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पाकिस्तान लौट रहे नवाज़ शरीफ़ के लिए ऐसे तैयार किया जा रहा है मैदान
- Author, इमाद ख़ालिक़
- पदनाम, बीबीसी उर्दू डॉट कॉम, इस्लामाबाद
पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की अगले महीने पाकिस्तान वापसी की घोषणा ने राजनीतिक मैदान में एक हलचल पैदा कर दी है.
लंदन में मीडिया के प्रतिनिधियों से बात करते हुए उनके भाई और निवर्तमान प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ का कहना था कि 21 अक्टूबर को पूरा पाकिस्तान लाहौर में नवाज़ शरीफ़ का स्वागत करेगा.
ध्यान रहे कि मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ इलाज के लिए सन 2019 में ब्रिटेन चले गए थे और पनामा लीक्स में नाम आने पर अदालत की ओर से दी गई चार सप्ताह की अवधि में वह वापस नहीं आए जिसके बाद उनकी गिरफ़्तारी का वारंट जारी कर दिया गया था जिसमें उन्हें ज़मानत भी नहीं मिलनी थी.
और अब उन्होंने लगभग चार साल के स्व-निर्वासन के बाद पाकिस्तान वापस आने की घोषणा की है.
एक ऐसे समय में जब पिछले कई सालों के दौरान उनकी अनुपस्थिति में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी दल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) के नैरेटिव के कारण उनकी पार्टी की लोकप्रियता और वोट बैंक को धक्का पहुंचा है, उन्हें ख़ुद भी राजनीति से आजीवन अयोग्यता की चुनौती का भी सामना है. उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी इमरान ख़ान क़ैद में होने के बावजूद जनता में लोकप्रिय हैं.
स्पष्ट रहे कि गठबंधन सरकार के दौर में रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने अपने एक बयान में कहा था कि नवाज़ शरीफ़ की पाकिस्तान वापसी उस समय तक नहीं होगी जब तक रिस्क ज़ीरो न हो जाए.
ऐसे में उनकी वापसी की घोषणा और मंगलवार को ही वर्तमान कार्यवाहक व्यवस्था में उनके प्रिंसिपल सेक्रेटरी रहने वाले फ़व्वाद हसन फ़व्वाद के कार्यकारी सरकार में शामिल होने से कुछ सवाल खड़े हुए हैं.
नवाज़ शरीफ़ की वापसी के लिए क्या मैदान तैयार है?
क्या नवाज़ शरीफ़ की वापसी के लिए ग्राउंड तैयार किया जा रहा है और जब वह अपने भाई की सरकार के दौर में पाकिस्तान वापस नहीं आए तो अब कहां से क्या भरोसा दिया गया है?
इस सवाल के जवाब में वरिष्ठ पत्रकार व विश्लेषक मुजीबुर रहमान शामी का कहना है, "नवाज़ शरीफ़ के लिए माहौल काफी साज़गार हो चुका है. वर्तमान कार्यवाहक केंद्रीय व राज्य सरकार उनके विरुद्ध कोई प्रतिशोध की भावना नहीं रखती इसलिए अगर पाकिस्तान वापसी पर उन्हें जेल जाना पड़ा तो वह एक 'सॉफ़्ट' जेल होगी और संभव है उन्हें सशर्त ज़मानत भी मिल जाए.
मुजीबुर रहमान शामी ने टिप्पणी करते हुए कहा, "नवाज़ शरीफ़ के वापस आने से सन 2018 का दृश्य दोबारा दोहराया जा रहा है, बस इस बार पात्रों का अंतर है."
"आज उनके प्रतिद्वंद्वी इमरान ख़ान सलाख़ों के पीछे हैं और मुस्लिम लीग (नवाज़) पर सत्ता के दरवाज़े खुल रहे हैं जबकि उस समय इमरान ख़ान पर सत्ता के दरवाज़े खुले थे और उन्हें बेदख़ल किया गया था."
