जम्मू के कठुआ में मारे गए सभी पाँचों जवान उत्तराखंड के, पाँचों सैनिकों को जानिए

    • Author, आसिफ़ अली
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

जम्मू कश्मीर के कठुआ में आठ जुलाई को एक चरमपंथी हमले में मारे गए सभी पाँच जवान उत्तराखंड के रहने वाले थे.

कठुआ में सेना के एक काफ़िले पर हमला हुआ था. मारे गए सभी सैनिक ‘गढ़वाल राइफ़ल्स’ के थे.

सभी सैनिकों का शव मंगलवार को उत्तराखंड के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुँचा. यहाँ राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद थे.

भारतीय सेना के एडिशनल डायरेक्टर जनरल, जन संपर्क ने अपने ट्वीट पर इन सैनिकों को श्रद्धांजली देते हुए लिखा है कि भारतीय सेना गहरी संवेदना व्यक्त करती है और इस दुःख की घड़ी में शोक संतप्त परिवारों के साथ खड़ी है.

एडीजी,पीआई ने लिखा, “ भारतीय सेना के नायब सूबेदार आनंद सिंह, हवलदार कमल सिंह, एनके विनोद सिंह, आरएफ़एन अनुज नेगी और आरएफ़एन आदर्श नेगी के सर्वोच्च बलिदान को सलाम करते हैं, जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी."

जवानों को जानिए

अनुज नेगी

कठुआ में मारे गए जवानों में पौड़ी के रिखणीखाल के अनुज नेगी भी शामिल हैं.

पौड़ी के रिखणीखाल ब्लॉक की पूर्व ब्लाक प्रमुख पिंकी नेगी के मुताबिक़, “पौड़ी के ग्राम डोबरिया निवासी राइफलमैन अनुज नेगी साल 2018 में सेना का हिस्सा बने और 22-गढ़वाल राइफ़लस में कार्यरत थे.”

अनुज की शादी पिछले साल नवंबर 2023 में हुई थी. अनुज के पिता भारत सिंह वन विभाग में कर्मचारी हैं.

अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू की एक ख़बर के मुताबिक़ 26 साल के अनुज नेगी की 23 साल की पत्नी सीमा अभी अपने पति के साथ मुश्किल से दो महीने भी नहीं बिता पाई थीं.

जब कठुआ में हुए हमले में अनुज नेगी के मारे जाने की ख़बर आई तो उनके माता-पिता ने घर पर टीवी बंद कर दिया ताकि सीमा को इसकी जानकारी नहीं मिल सके.

अनुज के पिता भरत सिंह ने ‘द हिन्दू’ अख़बार को बताया, “वह मेरा इकलौता बेटा था. अभी उसकी उम्र ही कितनी हुई थी. मुझसे ज़्यादा मेरी बहू का नुक़सान हुआ है.”

आदर्श नेगी

मारे गए सैनिकों में टिहरी गढ़वाल ज़िले के थाटी डागर गाँव के 26 साल से राइफलमैन आदर्श नेगी भी शामिल हैं.

किसान दलबीर सिंह नेगी के सबसे छोटे बेटे आदर्श नेगी के परिवार के लोगों के मुताबिक़ आदर्श हमेशा से ही सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहते थे.

कीर्तिनगर की एसडीएम सोनिया पंत ने बीबीसी को बताया है, “आदर्श नेगी टिहरी जिले के कीर्तिनगर ब्लॉक के थाती डागर गांव के रहने वाले थे. वो साल 2018 में गढ़वाल राइफल्स में भर्ती हुए थे.”

आदर्श तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे थे और उनके बड़े भाई चेन्नई में नौकरी करते हैं जबकि पिता दलबीर सिंह किसान हैं.

आदर्श पिछली बार फ़रवरी महीने में अपने परिवार की शादी में शामिल होने घर आए थे.

विनोद सिंह

इकलौते बेटे के जाने का ग़म

मारे गए जवानों में से एक जवान विनोद सिंह भंडारी हैं. मूल रूप से टिहरी गढ़वाल के चौंड़ जसपुर गाँव के रहने वाले विनोद का परिवार लगभग आठ साल पहले टिहरी से विस्थापित होकर देहरादून के अठूरवाला गांव में बस गया था.

