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तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार के पाला बदल पर कहा- 'खेला बाकी है', क्या हैं मायने
राष्ट्रीय जनता दल नेता और बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार के एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से कुछ मिनट पहले राज्य के बदले सियासी घटनाक्रम पर पहली प्रतिक्रिया दी और कहा, ‘अभी खेल शुरू हुआ है, खेला अभी बाकी है.’
बिहार में बीते कई दिन से सियासी हलचल जारी थी. नीतीश कुमार के पाला बदलने की अटकलें लगाई जा रही थीं लेकिन इस बीच तेजस्वी यादव चुप थे. वो सार्वजनिक बयान देने से बच रहे थे.
नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के ठीक पहले तेजस्वी यादव ने चुप्पी तोड़ी. उन्होंने महागठबंधन से बाहर निकली नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइडेट को लेकर एक बड़ा दावा किया.
तेजस्वी यादव ने कहा, "मैं जो कहता हूं वो करता हूं. आप लिख के ले लीजिए, जनता दल यूनाइटेड जो पार्टी है 2024 में ही ख़त्म हो जाएगी.”
तेजस्वी यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल बिहार विधानसभा की सबसे बड़ी पार्टी है. 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में राष्ट्रीय जनता दल के 79 विधायक हैं. कांग्रेस के 19 और कम्युनिस्ट पार्टियों के 16 विधायकों का भी समर्थन उनके साथ है.
बिहार में बहुमत के लिए 122 विधायकों के समर्थन की दरकार है. नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के 45 और बीजेपी के 78 विधायक हैं. हिंदुस्तानी आवामी मोर्चा (सेक्युलर) के चार विधायकों का समर्थन भी उनके साथ है.
यानी बहुमत की लकीर बहुत बारीक है.
ये दूसरा मौका है, जब नीतीश कुमार ने महागठबंधन से अलग होकर बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए का हाथ थामा है.
साल 2015 में जेडीयू और राष्ट्रीय जनता दल ने मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा था और बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी. तब ये गठजोड़ 2017 में टूट गया था.
इस बार नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की पार्टी साल 2022 में एक साथ आईं थीं. ये साथ करीब 17 महीने चला.
तेजस्वी यादव ने कहा कि अब ‘17 साल (नीतीश जब से सीएम हैं) बनाम 17 महीने ’ की तुलना होगी.
तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार को 'थका हुआ मुख्यमंत्री' बताया लेकिन कहा कि वो 'व्यक्तिगत टिप्पणी' नहीं करेंगे.
नीतीश कुमार ने रविवार शाम एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. वो 9वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बने हैं. रविवार सुबह राज्यपाल से मुलाक़ात कर उन्होंने अपना इस्तीफ़ा सौंपा था.
महागठबंधन में दरार के संकेत बीते कुछ महीने से देखे जा रहे थे. मीडिया रिपोर्टों में बीजेपी के नेताओं के हवाले से लगातार दावा किया जा रहा था कि लालू यादव अपने बेटे तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं.
जनता दल यूनाइडेट में जब नीतीश कुमार अपने करीबी राजीव रंजन उर्फ़ ललन सिंह की जगह पार्टी अध्यक्ष बने तब भी कयास लगाए गए.
लेकिन, नीतीश कुमार पाला बदल सकते हैं, ऐसी अटकलों का दौर तभी शुरू हो गया था, जब कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न दिए जाने के बाद एक कार्यक्रम में नीतीश कुमार ने परोक्ष रूप से ‘परिवारवाद’ पर टिप्पणी की.
इसे राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव के परिवार पर 'निशाना' माना गया था.
इसके जवाब में लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य के ट्वीट ने राजनीतिक पारे को और चढ़ा दिया. उन्होंने अपने ट्वीट में नीतीश के बार बार पाला बदलने को लेकर तंज कसा था. बाद में ये ट्वीट डिलीट कर दिया.
बीते दो दिनों से दोनों पार्टियों के नेताओं के बीच बयानबाज़ी जारी है लेकिन लालू यादव और तेजस्वी यादव का कोई बयान सामने नहीं आया था. तेजस्वी यादव ने रविवार शाम पहला बयान दिया.
तेजस्वी यादव का सवाल- 'कितने दिन चलेगी सरकार?'
रविवार को महागठबंधन की सरकार गिरने के बाद समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में पिछली सरकार में डिप्टी सीएम रहे तेजस्वी यादव ने कहा कि ‘अभी खेला बाकी है.’
उन्होंने कहा, “स्पष्ट रूप से कह देना चाहता हूं. अभी खेल शुरू हुआ है, खेल अभी बाकी है. मैं जो कहता हूं वो करता हूं. आप लिख के ले लीजिए, जनता दल यूनाइटेड जो पार्टी है 2024 में ही ख़त्म हो जाएगी.”
नीतीश कुमार को लेकर उन्होंने कहा कि ‘वो शपथ ग्रहण कर लें लेकिन ये सरकार कितने दिन चलेगी ये कोई नहीं जानता. बीजेपी को हमारी शुभकामना है.’
