इसराइल-हमास समझौते का श्रेय लेने की होड़, ईरान से लेकर ट्रंप और बाइडन के क्या हैं दावे

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इसराइल और हमास के बीच ग़ज़ा में चल रहे युद्ध को रोकने और बंधकों की अदला-बदली के समझौते पर सहमति बन गई है.
इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ग़ज़ा में युद्धविराम पर सहमति बन चुकी है.
इसराइल की सुरक्षा कैबिनेट की बैठक चल रही है और इसमें सहमति बन गई तो बंधकों की अदला-बदली रविवार से शुरू हो जाएगी.
लेकिन इस बीच, युद्धविराम पर सहमति का श्रेय लेने की होड़ भी तेज़ हो गई है.

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अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन, नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समझौते का श्रेय तो ले ही रहे हैं लेकिन ईरान और हूती विद्रोहियों का मानना है कि 'एक्सिस ऑफ रेज़िस्टेंस' की ताक़त ने इसराइल को झुकाया है.
'एक्सिस ऑफ रेज़िस्टेंस' ईरान के दशकों के समर्थन से खड़ा हुआ है. इसमें हमास, लेबनान के हिज़्बुल्लाह आंदोलन, यमन का हूती आंदोलन और इराक़ और सीरिया के शिया हथियारबंद समूह शामिल हैं.
ये सभी इसराइल को अपना दुश्मन मानते हैं.
ये गठजोड़ ईरान के सबसे अहम भू-राजनीतिक हथियार के तौर पर काम करता रहा है.
ईरान ने क्या दावा किया

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ईरान ने कहा है कि 'फ़लस्तीनी प्रतिरोध' ने इसराइल को पीछे हटने पर मजबूर किया है.
ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ''इसराइल और हमास के बीच समझौता इस बात का सुबूत है कि फ़लस्तीनी प्रतिरोध ने इसराइल को पीछे धकेल दिया है. आज पूरी दुनिया को पता चल गया है कि ग़ज़ा के लोगों और फ़लस्तीनी प्रतिरोध की निरंतरता ने यहूदी शासन को पीछे हटने को मजबूर कर दिया है.''
उन्होंने कहा, ''इतिहास की किताबों में एक दिन ये लिखा जाएगा कि कि यहूदियों के एक समूह ने हज़ारों महिलाओं और बच्चों को मारने के क्रूर अपराध को अंजाम दिया था. लेकिन आख़िर में वे हरा दिए गए.''
7 अक्टूबर 2023 को ईरान समर्थित हमास ने दक्षिणी इसराइल पर हमले कर करीब 1200 इसराइलियों को मार डाला था.
इसराइल ने जवाबी हमले के तहत ग़ज़ा में लगातार हमले किए. हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़ इन हमलों में अब तक 50 हज़ार फ़लीस्तीनी मारे जा चुके हैं.
ईरान की इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड्स ने एक बयान जारी कर हमास को बधाई दी है. उसने हमास के हमले को 'ऐतिहासिक और असाधारण' करार दिया है. उसने समझौते को फ़लस्तीन की बड़ी जीत और इसराइल की बड़ी हार करार दिया है.
हालांकि इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेताया है कि नेतन्याहू पर भरोसा नहीं किया जा सकता है. उसने कहा कि हमास को नए युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए.
ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी इस समझौते को फ़लस्तीनी लोगों को 'ऐतिहासिक जीत' बताया है.
'नेतन्याहू पर भरोसा नहीं'