नवाज़ की देश वापसी पर भरोसा मिलने के सवाल पर उन्होंने राय देते हुए कहा, "गारंटी देना बड़ा मुश्किल है लेकिन उनकी वापसी के समय न्याय व्यवस्था में एक बड़ा परिवर्तन हो चुका होगा. वर्तमान चीफ़ जस्टिस उमर अता बंदियाल की जगह जस्टिस क़ाज़ी फ़ैज़ ईसा संभाल लेंगे. इसलिए उनके लिए इससे बेहतर माहौल हो नहीं सकता क्योंकि वह महसूस कर रहे हैं कि जो जज साहिबान उनके विरुद्ध वैर भाव रखते थे, उनके हाथ अब इतने खुले नहीं रहेंगे."
वरिष्ठ पत्रकार व विश्लेषक नसीम ज़ोहरा का कहना है, "नवाज़ शरीफ़ यह समझते हैं कि चूंकि इमरान ख़ान भी जेल में हैं, और उन्हें क़ानूनी मुक़दमों में भी राहत मिल चुकी है या मिल जाएगी तो इसलिए वह आ रहे हैं."
उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा, "नवाज़ शरीफ़ समझते हैं कि यह समय उनकी देश वापसी के लिए सही है और उन्हें देश के किसी वर्ग की ओर से विशेष विरोध का सामना नहीं करना पड़ेगा."
पत्रकार और विश्लेषक सलमान ग़नी का कहना है कि नवाज़ शरीफ़ की वापसी की घोषणा मुस्लिम लीग नवाज़ के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने की है जिससे यह साफ़ होता है कि नवाज़ शरीफ़ की देशवासी से संबंधित रिस्क ख़त्म हो चुका है."
क्या नवाज़ शरीफ़ की वापसी पार्टी में नई जान डाल सकती है?
पीडीएम (पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट) के कार्यकाल में आर्थिक अस्थिरता, महंगाई, पेट्रोल व बिजली की बढ़ती क़ीमतें और पीटीआई की जनता के स्तर पर, विशेष कर पंजाब में, लोकप्रियता के बावजूद क्या नवाज़ शरीफ़ अपने दल के लिए ताज़ा हवा का झोंका साबित होंगे?
इस पर मुजीबुर रहमान शामी ने राय देते हुए कहा कि नवाज़ शरीफ़ का यह बयान कि अगर उनकी सरकार को ख़त्म नहीं किया जाता तो आज पाकिस्तान जी 20 देश की लिस्ट में होता, असल में उनके चुनावी अभियान के नैरेटिव की शुरुआत है.
उनका कहना है कि नवाज़ शरीफ़ वापस आकर चुनावी अभियान में अपना एक नैरेटिव सामने लेकर आगे आएंगे. दूसरी बात यह है कि कार्यवाहक सरकार की ओर से डॉलर और चीनी से संबंधित क्रैकडाउन का भी मनोवैज्ञानिक लाभ नवाज़ शरीफ़ उठाएंगे.
नसीम ज़ोहरा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि वह पाकिस्तान की राजनीति में एक हैवीवेट की हैसियत रखते हैं.
उनका कहना है मुस्लिम लीग (नवाज़) में उन्हें और उनकी बेटी मरियम नवाज़ को क्राउड पुलर कहा जाता है. उनका कहना था कि उनके पाकिस्तान वापस आने से निश्चित रूप से उनके दल और देश की राजनीति पर असर पड़ेगा.
नवाज़ शरीफ़ को क्या क्या करना होगा
विश्लेषक सलमान ग़नी कहते हैं कि नवाज़ शरीफ़ ने सन 2018 में भी इलेक्शन से पहले अपनी बेटी के साथ पाकिस्तान जाकर जब रिस्क लिया था तो उसी ने पंजाब में पीएमएल (उस समय पाकिस्तान मुस्लिम लीग) को निर्णायक बहुमत दिलवाया था.
वह कहते हैं, "अब भी वही बातें हैं, उनकी वापसी निश्चित रूप से मुस्लिम लीग (नवाज़) को राजनीतिक तौर पर न केवल सक्रिय करेगी बल्कि लेवल प्लेइंग फ़ील्ड की ओर भी सकारात्मक प्रगति होगी."
