माधवी लता: ओवैसी के ख़िलाफ़ हैदराबाद के चुनावी मैदान में उतरीं बीजेपी उम्मीदवार कौन हैं?

माधवी लता

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लोकसभा चुनावों में कुछ सीटों पर सबकी निगाहें होती हैं.

चुनाव के एलान से लेकर चुनावी नतीजे आने तक, ये सीटें अपने उम्मीदवारों की वजह से चर्चा में रहती हैं. ऐसी ही एक लोकसभा सीट हैदराबाद है.

हैदराबाद सीट क़रीब चार दशक से ओवैसी परिवार के पास है. फिलहाल इस सीट से एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी चार बार से सांसद हैं.

इस सीट पर ओवैसी के पिता सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी साल 1984 से 2004 तक सांसद रहे थे. सात विधानसभा सीट वाली हैदराबाद लोकसभा सीट में क़रीब 19 लाख मतदाता हैं.

मगर इन चुनावों में ये सीट बीजेपी की ओर से मैदान में उतरीं उम्मीदवार माधवी लता की वजह से भी चर्चा में हैं.

माधवी लता ने हाल ही में टीवी शो 'आप की अदालत' में एंकर रजत शर्मा से बात की. इस इंटरव्यू में माधवी लता की तारीफ़ करते हुए पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट भी लिखी.

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बीजेपी का टिकट मिलने से पहले माधवी लता के बारे में लोग अपेक्षाकृत कम ही जानते थे. सवाल इस बात पर भी उठे कि बीजेपी ने ओवैसी के ख़िलाफ़ माधवी लता को किन वजहों से चुना?

इस कहानी में हम आपको माधवी लता के बारे में कुछ बातें बताने की कोशिश करेंगे.

माधवी लता कौन हैं?

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रिपोर्ट्स के मुताबिक़, माधवी लता 49 साल की हैं और हैदराबाद की रहने वाली हैं. माधवी के पिता मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस में स्टोर इंचार्ज थे.

माधवी लता को अच्छा वक्ता भी माना जाता है.

माधवी ने हैदराबाद के निज़ाम कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है. वो एमए तक पढ़ी हुई हैं.

माधवी लता भरतनाट्यम डांस की ट्रेनिंग ले चुकी हैं. वो पेंटिंग करती हैं और समाजसेवा में भी सक्रिय रही हैं.

कई वीडियो में वो भजन गाती हुई भी दिखती हैं. माधवी लता एक अस्पताल के प्रशासन में भी हैं.

माधवी के तीन बच्चे भी हैं. इन बच्चों ने स्कूल जाकर पढ़ाई नहीं की है. मगर बेटा-बेटी आईआईटी तक पहुंचे हैं.

बच्चों को घर में पढ़ाने के बारे में समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में माधवी ने कहा, ''हमारी मुख्य ज़रूरत ये थी कि बच्चे कभी रोते हुए स्कूल ना जाएं. मैं 25-30 साल तक टीचर भी रही हूं. मैं बहुत छोटी उम्र से पढ़ा रही हूं. जब 17 साल की थी, तब भी मेरी क्लास में कोई बच्चा रोया नहीं.''

माधवी के पति विश्वनाथ शर्मा ने भी आईआईटी चेन्नई से पढ़ाई की है. माधवी और विश्वनाथ की शादी का किस्सा भी दिलचस्प है. दोनों शादी के एक विज्ञापन के ज़रिए एक-दूसरे से जुड़े थे.

माधवी कहती हैं- मेरी शर्त थी कि शादी करनी है तो सारा खर्च उठाना होगा, तो वो शादी का सारा खर्च करके मुझे लेकर गए.

माधवी कहती हैं, ''मेरा मानना है कि अगर बच्चे फिल्म देखते, खेलते हुए ख़ुश रह सकते हैं. स्कूल सिस्टम बहुत कमर्शिलाइज़ हो चुका है. आप 10वीं क्लास तक रोज़ स्कूल जाते ही रहते हैं. इन 10 सालों में बच्चे क्या बनकर निकलते हैं. प्रोफेशनल डांसर बनकर कोई नहीं निकलता. खेल के क्षेत्र में कुछ नहीं करते. आपको एक प्राइवेट टीचर लगाना पड़ता है.''

वो बोलीं, ''स्कूल जाते हुए आपको इंस्टाग्राम, ड्रग्स मिल जाते हैं. मैंने सोचा कि मेरे बच्चे ऐसा नहीं करेंगे. पहले बच्चे को इंसान बनना तो सिखा दें.''

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मुस्लिम इलाकों में माधवी लता

हैदराबाद में 13 मई को वोट डाले जाएंगे.

हैदराबाद में जो सात सीटें हैं, उनमें सिर्फ़ एक सीट गोशामहल है, जिसके विधायक बीजेपी के टी राजा सिंह हैं. बाकी की सीट पर एआईएमआईएम के विधायक हैं.

ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि बीजेपी ने माधवी लता को टिकट दी तो इससे टी राजा सिंह नाराज़ दिखे.

एक इंटरव्यू में जब टी राजा सिंह से इस बारे में पूछा गया तो वो बोले- ये सिर्फ़ राजनीति की बात नहीं है, महिलाएं कहीं भी आगे आती हैं तो लोगों को दिक़्क़त होती है.

