लेबनान में इसराइली हमलों के कारण बेघर हुए लोगों की आपबीती: 'पहले एसएमएस आए और फिर हुई बमबारी'

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- Author, इथर शेल्बी
- पदनाम, बीबीसी अरबी सेवा
लेबनान के लिए सोमवार का दिन घातक साबित हुआ. वहां इसराइल ने एयर स्ट्राइक की, जिसमें 50 बच्चों समेत 550 लोगों की मौत हो गई.
लेबनान में 1990 में गृहयुद्ध ख़त्म हुआ था. तब से लेकर आज तक की यह सबसे बड़ी घातक घटना है.
कई लोगों को सीमा पार इस संकट का पहला संकेत एसएमएस, फोन कॉल्स और रेडियो ब्रॉडकास्ट के ज़रिए मिला.
इसराइल के अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने चेतावनी भेज दी थी, ताकि लेबनान के नागरिक इलाक़े को खाली कर सके. मगर, लेबनान ने इसे ‘मनोवैज्ञानिक युद्ध’ के तौर पर प्रस्तुत किया है.

इसराइल ने लेबनान के लोगों को इलाके खाली करने का पहला अधिकृत संदेश सोमवार को शुरुआती घंटों में भेजा था.
नागरिकों को उनके फ़ोन पर एसएमएस में यह संदेश मिला था. लोगों से अपील की गई थी कि वो गाँव छोड़ दें और वो इलाका भी, जिसे लेकर माना जाता है कि वहां हिज़्बुल्लाह उसके हथियार इकट्ठा करके रखता है.
बेत लिफ़ इलाक़ा इसराइल के साथ जुड़ी सरहद से केवल 4 किलोमीटर दूर है. वहां रहने वाली नेमत ने बीबीसी अरबी सेवा को बताया कि उनके भाई को एक संदेश मिला था.
49 वर्षीय नेमत ने कहा, ‘‘हम अपना सामान बांधने और उस इलाक़े को छोड़ने के लिए भागे.’’
नेमत अपने भाई-बहन के साथ रहती हैं.
उन्होंने कहा, ‘‘हम पहले भी युद्ध देख चुके हैं, लेकिन पहले ऐसा कुछ नहीं देखा है. हमें इसका गहरा दुख है. हम मानसिक रूप से परेशान हैं.’’
ये लोग फिलहाल एक स्कूल में रह रहे हैं, जो अस्थायी तौर पर विस्थापितों के लिए एक आश्रय बना हुआ है.

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इसके अलावा, न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स को लेबनान की टेलीकॉम कंपनी ओगेरो के प्रमुख इमाद क्रिदिह ने बताया कि ऐसा माना जा रहा है कि इसराइल की सेना ने लेबनान के लोगों को 80 हज़ार से ज़्यादा फोन कॉल के ज़रिए इलाक़ा खाली करने को कहा.
इमाद ने इन फोन कॉल को लेकर कहा, “यह मनोवैज्ञानिक जंग की तरह है, जो तबाही और अव्यवस्था को बढ़ाते हैं.”
लेबनान के सूचना मंत्रालय को एक कॉल आया, इसमें मुख्यालय में मौजूद लोगों को जगह खाली करने को कहा गया.
सूचना मंत्री ज़ियाद मेकेरी ने बीबीसी की अरबी सेवा से कहा कि वो 'जगह खाली करने के आदेश पर कोई प्रतिक्रिया नहीं' देंगे.
उन्होंने बताया कि वो मानते हैं, “इसराइल मुकाबले के दौरान मनोवैज्ञानिक युद्ध के हर तरीके का प्रयोग करता है.’’
इस बीच, लेबनान में सोमवार को हुए हवाई हमलों के बाद पैदा हुआ तनाव मंगलवार को फ़िर ताज़ा हो गया, जब इसराइल के जेट विमान लेबनान की राजधानी बेरुत के ऊपर उड़ते दिखाई दिए.
इसराइली सेना की योजना हिज़्बुल्लाह के गढ़ में जोरदार बमबारी करने की थी. चेतावनी के तौर पर जो संदेश और फ़ोन कॉल्स इसराइली सेना ने भेजे थे, वो एक संयोग था.
इस बारे में इसराइल ने पहले ही बता दिया था कि ये लेबनान में व्यापक स्ट्राइक का नया दौर था, जिसमें बेरुत भी शामिल था.
इसराइल मानता है कि ईरान समर्थित इस समूह (हिज़्बुल्लाह) की रणनीति है कि वो अपने हथियार और मिसाइल को लेबनान के नागरिकों के बुनियादी ढांचे में छिपा कर रखता है.
इसराइली सेना के प्रवक्ता अविचय एड्राइ ने एक्स पर लिखा, ‘‘लोगों से अपील कर रहे हैं कि घरों को खाली कर दें, जहां हिज़्बुल्लाह ने हथियार छिपा कर रखे हैं. हिज़्बुल्लाह आप लोगों को कुर्बान कर रहा है.’’
वहीं, इसराइल ने कहा कि उसने चेतावनी जारी की थी, ताकि लोग सुरक्षित इलाक़े में जा सके. कुछ लोगों ने यह भी कहा कि वो परेशान हो गये थे कि उनको कहां जाना चाहिए.
ज़ैनब तीन बच्चों की मां है. वह नाबातेह इलाके के एक गाँव में उसकी बहन के साथ रहती है. इस गाँव की सीमा इसराइल के साथ जुड़ती है. उन दोनों को फ़ोन पर यह संदेश मिला था.
उसका मानना है कि उसकी बहन के घर के पास हिज़्बुल्लाह ने किसी तरह के हथियार नहीं छिपाए थे, मगर उन लोगों ने वो इलाक़ा खाली कर दिया था.
‘‘हमने तेज़ी से अपना सामान बांधा और मेरे घर चले गए, जो मेरी बहन अया के घर से ज़्यादा दूर नहीं है.’’
उसने कहा, ‘‘हमने सोचा कि वही सही फ़ैसला था, क्योंकि मेरी बहन का घर सरहद के नज़दीक है.’’

