शिवराज क्यों बोले वो सीएम की रेस में नहीं, सामने है ये बड़ा लक्ष्य

शिवराज सिंह चौहान

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    • Author, सलमान रावी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर वाहनों का तांता लगा हुआ है. नेताओं और पार्टी के कार्यकर्ताओं का एक हुजूम आता है तो एक बाहर निकल रहा होता है.

पिछले 18 सालों से ये मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के सबसे क़द्दावर नेता शिवराज सिंह चौहान का घर है. वो मध्य प्रदेश में अब तक के सबसे लंबे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री हैं.

इस मुख्यमंत्री आवास में शिवराज सिंह और कितने समय तक रहेंगे इसको लेकर कयास लगने शुरू हो गए हैं क्योंकि मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए नेताओं की दौड़ शुरू हो गयी है.

इस दौड़ में शामिल पार्टी के कई नेता दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं. वो बड़े नेताओं से मुलाक़ात कर रहे हैं और उन मुलाक़ातों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा भी कर रहे हैं.

मगर शिवराज सिंह चौहान दिल्ली नहीं गए हैं. वो भोपाल में ही हैं. कभी मंदिर जा रहे हैं तो कभी रात में "रैन बसेरों" का निरीक्षण कर रहे हैं. दिनभर अपने आवास पर आनेवाले विधायकों और कार्यकर्ताओं से मुलाक़ात कर रहे हैं.

बुधवार को वो छिन्दवाड़ा के दौरे पर निकल पड़े जहां सभी सातों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है. ये कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का गढ़ है.

वो दिल्ली क्यों नहीं जा रहे हैं? यही सवाल मैंने उनसे मुलाक़ात के दौरान किया तो वो बोल पड़े, “दिल्ली में संसद का सत्र शुरू हो गया है. इस वजह से भी हमारे दल के वरिष्ठ नेता दिल्ली गए हुए हैं. जहां तक मेरा सवाल है, मैं तो सीधे यहाँ अपने काम में लगा हुआ हूँ. आचार संहिता हट गयी है तो कुछ ज़रूरी काम थे वो पूरा करना है.”

शिवराज सिंह चौहान का इंटरव्यू लेते बीबीसी संवाददाता सलमान रावी
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लोकसभा चुनाव की तैयारी

शिवराज कहते हैं कि मुख्यमंत्री की कुर्सी की दौड़ के बजाय उनके सामने लोकसभा की 29 की 29 सीटें जीतना ही बड़ा लक्ष्य है.

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वो कहते हैं, “मेरे सामने लक्ष्य है कि 29 की 29 सीटें भारतीय जनता पार्टी कैसे जीते? और हमारे प्रधानमंत्री जी जो भारत के लिए भगवान का वरदान हैं फिर से प्रधानमंत्री बनें तो मध्य प्रदेश से उनके गले में 29 कमल के फूलों की माला डाले. माने 29 की 29 सीटें उनको दें. और इसलिए मैं छिन्दवाड़ा जा रहा हूँ जहां हम सभी सात सीट नहीं जीत नहीं पाए. मैं वहाँ कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाऊंगा ताकि लोकसभा की सीट हम जीत सकें.”

छिन्दवाड़ा ही मध्य प्रदेश में एकमात्र सीट ऐसी है जहां भाजपा को पिछले लोकसभा के चुनावों में नुकसान हुआ था. इस सीट से कमलनाथ के पुत्र नकुलनाथ सांसद हैं.

शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि जिन सीटों पर उनके दल के मौजूदा विधायकों और मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा है उन सीटों की समीक्षा भी की जा रही है. ऐसे कुल 27 विधायक हैं जिनमें कई बड़े मंत्री भी शामिल हैं जो चुनाव हार गए.

राज्य के तेज़ तर्रार गृह मंत्री नरोत्तम मिश्र और कृषि मंत्री कमल पटेल ने तो अपनी सीटों पर ‘री काउंटिंग’ भी करवाई थी. मगर इसके बावजूद उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

मोदी

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सीएम पद पर संशय

शिवराज सिंह चौहान दिल्ली नहीं जाने और हारी हुई सीटों की समीक्षा की बातें ज़रूर कर रहे हैं. मगर उनकी बातों से इतना तो समझ आ रहा है कि उनके मन में भी ये संशय है कि उन्हें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान फिर से सौंपी जायेगी या नहीं.

हालांकि इसके संकेत तब मिलने शुरू हो गए थे जब भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश में हो रहे विधानसभा के चुनावों के लिए अपने प्रचार की शुरुआत की थी. शुरुआत केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे से हुई थी जिस क्रम में उन्होंने भोपाल में पिछली सरकार का रिपोर्ट कार्ड जारी करते हुए एक प्रेस कांफ्रेंस भी की थी.