उन्होंने राय देते हुए कहा कि अगले वर्ष चुनाव में सभी राजनीतिक दल भाग लेंगे. उनका कहना था कि देश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति में एक बड़ी लीडरशिप और उसके बड़े किरदार की ज़रूरत होगी.
क्या मुस्लिम लीग (नवाज़) के पास चुनाव के लिए नवाज़ शरीफ़ को वापस ले बिना कोई चारा नहीं था?
मुजीबुर रहमान शामी कहते हैं कि नवाज़ शरीफ़ वापस आकर अपने दल के कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा सकेंगे और उनमें जोश पैदा करने के साथ-साथ संगठन पर भी ध्यान देंगे.
वह कहते हैं, "इससे न केवल कार्यकर्ता सक्रिय होगा बल्कि वोटर भी यह समझते हुए कि पीटीआई की ओर से विरोध नहीं है, बाहर निकलेगा. इसलिए नवाज़ शरीफ़ यह महसूस करते हैं कि वह पूरे हौसले के साथ अपने कारवां को आगे बढ़ा सकेंगे."
कैसी है नवाज़ शरीफ़ की पार्टी की साख
सलमान ग़नी ने इस पर राय देते हुए कहा, "हालांकि यह सच्चाई है कि पीडीएम के ख़राब प्रदर्शन ने मुस्लिम लीग (नवाज़) की साख को नुक़सान पहुंचाया है और निश्चित रूप से आम चुनाव में जाने के लिए मुस्लिम लीग (नवाज़) नवाज़ शरीफ़ को अपने अंतिम विकल्प के तौर पर सामने लेकर आई है क्योंकि वह और उनकी बेटी क्राउड पुलर हैं और वह अपने एक नए नैरेटिव के साथ वोटर को विश्वास दिला सकेंगे."
उनका कहना था कि इसमें सबसे महत्वपूर्ण उनका स्वागत होगा जो मुस्लिम लीग (नवाज़) का चुनाव में प्रदर्शन की दिशा तय करेगा.
अगर मुस्लिम लीग (नवाज़) का यह राजनीतिक दांव भी सफल न हुआ तो फिर पार्टी के पास क्या बचेगा?
विश्लेषक मुजीबुर रहमान शामी ने इस सवाल के जवाब में कहा, "हर नेता की इच्छा होती है कि चुनाव स्वतंत्र और न्यायपूर्ण हो."
उनका कहना था कि इसमें सबसे महत्वपूर्ण यह है कि वह चुनावी अभियान में किस नैरेटिव से जाते हैं और "वह समझते हैं कि अगर उन्होंने परवेज़ मुशर्रफ़ के दौर का राजनीतिक धक्का बर्दाश्त कर लिया था तो वह अब भी अपने दल को निकाल सकते हैं. बहरहाल, फिर भी निर्णय जनता के हाथ में होगा कि वह उन्हें स्वीकार करती है या नहीं."
सलमान ग़नी का कहना है, "नेता कभी मरता नहीं, किसी डिक्टेटर के उलट उसके दस जीवन होते हैं जो वर्दी जाने से ख़त्म नहीं होता."
वह राय देते हैं कि नवाज़ शरीफ़ की देश वापसी से एक नए राजनीतिक दौर की शुरुआत होगी.
"इसी नवाज़ शरीफ़ को देश के राजनीतिक इतिहास में सुरक्षा के लिए ख़तरा घोषित करते हुए निर्वासित किया गया और फिर किसी ने लंदन जाकर मुलाकातें कीं, यह सब जगज़ाहिर है."
उनका कहना था, "नवाज़ शरीफ़ राजनीति की बुनियाद हमेशा आम आदमी को राहत देने पर रखते हैं और उनकी देश वापसी में मुस्लिम लीग (नवाज़) के साथ-साथ पाकिस्तान की राजनीति का रहस्य भी छिपा हुआ है."
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