कर्नाटकः स्कूली बच्चों के पानी में कीटनाशक मिलाए जाने की घटना के बाद लाए गए नए नियम

कर्नाटक का एक सरकारी स्कूल

इमेज स्रोत, AFP via Getty Images

इमेज कैप्शन, कर्नाटक के एक सरकारी स्कूल की पानी की टंकी में श्रीराम सेना के सदस्य ने कीटनाशक मिला दिया था (सांकेतिक तस्वीर)
    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, बेंगलुरु से

स्कूल के बच्चों के लिए पीने के पानी में कीटनाशक मिलाने की घटना के बाद कर्नाटक सरकार ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देते हुए 25 बिंदुओं वाले एसओपी यानी मानक संचालन प्रक्रिया जारी की है.

क़रीब तीन हफ्ते पुरानी यह घटना उस वक्त सुर्खियों में आई जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने ट्वीट कर आरोप लगाया कि श्रीराम सेना के एक तालुका अध्यक्ष ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर स्कूली बच्चों के पीने के पानी में ज़हर मिला दिया.

ये मामला बेलगावी ज़िले के साउंदत्ती तालुका के हूलीकट्टी गांव में सरकारी स्कूल का है जहां पानी की टंकी में कीटनाशक मिला दिया गया था. घटना के बाद 11 बच्चों को बेलगावी के अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया.

आरोप है कि श्रीराम सेना के तालुकाध्यक्ष सागर पाटिल ने अपने साथियों के साथ मिलकर सरकारी स्कूल की छत पर बनी पानी की टंकी में तीन तरह के कीटनाशक मिला दिए थे.

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

बेलगावी के एसपी भीमाशंकर गुलेड ने बीबीसी हिंदी को बताया, "अगर इस पानी को पिया जाता तो लोगों की मौत हो सकती थी. यह इतना तीखा था कि बच्चों ने इसे थूक दिया. अच्छा हुआ कि उन्होंने इसे निगला नहीं."

उन्होंने आगे बताया, "यह सुनिश्चित करने के लिए कि उनके पेट में कुछ न गया हो, उन्हें अस्पताल ले जाया गया क्योंकि वे बच्चे बहुत असहज महसूस कर रहे थे."

अस्पताल में जिन बच्चों का इलाज किया गया, उनकी उम्र आठ से 10 साल के बीच थी. इनमें छह लड़कियां और पांच लड़के थे.

पुलिस जांच में क्या पता चला?

कीटनाशक

इमेज स्रोत, AFP via Getty Images

इमेज कैप्शन, प्राथमिक जांच में पता चला है कि पानी की टंकी में तीन तरह के कीटनाशक मिलाए गए थे
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

पुलिस को सागर पाटिल ने कथित तौर पर जो वजह बताई वो ये थी कि बच्चों की मौत के कारण स्कूल के हेडमास्टर को हटाना पड़ता.

पुलिस अधिकारी ने कहा, "हेडमास्टर सुलेमान गोरिनाइक ऐसे व्यक्ति थे जो पारंपरिक कपड़े पहनते थे और मुस्लिम समुदाय से आते थे."

क्या अभियुक्त की हेडमास्टर से कोई दुश्मनी थी? क्या उनके बीच कोई कहासुनी हुई थी या हेडमास्टर ने श्रीराम सेना के नेता के किसी क़रीबी के साथ दुर्व्यवहार किया था?

इन सवालों पर एसपी भीमाशंकर गुलेड ने कहा, "हेडमास्टर पिछले 13 साल से स्कूल में काम कर रहे थे. उनके ख़िलाफ़ किसी भी तरह की कोई शिकायत नहीं थी. कोई ठोस वजह नहीं है. यह उनकी मानसिकता की बात है."

