क्या है हमारी ख़ुशी का राज़ और ये क्यों ज़रूरी है

ख़ुश रहने के मायने
    • Author, नीना क्रॉमेयर डायके
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर

क्या आप ख़ुश हैं?

अगले एक-दो महीने को लेकर आपका क्या अंदाज़ा है? तब आप कैसा महसूस करेंगे?

हम सब लोग ये समझना चाहेंगे कि आने वाले वक़्त में हम ख़ुश होंगे या नहीं, इस बात का अंदाज़ा कैसे लगाया जाए? अगर हम ये अंदाज़ा लगा लें कि आगे चलकर हम कैसा महसूस करेंगे, तो हम उसे बदलने के लिए ज़रूरी क़दम भी उठा सकते हैं.

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ख़ुशी के मायने

बहुत से लोगों के लिए ख़ुशी का मतलब है ज़िंदगी में से नेगेटिव बातों, लोगों या चीज़ों को हटाना. अगर हम तनाव से आज़ाद हो जाएं, बोरियत से छुटकारा पा लें, बीमारी को हरा दें, अकेलेपन को दूर कर लें, पैसे की किल्लत पर जीत हासिल कर लें, तो हम ज़्यादा संतुष्ट हो सकते हैं. अपने हालात से ज़्यादा ख़ुश हो सकते हैं.

मगर, क्या हो अगर ख़ुशी के मायने और ख़ुश होने के तरीक़े इन बातों से भी ज़्यादा हों? क्या ख़ुशी का ये मतलब है कि हमारी ज़िंदगी में समस्याएं न हों? या फिर ख़ुशी का कोई और मतलब है?

ब्रिटेन की लिवरपूल यूनिवर्सिटी में मनोवैज्ञानिक प्रोफ़ेसर पीटर किंडरमैन कहते हैं, ''हमें नहीं मालूम कि लोग इसलिए ख़ुश होते हैं कि उनकी ज़िंदगी से हर नेगेटिव चीज़ हट गई है, या फिर उन्होंने ख़ुश होने के लिए कुछ और भी किया है.''

ख़ुश रहने के मायने

इमेज स्रोत, Getty Images

किस पर निर्भर है ख़ुशी

पीटर किंडरमैन का मानना है कि हमारी ख़ुशी, काफ़ी हद तक हमारे सोचने के तरीक़े पर निर्भर करती है. वो इस बात पर रिसर्च कर रहे हैं कि हम मुश्किल हालात में कैसा बर्ताव करते हैं. इसका हमारी दिमाग़ी सेहत पर कैसा असर पड़ता है. इसके लिए पीटर किंडरमैन ने बीबीसी के साथ मिलकर एक ऑनलाइन सर्वे तैयार किया है, जो ख़ुशी के राज़ जानने के लिए आपसे कुछ सवाल करता है. फिर 6 हफ़्ते बाद सर्वे के तहत कुछ और सवाल आप से पूछे जाते हैं.

पीटर किंडरमैन कहते हैं कि इस प्रयोग के ज़रिए वो इस सवाल का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि जो हम आज सोचते हैं, क्या उससे हमारे मुस्तक़बिल पर असर पड़ता है? उन्हें लगता है कि इस रिसर्च से हम ये पता लगा सकेंगे कि हमें ख़ुश रहने के लिए अपने सोचने के तरीक़े में क्या बदलाव करने चाहिए.

पीटर किंडरमैन, ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस के सलाहकार मनोवैज्ञानिक हैं. वो कहते हैं कि बार-बार परेशानियों के बारे में सोचना और निराशावादी होना, हमारी दिमाग़ी सेहत के लिए नुक़सानदेह हैं.

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ख़ुश रहने का अंदाजा

किंडरमैन के रिसर्च से अगर ये आंकड़े सामने आते हैं कि किसी के सोचने-विचारने की बिनाह पर भविष्य में उसके ख़ुश रहने का अंदाज़ा लगाया जा सकता है, तो उसकी ज़िंदगी से नेगेटिव सोच को हटाने के तरीक़ों पर भी ग़ौर किया जा सकता है. इससे लोगों को दिमाग़ी बीमारियों से बचाने में मदद मिलने की उम्मीद है.

अच्छी ख़बर ये है कि जिस तरह हम हमारी सेहत से जुड़ी समस्याओं का इलाज करते हैं, उसी तरह हमारे सोचने के तरीक़ों में बदलाव के इलाज भी मौजूद हैं. जैसे कि कॉग्निटिव बिहैवियल थेरेपी से हम कुछ ख़ास मुद्दों पर ज़्यादा सोच-विचार करके अपने व्यवहार को बदल सकते हैं.

पीटर किंडरमैन कहते हैं कि, ''हमारी ख़ुशी का राज़ इस बात में छुपा है कि हम अपने जज़्बातों की पेचीदगियों को समझें. फिर जो बातें हमारे ज़हन में नेगेटिव ख़्याल लाती हैं, उनसे निपटने के तरीक़ों पर काम करें. इस तरह से ख़ुशी हासिल की जा सकती है.''

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