कोरोना वायरस : दुनिया भर में सेहत के लिहाज सबसे सुरक्षित ये पाँच देश
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Author, लिंडसे गैलोवे
पदनाम, बीबीसी ट्रैवल
कोविड-19 से लड़ाई अस्पतालों में लड़ी जा रही है, लेकिन इसकी क़ामयाबी बहुत हद तक स्वास्थ्य प्रणालियों के कारगर होने पर निर्भर है.
ऐसा देखा गया है कि किसी देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रैंकिंग और वायरस को नियंत्रित करने की उसकी क्षमता के बीच सीधा संबंध है.
हमने लंदन के थिंक टैंक लेगाटम के समृद्धि सूचकांक 2019 को देखा. आर्थिक और सामाजिक नीतियों और स्थितियों के 12 पैमानों पर आधारित इस सूचकांक में 167 देश शामिल हैं.
संक्रमण की हालत जानने के लिए ज़िले का नाम अंग्रेज़ी में लिखें
इससे पता चलता है कि किसी देश के लोग कितने सेहतमंद हैं और ज़रूरी चिकित्सा सेवाओं तक उनकी कितनी पहुंच है.
हमने सूचकांक के शीर्ष के कुछ देशों के डॉक्टरों और वहां के निवासियों से बात की और यह समझने का प्रयास किया कि चिकित्सा व्यवस्था के किन पहलुओं ने वायरस को नियंत्रित करने में मदद की, आगे क्या चुनौतियां हैं और लोग वहां रहने में कैसा महसूस करते हैं.
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जापान
स्वास्थ्य रैंकिंग में जापान दूसरे स्थान पर है. कोविड-19 पर क़ाबू पाने की शुरुआती सफलता के बाद इसकी तारीफ़ हुई लेकिन संक्रमण बढ़ा तो प्रधानमंत्री ने 7 अप्रैल को राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर दी.
इसके बावजूद जापान में लॉकडाउन नहीं हुआ. जापान ने गंभीर लक्षण होने पर ही कोविड-19 टेस्ट किए, मगर कोई भी व्यक्ति स्थानीय क्लीनिक में जाकर स्कैन करा सकता है.
टोक्यो की डॉक्टर मीका वाशियो कहती हैं, "सीटी स्कैन से निमोनिया के शुरुआती चरण का भी पता लगाया जा सकता है, फिर तुरंत ही उसका इलाज शुरू हो जाता है." इसी वजह से जापान में गंभीर मामले कम हुए.
सामुदायिक संक्रमण का पता लगाकर और उसे रोककर वायरस का प्रसार सीमित रखने पर काम चल रहा है.
सेहत के प्रति जागरुक जापानी संस्कृति के कारण भी कोविड-19 के प्रभाव को कम किया जा सका. वाशियो कहती हैं, "बहुत से लोग पहले से मास्क पहनते थे, ख़ास तौर पर सर्दियों में. इससे वायरस बहुत ज़्यादा नहीं फैला."
जापान के क़रीब 60 फ़ीसदी लोग सालाना हेल्थ चेक-अप कराते हैं और तंदुरुस्त रहने की कोशिश करते हैं.
इसका यह मतलब नहीं है कि आगे चुनौतियां नहीं हैं. कोविड-19 संक्रमण वाले कई मरीजों को अस्पताल में होना चाहिए, लेकिन जापान ज़्यादा गंभीर मामलों के लिए अस्पताल के बेड बचाकर रख रहा है.
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दक्षिण कोरिया
लेगाटम हेल्थ पिलर इंडेक्स में चौथे नंबर का देश दक्षिण कोरिया कोविड-19 को संभालने के लिए ज़्यादा तैयार था.
उसे 2015 में MERS वायरस को नियंत्रित करने का तजुर्बा था. यहां के डॉक्टर और अस्पताल इस तरह के संकट से निपटने के लिए तैयार थे.
भारत में कोरोनावायरस के मामले
यह जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाती है, हालांकि मुमकिन है इनमें किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के नवीनतम आंकड़े तुरंत न दिखें.
