कांग्रेस ने सीडब्ल्यूसी में सचिन पायलट और शशि थरूर को दी जगह, क्या हैं इसके मायने?- प्रेस रिव्यू

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कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभालने के दस महीने बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने नई कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) का गठन किया है, जिसमें कई ऐसे नेताओं को जगह दी गई है, जो बग़ावती सुर दिखा चुके हैं.
कांग्रेस कार्यसमिति में हुए अहम बदलावों को आज के हर प्रमुख अख़बार में जगह दी गई है.
अंग्रेज़ी अख़बार 'द इंडियन एक्सप्रेस' ने कार्यसमिति के गठन को लोकसभा चुनाव से चंद महीनों पहले खड़गे की ओर से संतुलन बैठाने की कोशिश बताया है. प्रेस रिव्यू में सबसे पहले यही रिपोर्ट.
ख़ास बात ये है कि खड़गे ने सीडब्ल्यूसी में अपने ख़िलाफ़ कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने वाले शशि थरूर और युवा नेता सचिन पायलट, गौरव गोगोई, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और चरणजीत सिंह चन्नी को भी जगह दी है.
कांग्रेस की 39 सदस्यों वाली कार्यसमिति में गुजरात के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जगदीश ठाकोर, पूर्व जम्मू-कश्मीर अध्यक्ष ग़ुलाम अहमद मीर, गुजरात के नेता दीपक बाबरिया, पश्चिम बंगाल की नेता दीपा दास मुंशी, आंध्र प्रदेश के पूर्व कांग्रेस चीफ़ एन रघुवीरा रेड्डी, छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, राज्यसभा सांसद सैयद नासिर हुसैन, मध्य प्रदेश के युवा विधायक कमलेश्वर पटेल और राजस्थान के मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय को भी जगह दी गई है.
कांग्रेस कार्यसमिति में 39 नियमित सदस्य, 32 परमानेंट इनवाइटी और 13 स्पेशल इनवाइटी मिलाकर कुल 84 सदस्य होते हैं.
थरूर और पायलट को शामिल करना अहम

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इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि सीडब्ल्यूसी में शशि थरूर और सचिन पायलट को शामिल करना अहम माना जा रहा है.
थरूर को शामिल करके खड़गे ने ये संकेत दिया है कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के दौरान प्रतिद्वंद्विता को पार्टी के भीतर लोकतंत्र के तौर पर देखा है.
लेकिन पायलट का कद बढ़ाकर खड़गे ने दो संदेश देने की कोशिश की है. पहला कि राजस्थान की राजनीति में अहम भूमिका और मुख्यमंत्री का पद न दिए जाने के बावजूद पार्टी को सचिन पायलट की परवाह है.
दूसरा इससे राजस्थान में नवंबर-दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ऊपर से दबाव भी कम होगा.
इसी साल फ़रवरी में कांग्रेस के रायपुर अधिवेशन के दौरान पार्टी ने सीडब्ल्यूसी के सदस्यों की संख्या 23 से बढ़ाकर 35 करने का फ़ैसला लिया था. इसके अतिरिक्त पार्टी अध्यक्ष, कांग्रेस संसदीय समिति अध्यक्ष, प्रधानमंत्री या पूर्व प्रधानमंत्री, लोकसभा-राज्यसभा में कांग्रेस के नेता और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष भी समिति का हिस्सा होंगे.
हालांकि, फ़ैसले लेने वाली मुख्य इकाई में वरिष्ठ नेताओं को तरजीह दी गई है.
बीते साल उदयपुर चिंतन शिविर में पार्टी ने ये महसूस किया था कि सीडब्ल्यूसी से लेकर ब्लॉक समितियों तक 50 फ़ीसदी सदस्यों की संख्या 50 साल से कम होनी चाहिए.
