महबूबुल हक़ कौन हैं जिन पर असम के सीएम हिमंत लगा चुके हैं 'बाढ़ जिहाद' के आरोप

    • Author, दिलीप कुमार शर्मा
    • पदनाम, गुवाहाटी से बीबीसी हिंदी के लिए

असम पुलिस ने यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी मेघालय (यूएसटीएम) के मालिक महबूबुल हक़ को गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया है.

महबूबुल हक़ साल 2011 में मेघालय के री-भोई ज़िले में स्थापित हुई इस प्राइवेट यूनिवर्सिटी 'यूएसटीएम' के चांसलर भी हैं.

असम पुलिस की स्पेशल टास्क फ़ोर्स ने हक़ को शनिवार तड़के गुवाहाटी में उनके आवास से गिरफ़्तार किया था. महबूबुल हक़ की गिरफ़्तारी असम के श्रीभूमि में एजुकेशन रिसर्च एंड डेवलपमेंट फ़ाउंडेशन (ईआरडीएफ़) की ओर से संचालित सेंट्रल पब्लिक स्कूल की परीक्षा में कदाचार के आरोपों के बाद हुई है.

इस फ़ाउंडेशन के अध्यक्ष महबूबुल हक़ हैं, जिसके अंतर्गत दो स्कूल और यूएसटीएम चलते हैं. इसके अलावा हक़ ने पिछले साल पूर्वोत्तर का पहला निजी मेडिकल कॉलेज भी शुरू किया है.

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दरअसल शुक्रवार को श्रीभूमि ज़िले के पथारकांदी स्थित सेंट्रल पब्लिक स्कूल में सीबीएसई बोर्ड के तहत 12वीं की परीक्षा चल रही थी. लेकिन परीक्षा ख़त्म होने के बाद कुछ छात्रों ने हंगामा शुरू कर दिया.

पथारकांदी थाना प्रभारी सोमेश्वर कोंवर के अनुसार शुक्रवार को सेंट्रल पब्लिक स्कूल में सीबीएसई की 12वीं कक्षा की फ़िज़िक्स की परीक्षा के दौरान क़ानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो गई थी.

पुलिस ने यूएसटीएम के चांसलर और सेंट्रल पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल समेत कुल छह लोगों के ख़िलाफ़ एक मामला दर्ज किया है. फ़िलहाल इन सभी लोगों को ज़िला अदालत ने जेल भेज दिया है.

श्रीभूमि ज़िले में तैनात एक पुलिस अधिकारी के अनुसार कुछ छात्रों ने दावा किया कि वे पूरे समय यूएसटीएम में क्लास कर रहे थे.

पुलिस का कहना है कि वे अन्य ज़िलों से इस केंद्र में परीक्षा देने इसलिए आए थे, क्योंकि उन्हें आश्वासन दिया गया था कि यहाँ केंद्र मिलने के बाद वे आसानी से परीक्षा पास कर लेंगे.

इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर 209 छात्रों की एक सूची साझा करते हुए लिखा, "ये उन छात्रों के नाम हैं, जिन्हें यूएसटीएम के मालिक महबूबुल हक़ ने सीबीएसई परीक्षा में ज़्यादा अंक दिलाने का वादा किया था."

उन्होंने लिखा, "असम पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है और मामला दर्ज कर लिया गया है. यह एक गंभीर मामला है और हम सभी संबंधित पक्षों से सहयोग की अपेक्षा करते हैं."

सीएम ने महबूबुल हक़ पर लगाए थे 'बाढ़ जिहाद' के आरोप

महबूबुल हक़ वही शख़्स हैं, जिन पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कुछ महीने पहले 'बाढ़ जिहाद' के आरोप लगाए थे.

मुख्यमंत्री ने हक़ पर आरोप लगाया था कि उन्होंने पड़ोसी राज्य मेघालय की पहाड़ियों को काटकर यूएसटीएम का विशाल परिसर बनाकर असम के ख़िलाफ़ 'बाढ़ जिहाद' छेड़ा है.

इसके अलावा सीएम हिमंत ने बीते अगस्त में कहा था कि यूएसटीएम से स्नातक करने वाले छात्र असम सरकार की नौकरी के लिए पात्र नहीं होंगे.

बीते कई महीनों से मुख्यमंत्री ने यूएसटीएम और इसके संस्थापक हक़ को लेकर कई बयान दिए हैं.

उन्होंने यूएसटीएम पर यहाँ तक आरोप लगाया था कि यह संस्थान फ़र्ज़ी डिग्री और प्रमाण पत्र जारी करने में लिप्त है और पीएचडी की डिग्री भी बिना उचित परीक्षा के बेची जा रही हैं.