राज्य या केंद्र शासित प्रदेश
कुल मामले
जो स्वस्थ हुए
मौतें
महाराष्ट्र
1351153
1049947
35751
आंध्र प्रदेश
681161
612300
5745
तमिलनाडु
586397
530708
9383
कर्नाटक
582458
469750
8641
उत्तराखंड
390875
331270
5652
गोवा
273098
240703
5272
पश्चिम बंगाल
250580
219844
4837
ओडिशा
212609
177585
866
तेलंगाना
189283
158690
1116
बिहार
180032
166188
892
केरल
179923
121264
698
असम
173629
142297
667
हरियाणा
134623
114576
3431
राजस्थान
130971
109472
1456
हिमाचल प्रदेश
125412
108411
1331
मध्य प्रदेश
124166
100012
2242
पंजाब
111375
90345
3284
छत्तीसगढ़
108458
74537
877
झारखंड
81417
68603
688
उत्तर प्रदेश
47502
36646
580
गुजरात
32396
27072
407
पुडुचेरी
26685
21156
515
जम्मू और कश्मीर
14457
10607
175
चंडीगढ़
11678
9325
153
मणिपुर
10477
7982
64
लद्दाख
4152
3064
58
अंडमान निकोबार द्वीप समूह
3803
3582
53
दिल्ली
3015
2836
2
मिज़ोरम
1958
1459
0
स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
11: 30 IST को अपडेट किया गया
दक्षिण कोरिया ने तेज़ी से कोविड-19 टेस्ट किए. बीमारी के निदान और इलाज में इसके हेल्थकेयर सिस्टम का भी योगदान रहा. देश का हर नागरिक राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा सेवा (NHIS) के दायरे में है.
राजधानी सोल के डॉक्टर ब्रैंडन बी. सु का कहना है कि इलाज पर कम ख़र्च होने के कारण दक्षिण कोरिया में इमेजिंग और प्रयोगशाला परीक्षण बड़े पैमाने पर किए जाते हैं.
कोविड-19 प्रकोप होने पर कई लोगों का परीक्षण जल्दी हो गया जिससे समय रहते इसे रोकने के उपाय कर लिए गए.
सरकार ने मास्क ख़रीदने की नई प्रणाली बनाकर आपूर्ति को स्थिर कर दिया. जन्म के साल के आख़िरी अंक के आधार पर मास्क ख़रीदने की व्यवस्था बनाई गई.
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सोल की ऑफ़िस वर्कर योंगबॉक ली कहती हैं, "कई जगहों पर इमारतों में घुसने से पहले शारीरिक तापमान लिया जाता है. बड़ी इमारतों में थर्मल कैमरे भी लगाए गए."
कोरिया सेंटर फ़ॉर डिज़ीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन और दूसरी सरकारी एजेंसियां कड़ी मेहनत कर रही हैं और लोग उनके प्रयासों की तारीफ़ भी कर रहे हैं."
दक्षिण कोरिया में निजी बीमा भी बहुत लोकप्रिय है. 77 फ़ीसदी नागरिकों ने इलाज के उन ख़र्चों को भी कवर कराया है जो NHIS के दायरे में नहीं हैं.
बीमा कवर देखभाल की गुणवत्ता बढ़ाने और नई तकनीक तक पहुंच बढ़ाने में बोनस हो सकता है लेकिन सु का कहना है कि "हमें अधिक मूल्य-आधारित स्वास्थ्य सेवा मॉडल की ज़रूरत है."
कुल मिलाकर, दक्षिण कोरिया की शुरुआती सफलता ने उम्मीद जगाई है. सु कहते हैं, "लोगों ने बाहर निकलना शुरू कर दिया है, हालांकि सभी लोग हर समय मास्क लगाते हैं."
नक्शे पर
दुनिया भर में पुष्ट मामले
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गोले प्रत्येक देश में कोरोना वायरस के पुष्ट मामलों की संख्या दर्शाते हैं.
स्रोत: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां
आंकड़े कब अपडेट किए गए 5 जुलाई 2022, 1:29 pm IST
दायगू दक्षिण कोरिया का सबसे अधिक प्रभावित इलाका है. यहां की वोन-जियोंग वांग को लगता है कि हालात सामान्य हो रहे हैं.
"हम पड़ोस के मोहल्ले तक टहल आते हैं लेकिन भीड़-भाड़ या बंद जगहों पर जाने से बचने की कोशिश करते हैं. मुझे लगता है कि सुरक्षा के लिए अभी घर पर रहना सही है."
वांग उस दिन का इंतज़ार कर रही हैं जब वह बच्चों को लेकर पार्क और मनोरंजन पार्कों में जा सकें.
