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अरुणाचल में पीआरसी के मुद्दे पर बवाल क्यों मचा है?
- Author, दिलीप शर्मा
- पदनाम, गुवाहाटी से बीबीसी हिंदी के लिए
अरुणाचल प्रदेश में स्थायी आवासीय प्रमाण पत्र (पर्मानेंट रेज़िडेन्स सर्टिफ़ीकेट या पीआरसी) के मुद्दे पर हिंसा भड़कने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री पेमा खांडु ने कहा है कि वो आगे भी अब इस मुद्दे को नहीं उठाएंगे.
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार पेमा खांडु का कहना था, ''22 फ़रवरी की रात को मैंने मीडिया तथा सोशल मीडिया के ज़रिये स्पष्ट किया था कि सरकार इस मुद्दे पर आगे चर्चा नहीं करेगी... आज भी मुख्य सचिव की मार्फ़त एक आदेश जारी किया गया है कि हम पीआरसी मामले पर आगे कार्यवाही नहीं करेंगे..."
भाजपा के राज्य उपाध्यक्ष डॉमिनिक तादर के अनुसार कथित पुलिस फ़ायरिंग में अब तक छह लोग मारे गए हैं.
सरकार ने हिंसा के कारणों की जांच के लिए कमिश्नर स्तर जांच समिति का गठन किया है. सरकार ने मामले से निपटने के लिए सोमवार को सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है.
राजधानी इटानगर में कर्फ़्यू लगा दिया गया है.
अर्धसैनिक बलों की तैनाती कर दी गई है. कई इलाक़ों में सेना ने फ़्लैगमार्च किया है.
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है.
क्या है पूरा मामला
अरुणाचल प्रदेश पहले असम राज्य का हिस्सा था और 1987 में इसे अलग राज्य का दर्जा मिला.
नए राज्य के दो ज़िलों नामसाइ और छांगलांग में दशकों से छह ग़ैर-अरुणाचली जन-जाति के लोग रह रहे हैं. उनकी आबादी क़रीब 20-25 हज़ार है.
उनके पास ज़मीन तो है क्योंकि उस पर वो दशकों से रह रहे हैं लेकिन उनके पास पीआरसी नहीं है जिसके कारण उन्हें कई तरह की परेशानी होती है.
अरुणाचल प्रदेश की सरकार ने मई 2018 में एक संयुक्त उच्चाधिकार समिति का गठन किया था. समिति की ज़िम्मेदारी ये तय करना था कि उन ग़ैर-अरुणाचली जन-जातियों के लिए क्या रास्ता निकाला जाए.
समिति ने सिफ़ारिश की है कि ग़ैर-अरुणाचली छह समुदायों को भी राज्य में पीआरसी दी जाए.
इसके विरोध में छात्रों और सिविल सोसाइटी समेत राज्य के कई संगठनों ने गुरुवार से लेकर शनिवार तक 48 घंटों के बंद का आह्वान किया था.
बीजेपी उपाध्यक्ष तादर के अनुसार ग़ैर-अरुणाचली लोग को अगर पीआरसी मिलती है तो इससे वो कई तरह की दिक़्क़तों का सामना करने से बच जाएंगे.
अरुणाचल ईस्ट लोकसभा सीट से कांग्रेस के सांसद निनोंग इरिंग का भी मानना है कि इस पर विचार किया जा सकता है.
लेकिन विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि सिफ़ारिश मानी गई तो स्थानीय स्थायी निवासियों के अधिकारों पर विपरीत असर पड़ेगा. पूर्व छात्र नेता रितेमसो मान्यू ने कहा कि अरुणाचल में पहले से ही रोज़गार की समस्या है और अगर इन जन-जातियों को पीआरसी दी गई तो वो राज्य की दूसरी जन-जातियों के बराबर हो जाएंगे और सारे अधिकार उन्हें भी मिलने लगेंगे. रितेमसो के अनुसार इससे अरुणाचली लोगों को नुक़साना होगा.
शुक्रवार रात प्रदर्शनकारी सचिवालय में घुसने की कोशिश करने लगे. पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए गोली चलाई जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए.
इसके बाद हिंसा और भड़क गई. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस थाने को आग लगा दी. उप-मुख्यमंत्री चौना मेन के निजी घर में भी तोड़-फोड की गई.
विश्लेषकों का मानना है कि हिंसा ने इस वजह से और भयानक रुप ले लिया क्योंकि पेमा खांडू ने नागरिकता संशोधन बिल का भी समर्थन किया था, जबकि मणिपुर के मुख्यमंत्री ने बीजेपी के होते हुए भी इस बिल का विरोध किया था.
स्थानीय अरुणाचली लोगों में इस बात को भी लेकर ग़ुस्सा था जिसने पीआरसी के मुद्दे पर हिंसक रुप ले लिया.
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