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अच्छी-ख़ासी टीम का यूँ बिखरना....

पंकज प्रियदर्शीपंकज प्रियदर्शी|गुरुवार, 11 मार्च 2010, 11:08 IST

पाकिस्तान क्रिकेट में जो भी हो रहा है, उसे आप बवाल कहें, खलबली कहें या फिर सनसनी, एक क्रिकेट प्रेमी होने के नाते मुझे बहुत अफ़सोस है.

अफ़सोस इसलिए नहीं कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के कुछ नामी-गिरामी चेहरे पर पाबंदी लगाई गई है. बल्कि इसलिए क्योंकि क्रिकेट के शीर्ष पर पहुँचने का दम रखने वाली इस टीम का क्या हाल हो गया है.

एक समय घातक तेज़ गेंदबाज़ी और मैदान पर आक्रामकता का दंभ एशियाई देशों में नहीं दिखता था. ये वो दौर था जब मैदान पर घायल होने वाले एशियाई खिलाड़ियों की सूची काफ़ी लंबी थी.

लेकिन घायल शेरों की भाँति मैदान पर उतर कर पलटवार पहले पाकिस्तान ने दिखाया और एक समय ऐसा भी आया जब भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को देश के विभाजन के दंश ने सबसे ज़्यादा दुखी किया. सब यही सोचते थे काश! कपिल और इमरान साथ गेंदबाज़ी करते, काश, गावस्कर और ज़हीर अब्बास साथ बैटिंग करते.

लेकिन विश्व कप जीतने वाली इस टीम को जैसे किसी की नज़र लग गई. ये तो सच है कि पाकिस्तान टीम में कुछ न कुछ हमेशा होता रहा है. लेकिन अब तो ऐसा नियमित होने लगा है. कभी मैच फ़िक्सिंग, कभी गेंद से छेड़छाड़ तो कभी मादक दवाओं के सेवन का मामला.

अपनी ज़मीन पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच न करा पाने के कारण पहले से ही ख़स्ताहाल पाकिस्तान क्रिकेट को लगने वाले झटके अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए दुखद है.

कितना अच्छा होता यदि शोएब की गोलंदाज़ी, यूसुफ़ की संयमित बल्लेबाज़ी तो अफ़रीदी के धमाकेदार शॉट्स का संगम हमें नियमित रूप से देखने को मिलता.

हम प्रशासकों को दोष दें, चयनकर्ताओं को, या फिर खिलाड़ियों को....एक अच्छी टीम का इस तरह बिखरना क्रिकेट का नुक़सान है.

टिप्पणियाँटिप्पणी लिखें

  • 1. 11:48 IST, 11 मार्च 2010 MOHD BELAL AZMI:

    पंकज प्रियदर्शी आप का नाम है. कहीं आप का नाम पीर मोहम्मद होता तो आप अब तक ग़द्दारी जैसे शब्द से नवाज़ दिए गए होते. बस मैं इतना कहूँगा कि एक क्रिकेट प्रेमी के लिए यह वास्तव में दुख की बात है.

  • 2. 12:14 IST, 11 मार्च 2010 akram:

    जहां तक पाकिस्तान का सवाल है बोर्ड और खिलाड़ी में कभी भी तालमेल नहीं नज़र आया. इमरान ख़ान के क्रिकेट छोड़ने के बाद ना ही कोई कप्तान मिला जो बोर्ड को और खिलाड़ी में तालमेल रख सके. यही वजह है कि वर्ल्ड क्लास खिलाड़ी होने बावजूद पाकिस्तान टीम ख़स्ताहाली में है. बोर्ड सदस्य को शोएब अख़्तर जैसे खिलाड़ी को नियमित रुप से टीम में जगह नहीं देनी पड़ती और ऐसे कई खिलाड़ी हैं जिन्हें छोटी-छोटी ग़लतियों की वजह से टीम के बाहर रखना जाता है, ऐसे में पाकिस्तान टीम कैसे ऊपर उठ सकती है. सच में क्रिकेट के लिए बुरा हुआ है.

  • 3. 12:33 IST, 11 मार्च 2010 manorath rana:

    श्रीमान! ये पाकिस्तान के खिलाड़ियों की प्रवृत्ति बन चुकी है, और आज से नहीं अकरम और वकार के समय से ही इस दल मे एकता की कमी स्पष्ट है.

  • 4. 17:33 IST, 11 मार्च 2010 praveen:

    भले ही पाकिस्तान हमारा चिर प्रतिद्वंदी रहा हो क्रिकेट के मैदान में लेकिन उनके खेल का दीवाना तो हर हिन्दुस्तानी भी रहा है. पिछले साल श्रीलंकाई क्रिकेट टीम पर हुई हमले से लेकर यह नवीनतम घटना क्रम हारा तो क्रिकेट ही है जो आज एक टॉप क्लास क्रिकेट टीम को खोने के कगार पर है. लेकिन भारतीय द्दृष्टि कोण से देखे तो आईपीएल में इन्हें न चुनने पर जमकर बवाल हुआ और इस टूर्नामेंट के शुरू होने के दो दिन पहले यह ड्रामा हुआ निश्चित ही हमारा आईपाएल भी बदनाम होता जो एक डर आयोजकों और हिन्दुस्तानियो को था वह सही साबित हुआ.