हालांकि, रायपुर में इस नियम में थोड़े बदलाव किए गए. पार्टी संविधान में ये प्रावधान किया गया कि 35 सदस्यों में से 50 फ़ीसदी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, युवा और महिला होंगे.
कांग्रेस की मुख्य इकाई में फेरबदल आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व को दिखाता है और कुछ नेता शायद इसी गुणा-भाग के आधार पर जगह पाने में कामयाब रहे हैं. 39 सदस्यीय निकाय में, केवल तीन - पायलट, गोगोई और पटेल ही 50 वर्ष से कम आयु के हैं.
खड़गे ने कई नेताओं को परमानेंट इनवाइटी के तौर पर भी समिति में जगह दी है.
इनमें कर्नाटक के पूर्व सीएम एम वीरप्पा मोइली, लोकसभा सांसद मनीष तिवारी, त्रिपुरा के सुदीप रॉय बरमन, केरल के रमेश चेन्नीथाला, कर्नाटक के बीके हरिप्रसाद, हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह, पूर्व गोवा कांग्रेस चीफ़ गिरिश चोडनकर, ब्यूरोक्रैट से राजनेता बने के राजू, मुंबई के पूर्व मेयर चंद्रकांत हंडोर, मध्य प्रदेश के मीनाक्षी नटराजन, राज्यसभा सांसद फूलो देवी नेताम, अविभाजित आंध्र प्रदेश के पूर्व डिप्टी सीएम दामोदर राजा नरसिम्हा और मोहन प्रकाश भी हैं.
कांग्रेस शासित किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री को सीडब्ल्यूसी में जगह नहीं दी गई है लेकिन सीएम अहम बैठकों में आमतौर पर आमंत्रित होते हैं.
पिछली सीडब्ल्यूसी के अधिकतर सदस्यों को इस बार भी जगह मिली है. इनमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मनमोहन सिंह, एके एंटनी, अंबिका सोनी, केसी वेणुगोपाल, मुकुल वासनिक, पी. चिदंबरम, आनंद शर्मा, तारिक़ अनवर, अजय माकन, कुमारी शैलजा, अभिषेक सिंघवी, गैखंगम, लाल थानवाला और रणदीप सिंह सुरजेवाला शामिल हैं.
आनंद शर्मा, वीरप्पा मोइली, शशि थरूर और मनीष तिवारी कांग्रेस के उस 23 नेताओं के समूह का भी हिस्सा रहे हैं, जिन्होंने 2020 में सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर पार्टी में बड़े बदलावों की मांग की थी.
हालांकि, सीडब्ल्यूसी में राजस्थान के नेता रघुवीर सिंह मीणा, उत्तर प्रदेश के नेता प्रमोद तिवारी और पीएल पूनिया का नाम न होना चौंकाता है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने भी बताया है कि जेपी अग्रवाल, दिनेश गुंडू राव, एचके पाटिल, केएच मुनियप्पा और रघु शर्मा को सीडब्ल्यूसी में शामिल नहीं किया गया है.
एससी, एसटी और आदिवासी नेताओं को जगह

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अंग्रेज़ी अख़बार द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के अनुसार कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने अपनी इस टीम में विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखा है.
रिपोर्ट के अनुसार सीडब्ल्यूसी में अन्य पिछड़ा वर्ग के छह, अनुसूचित जनजाति के नौ और राजस्थान के महेंद्रजीत मालवीय के तौर पर एक मुख्य आदिवासी नेता को शामिल किया गया है.
अख़बार लिखता है कि इसके अलावा युवा चेहरों को भी जगह दी गई है. इनमें सचिन पायलट, गौरव गोगोई के अलावा जितेंद्र सिंह, यशोमती ठाकुर, मणिकम टैगोर, प्रणिति शिंदे, कमलेश्वर पटेल, वामशी चंद रेड्डी, अल्का लांबा, कन्हैया कुमार, सुप्रिया श्रीनेत और राज्यसभा के युवा सांसद नासिर हुसैन शामिल हैं.