पुलिस का कहना है कि बच्चों को अस्पताल ले जाने के तुरंत बाद की गई प्रारंभिक जांच में पाया गया कि पीने के पानी की टंकी को दूषित करने की कोशिश 'जानबूझकर' की गई थी. इसके बाद सागर पाटिल (उम्र 29 वर्ष), कृष्णा मदार (उम्र 26 वर्ष) और मगनगौड़ा (उम्र 27 वर्ष) को गिरफ़्तार कर लिया गया.

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि सागर पाटिल ने कथित तौर पर कृष्णा मदार को कीटनाशक खरीदने के लिए ब्लैकमेल किया था.

पुलिस अधिकारी के अनुसार, कृष्णा मदार का दूसरी जाति की महिला के साथ कथित प्रेम संबंध इस ब्लैकमेल की वजह था.

पुलिस ने सागर पाटिल और उसके दोनों साथियों के ख़िलाफ़ गैर-इरादतन हत्या और उकसाने का मामला दर्ज किया है. वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं.

इस तरह का एक मामला शिवमोगा में भी देखने को मिला था. यहां शरारती तत्वों ने स्कूल के बच्चों के लिए बनी पीने की पानी की टंकी में ज़हर मिलाने की कोशिश की थी.

स्कूलों के लिए नए नियम

कर्नाटक स्कूल

इमेज स्रोत, AFP via Getty Images

इमेज कैप्शन, कर्नाटक के स्कूलों में सुरक्षा के नए नियम लागू किए गए हैं (सांकेतिक तस्वीर)

स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने एक निर्देश में सभी स्कूलों को प्रतिदिन स्कूल परिसर का निरीक्षण करने का निर्देश दिया है.

इसमें पीने के पानी में रसायन या बदबू की जांच, टंकियों की नियमित सफाई सुनिश्चित करना और बच्चों को साफ़ शौचालय की सुविधा देना शामिल है. इन नियमों के तहत स्कूलों में पानी की टंकियों को ताला लगाकर सुरक्षित रखना भी अनिवार्य किया गया है.

नियमों के अनुसार हर दिन इन कार्यों की जांच, पुष्टि और दस्तावेज़ीकरण स्कूल के हेडमास्टर द्वारा किया जाएगा और इसे विभाग के पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा.

सुरक्षा दिशानिर्देशों में स्कूल परिसर और उसके आसपास की जगहें जैसे प्रवेश द्वार, कक्ष आदि शामिल हैं. आपात स्थिति से निपटने के लिए स्कूलों को प्राथमिक उपचार किट आदि जैसी सुविधाएं भी रखनी होंगी.

साथ ही ये भी कहा गया है कि स्कूल परिसर के ऊपर से ढीले लटकते केबल और बिजली के तार नहीं गुज़रने चाहिए, स्कूलों में मिलने वाले मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता पर नज़र रखी जानी चाहिए, गैस सिलेंडर के रिसाव को रोकने के उपाय अपनाए जाने चाहिए और राशन का भी निरीक्षण किया जाना चाहिए.

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने क्या कहा

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया

बच्चों के पीने के पानी में कीटनाशक मिलाने की घटना को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने "धार्मिक नफ़रत और कट्टरपंथ से प्रेरित घृणित कार्य" बताया है.

उन्होंने कहा, "धार्मिक कट्टरपंथ और सांप्रदायिक नफ़रत घृणित घटनाओं को जन्म दे सकते हैं. यह घटना इसका प्रमाण है, जिसमें मासूम बच्चों को मारने की संभावना थी. शरणा (बासवन्ना) की इस भूमि पर, जिन्होंने कहा था कि 'करुणा ही धर्म की जड़ है', वहां ऐसी क्रूरता और नफ़रत कैसे पैदा हो सकती है? इस समय भी मैं इस पर भरोसा नहीं कर पा रहा हूं."

सिद्धारमैया ने बीजेपी नेताओं और दक्षिणपंथी संगठनों पर भी तीखा हमला बोला और कहा कि "जो लोग राजनीतिक लाभ के लिए धर्म के नाम पर नफ़रत फैलाते हैं उन्हें आत्ममंथन करना चाहिए."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित