उत्तरकाशी टनल से निकलने के बाद मज़दूरों ने क्या-क्या बताया

मज़दूर

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उत्तराखंड में उत्तरकाशी की सिलक्यारा टनल में फंसे 41 मज़दूरों को निकाला जा चुका है.

मंगलवार की रात सभी मज़दूरों के टनल से निकलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे टेलीफ़ोन पर बातचीत की जिसका वीडियो उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी ट्वीट किया है.

पीएम मोदी ने सभी मज़दूरों से विस्तार से बातचीत की है जिसमें उन्होंने उनके स्वास्थ्य और उनके संघर्षों के बारे में पूछा.

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टेलीफ़ोन पर बातचीत की शुरुआत करते ही पीएम मोदी ने बताया कि उन्होंने इस बातचीत को स्पीकर मोड पर रखा है ताकि बाक़ी उनके साथ मौजूद लोग भी बात को सुन सकें.

उन्होंने सबसे पहले सभी मज़दूरों को बधाई देते हुए कहा कि शुक्र है कि सब इस संकट से निकल पाए और ये उनके लिए बड़ी ख़ुशी की बात है जिसका वो शब्दों में वर्णन नहीं कर सकते हैं.

पीएम मोदी ने क्या कहा

पीएम मोदी ने कहा कि अगर कुछ भी बुरा हो जाता तो ख़ुद को कैसे संभाल पाते ये कहना कठिन था.

“केदारनाथ बाबा और बद्रीनाथ भगवान की कृपा हुई कि सब सकुशल आए हैं. 16-17 दिन समय कम नहीं होता, आपने बहुत बड़ी हिम्मत दिखाई और एक-दूसरे का हौसला बनाए रखा जो सबसे बड़ी बात है.”

“एक समय रेलवे के डिब्बे में भी जब साथ-साथ चलते हैं तो तू-तू मैं-मैं भी हो जाती है. उसके बावजूद भी आपने धैर्य रखा. मैं लगातार जानकारियां लेते रहता था.”

“मुख्यमंत्री जी के साथ भी संपर्क में रहता था. मेरे पीएमओ के अफ़सर भी वहां आकर बैठे थे. तो जानकारी तो रहती थी लेकिन चिंता कम होती नहीं है. जानकारियों से समाधान होता नहीं है लेकिन मैं सचमुच में आपके माध्यम से जितने भी साथी वहां से निकलकर आए हैं, उनको शुभकामनाएं देता हूं.”

पीएम मोदी से बात करते शबाब अहमद

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मज़दूरों ने क्या कहा

पीएम मोदी ने सबसे पहले नवयुगा इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड के शबाब अहमद से बातचीत शुरू की थी.

सिलक्यारा टनल का निर्माण नवयुगा इंजीनियरिंग ही कर रही है और इसमें फंसे अधिकतर मज़दूर इसी कंपनी से जुड़े हुए थे.

शबाब अहमद ने पीएम मोदी से कहा कि वो सभी मज़दूर 18 दिन तक टनल में फंसे थे लेकिन उन्हें एक भी दिन एहसास नहीं हुआ कि कोई कमज़ोरी या घबराहट महसूस हो रही हो क्योंकि 41 लोग थे जो अलग-अलग राज्यों से थे.

उन्होंने कहा, “हम सब भाई की तरह रहते थे और किसी को भी कोई दिक़्क़त होती थी तो मदद करते थे. खाना आता था तो हम सब मिल-जुलकर एक साथ बैठकर खाते थे. रात में खाना खाने के बाद मैं अपने लोगों से कहता था कि चलो टहलते हैं क्योंकि टनल के अंदर ढाई किलोमीटर की लंबाई थी.”

“सुबह के समय हम बंदों से कहते थे कि हम बस खा-पी रहे हैं तो थोड़ी मॉर्निग वॉक और योगा भी करना चाहिए. हम शुक्रिया अदा करना चाहते हैं उत्तराखंड सरकार का जिसने हमारे साथ इतना अच्छा व्यवहार किया. माननीय मुख्यमंत्री धामी साहब हमसे बराबर संपर्क में रहते थे. उनका भी बहुत शुक्रिया.”

पीएम मोदी से बात करते गब्बर सिंह नेगी

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गब्बर सिंह ने क्या कहा

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शबाब अहमद के बाद पीएम मोदी ने गब्बर सिंह नेगी से बात की जो टनल फ़ॉरमैन हैं.

पीएम मोदी ने बताया कि वो उन्हें विशेष रूप से बधाई देते हैं क्योंकि रोज़ाना मुख्यमंत्री धामी अपनी रिपोर्ट में बताते थे कि आप दोनों ने जो टीम स्पिरिट दिखाई, उसको लेकर किसी यूनिवर्सिटी को केस स्टडी करनी पड़ेगी.

गब्बर सिंह नेगी ने पीएम मोदी और मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनकी पूरी कंपनी उन्हें बचाने में लगी हुई थी और वो उनके परिवार के जैसी है.

उन्होंने कहा कि उन्हें टनल में कभी कोई दिक़्क़त महसूस नहीं हुई और सभी साथियों ने मुश्किल की घड़ी में भी धैर्य से उनकी बातों को सुना और हौसला नहीं छोड़ा.

पीएम मोदी ने मज़दूरों से पूछा कि क्या कोई मज़दूर पहले भी इसी तरह की किसी मुसीबत में फंसा था और क्या उनके अनुभव काम आए?

