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हिमन्त बिस्व सरमा ने ब्राह्मण-शूद्र वाली पोस्ट डिलीट कर अब कहा- सॉरी
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने अपने एक ट्वीट के लिए माफ़ी मांगी है. हालांकि उस ट्वीट को उन्होंने अब डिलीट कर दिया है.
डिलीट किए ट्वीट में लिखा था कि ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्यों की सेवा करना शूद्रों का स्वाभाविक कर्म है.
मंगलवार सुबह किए गए इस पोस्ट को हटाने के बाद गुरुवार को उन्होंने इसके लिए माफ़ी मांगी.
गुरुवार को उन्होंने इस बारे में सफ़ाई भी दी और कहा कि उनकी टीम के सदस्यों ने हाल में ग़लत अनुवाद वाली एक पोस्ट डाली थी.
हालांकि विपक्षी दलों के नेताओं ने इसे लेकर उन पर निशाना साधा और कहा कि हिंदुत्व समानता, बंधुत्व और न्याय का विरोधी है.
क्या बोले मुख्यमंत्री?
गुरुवार शाम हिमन्त बिस्व सरमा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट हटा रहे हैं.
उन्होंने लिखा, "हाल ही में मेरी टीम के एक सदस्य ने भगवद्गीता के 18वें अध्याय से 44वां श्लोक ग़लत अनुवाद के साथ पोस्ट किया था."
उन्होंने लिखा, "जैसे ही मुझे ग़लती का पता चला, मैंने पोस्ट को तुरंत हटा लिया. अगर हटाई गई पोस्ट से किसी को ठेस पहुंची है, तो मैं उससे दिल से माफ़ी मांगता हूँ."
"मैं नियमित तौर पर हर सुबह अपने सोशल मीडिया हैंडल पर भगवद्गीता का एक श्लोक अपलोड करता हूँ. अब तक, मैंने 668 श्लोक पोस्ट किए हैं."
उन्होंने लिखा, "महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव के नेतृत्व में हुए सुधार आंदोलन की वजह से असम राज्य जातिविहीन समाज की एक आदर्श तस्वीर दिखाता है."
हटाई गई पोस्ट में क्या था?
26 दिसंबर की सुबह हिमन्त बिस्व सरमा ने श्रीमदभगवद्गीता का एक श्लोक अपनो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था.
उन्होंने एक तस्वीर शेयर की थी जिस पर कृष्ण और अर्जुन की तस्वीर बनी थी और गीता का हवाला देकर एक श्लोक लिखा था.
इसमें लिखा था, "खेती गाय पालन और व्यापार- ये वैश्यों के अंतर्निहित और स्वाभाविक कर्म हैं. ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य ये तीन वर्णों की सेवा करना शूद्र का भी स्वाभाविक कर्म है."
इसे शेयर करते हुए हिमन्त बिस्व सरमा ने लिखा, "भगवान श्रीकृष्ण स्वयं वैश्यों और शूद्रों के स्वाभाविक कर्मों का वर्णन करते हैं."
हो रही आलोचना
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अपने सोशल मीडिया पर कहा कि हटाए गए पोस्ट में असम के मुख्यमंत्री ने समाज को लेकर अपने नज़रिए के बारे में लिखा था.
उन्होंने लिखा, "संवैधानिक पद पर रहते हुए आपने शपथ ली है कि सभी नागरिकों के साथ आप समान व्यवहार करेंगे. ये उस दुर्भाग्यपूर्ण क्रूरता में दिखता है, जिसका सामना बीते कुछ सालों से असम में रहने वाले मुसलमान कर रहे हैं. हिंदुत्व स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और न्याय का विरोधी है."
हिमन्त बिस्व सरमा विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं. बीते साल दिसंबर में हिमन्त बिस्व सरमा ने कहा था कि वो मुसलमानों के वोट की उम्मीद नहीं करते क्योंकि वो वैसे भी बीजेपी के लिए वोट नहीं करते.
बीते साल असम सरकार ने बाल विवाह के ख़िलाफ़ चलाई अपनी मुहिम में दो हज़ार से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया था.
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री कार्यालय को टैग करते हुए पूछा कि "क्या आम हिमन्त बिस्व सरमा के इस बयान से सहमत हैं?"
उन्होंने लिखा, "और अगर आप उनसे कुछ कहेंगे तो वो आपके पास पुलिस भेज देंगे. लेकिन इस तरह की बेतुकी टिप्पणी को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता."
कम्युनिस्ट पार्टी ने हिमन्त बिस्व सरमा की पोस्ट की आलोचना करते हुए लिखा ये बीजेपी की मनुवादी विचारधारा है, जिसे साफ तौर पर देखा जा सकता है.
बहुजन लाइव्स मैटर नाम के एक ट्वीटर हैंडल ने लिखा, "हिमन्त बिस्व सरमा ने शूद्र जाति को अपमानित करने वाला जातिवादी ट्वीट पोस्ट किया. इसमें समाज के मेहनतकश और कारीगर वर्ग के बारे में उन्होंने कहा कि उनका काम ब्राह्मणों, क्षत्रियों और वैश्यों की सेवा करना है."
मास्टर वीजेएन नाम के एक हैंडल ने लिखा, "इस जातिवाद भरे और असंवैधानिक ट्वीट को लेकर कोई क़दम नहीं उठाया जाएगा. इसे लेकर बीजेपी के अनुसूचित जाति के वर्गों के वोटर भी नाराज़गी नहीं जताएंगे क्योंकि अब देश के लोगों को इस कदर ब्रेनवॉश कर दिया गया है."
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