इस संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने एक सवाल के जवाब में स्पष्ट रूप से कह दिया था कि अगर भारतीय जनता पार्टी चुनाव जीतती है तो “मुख्यमंत्री का चेहरा तय करना पार्टी का काम है और ये पार्टी ही तय करेगी.”

इस बार विधानसभा चुनाव में शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर पेश नहीं किया गया था. इस चुनाव में भी ‘एमपी के मन में मोदी, मोदी के मन में एमपी’ का नारा था.

फिर भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीदवारों की एक के बाद एक, तीन सूचियाँ जारी की थीं.

इनमें शिवराज सिंह चौहान का नाम नहीं था. अटकलें लगने लगी थीं कि शायद वो इस बार चुनाव न लड़ें. मगर, फिर चौथी सूची आई जिसमें उनका नाम उनके गृह क्षेत्र बुधनी से दिया गया था.

इससे पहले की तीन सूचियों में पार्टी ने सात सांसदों के नाम जारी किये जिन्हें चुनावी मैदान में उतारा गया. इनमें तीन केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते शामिल थे.

इनके अलावा पार्टी के केंद्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को भी पार्टी ने इंदौर-1 की विधानसभा की सीट से उम्मीदवार बनाया.

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सिंधिया भी रेस में

इन सभी नेताओं को मध्य प्रदेश के भावी मुख्यमंत्री के रूप में देखा जाने लगा. साथ ही ग्वालियर-चंबल संभाग के क़द्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम तो इस फ़हरिस्त में सबसे ऊपर चल रहा है.

शिवराज सिंह चौहान और भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई के लिए ये संकेत स्पष्ट थे.

हालांकि चुनावों से कुछ महीने पहले शिवराज सिंह चौहान द्वारा महिलाओं के लिए शुरू की गयी ‘लाड़ली बहना योजना’ की ‘लोकप्रियता’ को देखते हुए उन्हें जब एक बार फिर प्रचार का ज़िम्मा सौंपा गया तो उन्होंने पूरे प्रदेश में घूम घूमकर सभाएं कीं और महिला मतदाताओं के बीच गए.

बातचीत के दौरान शिवराज सिंह चौहान कहते हैं कि इस बार मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का जो मत प्रतिशत ‘ऐतिहासिक’ रूप से बढ़ा है वो महिलाओं द्वारा बढ़ चढ़ कर वोट देने की वजह से हुआ है.

भारतीय जनता पार्टी को इस बार के विधानसभा के चुनावों में 48.55% मत मिले जो पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में 7.53 प्रतिशत ज़्यादा थे.

पार्टी को इस बार 163 सीटों पर जीत मिली जो पिछली बार की तुलना में 54 सीटें ज़्यादा थीं.

शिवराज सिंह चौहान

‘महिलाओं को श्रेय’

शिवराज सिंह चौहान का दावा है कि इन 54 सीटों पर जीत का श्रेय महिला मतदाताओं को जाता है.

वो इसके लिए अपने मुख्यमंत्री काल में बनाई गई तमाम योजनाओं को क्रेडिट देते हैं.

उनका कहना था कि मध्य प्रदेश में उनकी सरकार ने महिलाओं के लिए योजनाओं की झड़ी लगा दी है जिसका भारतीय जनता पार्टी को चुनाव में भरपूर फ़ायदा मिला.

शिवराज सिंह चौहान ने अपनी सीट, बुधनी भी रिकॉर्ड मतों से जीती. उन्हें एक लाख चार हज़ार से ज़्यादा मतों से विजय मिली और वो दावा करते हैं कि ये इसलिए हुआ क्योंकि महिलाओं ने न सिर्फ़ उन्हें वोट दिया बल्कि चुनाव लड़ने के लिए पैसे भी दिए.

वो मानते हैं कि पिछले विधानसभा के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की हार के कई कारण रहे थे जिसमें कांग्रेस के वायदे तो थे ही लेकिन कुछ जातियों के बीच की कलह भी एक कारण रही थी जिसे अब दूर कर लिया गया था.

शिवराज सिंह चौहान इस बात तो सिरे से नकारते हैं कि राज्य में किसी भी तरह की कोई ‘सत्ता विरोधी’ लहर थी.

वो बीबीसी के साथ हुए पिछले साक्षात्कार का हवाला देते हुए कहते हैं कि वो पहले भी कह रहे थे कि भारतीय जनता पार्टी सम्मान जनक बहुमत से सरकार बनाएगी.

उनका कहना था, “मैं सम्मानजनक शब्द का इस्तेमाल कर रहा था क्योंकि कहीं कोई मुझे बड़बोला ना कह दे. इसलिए मैं सीटों की संख्या नहीं बता रहा था. मुझे भरोसा था कि इतनी सीटें हम ज़रूर जीतेंगे.”

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