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दूसरी ओर, ईरान समर्थित यमन के हूती आंदोलन ने कहा है वो इस समझौते पर नज़र रखेगा.
विद्रोहियों के नेता अब्दुल मलिक हल हूती ने गुरुवार को कहा कि उनका संगठन इस बात पर नज़र रखेगा कि युद्धविराम का समझौता कैसे लागू किया जा रहा है.
अगर इस समझौते को तोड़ा गया तो हूती इसराइल पर अपने हमले जारी रखेंगे.
हूती विद्रोहियों ने कहा था कि जब तक ग़ज़ा पर इसराइली हमले नहीं रुकते तब तक यमन के समुद्री तटों के नज़दीक और लाल सागर में इसराइली जहाजों पर वो बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमले करते रहेगा. हूती विद्रोहियों ने ऐसे कुछ हमलों को अंजाम भी दिया था.
नवंबर 2023 में शुरू हुए इन हमलों की वजह से इस मार्ग पर समुद्री व्यापार लगभग रुक गया था.
हमलों ने इन जहाज़ों को स्वेज़ नहर की जगह दक्षिणी अफ़्रीका से घूम कर जाने को मजबूर किया था. इससे शिपिंग कंपनियों की लागत काफी बढ़ गई थी.
माना जा रहा थाा कि समुद्री व्यापार की बढ़ती लागत से दुनिया भर में महंगाई बढ़ सकती है.
यमन के ज्यादातर हिस्सों पर हूती विद्रोहियों का कब्ज़ा है. इनमें राजधानी सना भी शामिल है. हूती विद्रोहियों ने 2014 में इस पर कब्ज़ा कर लिया था.
यमन के समुद्री तट के नज़दीक हूती विद्रोहियों के हमलों ने दो समुद्री जहाज़ों को डुबो दिया था. एक जहाज़ पर कब्ज़ा कर लिया गया था. इस हमले में चार नाविक मारे गए थे.
हूती विद्रोहियों ने इसराइल पर भी मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए थे. इसराइल ने इसके जवाब में हूती विद्रोहियों के कई ठिकानों पर हमला किया था.
इसराइली लड़ाकू विमानों ने यमन के आसपास दो बंदरगाहों और एक पावर स्टेशन पर हमला किया था.
पिछले महीने इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा था कि उनके देश ने अभी तो हूतियों के ख़िलाफ़ अपना अभियान शुरू ही किया है.
बाइडन और ट्रंप क्या बोले

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अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन और नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, दोनों ने इसराइल और हमास के बीच समझौते का श्रेय लिया है.
बाइडन ने समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि इसके लिए कई महीनों तक 'लगातार और जमकर कूटनीतिक प्रयास' किए गए.
बुधवार को उन्होंने व्हाइट हाउस की एक ब्रीफिंग में कहा कि वो आज बेहद संतुष्ट हैं. उन्होंने इस समझौते को अपने करियर के सबसे कठिन कामों में से एक करार दिया.
उन्होंने तीन चरणों में लागू होने वाले इस समझौते का ब्योरा देते हुए कहा कि पहले चरण के तहत ग़ज़ा की आबादी वाले इलाके से इसराइली सेना हट जाएगी. दूसरे चरण में मौजूदा बंधकों की अदला-बदली होगी. तीसरे चरण में सभी पुराने बंधकों की वापसी होगी और ग़ज़ा में पुनर्निर्माण का काम शुरू होगा.
नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी समझौते का श्रेय लेने में पीछे नहीं रहे. उन्होंने कहा है कि मई 2024 में उन्होंने समझौते के लिए एक योजना दे दी थी, ये समझौता इसी फ्रेमवर्क पर हुआ है.
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया ट्रूथ सोशल पर लिखा कि पिछले साल नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव में उनकी जीत की वजह से ही ये 'विराट' समझौता संभव हुआ.
उन्होंने लिखा, ''इसने पूरी दुनिया को संकेत दे दिया कि मेरा प्रशासन दुनिया में शांति कायम करने की कोशिश करेगा. ये सभी अमेरिकियों और अमेरिका के सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समझौते की बातचीत करेगा.''
बाइडन जिस प्रेस कॉन्फ्रेंस में समझौते का श्रेय ले रहे थे उसके ख़त्म होने पर पत्रकारों ने पूछा कि समझौता उनकी वजह से हुआ या ट्रंप की कोशिश से. इस पर उन्होंने पलटकर जवाब दिया, 'क्या ये मज़ाक था.'
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित















