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मरियम नवाज़ ने ‘जिहाद’ के लिए इमरान ख़ान को अपने बेटों को बुलाने की क्यों दी चुनौती - पाकिस्तान उर्दू प्रेस रिव्यू
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान में सत्तारूढ़ मुस्लिम लीग (नवाज़ गुट) की उपाध्यक्ष मरियम नवाज़ ने कहा है कि अगर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को लगता है कि 'इस्लामाबाद तक की लॉन्ग मार्च जिहाद है तो उन्हें लंदन में रह रहे अपने बेटों को भी बुला लाना चाहिए.'
अख़बार डॉन के अनुसार, शनिवार को बहावलपुर में यौम-ए-तकबीर (पाकिस्तान ने 28 मई 1998 को परमाणु परीक्षण किया था और उसके बाद से हर साल पाकिस्तान में 28 मई को यौम-ए-तकबीर मनाया जाता है) के अवसर पर एक रैली को संबोधित करते हुए मरियम नवाज़ ने कहा, "अगर इस लॉन्ग मार्च को जिहाद का नाम देते हैं तो जिहाद तो हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है. फिर अपने बेटों क़ासिम और सुलैमान को लंदन में क्यों बिठाया हुआ है. तुम्हारे बच्चे लंदन में और क़ौम के बच्चे सड़कों पर लू की थपेड़ें खाने के लिए हैं."
उन्होंने इमरान ख़ान पर हमला करते हुए कहा, "सबसे पहले अपने बच्चों से कहें, वो ब्रितानी पासपोर्ट को आग लगाकर आएं और आज़ादी मार्च लीड करें."
इस अवसर पर मरियम नवाज़ ने पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट पर भी निशाना साधा.
मरियम का कहना था कि अब अदालतों का यह काम रह गया है कि जहां इमरान ख़ान नाकाम हो जाएं, वो उनकी मदद के लिए आएं.
उनका कहना था, "इमरान ख़ान जो इंक़लाब सुप्रीम कोर्ट के ज़रिए लाना चाहते हैं, इंशाअल्लाह सुप्रीम कोर्ट और पाकिस्तान की जनता उसको भी नाकाम बना देंगी."
मरियम नवाज़ ने कहा कि वो बहुत विनम्रता से कहना चाहती हैं कि सुप्रीम कोर्ट इससे दूर रहे.
धरना देता तो ख़ून ख़राबा होता: इमरान ख़ान
इमरान ख़ान ने कहा है कि अगर वो इस्लामाबाद मार्च के अपने फ़ैसले पर अड़े रहते तो हिंसा होने की आशंका थी.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार शनिवार को पेशावर में संवाददाता सम्मेलन के दौरान इमरान ख़ान ने कहा कि उन्होंने एस्टैबलिशमेंट (पाकिस्तान में सेना को आमतौर पर एस्टैबलिशमेंट कहा जाता है) से कोई डील करके आज़ादी मार्च ख़त्म करने का फ़ैसला नहीं किया था.
उन्होंने कहा, "अगर उस शाम इस्लामाबाद में धरने पर बैठ जाता तो ख़ून ख़राबा होता. आज़ादी मार्च ख़त्म करके वापस जाने को हमारी कमज़ोरी ना समझी जाए. 126 दिन का धरना दे चुका हूं. लेकिन मुझे मुल्क और क़ौम की फ़िक्र थी."
उन्होंने कहा कि अगर छह दिन के अंदर संसद को भंग करके चुनाव की तारीख़ तय कर दी जाती है तो फिर आगे हर चीज़ पर बात हो सकती है.
इमरान ख़ान का कहना था कि वो जून में चुनाव चाहते हैं. उनका कहना था, "हमने बातचीत के दरवाज़े खुले रखे हैं, क्योंकि हम लड़ाई नहीं चाहते हैं. हम जून में इलेक्शन चाहते हैं. अगर जून में इलेक्शन के लिए तैयार हैं तो बाक़ी चीज़ों पर बात हो सकती है."
इमरान ख़ान ने कहा कि अगर उनकी मांग स्वीकार नहीं की गई तो इस बार वो पूरी तैयारी के साथ आएंगे.
उन्होंने कहा कि तैयारी का मतलब है कि इस बार उनके लोग घरों से नहीं पकड़े जाएंगे.
उनका कहना था, "छह दिन दिए हैं. सरकार के पास भी वक़्त है और हमारे पास भी वक़्त है. एस्टैबलिश्मेंट (सेना) जो न्यूट्रल रोल अदा कर रही है उसके पास भी वक़्त है. कोशिश यह है कि चीज़ें हमारे हाथ से न निकल जाएं."
इमरान ख़ान ने 25 मई को अपने समर्थकों के साथ इस्लामाबाद तक लॉन्ग मार्च करने की घोषणा की थी. वो अपने हज़ारों समर्थकों के साथ इस्लामाबाद के क़रीब पहुंच गए थे लेकिन फिर ख़बर आई कि इमरान ख़ान ने लॉन्ग मार्च का फ़ैसला वापस ले लिया है और अपनी मांग को पूरा करने के लिए सरकार को छह दिन की मोहलत दी है.
इमरान ख़ान की सबसे अहम मांग है कि संसद को भंग किया जाए और जल्द से जल्द नए चुनाव की घोषणा की जाए.
इस्लामाबाद में फ़साद फैलाने वाले जलसे-जुलूसों पर पाबंदी
इस बीच सरकार ने फ़साद फैलाने वाले किसी भी जलसे या जुलूस पर इस्लामाबाद में मुकम्मल पाबंदी लगाने का फ़ैसला किया है.
अख़बार दुनिया के अनुसार शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री राना सनाउल्लाह की अध्यक्षता में एक बैठक हुई जिसमें पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ के लॉन्ग मार्च और देश भर में क़ानून व्यवस्था का जायज़ा लिया गया.
अख़बार के अनुसार गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने बैठक ख़त्म होने के बाद एक बयान जारी कर कहा कि इस्लामाबाद प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वो फ़सादी मार्च को रोकने के लिए प्रभावी क़दम उठाए. बयान के अनुसार गृह मंत्री ने कहा कि फ़सादी जत्थे और असामाजिक तत्वों के हाथों देश को बंधक बनाने की इजाज़त नहीं दी जा सकती है. उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी भी फ़सादी जुलूस या लॉन्ग मार्च को इस्लामाबाद में दाख़िल होने की इजाज़त नहीं दी जाएगी.
ज़रदारी और बिज़नेसमैन मलिक रियाज़ के बीच कथित बातचीत का ऑडियो वायरल
सरकार और इमरान ख़ान के बीच चल रहे वाकयुद्ध में शनिवार को एक नया मोड़ आया जब पूर्व राष्ट्रपति और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सह-अध्यक्ष आसिफ़ अली ज़रदारी और मलिक रियाज़ नाम के एक बड़े व्यापारी के बीच कथित बातचीत का ऑडियो वायरल हो गया.
कथित ऑडियो में मलिक रियाज़ ज़रदारी को फ़ोन करते हैं और कहते हैं कि इमरान ख़ान उनसे बार-बार कह रहे हैं कि वो आप से सुलह-सफ़ाई करवा दें.
ऑडियो में आसिफ़ अली ज़रदारी कथित तौर पर कहते हैं कि अब यह असंभव है. इस पर मलिक रियाज़ कहते हैं कि वो केवल ज़रदारी को यह ख़बर पहुँचाना चाहते थे.
इमरान ख़ान की पार्टी ने इस स्टोरी को ख़ारिज कर दिया है. कथित ऑडियो टेप पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसका हक़ीक़त से कोई ताल्लुक़ नहीं है.
पीटीआई के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शहबाज़ गिल ने कहा कि एक व्यापारी और इमरान ख़ान के सियासी विरोधी आपस में बात कर रहे हैं लेकिन बातचीत में इमरान ख़ान के बारे में जो बातें कही गई हैं उनका सच्चाई से कोई संबंध नहीं है.
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