छगन भुजबल ने बताया, एनसीपी में बग़ावत किनकी वजह से हुई- प्रेस रिव्यू

छगन भुजबल

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‘द हिंदू’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार का साथ छोड़कर बीजेपी की गठबंधन सरकार में शामिल होने वाले छगन भुजबल ने कहा है कि पार्टी में बग़ावत उनकी वजह से नहीं बल्कि शरद पवार के परिवार की वजह से हुई है.

शनिवार को शरद पवार ने नासिक के येवला में रैली की थी. छगन भुजबल यहीं से विधायक हैं. रविवार को छगन भुजबल ने इस रैली के मक़सद पर ही सवाल उठाये.

भुजबल ने कहा, “शरद पवार साहब, आप येवला क्यों आए? मैं ये समझ नहीं पा रहा हूं. मैं विद्रोह के लिए ज़िम्मेदार नहीं हूं. ये बग़ावत आपके परिवार में हुई है.”

पिछड़ी जातियों के नेता छगन भुजबल ने रैलियों का आयोजन करने और भाषण देने में अपनी भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि शरद पवार ने येवला को इस वजह से चुना होगा क्योंकि वो यहां मौजूद हैं.

भुजबल ने कहा, पवार साहब को ये लगता है कि मैंने ये बग़ावत की है लेकिन मेरी इसमें कोई भूमिका नहीं है.

भुजबल ने संकेत दिए कि पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सदस्य प्रफुल्ल पटेल, शरद पवार के भतीजे अजीत पवार और उनके क़रीबी दिलीप वालसे पाटिल, ये सभी लोग बग़ावत से जुड़े थे.

भुजबल ने कहा कि उन्हें इस बाद का दुख है कि पवार येवला तो आए लेकिन दिलीप वालसे पाटिल के क्षेत्र में एनसीपी की रैली में नहीं गए.

भुजबल ने कहा, “पवार साहेब ने कहा कि वो येवला को लोगों से माफ़ी मांगतें हैं और मुझे टिकट देने को उन्होंने एक ग़लती बताया. लेकिन उन्हें माफ़ी मांगने की कोई ज़रूरत नहीं है क्योंकि येवला में विकास मेरी वजह से हुआ है.”

भुजबल ने कहा कि नासिक जिले में पवार की लोकप्रियता के बावजूद एनसीपी के दोनों लोकसभा उम्मीदवार यहां साल 2019 में चुनाव हार गए थे.

मानुषी छिल्लर बोलीं- फ़िल्म जगत के लोगों ने कहा, ब्यूटी क्वीन अभिनय नहीं कर सकती

मानुषी छिल्लर

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2017 में मिस वर्ल्ड का ख़िताब जीतने वाली फ़िल्म अभिनेत्री मानुषी छिल्लर ने द हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में कहा है कि फ़िल्म जगत के लोगों ने उनसे कहा था कि ब्यूटी क्वीन अभिनय नहीं कर पाती हैं.

मानुषी छिल्लर को बॉलीवुड में एक साल पूरा हो गया है. जब उनसे पूछा गया कि क्या वो अब भी अपने आप को एक अदाकारा कहकर संबोधित करने में शर्माती हैं तो उन्होंने कहा, “अब मुझे इसकी आदत सी हो रही है.''

''लोग पहले मुझे डॉक्टर कहते थे, फिर मिस वर्ल्ड कहा. जब मैंने अपनी फ़िल्म पर काम शुरू किया तो मैें सोच रही थी कि मैं अब अपने आप को क्या कहूं, अब ना ही मैं मेडिकल स्टूडेंट थी और ना ही मिस वर्ल्ड, मैं अभिनेत्री बनने जा रही थी. मैं फ़िल्म जगत से बहुत दूर पली-बढ़ी हूं, मैं लंबे समय तक यही सोचती रही कि यहां मेरी जगह कहां हैं. मैं एक अभिनेत्री हूं.”

मानुषी छिल्लर ने इस साल कान फ़िल्म समारोह में भी हिस्सा लिया. इस पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि ये अंतिम समय में लिया गया फ़ैसला था. मानुषी ने कहा कि कान फ़िल्मोत्सव के रेड कार्पेट पर चलकर उन्होंने अपना एक सपना पूरा कर लिया है.

क्या मिस वर्ल्ड होने के अनुभव ने अभिनय में मदद की. इस सवाल पर मानुषी ने कहा, “पेजेंट इंडस्ट्री के अनुभव से मदद तो मिली, लेकिन मैं एक बाहरी हूं, इसलिए मेरे सामने बहुत चुनौतियां भी थीं. ये आसान भी है और मुश्किल भी.''

''मेरे लिए पहली फ़िल्म पाना इतना मुश्किल नहीं था जितना मिस वर्ल्ड के टाइटल के बिना होता. मीडिया में ये चर्चा थी कि मुझे कौन लॉन्च करेगा और बहुत उत्साह भी था. मैंने वाईआरएफ़ को चुना, उन्होंने मुझसे कहा कि था कि हम आपको लांच करके ख़ुश होंगे लेकिन हमें देखना होगा कि ये कैसे होगा और आपको ऑडिशन देना होगा.”