तेजस्वी ने कहा, "हमने एक थके हुए मुख्यमंत्री से इतना काम कराया. 26 जनवरी के अभिभाषण में खुद राज्यपाल ने साढ़े तीन लाख से अधिक युवाओं को नौकरी देने की बात की है."
उन्होंने कहा, “बिहार में यह इतिहास है कि एक लाख नौजवानों को नियुक्ति पत्र बांटे गए. यह हमने करवाया. स्वास्थ्य विभाग में एक लाख से अधिक भर्तियां करने की फ़ाइल पिछले दो कैबिनेट बैठक में आने ही नहीं दी गई. हम लोग विज़न पर काम कर रहे हैं.”
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि तेजस्वी बिना सीधा हमला बोले जेडीयू को संदेश देना चाहते हैं और ये भी संदेश देना चाहते हैं कि उनके नेतृत्व में हुए विकास कार्यों और नियुक्तियों से जेडीयू 'असहज' थी.
आरजेडी के खेमे में क्या चल रहा है?
इस समय आरजेडी के बड़े नेता फूंक फूंक कर कदम रख रहे हैं जिसका संकेत उनके नेताओं के बयानों में देखा जा सकता है.
पटना राजभवन में मौजूद बीबीसी संवाददाता चंदन जजवाड़े के अनुसार, आरजेडी के क़रीबी सूत्रों ने बताया कि शनिवार को विधायकों की बैठक में तेजस्वी यादव ने सबको नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ किसी तरह की बयानबाज़ी न करने की सख़्त हिदायत दी थी.
और इसका असर साफ़ तौर पर दिखा भी.
तेजस्वी की तरह राजद नेता मृत्युंजय तिवारी ने ये ज़रूर कहा, “जेडीयू को खेल शुरू करने दीजिए,खेल ख़त्म हम करेंगे. जनता सबकुछ देख रही है और इसका हिसाब रखेगी. ”
लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ार्म एक्स पर एक कविता पोस्ट कर बिना नाम लिए नीतीश कुमार पर निशाना साधा. तेज प्रताप यादव अपने अलग अंदाज़ के लिए चर्चित रहे हैं.
पार्टी की आधिकारिक लाइन को आरजेडी प्रवक्ता ने रखा.
आरजेडी प्रवक्ता एजाज़ अहमद ने कहा, ''नीतीश कुमार ने अपने स्वार्थ में युवाओं के नौकरी के रोजगार के मामले को धक्का देने और नफ़रत की राजनीति को बढ़ावा देने का काम किया है.''
उन्होंने कहा, ''नौकरी मिलने के बाद बिहार के युवाओं के चेहरों पर जो मुस्कुराहट थी नीतीश ने उसे छीनने की कोशिश की है. नीतीश कुमार ने युवाओं और युवाओं के नेता तेजस्वी यादव की सोच को धक्का पहुंचाने का काम किया है. उन्हें ये बताना चाहिए था कि वो किस कारण, किस स्वार्थ से भारतीय जनता पार्टी के साथ जा रहे हैं.''
उन्होंने कहा, ''यहां ठग और लोभी का गठबंधन तैयार हो रहा है. नौ अगस्त 2022 से पहले नीतीश ने खुद कहा था कि भारतीय जनता पार्टी हमारे अस्तित्व को समाप्त करना चाहती है. हमारी पार्टी को ख़त्म करना चाहती है. हम सभी समाजवादी विचारधारा के लोग मिल कर इस ताक़त का मुकाबला कर सकते हैं. लेकिन आज अपने स्वार्थ में बीजेपी के साथ जा रहे हैं.''
आरजेडी की क्या है रणनीति?
रविवार को सुबह पटना के अख़बारों में पहले पन्ने पर एक विज्ञापन छपा, जिसमें पिछले डेढ़ साल में महागठबंधन की सरकार द्वारा चार लाख से अधिक नौकरियों के लिए उप मुख्यमंत्री रहे तेजस्वी यादव को धन्यवाद दिया गया था.
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस विज्ञापन के माध्यम से राजद नीतीश कुमार की छवि के ऊपर पिछली सरकार के कामों का श्रेय लेने की कोशिश की है.
बार बार पाला बदलने की वजह से नीतीश कुमार की छवि पर असर पड़ा है और राजद अपनी ओर से कोई हड़बड़ी वाला कदम नहीं उठाना चाहती.
शपथ ग्रहण समारोह के बाद सदन की बैठक बुलाई जाएगी और विश्वासमत हासिल करना होगा.
बिहार की राजनीति पर नज़र रखने वालों का ये भी मानना है कि तेजस्वी उस पल का इंतज़ार कर रहे हैं जब विश्वासमत पर बहस होगी.
उधर, कोई भी अंतिम निर्णय लेने के लिए लालू यादव को अधिकृत किया गया है जिससे कयास लगाया जा रहा है कि अभी कई चीजें मोड़ ले सकते हैं.
राजद के करीबी सूत्रों का कहना है कि लालू यादव ने पार्टी विधायकों से कुछ दिन तक पटना में बने रहने और अपना फ़ोन बंद न करने को कहा है.
इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि नीतीश कुमार के फैसले के बाद उपजी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए लालू सक्रिय हैं.
ये देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति क्या करवट लेती है.
कॉपीः संदीप राय
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