पहलवानों के समर्थन में महिला महापंचायत के मद्देनज़र दिल्ली में अस्थायी जेल और सीमा पर घेराबंदी - प्रेस रिव्यू

महिला पहलवान

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दिल्ली से छपने वाले अख़बारों ने पहले पन्ने पर आज संसद भवन की नई इमारत के उद्घाटन, विपक्ष के इस समारोह को बॉयकॉट करने के फ़ैसले और नीति आयोग की बैठक को प्रमुखता से छापा है.

इसके अलावा जिन ख़बरों को अख़बारों में जगह मिली है वो हैं रविवार के दिन महिला पहलवानों के समर्थन में दिल्ली में महिला महापंचायत करने की अपील, कैबिनेट सेक्रेटरी के नाम केमिस्टों के संगठन का पत्र जिसमें कहा गया है कि दवा की ऑनलाइन दुकानों पर बैन लागू किया जाना चाहिए.

वहीं कुछ अख़बारों ने दिल्ली यूनिवर्सिटी की एकेडेमिक काउंसिल के 'सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा' लिखने वाले कवि मोहम्मद इक़बाल को सिलेबस से निकालने और सावरकर को शामिल करने के प्रस्ताव मंज़ूरी को जगह दी है और कुछ ने नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड दाहल के भीतर दौरे के बारे में भी ख़बर छापी है.

आज के प्रेस रिव्यू की शुरुआत करते हैं महिला पहलवानों के समर्थन में महिला महापंचायत से जुड़ी ख़बर से.

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राजधानी दिल्ली में आज विपक्ष की आलोचना के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के नए भवन का उद्घाटन किया. इससे पहले शनिवार को पीएम ने तमिलनाडु के अधीनम (मठ) से सेंगोल स्वीकार किया.

इसके मद्देनज़र रविवार को दिल्ली में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है. लेकिन एक और कारण है जिस कारण दिल्ली में आज चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था है.

दिल्ली में बीते कई सप्ताह से प्रदर्शन कर रही महिला पहलवानों ने रविवार को नए संसद भवन के सामने 'महिला सम्मान महापंचायत' करने की घोषणा की, जिसमें कई राज्यों के किसान, मज़दूर और खाप पंचायतों के हिस्सा लेने की उम्मीद जताई गई.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार इसके मद्देनज़र शहर के सीमावर्ती ओल्ड बवाना में पुलिस को म्यूनिसिपालिटी स्कूल में अस्थायी जेल बनाने की अनुमति मिल गई है.

दिल्ली आउटर नॉर्थ के अतिरिक्त डीसीपी राजीव कुमार अम्बस्ता ने एक ऑर्डर जारी किया है जिसके अनुसार संसद उद्घाटन के मौक़े पर कई वीआईपी अतिथि और नेता दिल्ली आने वाले हैं. इसी बीच दिल्ली में 'महिला सम्मान महापंचायत' कराने की योजना है भी जिसमें कई राज्यों की खाप पंचायतें हिस्सा ले सकती हैं.

द हिंदू ने भी इस ख़बर को छापा है. रिपोर्टों के अनुसार ऑर्डर में लिखा है कि माना जा रहा है कि दिल्ली से सटे हरियाणा के सिंघु बॉर्डर की तरफ से काफी लोग इसके लिए दिल्ली आ सकते हैं, जिससे क़ानून व्यवस्था बिगड़ सकती है. इसके मद्देनज़र आउटर दिल्ली में एक अस्थायी जेल बनाने का फ़ैसला लिया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस लिखता है कि ये जेल कंझावाला के एमसी प्राथमिक बालिका विद्यालय में बनाया जाएगा. इसके लिए एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंज़ूरी दे दी है.

इसके अलावा महापंचायत के लिए किसानों को आने से रोकने के लिए दिल्ली की सभी सीमाओं पर बैरिकेडिंग की गई है और कहीं कहीं पर स्टोन बैरिकेड भी तैयार किए गए हैं.

नीति आयोग की बैठक

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नीति आयोग में बैठक में नहीं शामिल हुए 11 राज्यों के सीएम

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार शनिवार को हुई नीति आयोग की बैठक में 11 राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल नहीं हुए. ये सभी ग़ैर-बीजेपी शासित राज्यों के सीएम थे.

