झारखंड में जेएमम विधायक सरफ़राज़ अहमद के इस्तीफ़े से हेमंत सोरेन के भविष्य पर अटकलें तेज़

    • Author, रवि प्रकाश
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए, रांची से

झारखंड की राजधानी रांची में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है. लेकिन यहाँ की सियासी सरगर्मी लगातार बढ़ रही है.

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से भेजे गए सातवें समन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वैकल्पिक उपायों पर मंथन कर रहे हैं. चर्चा है कि ज़रूरत पड़ने पर वे अपनी पत्नी कल्पना सोरेन को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंप सकते हैं.

उनकी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के बुज़ुर्ग विधायक डॉक्टर सरफ़राज़ अहमद के अचानक इस्तीफ़ा देने के बाद यह चर्चा और तेज़ हो गई है. साल 2019 के विधानसभा चुनाव में वे गिरिडीह ज़िले की गांडेय सीट से विधायक चुने गए थे.

उन्होंने साल 2023 के आख़िरी दिनों में अपना इस्तीफ़ा विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा.

31 दिसंबर को स्पीकर रवींद्र नाथ महतो ने उनका इस्तीफ़ा स्वीकार भी कर लिया और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी.

यह ख़बर तब सार्वजनिक हुई, जब साल 2024 की पहली तारीख़ को विधानसभा सचिवालय ने उनका इस्तीफ़ा स्वीकार होने की अधिसूचना जारी की.

डॉक्टर सरफ़राज़ अहमद ने क्यों दिया इस्तीफ़ा?

डॉक्टर सरफ़राज़ अहमद ने बीबीसी से अपने इस्तीफ़े की पुष्टि करते हुए अपने इस फ़ैसले के लिए व्यक्तिगत वजहों को ज़िम्मेदार ठहराया.

उन्होंने बीबीसी से कहा, “मैंने स्वयं यह निर्णय लिया है. इसके लिए मुझे किसी ने नहीं कहा. मुझे लगा कि मेरी पार्टी जेएमएम और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर संकट आ सकता है, तो मैंने इस्तीफ़ा देना ज़्यादा मुनासिब समझा. मैं पार्टी का सिपाही हूँ और मेरा निर्णय जाहिराना तौर पर पार्टी के हित में है.”

यह पूछे जाने पर कि क्या आपने यह सीट कल्पना सोरेन के लिए खाली की है, डॉक्टर सरफराज अहमद ने कहा कि मैंने पार्टी हित में अपना इस्तीफ़ा दिया है. फ़िलहाल इससे अधिक मैं कुछ और नहीं कह सकता.

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है.

पार्टी के एक विधायक ने बीबीसी से कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन झारखंड के विकास के लिए काम कर रहे हैं और ईडी केंद्र सरकार के इशारे पर उन्हें बेवजह तंग कर रही है. राज्य की जनता यह देख-समझ रही है. इसका जवाब भी देगी.

उन्होंने कहा, “हेमंत सोरेन ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े आदमी को आवाज़ दी है. वे उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने का काम कर रहे हैं. उनके नेतृत्व में जेएमएम मज़बूत हुआ है. इसलिए पार्टी उनके हर निर्णय के साथ खड़ी होगी. इसमें कोई इफ-बट नहीं है. हमारे गठबंधन को विधानसभा में बहुमत है और अपना निर्णय लेने के लिए हम स्वतंत्र हैं.”

बीजेपी का क्या कहना है?

झारखंड की मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस पूरे प्रकरण पर चुटकी ली है. पार्टी के कई नेताओं ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा है कि डॉक्टर सरफ़राज़ अहमद ने अपना इस्तीफ़ा कल्पना सोरेन के चुनाव लड़ने के लिए दिया है.

बीजेपी के झारखंड प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने बीबीसी से कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ईडी के समन से डरे हुए हैं. इसलिए वे सारे तिकड़म कर रहे हैं.

प्रतुल शाहदेव ने बीबीसी से कहा, “सरफ़राज़ अहमद का इस्तीफ़ा साबित करता है कि जेएमएम जैसी वंशवादी पार्टियाँ परिवार के अलावा कुछ और नहीं सोच सकतीं. यही कारण है ईडी की कार्रवाई और अपनी संभावित गिरफ़्तारी से डरे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विकल्प के तौर पर अपनी पत्नी कल्पना सोरेन का नाम आगे कर रहे हैं. वे चाहते तो जेएमएम के किसी वरिष्ठ नेता को अपना उत्तराधिकारी बना सकते थे लेकिन वे ऐसा नहीं करेंगे.”

बीजेपी के सांसद निशिकांत दुबे ने ‘एक्स’ पर अपने पोस्ट में दावा किया कि कल्पना सोरेन झारखंड की अगली मुख्यमंत्री बनेंगी.

उन्होंने लिखा, “झारखंड के गांडेय विधायक सरफ़राज़ अहमद ने विधानसभा से इस्तीफ़ा दिया. इस्तीफ़ा स्वीकार हुआ. हेमंत सोरेन जी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देंगे. झारखंड की अगली मुख्यमंत्री उनकी पत्नी कल्पना सोरेन जी होंगी. नया साल सोरेन परिवार के लिए कष्टदायक.”

हालाँकि, उन्होंने अपने दूसरे ‘एक्स’ पोस्ट में मुंबई हाई कोर्ट के एक फ़ैसले का हवाला देते हुए यह भी लिखा कि गांडेय विधानसभा सीट के लिए अब चुनाव नहीं हो सकता.