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चेतावनी वाले एसएमएस उत्तरी इसराइल में रहने वाले लोगों को भी मिले थे.
19 सितंबर को, इसराइल के लोगों को 50 लाख टैक्स्ट मैसेज मिले थे. इसराइल की साइबर अथॉरिटीज़ का कहना है कि यह संदेश ईरान और हिज़्बुल्लाह ने भेजे थे.
इसराइल की सरकार ने इसे जनता के बीच तनाव बढ़ाने का एक ‘सस्ता’ और ‘मामूली’ प्रयास बताया. उन्होंने कहा कि दुश्मन ने इसके ज़रिए हमारे नागरिकों के दिमाग से खेलने की कोशिश की.
इस संदेश का कुछ हिस्सा बेतरतीब ढंग से हिब्रू में लिखा था. इसकी टोन धमकी भरी थी. इसमें वेबलिंक्स थी, जिसे इसराइल के अधिकारियों ने संदिग्ध बताया.
इसराइल के न्यूज़ आउटलेट हारेट्ज़ की रिपोर्ट के मुताबिक एक संदेश में लिखा था, ‘‘अपने प्रियजनों को अलविदा कह दीजिए, मगर घबराइए मत, अगले कुछ घंटों में आप उनको नरक में गले लगा पाएंगे.’’
संदेश भेजने वाले का नाम सेहनासराला दिखा था. हो सकता है कि संदेश भेजने वाले ने इसका इस्तेमाल हिज़बुल्लाह के नेता सय्यद हसन नसरल्लाह के संदर्भ के तौर पर किया हो.
रेडियो संदेश
इसराइली सेना ने लेबनान की रेडियो फ्रिक्वेंसी पर भी बिना अनुमति के कब्ज़ा कर लिया था. कई रेडियो स्टेशन पर रिकॉर्डेड संदेश प्रसारित किए गए थे. इसमें लोगों से उन इलाकों को खाली करने को कहा गया था, जहां हिज़्बुल्लाह ऑपरेशन चलाता है.
परिस्थितियाँ उस समय और भी ज़्यादा ख़राब हो गई, जब इसराइल-लेबनान सीमा पर विस्थापन संकट बढ़ गया. वहां हालिया घटनाक्रम से पहले दोनों तरफ डेढ़ लाख से ज़्यादा लोग जमा थे, जो उनके घर से भाग कर आए थे.
लेबनान के दक्षिण में सड़कें जाम हो चुकी थी, तो लोगों ने उत्तर से जाने की कोशिश की.

लेबनान में एयरस्ट्राइक से जुड़ी चेतावनियों को सुनने के बाद कई अभिभावक अपने बच्चों को लेने के लिए स्कूल की ओर दौड़े.
जबकि शिक्षा मंत्रालय ने ‘‘सुरक्षा और सैन्य परिस्थितियों’’ के मद्देनज़र कई स्कूलों और यूनिवर्सिटीज़ को बंद करने का फ़ैसला ले लिया था.
जिस तरह हिज़्बुल्लाह ने हाल ही के दिनों में रॉकेट हमले बढ़ा दिए हैं, तो इसराइल में सुरक्षा के लिए रक्षा के तौर-तरीकों में इजाफ़ा हुआ है.
इसराइल के स्वास्थ्य मंत्री ने रविवार को उत्तरी इसराइल के अस्पतालों को आदेश जारी किया कि मरीज़ों को सुरक्षित इलाकों में भेज दें. स्कूल बंद कर दिए गए हैं. लोगों के लिए घर से बाहर बड़ी संख्या में मिलने पर पाबंदी लगा दी गई है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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