बांग्लादेशः विरोध प्रदर्शनों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा फ़ैसला, सरकार ने क्या कहा

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बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण के विरोध में जारी छात्रों के आंदोलन के बीच सुप्रीम कोर्ट ने अधिकतर सरकारी नौकरियों में आरक्षण समाप्त करने का फ़ैसला दिया है.
रविवार को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि देश में 93 प्रतिशत सरकारी नौकरियों में भर्तियां योग्यता के आधार पर की जाएं. साथ ही कोर्ट ने कहा कि 1971 स्वतंत्रता आंदलोन में शामिल रहे सेनानियों के परिजनों को सिर्फ़ 5 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए.
बाक़ी दो प्रतिशत नौकरियों को विकलांगों, ट्रांसजेंडरों और नस्लीय अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित रखा गया है.
जुलाई की शुरुआत से ही बांग्लादेश में हज़ारों छात्र देश के अलग-अलग हिस्सों कोटा व्यवस्था के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं.
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि देश में लागू मौजूदा कोटा व्यवस्था सत्ताधारी आवामी लीग के क़रीबी लोगों को फ़ायदा पहुंचाती है.
अब तक बांग्लादेश में एक तिहाई सरकारी नौकरियों स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों के लिए आरक्षित थीं.

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प्रदर्शन और हिंसा

बांग्लादेश में बीते कुछ दिनों से जारी विरोध प्रदर्शनों में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई है. यहां अब तक कम से कम 115 लोग मारे गए हैं. हालांकि स्थानीय मीडिया के मुताबिक़ मरने वालों की तादाद इससे कहीं अधिक हो सकती है.
शुक्रवार को ही कम से कम 50 लोगों की मौत हुई है.
बांग्लादेश सरकार ने राजधानी ढाका में शनिवार को कर्फ्यू लगा दिया था. रविवार को भी राजधानी ढाका की अधिकतर सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा.
हालांकि, कुछ इलाक़ों से मामूली झड़पों की रिपोर्टें भी आ रही हैं.
बांग्लादेश की सरकार ने साल 2018 में इस विवादित कोटा व्यवस्था को समाप्त कर दिया था लेकिन पिछले महीने हाई कोर्ट ने इसे फिर से बहाल कर दिया, जिसके बाद से ये प्रदर्शन शुरू हुए हैं.
सरकार ने किया स्वागत

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बांग्लादेश की सरकार ने कोटा व्यवस्था पर अदालत के फ़ैसले का स्वागत किया है.
फ़ैसले के बाद बांग्लादेश के क़ानून मंत्री अनीसुल हक़ ने बीबीसी न्यूज़आवर कार्यक्रम में कहा कि सरकार अदालत के फ़ैसले को लागू करेगी.
उन्होंने कहा, "हम इस फ़ैसले का स्वागत करते हैं, हमें लगता है कि कोर्ट का ये फ़ैसला बहुत ही समझदारी भरा फ़ैसला है. जल्द से जल्द सरकार इसे लेकर एक अधिसूचना जारी करेगी."
उन्होंने कहा कि सोमवार को छुट्टी है और अगर अधिसूचना बहुत जल्द जारी करना हो तो हम मंगलवार तक इसे जारी कर देंगे. उन्होंने कहा, "सरकार को सुप्रीम कोर्ट की अपीलीय डिविज़न के फ़ैसले और आदेश के आधार पर सर्कुलर जारी करना होगा."
उन्होंने सत्ताधारी पार्टी से जुड़े छात्र संगठन के प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसा करने के आरोपों खारिज किया.
उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शनों में विपक्षी ताकतें भी शामिल हो गई थीं जिन्होंने हिंसा भड़काने के काम किया और 'बांग्लादेश के विकास के प्रतीकों को नुकसान पहुंचाया.'
अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि अगर सरकार चाहे तो ज़रूरी होने पर इस नई कोटा व्यवस्था में सुधार कर सकती है.
क़ानून मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में ऐसा इसलिए कहा है ताक़ि ये फ़ैसला भविष्य में सरकार के किसी भी निर्णय में बाधा ना डाले.
छात्रों के वकील ने कहा- अदालत ने समाधान दिया

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अदालत में छात्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता शाह मंजरुल हक़ ने अदालत के फ़ैसले के बाद बताया, "सुप्रीम कोर्ट की अपील बेंच ने संविधान के अनुच्छेद 104 के अनुसार, इस कोटा व्यवस्था के लिए अंतिम समाधान दे दिया है."
उन्होंने कहा, "आम लोगों के लिए 93 प्रतिशत कोटा रहेगा, पांच प्रतिशत स्वतंत्रता सेनानियों और उनके परिजनों के लिए और एक प्रतिशत नस्लीय अल्पसंख्यकों और बाक़ी एक प्रतिशत विकलागों और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए."
सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने भी हाई कोर्ट के फ़ैसले को विरोधाभासी बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की थी.
हालांकि समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ छात्रों के एक समूह ने कहा है कि मांगों के पूरा होने का आदेश जारी न होने तक प्रदर्शन जारी रहेंगे.
स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिसक्रिमिनेशन संगठन के एक प्रवक्ता ने एएफ़पी से कहा, "हम सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन हम तब तक प्रदर्शन वापिस नहीं लेंगे जब तक सरकार हमारी मांगों को पूरा करते हुए आदेश ना पारित करे."

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समाचार एजेंसी रायटर्स के मुताबिक़ सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के समय अदालत के बाहर सड़कों पर सन्नाटा पसरा था. राजधानी ढाका के अधिकतर हिस्सों में सेना को तैनात किया गया है.
सुप्रीम कोर्ट के गेट के बाहर भी सेना के टैंक खड़े थे. अदालत के फ़ैसले से पहले प्रशासन ने कर्फ़्यू को आगे बढ़ा दिया था. बांग्लादेश सरकार ने प्रदर्शनों के मद्देनज़र रविवार की सार्वजनिक छुट्टी के साथ सोमवार को भी अवकाश घोषित कर दिया है.
सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को छात्रों से बात भी की थी. हालांकि इस बीच छात्र नेता नाहिद इस्लाम के परिजनों ने उन्हें नज़रबंद किए जाने के आरोप लगाये थे. नाहिद सरकार के मंत्रियों के साथ छात्र नेताओं की बैठक में शामिल नहीं हुए थे.
नाहिद के परिजनों ने रविवार को बताया है कि नाहिद आंखों पर पट्टी बांधकर छोड़ दिया गया है.
परिजनों ने नाहिद को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किए जाने के आरोप भी लगाये हैं. नाहिद के परिजनों के मुताबिक़ उन्हें ढाका के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
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