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और माधवी ख़ुद के बारे में दावा करती हैं कि उनकी मुस्लिम महिलाओं के बीच मज़बूत पकड़ है और वो मुस्लिम महिलाओं के लिए काम करती रही हैं.

माधवी लता के एनजीओ की वेबसाइट पर ऐसे ही दावे किए जाते हैं. वेबसाइट के मुताबिक़- माधवी लता स्वास्थ्य, शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं.

माधवी लता 'आप की अदालत' शो में कहती हैं, ''मैं जिन मदरसों में जाती हूं, मेडिकल कैंप करवाती हूं, वहां दवाई देते हैं. ज़रूरत का सामान देते हैं. ये लोग कहते हैं कि आप मदद कर रहे हो पर हमारे मदरसे का नाम नहीं लेना.''

कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि माधवी लता तीन तलाक़ के ख़िलाफ़ भी काफी सक्रिय रही हैं.

बीजेपी ने माधवी लता को क्यों चुना?

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माधवी लता इससे पहले कभी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ी हैं. ऐसे में बीजेपी ने माधवी को टिकट क्यों दिया?

माधवी लता इस बारे में कहती हैं, ''20 साल की समाज सेवा का काम है. 8-10 महीने पहले मैंने हैदराबाद लोकसभा क्षेत्र में फ्री में 1008 नॉर्मल डिलिवरी करवाने का ऐलान किया. मेरे सिर्फ़ इस काम को देखकर दिल्ली में बैठे मोदी भाई ने मुझे मौक़ा दिया. वो मुझसे मिले नहीं हैं, वहीं से बैठकर मेरे काम को देखते हुए मुझे मौका दिया है.''

इंडियन एक्सप्रेस से एक बीजेपी नेता ने कहा, ''ये साफ नहीं है कि बीजेपी ने माधवी को क्यों चुना, क्योंकि वो ख़ुद कोई जानी-मानी कार्यकर्ता नहीं हैं. शायद महिला कार्ड वजह रही हो या फिर मुस्लिम औरतों के बीच माधवी लता का किया काम शायद वजह रहा हो और ये उनके हक़ में जा सकता है. पार्टी माधवी लता के साथ लड़ेगी और एक अच्छा मुकाबला लड़ा जाएगा.''

माधवी अपने इंटरव्यू में धर्म पर खुलकर बोलती दिखी हैं.

उनसे जब पूछा गया कि क्या मुसलमान वोटर उन्हें चुनेंगे?

माधवी लता जवाब देती हैं, ''मुसलमान हमको बराबर वोट देंगे. लेकिन हम उसके लिए काम नहीं कर रहे हैं. हैदराबाद की राजनीति इतनी सेक्यूलर है कि बेचारे मुसलमान भी उतने ग़रीब हैं, जितने हिंदू हैं. ओवैसी इस बार एक लाख वोट से हार जाएंगे.''

2019 लोकसभा चुनाव में ओवैसी ने बीजेपी उम्मीदवार को क़रीब दो लाख 82 हज़ार वोट से हराया था.

हैदराबाद सीट: पिछले चुनाव के बारे में जानिए

हैदराबाद लोकसभा सीट
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ओवैसी परिवार और हैदराबाद सीट

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन जिसे मजलिस भी कहा जाता है, काफ़ी पुराना संगठन है. लगभग 85 साल पहले हैदराबाद में सामाजिक-धार्मिक संस्था के रूप में इसकी शुरुआत हुई थी.

जब 1948 में हैदराबाद का भारत में विलय हुआ था, तब भारत सरकार ने इसे प्रतिबंधित कर दिया था. उस समय इसके अध्यक्ष रहे क़ासिम राजवी को गिरफ़्तार कर लिया गया था.

बाद में राजवी पाकिस्तान चले गए मगर संगठन की ज़िम्मेदारी उस समय के मशहूर वकील अब्दुल वहाद ओवैसी को सौंप गए थे.

तब से यानी पिछले पांच दशकों से ज़्यादा समय से ओवैसी परिवार ही मजलिस को चला रहा है. 1957 में मजलिस को राजनीतिक पार्टी के तौर पर बहाल किया गया, इसके नाम में 'ऑल इंडिया' जोड़ा गया और इसका संविधान भी बदला गया.

अब्दुल वहाद ओवैसी के बाद 1976 में पार्टी की ज़िम्मेदारी उनकी बेटे सलाहुद्दीन ओवैसी को मिली. सलाहुद्दीन साल 2004 तक लगातार कई चुनाव जीतते हुए हैदराबाद के सांसद रहे.

अब सलाहुद्दीन ओवैसी के बेटे असदुद्दीन ओवैसी पार्टी के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद हैं और उनके छोटे भाई अकबरुद्दीन ओवैसी विधानसभा में प्रोटेम स्पीकर हैं.

असदुद्दीन ओवैसी साल 2004 में पहली बार हैदराबाद सीट से जीतकर संसद पहुंचे थे.

2024 चुनाव में ओवैसी पांचवीं बार चुनावी मैदान में हैं और इस बार उनके सामने माधवी लता हैं.

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