सीएम ने महबूबुल हक़ को 'फ़्रॉड' बताते हुए उन पर फ़र्जी तरीक़े से ओबीसी प्रमाण पत्र हासिल करने का आरोप भी लगाया है.

दूसरी ओर मेघालय सरकार हमेशा इस प्राइवेट यूनिवर्सिटी के साथ खड़ी नज़र आई है.

'बाढ़ जिहाद' की बात जब सामने आई थी, तो मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने कहा था कि यूएसटीएम राज्य के प्रमुख शिक्षा संस्थानों में से एक है और ये बहुत बढ़िया काम कर रहा है.

मेघालय के मुख्य सचिव डोनाल्ड पी वाहलांग ने बीते गुरुवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा था, "यूएसटीएम एक स्टेट यूनिवर्सिटी है. यह मेघालय राज्य की विधानसभा द्वारा अधिकृत है. इसकी डिग्री को यूजीसी और मेडिकल काउंसिल से मान्यता प्राप्त है. इसलिए कोई सवाल ही नहीं है कि यह फ़र्ज़ी विश्वविद्यालय है."

ऐसे में सवाल उठते हैं कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा आख़िर किस वजह से महबूबुल हक़ के ख़िलाफ़ एक के बाद एक आरोप लगाते रहे हैं?

इन सबके पीछे क्या वजह है?

पूर्वोत्तर राज्यों में पिछले कई दशकों से पत्रकारिता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार अनिरबन रॉय कहते हैं, "बीते कुछ महीनों से जिस कदर सीएम निजी तौर पर यूएसटीएम और इसके संस्थापक महबूबुल हक़ के ख़िलाफ़ बोलते रहे हैं, उसके पीछे कुछ तो कहानी है."

अनिरबन रॉय कहते हैं, "जिस तरह देर रात एसटीएफ़ को भेजकर एक विश्वविद्यालय के चांसलर को गिरफ़्तार किया गया है, इससे लोगों में सरकार को लेकर एक ग़लत मैसेज गया है. ऐसा लग रहा है कि हक़ कोई उग्रवादी हैं. एसटीएफ़ का उपयोग बड़े गंभीर मामले में किया जाता है."

"यूएसटीएम एक उच्च शिक्षण संस्थान है, लिहाज़ा एक पढ़े-लिखे सीएम को ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए जिससे छात्रों का शैक्षिक करियर ही दाँव पर लग जाए. अगर संस्थान में कुछ ग़ैर-क़ानूनी काम हो रहा है तो सीएम को उसकी जाँच करानी चाहिए. बिना किसी जाँच-पड़ताल के किसी पर 'बाढ़ जिहाद' का आरोप कैसे लगाया जा सकता है?"

विवादों में रहे हैं मुख्यमंत्री के कई फ़ैसले

दरअसल साल 2021 में राज्य के मुख्यमंत्री बनने के बाद से हिमंत बिस्वा सरमा के कुछ फ़ैसले काफ़ी विवादों में रहे हैं.

आरोप है कि असम में बंगाली मूल के मुसलमान मुख्यमंत्री हिमंत के 'सॉफ़्ट टारगेट' रहे हैं. फिर चाहे बात मुस्लिम समुदाय में बाल विवाह की हो या बहुपत्नी से जुड़ा मसला हो. सीएम हिमंत कार्रवाई करने के साथ ही मुद्दे पर बढ़-चढ़कर बयानबाज़ी करते रहे हैं.

कांग्रेस से बीजेपी में आए हिमंत ने मुख्यमंत्री बनने के बाद असम विधानसभा में जुमे की नमाज़ के लिए तीन घंटे के ब्रेक को ख़त्म कर दिया. उसके बाद हिमंत सरकार ने बंगाली मूल के मुसलमानों से अलग कर गोरिया, मोरिया, जोलाह, देसी और सैयद समुदाय को 'स्वदेशी मुसलमान' घोषित किया.

वहीं उन्होंने 'असम मुस्लिम मैरिज बिल' पारित किया, जिसके बाद मुस्लिमों को मौलवी के पास शादी का रजिस्ट्रेशन कराना ज़रूरी नहीं रहा.

असम में विवाह और तलाक़ का सरकारी तरीक़े से पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है. दूसरी ओर सरकारी सहायता प्राप्त क़रीब 1200 मदरसों को सरकारी स्कूल में बदल दिया गया.

