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प्रवेश शुक्ला के आदिवासी युवक पर पेशाब करने के मामले में अब तक क्या-क्या हुआ है
शुरैह नियाज़ी
भोपाल से, बीबीसी हिंदी के लिए
मध्य प्रदेश के सीधी ज़िले में आदिवासी युवक पर पेशाब करने का जो वीडियो वायरल हुआ था, उसने सत्तारुढ़ बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं.
इस वीडियो को लेकर राज्य में राजनीति तेज़ हो गई है.
आदिवासियों के वोटों के ज़रिए एक बार फिर सत्ता में आने की कोशिश कर रही बीजेपी को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
क्योंकि आरोप ये लग रहे हैं कि आदिवासी युवक पर पेशाब करने वाला व्यक्ति बीजेपी विधायक से जुड़ा है.
हालाँकि बीजेपी विधायक ने इससे इनकार किया है.
फिर भी बीजेपी पर विपक्षी दलों ने हमले तेज़ कर दिए हैं. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मामले में सख़्त से सख़्त कारवाई की बात कही है.
इस बीच प्रशासन ने अभियुक्त के घर पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई की है और अवैध अतिक्रमण वाले हिस्से को ढहा दिया है.
क्या है पूरा मामला
मामला मंगलवार को उस समय सामने आया, जब सीधी ज़िले में प्रवेश शुक्ला नाम के व्यक्ति का शराब के नशे में एक आदिवासी युवक पर पेशाब करते हुए वीडियो वायरल हुआ. आरोप है कि प्रवेश शुक्ला बीजेपी का कार्यकर्ता है.
देखते ही देखते ये वीडियो देशभर में वायरल हो गया. इसे कुछ दिन पुराना वीडियो बताया जा रहा है.
यह वीडियो सीधी के कुबरी बाज़ार का है. प्रवेश शुक्ला भी कुबरी में ही रहता है.
वही पीड़ित ने पुलिस को बताया है कि उसके साथ इस तरह की कोई घटना ही नही हुई है. पुलिस का कहना है कि वो डरा हुआ है.
पुलिस की पूछताछ मे पीड़ित ने कहा है कि वीडियो उसका नहीं है और वो इस मामले में कोई रिपोर्ट दर्ज नही करना चाहता है.
पुलिस का दावा है कि वह पूरी तरह से स्वस्थ है. पहले उसे मानसिक रूप से विक्षिप्त बताया जा रहा था.
वही पीड़ित की पत्नी ने सीधी में पत्रकारों से बात करते हुए कहा है कि उन्हें इस मामले के बारे में कुछ भी नही मालूम है. लेकिन वीडियो में दिख रहा शख़्स उनका पति है.
उनका कहना है, "अगर किसी ने ग़लती की है, तो उसे सज़ा मिलनी चाहिए."
ये भी आरोप लग रहे हैं कि प्रवेश शुक्ला बीजेपी के विधायक केदारनाथ शुक्ला के प्रतिनिधि भी रहे है.
हालाँकि विधायक केदारनाथ शुक्ला ने इससे साफ़ इनकार कर दिया.
उन्होंने बीबीसी से कहा, “जनप्रतिनिधि होने की वजह से वे उसे जानते हैं. लेकिन यह व्यक्ति न तो उनका प्रतिनिधि रहा है और न ही उसका पार्टी से कोई लेना देना है.”
हालाँकि उन्होंने यह बताया कि वो सीधी से दूर कुबरी गाँव का रहने वाला है.
लेकिन अपने बचाव में दिए उनके बयान पर कांग्रेस नेताओं ने फ़ौरन जवाब दिया और उसके उन पोस्टर और पार्टी की ओर से निकाले गए उस लेटर को शेयर किया, जिसमें उसकी नियुक्ति भाजपा मंडल में उपाध्यक्ष के तौर पर की गई थी.
बीजेपी विधायक का विवादों से नाता
वैसे बीजेपी के चार बार के विधायक केदारनाथ शुक्ला का विवादों से नाता नया नही है.
पिछले साल भी वो उस समय चर्चा में आ गए थे, जब सीधी कोतवाली की एक तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें आठ लोग अर्धनग्न दिख रहे थे.
इनमें से दो स्थानीय पत्रकार और बाक़ी लोग नाट्यकर्मी थे.
आरोप था कि ये लोग एक स्थानीय रंगकर्मी की गिरफ़्तारी का विरोध कर रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने इन सभी को पकड़ कर उनके कपड़े उतरवाए और थाने में इनकी परेड निकाली.
उस वक़्त गिरफ्तार हुए पत्रकार कनिष्क तिवारी ने आरोप लगाया था कि वो स्थानीय विधायक केदारनाथ शुक्ला के ख़िलाफ़ ख़बरें चलाते रहे हैं और उन्हीं के इशारे पर पुलिस ने नाट्यकर्मियों के साथ-साथ उन्हें भी हिरासत में लिया और उनके साथ मारपीट की.
उनका आरोप था कि इसके बाद उनके कपड़े उतरवाकर तस्वीर ख़ीच कर वायरल कर दी.
बीजेपी के लिए झटका
वहीं पत्रकार और राजनैतिक विश्लेषक डॉ. राकेश पाठक का मानना है कि चुनाव के समय यह घटना बीजेपी के लिए निश्चत तौर पर एक सदमे से कम नहीं है.
उन्होंने बीबीसी से कहा, “साल के किसी भी समय अगर यह होता, तो कोई फ़र्क नही पड़ता. लेकिन ये ऐसे समय में हुआ, जब चुनाव सर पर है और ऐसे व्यक्ति के साथ जो आदिवासी है, तो इसका असर तो पूरे सूबे में पड़ेगा.”