नायक विनोद सिंह साल 2011 में सेना में भर्ती हुए थे. वो इस साल मई में अपनी चार महीने की बेटी से मिलने अपने घर आए थे. उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी और दो बच्चे हैं.

तीन महीने पहले जब वे घर आए थे, तब किसी को अंदाज़ा नहीं था कि वे इतनी जल्दी सबको छोड़कर चले जाएंगे.

टिहरी एसडीएम मंजू राजपूत के मुताबिक़, “29 साल के विनोद सिंह भंडारी का परिवार पिछले आठ साल से डोईवाला के अठूरवाला में रह रहा है. उनकी तीन महीने की बेटी और चार साल का बेटा है.”

विनोद सिंह अपने पिता के इकलौते बेटे थे. भंडारी के पिता भी सेना में सेवा दे चुके हैं.

कमल सिंह

पौड़ी ज़िले के लैंसडाउन के हवलदार कमल सिंह के घर में मातम पसरा हुआ है. कमल सिंह के घर में उनकी बुजुर्ग माँ सुमिता देवी, पत्नी रजनी और तीन और पांच साल की दो बेटियां हैं.

पौड़ी के रिखणीखाल ब्लॉक की पूर्व ब्लाक प्रमुख पिंकी नेगी के मुताबिक़ “हवलदार कमल सिंह 2007 में भारतीय सेना का हिस्सा बने थे. 22वीं गढ़वाल राइफ़ल्स के कमल सिंह की तैनाती जम्मू कश्मीर में थी.”

आनंद सिंह

इसी हमले में मारे गए 41 साल के नायब सूबेदार आनंद सिंह रावत के निधन से रुद्रप्रयाग जखोली ब्लॉक में शोक पसरा हुआ है.

आनंद के रिश्ते के भतीजे और इलाक़े के पूर्व प्रधान अमित रावत ने बीबीसी को बताया है, “आनंद सिंह इंटर पास करते ही साल 2001 में 22-गढ़वाल राइफ़ल्स में भर्ती हो गए थे.”

आनंद की पत्नी और दोनो बेटे मनीष और अंशुल देहरादून में रहते हैं. आनंद क़रीब 6 महीने पहले छुट्टी पर घर आये थे. तब वह माँ से मिलने गाँव भी पहुँचे थे.

अमित रावत ने कहा, ''छह महीने पहले जब आनंद छुट्टी पर बच्चों के पास आए थे तो उन्होंने पत्नी विजया से कहा था कि अगली बार जब छुट्टी पर आऊँगा तो सब गाँव चलेंगे.

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ट्वीट कर इन सैनिकों को श्रद्धांजली दी है.

पुष्कर सिंह धामी ने लिखा है, “शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाक़ी निशां होगा. आप सैन्यभूमि उत्तराखण्ड के गौरव हैं और हम सभी प्रदेशवासियों को आप पर गर्व है.”

इसी दिन बुरहान वानी की मुठभेड़ में हुई थी मौत

श्रीनगर में बीबीसी के स्थानीय पत्रकार माजिद जहांगीर के मुताबिक़, चरमपंथियों ने घात लगाकर सेना की गाड़ी पर हमला किया था. ये हमला सोमवार शाम क़रीब चार बजे का बताया जा रहा है.

कठुआ में जिस जगह पर हमला हुआ, वो इलाक़ा जंगल से घिरा है. हमले वाली जगह बदनोटा कठुआ शहर से क़रीब 150 किलोमीटर दूर है.

बीते चार हफ़्तों में कठुआ चरमपंथियों को लेकर दूसरी बार चर्चा में है.

11 जून को कठुआ के एक गांव में हुई मुठभेड़ में एक सीआरपीएफ जवान और दो चरमपंथी मारे गए थे.

कठुआ में यह ताज़ा हमला आठ जुलाई को हुआ है.

ये वही तारीख़ है, जब 2016 में चरमपंथी बुरहान वानी की सुरक्षाबलों से हुई मुठभेड़ में मौत हो गई थी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)