'द शिलांग टाइम्स' की संपादक पेट्रीसिया मुखिम का कहना है, "यूएसटीम में ज़्यादातर छात्र और शिक्षक असम से हैं. शायद यह बात सीएम हिमंत को ठीक नहीं लग रही होगी या फिर उनका और कोई मक़सद होगा."

"अगर 'यूएसटीएम' यूजीसी के नियमों के अनुसार चल रहा है, तो बाक़ी की चीज़ें उन्हें परेशान करने के लिए की जा रही हैं. असम में बीजेपी मुसलमानों के ख़िलाफ़ अपनी राजनीति करती रही है. ख़ासकर सीएम हिमंत मुसलमानों के ख़िलाफ़ खुलकर बोलते हैं. इन सबके बीच बंगाली मूल के मुसलमानों को ही टारगेट किया जा रहा है."

उनका कहना है, "अगर एक संस्थान नियमों के तहत सही तरीक़े से चल रहा है, तो एक मुख्यमंत्री को 'बाढ़ जिहाद' जैसी बातें नहीं करनी चाहिए. सीएम सरमा फ़ेक डिग्री का आरोप लगाते हैं, लेकिन जाँच नहीं करते. इससे पता चलता है कि उनका मक़सद कुछ और है."

दिलचस्प बात तो ये है कि 2021 में यूएसटीएम के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे.

कांग्रेस का आरोप और बीजेपी का जवाब

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद रिपुन बोरा सीएम हिमंत पर आरोप लगाते हैं कि असम को देश के पाँच सबसे अच्छे राज्यों में शामिल करने के बजाय हिमंत बिस्वा सरमा अपने परिवार को देश के पाँच सबसे अमीर परिवारों में शामिल करने में व्यस्त हैं.

यूएसटीएम के संस्थापक की गिरफ़्तारी पर रिपुन बोरा ने कहा, "गुवाहाटी में सालों से बाढ़ आती रही है लेकिन सीएम ने पिछले साल बाढ़ का पूरा आरोप यूएसटीएम पर मढ़ दिया. लिहाज़ा असम के मुख्यमंत्री अपने निहित स्वार्थों के लिए उत्तर पूर्व के प्रसिद्ध शिक्षाविद महबूबुल हक़ पर हमला कर रहे हैं."

असम प्रदेश बीजेपी के वरिष्ठ नेता विजय कुमार गुप्ता इस मामले में पार्टी पर लग रहे आरोपों का जवाब देते हुए कहते हैं, "यूएसटीएम के प्रमुख महबूबुल हक़ के ख़िलाफ़ उनके स्कूल में परीक्षा देने गए छात्रों ने ही शिकायत की है और उसी आधार पर मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई है."

"अगर कोई ग़ैर-क़ानूनी काम करेगा तो पुलिस उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई करेगी, इसलिए इस मामले से बीजेपी का कोई लेना-देना नहीं है. अब मामला कोर्ट के सामने है. ट्रायल होगा और सबकुछ साफ़ हो जाएगा."

बंगाली मूल के मुसलमानों को निशाना बनाने के सवाल का जवाब देते हुए बीजेपी नेता कहते हैं, "सरकार कोई भी हिंदुत्व की राजनीति नहीं करती. सुशासन और निष्पक्षता ही हमारी सरकार का लक्ष्य है. किसी भी अपराध में अगर कोई पकड़ा जाता है तो अभियुक्त की जाति-धर्म देखकर बात नहीं होनी चाहिए."

असम के वरिष्ठ पत्रकार नव कुमार ठाकुरिया यूएसटीएम के चांसलर महबूबुल हक़ की गिरफ़्तारी को एक आश्चर्यचकित घटना मानते हैं.

लेकिन वो साथ ही इस घटना में बीजेपी पर मुसलमानों को निशाना बनाने के आरोपों वाली राजनीति करने की बात से इनकार करते हैं.

वो कहते हैं, "ये हैरान करने वाली बात है कि स्कूली परीक्षा के स्तर पर हुई कथित गड़बड़ी में एक चांसलर को गिरफ़्तार किया गया है. चांसलर एक बड़ा पद होता है. सरकारी यूनिवर्सिटी में चांसलर राज्यपाल होते हैं. इसलिए यह मामला अब गंभीर जाँच का विषय है. क्योंकि हाल ही में नीट परीक्षा को लेकर देश में एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई थी."

ठाकुरिया कहते हैं, "इस घटना को लेकर अगर कोई बीजेपी पर मुसलमान विरोधी राजनीति करने के आरोप लगा रहा है, तो वो सही नहीं है. क्योंकि राजनीतिक दृष्टि से तो बीजेपी मुस्लिम समर्थक नज़र आती है."

