक के लिए ज़रूरी मुक़ाबले में उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी प्यूर्टो रिको के डेरियन टोई क्रूज़ को 13-5 से हराया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर बधाई देते हुए लिखा, "हमारे पहलवानों पर हमें और गर्व है. पेरिस ओलंपिक में पुरुषों की फ़्रीस्टाइल 57 किलोग्राम में कांस्य पदक जीतने के लिए अमन सेहरावत को बधाई. उनकी लगन और दृढ़ता साफ़ तौर पर दिखाई देती है. पूरा देश इस उल्लेखनीय उपलब्धि का जश्न मना रहा है."

कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर बधाई संदेश देते हुए लिखा है, "फ्रीस्टाइल कुश्ती में कांस्य पदक जीतने पर अमन सहरावत को हार्दिक बधाई. पेरिस ओलंपिक में भारत को अपना छठा पदक जीतते देखकर बहुत खुशी हुई. हमारे ओलंपिक टीम के प्रदर्शन पर पूरे देश को गर्व है"
इससे पहले गुरुवार को हुए सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले में अमन सहरावत को हार का सामना करना पड़ा था.
सेमीफ़ाइनल में अमन का मुक़ाबला जापान के रेई हिगुची के साथ था.

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इस मैच में अमन को 10-0 से हार का सामना करना पड़ा.
अमन ने क्वार्टर फ़ाइनल मुक़ाबले में अल्बानिया के अबकारोव को 12-0 से हराकर सेमीफ़ाइनल में जगह बनाई थी.
अमन ने पहले राउंड में पूर्व यूरोपीय चैम्पियन व्लादिमीर एगोरोव को 10-0 से मात दी थी.
इस ओलंपिक में भारत को कुश्ती में अभी तक कोई पदक नहीं मिला था.
महिला कुश्ती में विनेश फोगाट से पदक की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें फ़ाइनल से पहले अधिक वज़न के चलते अयोग्य घोषित कर दिया गया था.
पेरिस ओलंपिक में हुई थी शानदार शुरुआत

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21 साल के अमन ने अपने पेरिस ओलंपिक अभियान की शानदार शुरुआत करते हुए, राउंड ऑफ़ 16 में 2022 के यूरोपीय चैंपियन व्लादिमीर एगारोव को 10-0 से हरा दिया था.
दूसरी जीत, क्वार्टर फ़ाइनल में उन्होंने अल्बानिया की ओर से लड़ रहे 2022 के वर्ल्ड चैंपियन चेचेन पहलवान अबकारोव के मुकाबले में हासिल की थी. उन्होंने अबकारोव को 12-0 से हराया.
अमन ने अपनी पहचान तब बनाई जब भारतीय कुश्ती मुश्किलों के दौर से गुजर रही थी. देश के पहलवान सुशील कुमार को जेल हो गई थी. पिछले साल प्रदर्शनों के चलते लगभग पूरी गतिविधि ठप हो गई थी.
और इसी बीच टोक्यो ओलंपिक के सिल्वर मेडल विजेता रवि दहिया गंभीर रूप से घायल गए थे.
इन परिस्थितियों में पुरुष कुश्ती में अमन सहरावत भारतीय कुश्ती की उम्मीद के रूप में उभरे.
यह भी दिलचस्प है कि भारतीय ओलंपिक खिलाड़ियों में वो सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं, जिन्होंने पेरिस ओलंपिक में पुरुष कुश्ती में भारत की ओर से किसी खिलाड़ी के न जाने की शर्मिंदगी से बचाया.
दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम से हुई शुरुआत

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हरियाणा के झज्जर के बिरोहर गांव के रहने वाले अमन सहरावत दिल्ली के उसी मशहूर छत्रसाल विश्वस्तरी पहलवान हैं.
यह वो अखाड़ा है जहां से ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार, योगेश्वर दत्त, रवि दहिया, बजरंग पुनिया समेत कई कुश्ती खिलाड़ी बने और पहचान बनाई.
अमन का जन्म 2003 में हुआ था और जब वो 11 साल के थे उन्होंने अपने माता पिता को खो दिया. उनके दादा ने उनका पालन पोषण किया और इस हादसे से उबरने में उनकी मदद की.
कम उम्र में ही कुश्ती में रुचि को देखते हुए उन्हें छत्रसाल स्टेडियम में भर्ती कराया गया.
कुश्ती में जाने की प्रेरणा उन्हें सुशील कुमार से मिली, जिन्होंने 2008 में बीजिंग ओलंपिक में कांस्य और 2012 में लंदन ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीता था.
अमन ने नूर-सुल्तान में 2019 एशियाई कैडेट चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर अपनी प्रतिभा का पहली बार लोहा मनवाया.
तीन साल बाद 2022 में, अमन अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय बन गए.
2023 में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा और अस्ताना में एशियाई चैंपियनशिप में गोल्ड और हांग्जो एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता.
हाल ही में, वह विश्व ओलंपिक क्वालीफायर के दौरान पेरिस 2024 कोटा जीतने वाले एकमात्र भारतीय पुरुष पहलवान बने और अंततः पुरुषों की 57 किग्रा स्पर्धा के लिए टोक्यो 2020 के सिल्वर मेडल विजेता रवि दहिया पर उन्हें वरीयता दी गई.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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