सीडब्ल्यूसी के गठन में कुछ राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों को भी ध्यान में रखा गया है. तेलंगाना के मादिगा दलित समाज से आने वाले पूर्व डिप्टी सीएम दामोदर राजा नरसिम्हा को जगह देने को आगामी विधानसभा चुनाव से ही जोड़कर देखा जा रहा हैा. रणनीतिकार पार्टी को मदिगा समाज के बीच संपर्क बैठाने की कोशिश के लिए कह चुके हैं.
छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ ओबीसी नेता ताम्रध्वज साहू को चुनने के पीछे भी विधानसभा चुनाव को ही वजह बताया जा रहा है. ओबीसी समुदाय का झुकाव बीजेपी की ओर माना जाता है.
जी-23 के नेताओं को रखा साथ

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अंग्रेज़ी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स ने सीडब्ल्यूसी में कांग्रेस पार्टी के बगावती गुट जी-23 के नेताओं को जगह मिलने को अपनी हेडलाइन बनाया है.
अख़बार लिखता है कि खड़गे की अध्यक्षता में पार्टी के में पहले बड़ा संगठनात्मक बदलाव हुआ है. इसमें आनंद शर्मा से लेकर मुकुल वासनिक जैसे जी-23 के नेताओं को जगह मिली है.
इस रिपोर्ट के अनुसार पार्टी ने इन बदलावों के ज़रिए उन नेताओं को महत्व देने की कोशिश की है, जिन्हें कोई आधिकारिक पद न मिला हो. साथ ही क्षेत्रीय संवेदनशीलताओं और गांधी परिवार के भरोसेमंद लोगों को भी ध्यान में रखा गया है.
कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में जी-23 नेताओं के समर्थन ने जहाँ 'बर्फ़ पिघलने' का संकेत दिया था, तो वहीं कार्यसमिति में बाग़ी गुट के पाँच शीर्ष नेताओं को जगह देकर मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस समूह के बीच असंतुष्टी को कम करने की कोशिश की है.
आनंद शर्मा, जिन्हें राज्यसभा के लिए दोबारा नामांकित नहीं किया गया था, उन्हें सीडब्ल्यूसी में शामिल गया है. जी-23 के एक अन्य बड़े नेता मनीष तिवारी को भी इसमें जगह दी गई है. जी-23 की एक बैठक में शामिल हुए मुकुल वासनिक, पिछले काफ़ी समय से साइडलाइन चल रहे पूर्व कर्नाटक सीएम एम वीरप्पा मोइली को सीडब्ल्यूसी में शामिल किया गया है. थरूर तो इस गुट का बड़ा चेहरा हैं हीं.
वहीं राजस्थान में अपनी ही सरकार के ख़िलाफ़ बग़ावती तेवर दिखा चुके सचिन पायलट को जगह मिली है लेकिन अशोक गहलोत सरकार के करीबी माने जाने वाले रघु शर्मा को बाहर रखा गया है.
अख़बार ने कांग्रेस अध्यक्ष के एक सहयोगी के हवाले से लिखा है, "ये नियुक्तियां संकेत देती हैं कि खड़गे बीती बातें भूलाकर नई शुरुआत करना चाहते हैं."
कांग्रेस के कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट से पवन खेड़ा और सुप्रिया श्रीनेत के तौर पर दो सदस्यों को सीडब्ल्यूसी का हिस्सा बनाया गया है.
पार्टी के पुराने भरोसेमंदों को भी जगह मिली है. संन्यास का एलान कर वापस केरल जा चुके एके एंटनी की सीडब्ल्यूसी सदस्यता बरकरार रखी गई है. वहीं, गाधी परिवार के करीबियों में गिने जाने वाले दिग्विजय सिंह, पी. चिदंबरम, बीके हरिप्रसाद और प्रतिभा सिंह को भी जगह दी गई है.
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