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इसराइल
वुहान से फैलने वाले कोविड-19 वायरस पर नज़र रखने और उसके लिए तैयारी करने में शायद ही किसी दूसरे देश ने इसराइल जैसी तेज़ी दिखाई. हेल्थ इंडेक्स में वह 11वें नंबर पर है.
जनवरी के आख़िर में ही इसराइल के स्वास्थ्य मंत्री ने पीपुल्स हेल्थ ऑर्डिनेंस पर दस्तख़त करके वायरस के संभावित प्रसार की स्थिति में मंत्रालय का अधिकार बढ़ा लिए.
ऐसा मेडिकल टेस्ट जिससे साबित हो सके कि किसी शख्स को कोरोना वायरस था और अब उसमें कुछ इम्युनिटी आ गई है. यह टेस्ट खून में एंटीबॉडीज का पता लगाता है, जिन्हें बीमारी से लड़ने के लिए शरीर पैदा करता है.
बिना लक्षण वाले
ऐसा शख्स जिसे बीमारी हुई मगर उसमें कोई लक्षण नहीं दिखाई दिए. कुछ स्टडीज से पता चला है कि कोरोना वायरस का शिकार हुए कुछ लोगों में तेज़ बुखार या कफ़ जैसे आम लक्षण नहीं नज़र आए.
कोरोना वायरस
वायरस समूह में से एक वायरस जिससे मनुष्यों या जानवरों में गंभीर या हल्की बीमारी हो सकती है. पूरी दुनिया में फैले कोरोना वायरस से कोविड-19 बीमारी हो रही है. सामान्य सर्दी या इंफ्लूएंजा (फ़्लू) फैलाने वाले दूसरे तरह के कोरोना वायरस हैं.
कोविड-19
कोरोना वायरस की वजह से फैल रही बीमारी का सबसे पहले पता 2019 के अंत में चीन के वुहान में लगा. यह मूलरूप में फ़ेफ़ड़ों पर असर डालता है.
संक्रमण की तेज़ी को रोकना
ट्रांसमिशन की दर को कम करना ताकि चार्ट पर प्रदर्शित किए जाने पर मामलों की संख्या के आधार पर पीक को फ्लैट कर कर्व को नीचे लाया जाए ताकि स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते बोझ को कम किया जा सके.
फ़्लू
इंफ्लूएंजा का संक्षिप्त नाम. एक वायरस जो कि सीजनल बीमारियों में मनुष्यों और जानवरों में फैलता है.
सामुदायिक प्रतिरोधक क्षमता
एक बड़ी आबादी तक पहुंचने के बाद किस तरह से एक बीमारी का फैलाव सुस्त पड़ता है.
लड़ने में सक्षम
ऐसा शख्स जिसका शरीर किसी बीमारी के सामने टिक सके या उसे रोक दे वह इससे इम्यून कहा जाता है. एक बार जब कोई शख्स कोरोना वायरस से उबर जाता है तो ऐसा माना जाता है कि वह एक निश्चित अवधि तक इस बीमारी का फिर से शिकार नहीं हो सकता.
वायरस के असर करने की अवधि
किसी बीमारी का शिकार होने और उसका लक्षण दिखाई देना शुरू होने के बीच की अवधि
लॉकडाउन
आवाजाही या रोज़ाना की ज़िंदगी पर पाबंदियां, जिनमें सार्वजनिक इमारतें बंद हैं और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए कहा गया है. कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कई देशों में लॉकडाउन को कड़े उपायों के तौर पर लागू किया गया है."
शुरुआत
किसी क्लस्टर या अलग-अलग इलाकों में तेज रफ्तार से बीमारी के कई मामले सामने आना.
महामारी
किसी गंभीर बीमारी का कई देशों में एकसाथ तेजी से फैलना महामारी कहलाता है.
एकांतवास
किसी संक्रामक बीमारी को फैलने से रोकने के लिए इसकी जद में आए लोगों को अलग रखना.
सार्स
सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम एक कोरोना वायरस का ही प्रकार है जो कि एशिया में 2003 में शुरू हुआ था.
सेल्फ-आइसोलेशन
घर पर ही रहना और अन्य लोगों से सभी तरह के संपर्क से बचना ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके.
सामाजिक दूरी
अन्य लोगों से दूर रहना ताकि बीमारी के ट्रांसमिशन की रफ्तार कम की जा सके. सरकार की सलाह है कि अपने साथ रह रहे लोगों के अलावा दोस्तों और रिश्तेदारों से न मिलें. साथ ही सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल से भी बचें.
