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रहस्यमयी ढंग से ग़ायब होने के बाद मिल रहे हैं शव, कठुआ में हत्याएं साज़िश हैं या चरमपंथियों का काम?
- Author, माजिद जहाँगीर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
जम्मू और कश्मीर के कठुआ ज़िला के बिलावर में तीन आम नागरिकों की हत्या के बाद इलाक़े में ख़ौफ़ और तनाव का माहौल है.
इन हत्याओं पर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भी बीती सोमवार को हंगामा हुआ है.
जिन तीन नागरिकों की हत्या हुई है, उनकी पहचान वरुण ठाकुर (15 ), जोगेश सिंह (32 ), दर्शन सिंह (40) के रूप में हुई है. सुरक्षाबलों को इनके शव आठ मार्च को कठुआ के दूरदराज़ इलाक़े मल्हार में एक नदी के पास मिले थे.
ये तीनों व्यक्ति पाँच मार्च को उस समय लापता हो गए थे, जब वे अपने गाँव की एक बारात के साथ जा रहे थे. ये एक-दूसरे के रिश्तेदार हैं. इस बीच, पुलिस ने कहा है कि इस घटना की हर पहलू से जाँच की जा रही है.
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रिश्तेदार क्या बता रहे हैं?
अक्षय कुमार इन तीनों व्यक्तियों के रिश्तेदार हैं.
अक्षय ने बीबीसी हिंदी से फ़ोन पर बात की और दावा किया कि ये चरमपंथी हमले में मारे गए हैं. सरकार इसकी जाँच करे. हमें इंसाफ़ दिलाए.
घटना के दिन क्या हुआ था, अक्षय बताते हैं, "हमारे घर में शादी थी. दिन के चार बजे बारात निकली थी. जहाँ हमें जाना था, वहाँ तक का सफ़र चार घंटे पैदल तय करना था. ये तीन लोग हमसे पीछे छूट गए. हमें लगा कि वे खुद पहुँच जाएँगे. इसके बाद वे मिले नहीं."
"हमें पता नहीं चला कि वे गुम हो गए हैं. अगर हमें पता चलता तो हम उसी समय उन्हें ढूँढने निकलते या रिपोर्ट दर्ज़ करवाते. जिस रास्ते से हम जा रहे थे, वह जंगल का रास्ता है."
उन्होंने कहा, "अगले दिन हमने क़रीब बारह बजे तक उनका इंतज़ार किया. जब वह नहीं आए तो हमने थाने में रिपोर्ट दर्ज़ करवाई. अगले दिन हम फिर जंगल की तरफ उन्हें ढूँढने गए. पुलिस भी हमारे साथ थी.''
उनका आरोप है, ''पुलिस ने ढूँढने की ज़्यादा कोशिश नहीं की. पुलिस अपने अधिकारियों को सिर्फ़ यह बताती रही कि मेहनत से ढूँढ रहे हैं. ऐसा करते-करते चार दिनों के बाद पुलिस को उनके शव मिले. जहाँ उनके शव मिले, वहाँ से दो हज़ार फ़ुट की ऊँचाई पर उनका सामान भी मिला था."
वह कहते हैं कि वे तो चले गए लेकिन उनके पीछे जो परिवार हैं, अब उनका क्या होगा?
बिलावर में इन हत्याओं के बाद दो दिनों तक बाजार बंद रहे. लोगों ने प्रदर्शन भी किए.
बीते एक महीने में क्या हुआ?
कठुआ के बिलावर इलाक़े में बीते एक महीने में यह ऐसी दूसरी घटना है.
इस साल 16 फ़रवरी को दो व्यक्तियों, रोशन लाल और शमशेर के शव इलाक़े के बथेरी गाँव में एक नदी के पास मिले थे.
इन हत्याओं के ख़िलाफ़ भी बिलावर के लोगों ने बंद किया था और प्रदर्शन भी किए थे.
तीन नागरिकों के शव मिलने के तीन दिन बाद कठुआ जिला के हरदू गाँव में गुर्जर समुदाय के दो बच्चे दीन मोहम्मद (15) और रहमत अली (12) गायब हो गए.
दोनों ही चचेरे भाई हैं. दोनों की गुमशुदगी की रिपोर्ट कठुआ के राजबाग थाने में दर्ज़ की गई है. पुलिस दोनों बच्चों को तलाश रही है. परिजनों का कहना है कि दोनों ही बच्चे माल -मवेशी चराने गए थे.
इस बीच डीआईजी शिव कुमार मंगलवार को गायब बच्चों के परिजनों से उनके घर पर मिले.
स्थानीय लोग क्या कहते हैं?