क्योंकि, झारखंड की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल एक साल से भी कम है. उन्होंने राज्यपाल को इस मामले में क़ानूनी सलाह लेने का सुझाव भी दिया है.

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

झारखंड कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने मीडिया से कहा कि हमारी पार्टी इंडिया ब्लॉक के सभी दलों के साथ खड़ी है और रहेगी. हम जेएमएम के सहयोगी हैं और बने रहेंगे.

उन्होंने मीडिया से कहा, “सरफ़राज़ साहब अनुभवी नेता हैं. उन्होंने जेएमएम से इस्तीफ़ा नहीं दिया है. सिर्फ़ विधायकी छोड़ी है. उन्होंने यह निर्णय जेएमएम और राज्य के हित में ही लिया होगा. हम सब जानते हैं कि ईडी जैसी एजेंसियां पूर्वाग्रह से काम कर रही हैं और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को परेशान किया जा रहा है. बीजेपी बहुमत को लूटने के काम में लगी है लेकिन हम ऐसा होने नहीं देंगे.”

क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक?

झारखंड की सियासत पर नजर रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र सोरेन मानते हैं कि डॉक्टर सरफ़राज़ अहमद का इस्तीफ़ा अनायास नहीं है. यह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सियासी चाल है, जिसमें विपक्ष फंसकर रह जाएगा.

सुरेंद्र सोरेन ने बीबीसी से कहा, “हेमंत सोरेन न केवल मुख्यमंत्री हैं बल्कि वे अपनी पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं. उनकी पकड़ जेएमएम पर भी काफ़ी मज़बूत है. ऐसे में अगर आने वाले समय में उनकी पत्नी कल्पना सोरेन सरफ़राज़ अहमद द्वारा ख़ाली की गई सीट से विधानसभा का उपचुनाव लड़ जाएं, तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए.”

वो कहते हैं, “अगर हेमंत सोरेन के लिए विपरीत परिस्थितियाँ पैदा हुईं, तो वे कल्पना सोरेन को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंप सकते हैं और उन्हें शिबू सोरेन का भी आशीर्वाद मिल जाएगा.”

हालाँकि, वरिष्ठ पत्रकार मधुकर नहीं मानते कि डॉक्टर सरफ़राज़ अहमद ने कल्पना सोरेन को चुनाव लड़ाने के लिए अपना इस्तीफ़ा दिया है.

उन्होंने बीबीसी से कहा कि सरफ़राज़ अहमद अब वैसी हैसियत में नहीं हैं कि वे जेएमएम से बारगेन कर सकें. संभव है कि उन्होंने अपने लिए किसी और राजनीतिक विकल्प की तलाश कर ली होगी. इसलिए अपना इस्तीफ़ा दिया हो. वे पहले भी कांग्रेस और आरजेडी में रह चुके हैं.

क्यों बदली राजनीतिक परिस्थितियाँ?

ईडी ने 29 दिसंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक चिट्ठी भेजकर उनसे पूछताछ की मंशा जाहिर की थी. ईडी ने लिखा था कि ज़मीन के दस्तावेज़ों में हेराफेरी से संबंधित एक मामले की जाँच के लिए मुख्यमंत्री से पूछताछ ज़रूरी है.

इसलिए वे (हेमंत सोरेन) दो दिनों के अंदर इसके लिए उपयुक्त जगह और तारीख़ की लिखित सूचना दें. मुख्यमंत्री ने इस समयावधि में ईडी के पत्र का जवाब नहीं दिया.

अब संभावना है कि ईडी उनसे पूछताछ के लिए और कड़े विकल्प आजमाए, क्योंकि ईडी ने अपने पत्र में इसे आखिरी समन के तौर पर लेने की बात कही थी.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को इससे पहले भी छह समन किए गए थे लेकिन वे किसी भी समन पर पूछताछ के लिए उपलब्ध नहीं हुए. उन्होंने ईडी पर पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर काम करने का आरोप भी लगाया.

वे इसके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट भी गए थे. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाई कोर्ट भेज दिया था. झारखंड हाई कोर्ट ने उनकी याचिका पर यह कहते हुए सुनवाई नहीं की थी कि अब समन की तारीख़ बीत चुकी है. ईडी ने इसके बाद भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को समन करना जारी रखा.

ईडी उन्हें सात बार समन भेज चुकी है.

क्या कह रहे हैं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

एक जनवरी को जब रांची में सरफराज अहमद के इस्तीफ़े को लेकर सियासी बयानबाज़ी का दौर चल रहा था, तब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रांची से दूर खरसांवा में एक कार्यक्रम में शिरकत कर रहे थे. वहाँ उन्होंने एक जनसभा को भी संबोधित किया.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, “समाज में कुछ ऐसे तत्व हैं, जो आदिवासी समाज को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं. कभी जल, जंगल और जमीन से आदिवासियों को उजाड़ने की कोशिश होती है, तो कभी सीएनटी और एसपीटी में छेड़छाड़ होता है. आदिवासियों की परंपरा सभ्यता और संस्कृति पर भी हमला किया जाता है. लेकिन, यह सरकार आपने बनाR है. ऐसे में हम आदिवासियों के मान- सम्मान और स्वाभिमान से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ नहीं होने देंगे. आदिवासी समाज को जो भी तोड़ने का कोशिश करेगा, उसे उसका माकूल जवाब दिया जाएगा.”

इससे पहले के कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री ने कहा था कि जब भी वे काम करना चाहते हैं, केंद्र सरकार उनके पीछे ईडी लगा देती है. लेकिन वह गिरफ़्तारी से नहीं डरते.