मोरा गोरा रंग लइ ले!
मुंबई में रहने वाले हिंदी भाषी उत्तर भारतीय इन दिनों राहत की सांस ले रहे हैं क्योंकि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के 'देश भक्त' अभियान का निशाना वो नहीं बल्कि बॉलीवुड में काम करने वाले विदेशी कलाकार बन रहे हैं.
बॉलीवुड में लगभग एक हज़ार विदेशी जूनियर कलाकार काम करते हैं. जिनमें से अधिकतर गोरी नस्ल की यूरोपीय लड़कियां होती हैं.
पिछले हफ़्ते राज ठाकरे के अभियान की शुरुआत हुई फ़िल्म क्रूकेड के सेट पर. इस फ़िल्म में अमिताभ बच्चन भी हैं और 136 विदेशी जूनियर अभिनेत्रियाँ और डांसर काम रही हैं.
एमएनएस के कार्यकर्ता सेट पर गए और विदेशी कलाकारों से भारत में क़ानूनी तौर पर काम करने के दस्तावेज़ दिखने की मांग की. पार्टी का दावा है कि ये विदेशी जूनियर आर्टिस्ट स्थानीय लोगों की नौकरियां छीन रहे हैं इस लिए इन्हें बॉलीवुड में काम करने की इजाज़त नहीं होगी.
हमेशा की तरह इस बार भी बॉलीवुड खामोश है. किसी ने एमएनएस से यह पूछने की हिम्मत नहीं की कि वो पुलिस की भूमिका क्यों निभा रहे हैं. शायद इसलिए की कोई एमएनएस से झगडा मोल लेने की हिम्मत नहीं करता.
बॉलीवुड के लोगों को याद है वो दिन जब करण जौहर ने राज ठाकरे के घर जाकर हाथ जोड़े थे क्योंकि फ़िल्म 'वेक अप सिड' में उन्होंने मुंबई की जगह बॉम्बे का शब्द इस्तेमाल करने की 'गुस्ताख़ी' की थी
हाँ कुछ लोगों ने दबी आवाज़ में इसपर अपनी नाराज़गी ज़रूर जताई. उनका कहना था कि अगर विदेशी कालकारों को काम करने से रोका गया तो फ़िल्म निर्माताओं को विदेश जाकर शूट करना पड़ेगा जिस से फ़िल्म की लागत बढ़ जाएगी.
वैसे मुझे राज ठाकरे से एतराज़ इस बात पर नहीं है कि वो विदेशी कलाकारों के ख़िलाफ़ हैं. मुझे उनके एतराज़ करने के अंदाज़ पर एतराज़ है. उन्हें कानून का रखवाला बनने के बजाए सरकार से इस पर एतराज़ करना चाहिए था.
यह सही है कि हर रोज़ गोरे विदेशी पर्यटक सैंकड़ों की संख्या में गानों के सीक्वेंस में काम करते हैं और दिन भर नाच गाने की शूटिंग के बाद पांच सौ रुपए मुआवज़ा लेकर अपनी राह चल लेते हैं.
वो टूरिस्ट वीज़ा पर आते हैं इसलिए क़ानूनी तौर पर पैसे नहीं कमा सकते. दूसरी तरफ़ अगर भारतीय जूनियर कलाकारों को काम दिया जाए तो वो पांच सौ रुपए स्थानीय लोगों को जाएंगे.
बॉलीवुड में ग्लैमर बहुत ज़रूरी है और यह गोरी लड़कियां फ़िल्म को ग्लैमर देती हैं.
बॉलीवुड के फ़िल्मकारों को एक आम भारतीय की कमज़ोरी यानी गोरी चमड़ी, का खूब अंदाज़ा है जिसका वो भरपूर फ़ायदा उठाते हैं. अगर हम आप गोरी चमड़ी की कमजोरी से ऊपर उठ जाएँ तो बॉलीवुड में यह विदेशी अपने टैलेंट के बल पर ही काम पाएँगे गोरी चमड़ी के आधार पर नहीं.