"पीएम नरेंद्र मोदी दरगाह पर चादर चढ़ाते हैं. अगर बीजेपी सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों को देखें, तो सबसे ज़्यादा मुसलमान हैं. मुफ़्त राशन से लेकर आवास योजना और शौचालय तक, सबसे ज़्यादा फ़ायदा मुसलमानों को मिला है. लिहाज़ा यह कहना ग़लत होगा कि इस मामले में बीजेपी किसी तरह की कोई राजनीति कर रही है."

क्या कहते हैं परिजन?

महबूबुल हक़ की गिरफ़्तारी को लेकर उनके परिवार के एक व्यक्ति ने बीबीसी से कहा कि बीते कुछ दिनों से उनका परिवार काफ़ी डरा हुआ है.

हक़ के एक क़रीबी ने बताया, "जिस यूएसटीएम को सीएम हिमंत फ़र्ज़ी बता रहे हैं, उसी संस्थान को मेघालय सरकार सही बता रही है. इस तरह हम लोगों को निशाना बनाने का क्या मतलब है? महबूबुल हक़ ने अपने जीवन में बहुत संघर्ष कर इस शिक्षा संस्थान को खड़ा किया है, लेकिन सीएम उनके पीछे पड़े हुए हैं."

सेंट्रल पब्लिक स्कूल में छात्रों के हंगामे के बारे में हक़ के रिश्तेदार ने कहा कि ईआरडीएफ़ के तहत विज़न 50 नाम से छात्रों को परीक्षा की तैयारी करवाई जाती है.

उन्होंने कहा, "यह पहली दफ़ा नहीं था पिछले कई सालों से छात्र इस सेंटर में परीक्षा देने आ रहे हैं. लेकिन इस बार कुछ छात्रों को भड़का कर यह हंगामा खड़ा कर दिया गया. जब इस मामले की जाँच होगी, तो सब कुछ साफ़ हो जाएगा."

महबूबुल हक़ की गिरफ़्तारी के बाद सीएम सरमा ने कहा, "ग्वालपाड़ा, नगांव और कामरूप ज़िलों के 200 से ज़्यादा छात्रों को 30 से ज़्यादा नंबर देने का वादा करके पथारकांदी ले जाया जाता है. जब उन्हें मदद नहीं मिली, तो उन्होंने एक रैकेट बनाया और पूरा गिरोह सामने आ गया और ये सिर्फ़ सीबीएसई तक सीमित नहीं है, ये मेडिकल एंट्रेंस तक भी फैला हुआ है और पूरा फ़र्ज़ीवाड़ा सामने आ जाएगा."

कौन हैं महबूबुल हक़?

असम के श्रीभूमि (पहले करीमगंज) ज़िले के पथारकांदी के बरचर्रा गाँव के महबूबुल हक़ ने शुरुआती पढ़ाई गाँव में करने के बाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पहले बीएससी की.

फिर इसी यूनिवर्सिटी से साल 2000 में प्रथम श्रेणी में दूसरा स्थान हासिल करके कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स की डिग्री ली.

पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें देश-विदेश में बहुराष्ट्रीय कंपनियों से आकर्षक नौकरियों के प्रस्ताव मिले थे, लेकिन कंप्यूटर विज्ञान में स्नातकोत्तर पूरा करने के बाद वे वापस असम लौट आए और एक शैक्षिक उद्यमी के रूप में अपने करियर की शुरुआत की.

अपने कई इंटरव्यू में हक़ ने दावा किया कि 2001 में मात्र एक कंप्यूटर और चार छात्रों के साथ केवल 85 रुपये की राशि लेकर उन्होंने मणिपाल ग्रुप के तहत एक कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया था.

केवल पाँच वर्षों के भीतर ये केंद्र काफ़ी बड़ा बन गया है.

अब तक हक़ ने यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी मेघालय के अलावा क्षेत्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, मेघालय में यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ़ लॉ एंड रिसर्च, स्कूल ऑफ़ बिज़नेस साइंस, यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ़ फार्मास्युटिकल साइंसेज़,पीए संगमा इंटरनेशनल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल समेत कई डिग्री कॉलेज और स्कूलों की स्थापना कर चुके हैं.

यूएसटीएम को भारत सरकार के राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ़्रेमवर्क 2023 के 9वें संस्करण में भारत के शीर्ष 200 यूनिवर्सिटी में शामिल किया गया था.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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