आपातकालीन स्थिति
किसी संकट के वक्त सरकार द्वारा रोज़ाना की जिंदगी पर पाबंदी लगाने के मकसद से उठाए गए कदम. इसमें स्कूलों और दफ्तरों को बंद करना, लोगों की आवाजाही पर पाबंदी लगाना और यहां तक कि सैन्य बलों को तैनात करना ताकि रेगुलर इमर्जेंसी सेवाओं को सपोर्ट किया जा सके."
लक्षण
संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर की कोशिश के तौर पर इम्यून सिस्टम से किसी बीमारी के संकेत. कोरोना वायरस का मुख्य लक्षण बुखार, सूखी खांसी और सांस लेने में दिक्कत होना है."
टीका
ऐसा इलाज जिससे शरीर एंटीबॉडीज पैदा करता है, जो कि बीमारी से लड़ता है और आगे के संक्रमण से लड़ने की इम्युनिटी देता है."
वेंटीलेटर
ऐसी मशीन जो कि ऐसे वक्त पर शरीर के लिए सांस लेने का काम करती है जब फ़ेफ़ड़े काम करना बंद करने लगते हैं.
विषाणु
एक छोटा सा एजेंट जो कि किसी जीवित सेल के भीतर अपनी कॉपी बना लेता है. वायरस की वजह से ये सेल मरने लगती हैं और शरीर की सामान्य केमिकल प्रक्रियाओं को अवरुद्ध कर देती हैं जिससे बीमारी हो जाती है.
मुख्य कहानी नीचे जारी है
ट्रांसलेटर
इन सभी शब्दों का क्या मतलब है?
सरकारी उपायों में शामिल थे- गैर-ज़रूरी विदेश यात्राओं से परहेज़ कराना और "हॉटस्पॉट" से आने वाले लोगों को 14 दिन घर पर अलग रखना.
शुरुआत में ये उपाय बहुत सख़्त लगे थे लेकिन इनसे संक्रमण की दर कम रखने में मदद मिली.
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इसराइल के बराबर आकार के दूसरे देशों के मुक़ाबले यहां कम लोग अस्पताल में भर्ती हुए. जांच भी सटीक होने लगी.
तेल अवीव यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉक्टर खितम मुहसेन कहते हैं, "केंद्रीय वायरोलॉजी प्रयोगशाला ने नाक और गले के नमूने में कोरोना वायरस का पता लगाने के लिए RT-PCR टेस्ट का तरीका बहुत ज़ल्दी विकसित कर लिया."
डॉ. मुहसेन कोविड-19 संकट के बारे में स्वास्थ्य मंत्रालय के सलाहकार हैं. वह कहते हैं, "प्रति 10 लाख आबादी पर टेस्ट की संख्या के मामले में इसराइल दुनिया के अग्रणी देशों में है."
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तेल अवीव के कफ़ार सबा में रहने वाली तालिया क्लेन पेरेज़ को गर्व है कि उनके देश में परीक्षण की दर ज़्यादा है और मृत्यु दर बहुत कम है. वह क्वारंटीन के बारे में लिए गए शुरुआती फ़ैसलों को इसका श्रेय देती हैं.
सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली से भी मदद मिली. इसराइल में कोरोना का सबसे पहले इलाज शुरू करने वाले शेबा मेडिकल सेंटर के उप महानिदेशक प्रोफेसर आर्नोन आफ़ेक कहते हैं, "लोग इलाज के लिए मदद मांगने से नहीं घबराते क्योंकि उनको पता है कि इसके लिए उनको कुछ भी ख़र्च नहीं करना पड़ेगा."
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"स्वास्थ्य प्रणाली में लागत बहुत अहम होती है क्योंकि इस जैसी परिस्थितियों में आप चाहेंगे कि अगर किसी को लक्षण हो तो वह मदद मांगें ताकि आप उनको खोजकर वायरस का प्रसार रोक सकें."
आफ़ेक के मुताबिक एक कमी यह है कि इसराइल अपनी जीडीपी का पर्याप्त हिस्सा स्वास्थ्य पर ख़र्च नहीं करता. "हालांकि इसका मतलब यह भी है कि हम बहुत दक्ष हैं, बहुत सक्रिय है और ज़ल्दी सीखते हैं."
"शेबा में हम हमेशा दो कदम आगे की सोचते हैं और संकट आने से पहले उसे हल करने की कोशिश करते हैं."