अख़बार लिखता है कि कुछ ने बैठक की बहिष्कार किया तो कुछ ने कहा कि उनकी कोई और व्यस्तता है.

जिन मुख्यमंत्रियों ने बैठक का बहिष्कार किया उन पर निशाना साधते हुए बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने इसे "जन विरोधी" और "ग़ैर-ज़िम्मेदाराना" रवैय्या बताया.

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रविशंकर प्रसाद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल किया, "वो इस बैठक में शामिल होने क्यों नहीं आए जब उन्हें पता है कि इसमें सौ मुद्दों पर चर्चा होनी है? नीति आयोग की बैठकों में देश के विकास का रोडमैप तैयार किया जाता है. अगर बड़ी संख्या में सीएम इसमें शामिल नहीं होंगे तो वो अपने राज्य की जनता की आवाज़ यहां तक नहीं पहुंचा पाएंगे."

उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और तेलंगना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव शामिल नहीं हुए.

वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी स्वास्थ्य कारणों से बैठक में नहीं पहुंच पाए.

रविशंकर प्रसाद ने कहा, "सही कारण क्या है ये तो वहीं बता सकेंगे लेकिन उनकी तरफ से कोई प्रतिनिधि बैठक में नहीं आए."

सावरकर

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दिल्ली यूनिवर्सिटी के सिलेबस में गांधी से पहले सावरकर

शुक्रवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के अकादमिक काउंसिल की बैठक हुई जिसमें बीए राजनीति शास्त्र के सिलेबस में बदलाव किए जाने की ख़बर है.

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार यूनिवर्सिटी ने नए सिलेबस में पांचवें सेमेस्टर में हिंदुत्व से जुड़ा सेक्शन शामिल किया गया है जिसमें विनायक दामोदर सावरकर के बारे में बताया गया है.

पहली बार सिलेबस सावरकर के बारे में जानकारी जोड़ी गई है. वहीं महात्मा गांधी से जुड़ा चैप्टर सातवें सेमेस्टर में ले जाया गया है.

अख़बार ने अकादमिक काउंसिल के एक सदस्य के हवाले से बताया कि, "पहले सावरकर सिलेबस का हिस्सा नहीं था और पांचवें सेमेस्टर में गांधी के बारे में जानकारी थी. अब पांचवें सेमेस्टर में सावरकर की, छठे में आंबेडकर और सातवें में गांधी के बारे में बताया गया है. हमें सावरकर से जुड़ा चैप्टर सिलेबस में शामिल करने में कोई ऐतराज़ नहीं है लेकिन गांधी और उनकी शिक्षा से पहले उनके बारे में नहीं पढ़ाया जाना चाहिए."

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दवा की ऑनलाइन दुकानों पर लगे बैन- एआईओसीडी

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मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

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केमिस्टों के संगठन ऑल इंडिया ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (एआईओसीडी) ने शुक्रवार को कैबिनेट सेक्रेटरी को एक पत्र लिख कर कहा है कि दवा की ऑनलाइन दुकानें (ई-फ़ार्मेसी) नियमों का उल्लंघन कर रही हैं और लोगों की जान से खेल रही हैं, उन पर बैन लगाया जाना चाहिए.

इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार पत्र में 2018 के हाई कोर्ट के एक आदेश का ज़िक्र है जिसमें ऑनलाइन दवा की दुकानों पर बिना लाइसेंस दवा बेचने पर रोक लगाई गई थी. कोर्ट ने अगले आदेश तक इस तरह की बिक्री पर रोक लगाई थी.

पत्र में लिखा गया है कि "कोर्ट के आदेश के बावजूद बीते साढ़े चार साल से दवा की ऑनलाइन दुकानें ग़ैर-क़ानूनी तरीके से काम कर रही हैं."

संगठन ने कहा कि इसी साल फरवरी में ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया (डीजीसीआई) ने कई ई-फ़ार्मेसी को नोटिस जारी किया था लेकिन इसके बावजूद इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया गया है.

अख़बार लिखता है कि संगठन ने अपने पत्र में ड्रग कंट्रोल द्वारा 2020 में कोर्ट में दिए गए एक हलफनामे का भी ज़क्र किया है जिसमें कहा गया है ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स 1945 में ऑनलाइन फार्मेसी के बारे में कुछ नहीं कहा गया है. दवा की ऑनलाइन बिक्री के मुद्दे पर फिलहाल सरकार विचार कर रही है.

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