उन्होंने कहा कि घटना भी आदिवासी के साथ होना और अभियुक्त का बीजेपी से जुड़े होने का आरोप पार्टी के चिंता का विषय है.
जागृत दलित आदिवासी संगठन की माधुरी बहन का कहना है कि ये घटना बताती है कि सामंतवाद अब भी ज़िंदा है और दलितों का शोषण हो रहा है.
उनका दावा है कि इस तरह के सैकड़ों मामले हो रहे है और ज़्यादातर ऐसे होते हैं, जो डर के मारे लोगों के सामने भी नही आ पाते हैं.
माधुरी बहन ने बीबीसी से कहा, “हमें यह भी देखना होगा कि शिवराज सरकार इस मामले को किस तरह से डील करती है. क्या पीड़ित को इंसाफ़ मिल पाएगा या नहीं.”
वही आदिवासी मज़दूर पर पेशाब करने के मामले में अभियुक्त प्रवेश शुक्ला को पुलिस ने देर रात दो बजे गिरफ़्तार किया.
इससे पहले उसके ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया गया था. उसके ख़िलाफ़ एससी-एसटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया है.
साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून (रासुका) भी लगाई गई है.
क्या कहता है पीड़ित का परिवार
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनुजा लता पाटले ने बीबीसी को बताया, “सोशल मीडिया के वीडियो के आधार पर हमने मामला दर्ज किया था और उसके बाद टीम बना कर अभियुक्त को रात में दो बजे गिरफ़्तार किया गया है.”
उन्होंने आगे कहा कि यह गिरफ्तारी उनके गाँव के क़रीब ही की गई है.
जब पुलिस अधिकारियों से बात की गई कि इस घटना की वजह क्या थी, तो उन्होंने यही कहा कि इस मामले में अब आगे पूछताछ की जाएगी. उसके बाद ही कुछ कह पाएँगे.
लेकिन इस मामले में ये बात सामने आ रही है कि मज़दूरी को लेकर विवाद के बाद ये घटना हुई.
बीबीसी ने पीड़ित से भी बात करने की कोशिश की. लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.
बताया जा रहा है कि वे कहाँ है, इसकी जानकारी नहीं मिल पा रही है.
पीड़ित का हलफ़नामा
ये बात भी सामने आई है कि प्रवेश शुक्ला ने पीड़ित से एक हलफ़नामा लिखवा लिया था.
स्टैम्प पेपर पर पीड़ित का यह हलफ़नामा सामने आया है.
इसमें कहा गया है कि वायरल हो रहा वीडियो फ़र्ज़ी और ग़लत है.
3 जुलाई को बने इस हलफ़नामे में लिखा है कि उस पर दूसरे लोग प्रवेश शुक्ला के ख़िलाफ़ पुलिस में केस दर्ज कराने का दबाव डाल रहे थे.
पीड़ित ने हलफ़नामे में कहा है कि आदेश शुक्ला नाम के व्यक्ति ने प्रवेश शुक्ला के ख़िलाफ़ एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज करने का दबाव बनाया था.
शपथ पत्र में लिखा है कि इसके बदले में उसे ख़ूब सारे पैसे देने को कहा गया था.
पीड़ित ने ये भी लिखा है कि प्रवेश शुक्ला एक राजनीतिक और प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं और उन्हें बदनाम करने की साज़िश के तहत ये वीडियो वायरल किया गया है, जो फ़र्ज़ी और ग़लत है.
अभियुक्त के परिजन का आरोप
दूसरी तरफ़ अभियुक्त के पिता रमाकांत शुक्ला ने आरोप लगाया है कि उनका बेटा निर्दोष है और उसे राजनीति कारणों से फँसाया गया है. वो इस तरह का काम नही कर सकता है.
रमाकांत शुक्ला ने बीबीसी को बताया, “वो विधायक प्रतिनिधि पिछले चार-पाँच साल से है और आज भी है. यह जो हुआ है, इसके पीछे राजनीति ही कारण है. कुछ लोग उसके ख़िलाफ़ काम कर रहे थे और उन्होंने ही यह सब बनाया है.”
वही उन्होंने कुछ लोगों के नाम लिए और आरोप लगाया कि वे फ़र्जी वीडियो बनाते हैं और इसे उनकी ही कारस्तानी बताया.
दूसरी ओर पत्रकारों से बात करते हुए गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा, “क़ानून अपना काम कर रहा है. व्यक्ति गिरफ़्तार हो गया है कृत्य बहुत घृणित था. भाजपा की सरकार है. यहाँ क़ानून का राज है. मामले की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दे दिए थे.”
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस पूरे मामले की निंदा करते हुए एक बयान में कहा कि इस घटना ने पूरे मध्य प्रदेश को शर्मसार कर दिया है.
उन्होंने कहा, “मैं मुख्यमंत्री से माँग करता हूँ कि दोषी व्यक्ति को सख़्त से सख़्त सज़ा दी जाए और मध्य प्रदेश में आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार को समाप्त किया जाए.”
आदिवासियों पर अत्याचार के मामले लगातार मध्य प्रदेश में आते रहते है. लेकिन इस शर्मनाक घटना ने लोगों को हिला कर रख दिया है.
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी के पिछले साल जारी हुए आँकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश में आदिवासी और दलितों के ख़िलाफ़ अत्याचार के मामलों में बढ़ोतरी हुई है.
2021 में प्रदेश में एससी/एसटी एक्ट के तहत 2627 मामले दर्ज हुए थे.
ये 2020 की तुलना में क़रीब 9.38 फ़ीसदी अधिक है. वही दलितों पर अत्याचार के 7214 मामले दर्ज किए गए थे.
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