"हमने पहले अनुमान लगाया और कोरोना वायरस के रोगियों के लिए अलग आईसीयू बनाया. अतिरिक्त डॉक्टरों को वहां काम करने का प्रशिक्षण दिया. जब मरीज़ आए तो हम बिल्कुल तैयार थे."
कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले
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कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
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जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
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वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.
End of मैं और मेरा परिवार
इसराइल की आबादी विविध है. अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय पारंपरिक मीडिया से दूर रहता है. उसमें दूसरे समुदायों के मुक़ाबले वायरस ज़्यादा फैला.
सरकार उन तक अलग तरीक़े से पहुंची और वे वायरस रोकने के उपायों में साथ देने के लिए तैयार हो गए.
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जर्मनी
यूरोप के कई देशों के मुक़ाबले कम मृत्यु दर वाला जर्मनी सूचकांक में 12वें नंबर पर है.
कोविड-19 से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए उसकी दुनिया भर में तारीफ़ हुई, लेकिन विशेषज्ञों को लगता है कि जर्मनी अभी संकट से बाहर नहीं निकला है.
बर्लिन में यूरोपियन स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट के प्रोफ़ेसर फ्रांसिस डी वेरिकोर्ट को लगता है कि टेस्टिंग ज़्यादा करने से यह धारणा बनी कि जर्मनी की तैयारी बहुत अच्छी है और मृत्यु दर कम है.
हालांकि परीक्षण की व्यापक क्षमताओं की वजह से ही बीमार और बिना लक्षण वाले लोगों को स्वस्थ आबादी से अलग करने में क़ामयाबी मिली, जिससे वायरस का प्रसार रोकने में मदद मिली.
देश तैयार न हो तो संक्रमण की कम दर नुकसान पहुंचा सकती है. कम लोगों को कोविड-19 होने का मतलब है कि कम लोग इससे सुरक्षित हैं.
वेरिकोर्ट कहते हैं, "अपनी आदतों और सोशल डिस्टेंसिंग के उपायों में ढील तभी दी जा सकती है जब देश में कोविड-19 के मामले करीब-करीब ख़त्म हो जाएं वरना दूसरी बार प्रसार हो सकता है."
लोग इस बात के लिए तैयार हैं कि हालात ज़ल्दी सामान्य नहीं होने वाले फिर भी उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी है.
मुर्नो एम. स्टैफेल्सी में रहने वाली इनग्रिड ग्रुह्स की सबसे बड़ी परेशानी अपनी मां को यह समझाने में होती है कि घर से बाहर नहीं जाना है.
उनकी मां को खरीदारी करना पसंद है इसीलिए ग्रुह्स ने उनके लिए मास्क बनाया और अपने साथ बाहर ले गईं.
"अब जबकि नये संक्रमण की तादाद घट रही है मुझे लगता है कि अब हमारे लिए ढील के बारे में सोचने का सही वक्त है. मुझे विश्वास है कि सरकार लोगों को बचाने और ज़िंदगी सामान्य बनाने के लिए सही फ़ैसले करेगी."
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जर्मनी में संघीय ढांचा है जिसमें राज्यों के पास पर्याप्त अधिकार हैं. ब्रिटेन या फ्रांस के उलट यहां कोई एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं है.
वेरिकोर्ट कहते हैं, "बहुत अधिक बेड उपलब्ध हैं, आईसीयू और डॉक्टर उपलब्ध हैं." इन संसासधों का प्रबंधन विकेंद्रीकृत है, इस तरह स्थानीय सरकारों पर अधिक जिम्मेदारी आ गई है.
इसका मतलब है कि सभी पार्टियों की भी ज़िम्मेदारी है. इससे सहयोग को बढ़ावा मिलता है जो महामारी को रोकने और मरीजों की देखभाल में बहुत अहम है."
टेक्नीश यूनिवर्सिटी म्यूनिशन की छात्र लॉरा ग्रुह्स का कहना है कि उनको जर्मनी में रहने का गर्व है और सरकार ने लॉकडाउन करके बहुत बढ़िया काम किया है.
"मैंने ब्यूनस आयर्स में जुलाई से शुरू होने वाले सेमेस्टर में जाने की योजना बनाई थी जो अब शायद नहीं हो पाएगा. मैं निराश हूं लेकिन मैं बहुत भाग्यशाली हूं, इसलिए मुझे पाबंदियों को लेकर कोई शिकायत नहीं है."