इस सवाल पर गब्बर सिंह नेगी ने बताया कि वो सिक्किम में भूकंप के समय इसी तरह से फंसे थे लेकिन कभी टनल में नहीं फंसे थे.

उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर के एक अन्य मज़दूर अखिलेश ने कहा कि टनल के अंदर खाने-पीने की कोई कमी नहीं रहती थी, और उनका हालचाल लगातार लिया जाता रहता था. हम लोग ख़ुश हैं लेकिन हमसे ज़्यादा बाहर वाले भी ख़ुश हैं.

“शुरुआत में मोबाइल की बैटरी टाइम देखने के लिए बचाकर रखते थे लेकिन फिर कंपनी वालों ने मोबाइल और चार्जर उपलब्ध कराया जिसके बाद अच्छा लगने लगा और टाइम का पता चल जाता था. फिर मनोरंजन भी करने लगे और अच्छा लगने लगा.”

बिहार के छपरा से एक अन्य मज़दूर सोनू कुमार साहा ने बताया कि ‘एक समय जब हमें टनल में ऊब होने लगी तो हमारी परिजनों से बातचीत कराने की व्यवस्था की गई. जिससे हमारा मन हलका रहता था.’

“हम लोग एकसाथ एक परिवार के जैसे रहते थे. हमारे सीनियर साथियों ने हमारी बहुत हौसला अफ़ज़ाई की. एकजुट रहे और साथ खाना खाते थे. एनडीआरएफ़ के जवान जब अंदर घुसे तो हमारी जान में जान आई.”

वीके सिंह की पीएम मोदी ने की तारीफ़

पीएम मोदी से बात करते अखिलेश

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उत्तरकाशी की सुरंग में बचाव कार्य के दौरान केंद्रीय मंत्री और पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह कई बार घटनास्थल पर पहुंचे थे.

मंगलवार को मज़दूरों को सुरंग से निकालते समय भी वो और पुष्कर सिंह धामी वहां मौजूद थे.

शबाब अहमद ने जनरल वीके सिंह की तारीफ़ की तो पीएम मोदी ने कहा कि जनरल वीके सिंह ने अपनी पूरी सोल्जर वाली ट्रेनिंग वहां पर दिखाई और पूरा समय वो वहां पर रहे.

पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें डॉक्टरों ने बताया कि सभी मज़दूरों की सेहत बिलकुल स्वस्थ है और वो मेडिकल चेकअप से पहले सभी मज़दूरों से बात नहीं करना चाहते थे, जैसे ही डॉक्टरों ने बताया कि सभी मज़दूर स्वस्थ हैं तो तुरंत फ़ोन लगाया.

उन्होंने कहा कि ‘मैं सुबह तक बात करने का इंतज़ार नहीं कर सकता था’ इसलिए मैंने तुरंत रात में बात करने का फ़ैसला किया.

पीएम मोदी से बातचीत के अंत में सभी मज़दूरों ने ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए. इस पर पीएम मोदी ने कहा कि पूरा देश इन नारों को सुनकर बहुत ही प्रभावित हो जाएगा.

मंजीत की माँ

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गहने गिरवी रखकर सिलक्यारा पहुंचे थे पिता

वहीं, मज़दूरों के टनल से निकलने के बाद उनके परिजन बेहद ख़ुश हैं.

लखीमपुर खीरी ज़िले के भैरमपुर गाँव के मंजीत की माँ ने बेटे के सुरक्षित बाहर निकलने पर खुशी जाहिर की है.

मंजीत की माँ चौधराइन कहती हैं, "ये 17 दिन बहुत भारी पड़े. रोज़ ही कहते थे कि आज निकल आएगा, कल निकल आएगा, लेकिन 17 दिन बीत गए. हमने तो आज दीवाली मनाई है. बेटा सुरक्षित निकल आया, अब नहीं भेजेंगे इतनी ख़तरनाक जगह."

मंजीत का सिर चूमते उनके पिता

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अपने बेटे के सुरंग में फंसने की ख़बर मिलने के बाद जेवर बेचकर मंजीत के पिता सिलक्यारा चले गए. पिछले कई दिनों से वे वहीं हैं.

मंजीत के सुरंग से सुरक्षित बाहर निकलने के बाद सामने आई एक तस्वीर में उनके पिता अपने बेटे का सिर चूमते दिख रहे हैं.

बेहद सुकून देने वाले उस पल को उत्तराखंड सीएम पीएस धामी और केंद्रीय मंत्री वीके सिंह भी निहारते दिख रहे हैं.

अनिल बेदिया के पिता चरकू बेदिया

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झारखंड के इस गांव में 17 दिन बाद लौटी ख़ुशी

उधर झारखंड के रांची ज़िले के खीराबेड़ा गांव में 17 दिनों के बाद खुशी लौटी है.

ओरमांझी प्रखंड के इस गांव के तीन लड़के राजेन्द्र बेदिया, अनिल बेदिया और सुखराम बेदिया, उत्तरकाशी में हुए टनल हादसे से सुरक्षित निकल गए हैं.

इस ख़बर से गांव वालों ने राहत की सांस ली है. लोग अब इन तीनों के गांव लौटने का इंतज़ार कर रहे हैं.

मंगलवार की रात आठ से नौ बजे के बीच गांव वालों को टनल हादसे में फंसे 41 मजदूरों के सुरक्षित निकल जाने की ख़बर मिली.

उसके बाद रात में ही और बुधवार की सुबह भी, लोगों ने पटाखे छोड़कर और एक दूसरे का मुंह मीठा कराकर खुशियां मनाईं.

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