बिलावर और उससे सटे इलाक़े घने जंगलों से घिरे हैं. रास्ते भी काफ़ी दुर्गम हैं. इस इलाक़े में जो घटनाएँ पेश आई हैं, वह सभी बिलावार के ऊपरी इलाक़ों में पेश आई हैं.
यहाँ के लोग ज़्यादातर खेती-बाड़ी और माल -मवेशी चराने का काम करते हैं. यहाँ हिन्दुओं और मुसलमानों की मिली-जुली आबादी है.
बिलावर के एक स्थानीय पत्रकार इशांत सुदान ने बताया कि इस तरह की घटनाओं से पूरे इलाक़े में ख़ौफ़ का माहौल है. उनका कहना था कि रात के समय लोग बहुत डर महसूस कर रहे हैं.
उनका कहना था, "कठुआ के ऊपरी इलाक़ों में जो लोग रहते हैं, उनमें ज़बरदस्त ख़ौफ़ है. रात को अगर किसी भी व्यक्ति को जंगल की तरफ़ जाना होता है तो वह अकेले नहीं निकल पाते हैं. देर शाम तो अब लोगों ने जंगल के इलाक़ों की तरफ़ जाना ही छोड़ दिया है."
इशांत कहते हैं, "यहाँ के लोग माल-मवेशी चराने के लिए जंगलों में जाते हैं. लेकिन जब से इस तरह की घटनाएँ घटना शुरू हो गई हैं, तब से लोग इन जगहों की तरफ़ अब नहीं जाते हैं."
"बीते लम्बे समय से यह सिलसिला जारी है. कठुआ शहर में सब ठीक है, लेकिन जो इर्द-गिर्द के इलाक़े हैं, वहाँ हालात सामान्य नहीं हैं."
पुलिस ने क्या कहा?
जम्मू जोन के डीआईजी शिव कुमार ने बीबीसी हिंदी को फ़ोन पर बताया कि तीन व्यक्तियों की हत्या के मामले में जाँच जारी है. बहुत जल्द जाँच का नतीजा सामने आएगा.
शिव कुमार का कहना है, "हम हर पहलू से तफ़्तीश कर रहे हैं. जब तक हमारी जाँच पूरी नहीं होगी, तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता है."
यह पूछने पर कि कठुआ में बीते एक महीने से कई घटनाएँ सामने आई हैं, इसके क्या कारण हो सकते हैं, तो उन्होंने कहा "सभी घटनाओं की भी जाँच जारी है.''
यह पूछने पर कि बीते एक महीने में पाँच लोगों की मौत हुई है तो क्या चरमपंथियों का इनमें हाथ हो सकता है. इस सवाल पर शिव कुमार कहते हैं कि यह सब बातें जाँच के दायरे में आती हैं और जाँच अभी जारी है.
डीआईजी शिव कुमार ने बताया कि अभी बिलावर के हालात सामान्य हैं और बाज़ार भी खुल गए हैं.
उपराज्यपाल ने क्या कहा?
जम्मू -कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 10 मार्च को इन हत्याओं पर चिंता जताते हुए कहा कि दोषियों को सज़ा दी जाएगी. उनका यह भी कहना था इस मामले में जाँच के आदेश दिए गए हैं.
उन्होंने 'एक्स' पर लिखा, "कठुआ के वरुण सिंह, योगेश सिंह और दर्शन सिंह की हत्या से मैं दुखी हूँ. दुख की इस घड़ी में मैं उनके परिवार वालों और मित्रों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूँ. मैंने गहन और पारदर्शी जाँच के आदेश दिए हैं और परिवारों को सभी आवश्यक सहायता प्रदान की जाएगी. मैं लोगों को यक़ीन दिलाता हूँ कि अपराधियों को जल्द से जल्द सज़ा दिलाई जाएगी. न्याय सुनिश्चित किया जाएगा और जवाबदेही तय की जाएगी."
राजनीतिक दल क्या कह रहे हैं?
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता इल्तिजा मुफ़्ती ने तीन नागरिकों की हत्या के लिए प्रशासन की आलोचना की है. उन्होंने कठुआ और बिलावर में क़ानून-व्यवस्था की बिगड़ती हालत पर सवाल उठाए हैं. यहाँ पिछले दिनों हुई घटनाओं की जाँच की माँग की है.
इल्तिजा मुफ़्ती ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि सोमवार को वह बिलावर जाना चाहती थीं लेकिन उन्हें जाने नहीं दिया गया. उनका यह भी आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं को बिलावार जाने दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस निष्पक्ष होकर काम नहीं कर रही है.
प्रधानमंत्री कार्यालय में मंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने नौ मार्च को बयान दिया कि तीनों की हत्या चरमपंथियों ने की है. 'एक्स' पर उन्होंने लिखा, "ज़िला कठुआ के बनी क्षेत्र में तीन युवाओं की आतंकियों द्वारा निर्मम हत्या अत्यंत दुखद होने के साथ-साथ एक बड़ी चिंता का विषय है. इस शांतिपूर्ण क्षेत्र में माहौल बिगाड़ने के पीछे गहरा षड्यंत्र दिखाई देता है."