असली परीक्षा मेडिकल सप्लाई चेन की है, जिसमें हॉस्पिटल स्टाफ, बेड, वेंटिलेटर और पीपीई किट के अलावा और भी बहुत कुछ हैं.
जैसे यूरोप के कई देशों में सैनेटाइजर का स्टॉक ख़त्म हो गया. जर्मन में हैंड जेल उपलब्ध थे लेकिन उनको रखने के लिए प्लास्टिक बोतल नहीं थे.
वेरिकोर्ट कहते हैं, "हेल्थकेयर सप्लाई चेन में आप इन सब चीज़ों के बारे में सोचते भी नहीं हैं."
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ऑस्ट्रेलिया
हेल्थ पिलर इंडेक्स में ऑस्ट्रेलिया 18वें नंबर पर है. ऑस्ट्रेलिया कोविड-19 बढ़ने की दर 5% से नीचे रखने में क़ामयाब रहा.
यह की स्वास्थ्य व्यवस्था मिश्रित है. मेडिकेयर से सबको कवर किया गया है, साथ ही निजी अस्पताल भी हैं जिन्होंने देश को सबसे बुरी स्थिति के लिए तैयार रहने में मदद की.
मेलबर्न यूनिवर्सिटी में सीनियर लेक्चरार डॉ. एलेक्स पोलिकोव कहते हैं, "हमारी दो-स्तरीय व्यवस्था आपातकालीन सेवाओं और आईसीयू बेड की मांग में संभावित बढ़ोतरी को पूरा करने के लिए तैयार है."
"संघीय और राज्य सरकारों ने सभी गैर-ज़रूरी सर्जरी को स्थगित करने का निर्देश दिया है. इससे निजी अस्पतालों को कोविड-19 मरीजों के लिए तैयार होने का मौका मिल गया."
संघीय सरकार निजी अस्पतालों के बेड और स्टाफ के बदले पैसे चुकाने के लिए तैयार हो गई जिससे ऑस्ट्रेलिया की क्षमता दोगुनी हो गई.
यहां स्थानीय संक्रमण के कम मामले हुए. सरकार ने तेज़ी से कांटैक्ट ट्रेसिंग की और विदेश से लौटे लोगों या संक्रमण की चपेट में आए लोगों के संपर्क में आने वाले सभी लोगों के लिए अनिवार्य क्वॉरंटीन लागू किया.
पोलिकोव कहते हैं, "यदि स्थानीय संक्रमण रोका जा सकता है तो मैं लंबे दौर में रोज़ाना बहुत कम मामले बढ़ने की उम्मीद करता हूं."
'स्टोक्ड फॉर ट्रैवेल' पर ब्लॉग लिखने वाले क्रिस स्टीवेन्स कहते हैं, "जब कोविड-19 महामारी वास्तव में फैलनी शुरू हुई तो मैं श्रीलंका में था. वहां मामले तेज़ी से बढ़े जिससे 48 घंटे के नोटिस पर मुझे वहां से निकलना पड़ा."
"मेरे पास दो विकल्प थे- यूरोप में अपने माता-पिता के घर लौट जाऊं या ऑस्ट्रेलिया में अपने भाई के घर चला आऊं."
40 साल पैरामेडिक का काम कर रहे उनके पिता ने ऑस्ट्रेलिया को बेहतर विकल्प बताया. स्टीवेन्स यहां आए तो उनको 14 दिन क्वारंटीन में रहना पड़ा.
यदि मौजूदा रुझान जारी रहता है तो उम्मीद है कि ऑस्ट्रेलिया का हेल्थकेयर सिस्टम वेंटिलेटर और आईसीयू बेड की मांग में होने वाली बढ़ोतरी के लिए तैयार है. पोलिकोव निजी अस्पतालों के साथ की गई व्यवस्था से संतुष्ट हैं.
शटडाउन में ढील मिलने के बाद लोग सामान्य ज़िंदगी जीने का इंतज़ार कर रहे हैं.
सिडनी में रहने वाली जेनिफर डी लुका कहती हैं, "मैं अपने सबसे अच्छे दोस्त के साथ पसंदीदा कैफ़े में एक कप कॉफी पीना चाहती हूं. यह काम मैं पहले हर हफ़्ते करती थी और इस पर कभी ग़ौर भी नहीं करती थी."