वो कहती हैं, “लेकिन पहली फ़िल्म के बाद आप सिर्फ ख़ुद पर निर्भर होते हैं. अब ये मिस वर्ल्ड के बारे में नहीं होता है. अब ये महत्वपूर्ण हो जाता है कि कौन आपके साथ काम करना चाहता है या लोग आपमें क्षमता देखते हैं या नहीं. ये बहुत बड़ा बदलाव होता है.”

फ़िल्म जगत की चुनौतियों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “ये आम धारणा है कि सौंदर्य प्रतियोगिताओं से आने वाली लड़कियां अभिनय नहीं कर सकती हैं. हमारी कुछ सबसे बेहतरीन अदाकाराएं ऐसी प्रतियोगिताओं से आई हैं, जैसे प्रियंका चोपड़ा और ऐश्वर्या राय.''

''मैंने एक दर्शक के रूप में उन्हें देखा है और मैं सोचती थी कि वो बहुत शानदार अभिनेत्री हैं क्योंकि वो अच्छा काम कर रही हैं. लेकिन जब मैं यहां आई तो इंडस्ट्री के लोगों ने मुझसे कहा- आप जानती है, लोग ये सोचते हैं की पेजेंट लड़कियां अभिनय नहीं कर सकती हैं, ब्यूटी क्वीन अभिनय नहीं कर सकती हैं. यहाँ तक कि वाईआरएफ़ (यश राज फ़िल्म्स) में भी भी उन्होंने मुझसे कहा था कि आपको थोड़ा अधिक मेहनत करनी होगी क्योंकि आपको धारणाओं को तोड़ना है.”

गवर्नर ने धार्मिक नफ़रत फ़ैलाई, राज्य की शांति के लिए ख़तराः स्टालिन

स्टालिन

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर राज्य के गवर्नर आरएन रवि को पद से हटाने की मांग की है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक स्टालिन ने कहा है, “स्पष्ट है कि आरएन रवि एक ऐसे व्यक्ति हैं जिनमें तमिलनाडु, तमिल लोगों और तमिल संस्कृति के प्रति ग़हरी नफ़रत है.”

राष्ट्रपति को द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखे पत्र में मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा है कि गवर्नर रवि धार्मिक नफ़रत फैला रहे हैं. उन्होंने गवर्नर को राज्य की शांति के लिए ख़तरा भी बताया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक स्टालिन ने ये पत्र 8 जुलाई यानी शनिवार को लिखा है.

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पत्र में स्टालिन ने लिखा है कि राज्य की राजधानी में बैठकर गवर्नर राज्य की सरकार को उखाड़ फेंकने का मौका तलाश रहे हैं, इससे भारतीय लोकतंत्र के मूल सिद्धांत और हमारा संघीय दर्शन बर्बाद हो जाेगा.

गवर्नर को पद के लिए अयोग्य बताते हुए स्टालिन ने राष्ट्रपति से उन्हें पद से हटाने की मांग की.

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा है कि गवर्नर के कृत्य बताते हैं कि उनके मन में तमिलनाडु के प्रति असाधारण नफ़रत है.

केंद्र से फंड लेने के लिए स्कूल के नाम के आगे ‘पीएम श्री’ लगाना अनिवार्य

बच्चों के साथ पीएम मोदी

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  • द टेलीग्राफ़ की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ राज्यों के सरकारी स्कूल अगर केंद्र सरकार से फंड लेते हैं तो उन्हें अपने नाम के आगे पीएम श्री लगाना अनिवार्य होगा.

टेलीग्राफ़ ने ये ख़बर सरकारी दस्तावेज़ों के हवाले से दी है.

पश्चिम बंगाल उन छह राज्यों में शामिल हैं जिन्होंने अभी पीएम स्कूल फॉर राइज़िंग इंडिया (पीएम-एसएचआरआई) योजना में हिस्सा नहीं लिया है. इसके अलावा ओडिशा, तमिलनाडु, बिहार, दिल्ली और केरल भी इस योजना का हिस्सा नहीं बनें हैं.

अख़बार से बात करते हुए राज्य के अधिकारियों ने कहा है कि राजनीतिक नेतृत्व अपने स्कूलों के आगे पीएम-श्री लगाने के ख़िलाफ़ है.

इस योजना के तहत राज्य को 40 फ़ीसदी ख़र्च उठाना है और बाक़ी की ज़िम्मेदारी केंद्र की होगी.

अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक ओडिशा और पश्चिम बंगाल का केंद्र के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग़रीबों के लिए मकानों के श्रेय को लेकर भी विवाद चल रहा है.

केंद्र सरकार ने सितंबर 2022 में पीएम-श्री योजना को मंज़ूरी दी थी जिसके तहत राज्यों में पहले से चल रहे 14597 स्कूलों को अपग्रेड किया जाना है. इस योजना के तहत एक ब्लॉक में ऐसे अधिकतम दो ही स्कूल हो सकते हैं.

इस योजना के तहत राज्य को स्कूलों के लिए फंड हासिल करने के लिए केंद्र सरकार के साथ समझौता करना होगा.

इस समझौते की शर्तों के तहत चयनित स्कूल के नाम के आगे पीएम-श्री लगाना अनिवार्य है.

अब तक केंद्र सरकार को 9000 स्कूलों को अपग्रेड करने के आवेदन मिल चुके हैं.

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