बिलावर क्षेत्र से बीजेपी के विधायक सतीश शर्मा ने बीबीसी हिंदी को फ़ोन पर बताया कि जो लोग आज बीजेपी को हालात बिगड़ने के लिए ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं, उनकी वजह से जम्मू-कश्मीर के हालात बिगड़ रहे हैं.
उनका कहना था, "जो लोग कहते हैं कि सुरक्षा का कंट्रोल बीजेपी के पास है और बीजेपी की ज़िम्मेदारी है कि वह ऐसी घटनाओं को घटने से रोके. मैं उनसे यह पूछना चाहता हूँ कि अगर उन्होंने बीते सत्तर सालों में सड़कें बनाई होतीं तो आज इन तीन आम लोगों को न मारा जाता. जिस जगह ये शादी में गए थे, वहाँ तक पैदल यात्रा करना पड़ती है."
वे सवाल करते हैं, "उनके पास दशकों से क़ानून व्यवस्था थी, तो वह कश्मीर में पत्थरबाज़ी को बंद क्यों नहीं करवा सके? यह सब कुछ राज्यपाल शासन के बाद ही संभव हो सका है. हम इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि हालात को बिगाड़ने का रुख़ अब इस तरफ़ (जम्मू की तरफ़) मोड़ा गया है. यहाँ हालात बिगाड़ने की कोशिश हो रही है."
सतीश शर्मा का कहना था कि हम इस मामले में साफ़-सुथरी जाँच चाहते हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके.
बीबीसी हिंदी ने कठुआ के बनी क्षेत्र के निर्दलीय विधायक डॉक्टर रामेश्वर से बात की. वह बताते हैं कि सियासत से ऊपर उठकर इन घटनाओं को रोका जाना चाहिए.
उनका कहना था कि बीते कुछ महीनों से ऐसी घटनाओं का सिलसिला जारी है. सुरक्षा एजेंसियों को अपने अभियानों में तेज़ी लाने की ज़रूरत है.
बीजेपी के आरोपों पर डॉक्टर रामेश्वर का कहना था कि इस पर किसी तरह की सियासत करना ठीक नहीं है. यह एक साझा मसला है. हम सबको साथ मिलकर इन घटनाओं को रोकना है. वह कहते हैं कि लोग अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं.
सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता इमरान नबी डार बीबीसी हिंदी से कहते हैं कि यह सिर्फ कठुआ की घटनाओं का मसला नहीं है, बल्कि पूरे जम्मू क्षेत्र में बीते कुछ समय से जो हो रहा है.
उनका यह भी कहना था कि जम्मू के कई इलाकों में अतीत में 'टार्गेटेड किलिंग' को अंजाम दिया गया. यह सबके लिए एक फ़िक्र की बात है. डार कहते हैं कि यह वह इलाक़े हैं कि जहाँ चरमपंथ का कोई साया भी नहीं था.
बीजेपी के आरोपों का जवाब देते हुए डार कहते हैं कि उन्हें सवाल उठाने का अधिकार है. लेकिन सवाल उठाने से बेहतर था कि सुरक्षा ग्रिड को मज़बूत किया जाए. वह कहते हैं कि जम्मू के कई इलाक़ों में ख़ौफ़ की स्थिति है. इसको दूर करने की ज़रूरत है.
ध्यान रहे, साल 2019 में जम्मू -कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म किया गया. राज्य को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया. केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद क़ानून एवं व्यवस्था यहाँ के उपराज्यपाल के पास है.
क्या जम्मू क्षेत्र में बढ़ी हैं चरमपंथी घटनाएँ?
बीते चार वर्षों से जम्मू क्षेत्र के कई इलाक़ों में चरमपंथ ने अपना सिर उठाया है. सबसे ज़्यादा चरमपंथी घटनाएँ जम्मू के पूँछ और राजौरी ज़िलों में पेश आई हैं.
हालाँकि, साल 2021 तक जम्मू क्षेत्र में चरमपंथ की गतिविधियाँ कभी-कभार ही पेश आती थीं.
साल 2021 से जुलाई 2024 तक जम्मू क्षेत्र में चरमपंथ से जुड़ी 33 घटनाएँ हुई थीं.
साल 2024 के पहले सात महीनों में जम्मू क्षेत्र में आठ चरमपंथी हमले हुए थे. उन हमलों में 11 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे जबकि अठारह जवान घायल हो गए थे.
इसी दौरान जम्मू क्षेत्र में 12 आम नागरिकों की हत्याएँ की गई थीं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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