  • 5. 21:25 IST, 11 मार्च 2010 SHABBIR KHANNA,RIYADH,SAUDIA ARABIA:

    पंकज जी, इतनी फ़िक्र आप पाकिस्तान और बकवास खेल क्रिकेट का न करें. जहाँ पैसा होगा, ये सब कुछ होगा. ये सब पैसे का खेल है. लेकिन बीबीसी इस खेल पर इतनी फ़्रिकमंद क्यों हैं.

  • 6. 08:04 IST, 12 मार्च 2010 BALWANT SINGH HOSHIARPUR PUNJAB :

    वैसे, पंकज जी कुछ कहने का मन तो नहीं है फिर भी न काहू से दोस्ती न काहू से बैर! जो औरों के लिए गड्ढे खोद कर रखता है एक न एक दिन खुद उसमे गिरता है. वक्त हर किसी से हिसाब माँगता है. हर किसी का समय आता है. इसलिए आप भी दुखी न हों.

  • 7. 16:40 IST, 12 मार्च 2010 Diwakar Singh:

    यह बहुत दुखद है कि अब क्रिकेट के साथ हॉकी भी विवाद में आ गई है. यही दो सबसे ज़्यादा पसंदीदा खेल हैं पाकिस्तान में. खेल के नज़रिए से बहुत ही दुखद है.

  • 8. 20:56 IST, 12 मार्च 2010 आनंद मिश्र, जशपुर नगर (छत्तीसगढ़):

    किसी भी क्षेत्र में अनुशासनहीनता का यही परिणाम होता है. इसमें इतना दुखी होने की क्या आवश्यकता है. साथ ही एक और बात आजकल बीबीसी के पास भी मुद्दों की कमी लग रही है. क्रिकेट और इंटरनेट को छोड़ कर भी बहुत से मुद्दे हैं जिन पर ब्लॉग लिखा जा सकता है.

  • 9. 21:38 IST, 12 मार्च 2010 Rajesh:

    शांति, शासन, निवेश, प्रतिभा, खेल- सब चीज़े एक-एक करके पाकिस्तान से ग़ायब हो रही है. और ये काफ़ी ख़तरनाक है. पाकिस्तान का आम नागरिक इससे काफ़ी शर्मिंदा है. सब चीज़ें सामान्य होने में पाँच से 10 साल लगेंगे.

  • 10. 21:01 IST, 13 मार्च 2010 brajkiduniya.blogspot.com:

    पाकिस्तान में जो कुछ भी हो रहा है उसका प्रभाव क्रिकेट पर भी पड़ना ही था.पाकिस्तान आज एक असफल राष्ट्र है और तानाशाही तो जैसे वहां की हवाओं में है.पाक क्रिकेट के अधिकारी खिलाडियों के साथ गुलामों जैसा व्यवहार करते हैं.इन परिस्थितियों में कोई टीम भला कैसे अच्छा प्रदर्शन कर सकती है?

  • 11. 01:08 IST, 14 मार्च 2010 ati ullah:

    यूसुफ़ और यूनिस जैसे महान खिलाड़ियों पर प्रतिबंध, पाकिस्तान ही नहीं विश्व क्रिकेट के लिए अत्यंत दुखद हैं. लेकिन मुझे विश्वास है कि ये टीम इस दौर से भी गुज़र जाएगी और अगर अगला विश्व कप पाकिस्तान फिर जीत जाए, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए.

  • 12. 13:02 IST, 15 मार्च 2010 vineeta vashisth:

    हाँ, ये बहुत दुखद है. लेकिन पाकिस्तानी क्रिकेटरों को इस अध्याय से कुछ सीख लेनी चाहिए.

  • 13. 09:31 IST, 17 मार्च 2010 Ankit :

    पाकिस्तान की परंपरा रही है कि खेलों पर राजनीति हावी रहती है, वह फिर हॉकी हो या क्रिकेट और जब-जब पाकिस्तान में राजनीतिक आकांक्षा टूटेगी, तब तब यही हाल देखने को मिलेगा. इसमें पाकिस्तान के अलावा कोई और कुछ भी नही कर सकता है.

  • 14. 12:21 IST, 18 मार्च 2010 Ibrahim kumbhar Islamabad:

    पाकिस्तानी क्रिकेट और टीम का नक्शा आप ने बहुत अच्छा खींचा है लिकन आप ने कोई रास्ता भी नहीं बताया कि राजनीति में उलझी हमारी टीम को किस तरह उस काम पर लगाया जा सकता है जो उन का काम है. क्रिकेट खिलाड़ियों को खेल से मतलब होना चाहिए राजनीति के लिए इमरान खान काफी हैं. आप इस टीम को सुधारने की कोई सलाह दे सकें तो धन्यवाद.

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