बाघ और बकरी की यारी कैसे हो जाती है?

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- Author, डेल शॉ
- पदनाम, बीबीसी अर्थ
कुत्ता घोड़े की सवारी करता है. नन्हा बत्तख बिल्ली का पीछा करता है, हैम्स्टर सांप के साथ गलबहियां करता है.
सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से शेयर किए जाने वाले ऐसे कई वीडियो आपने भी देखे होंगे.
हम अंतर-प्रजातीय दोस्ती की कहानियों से रोमांचित होते हैं. यह जितनी अनोखी हो उतनी बेहतर लगती है.
लेकिन कुछ जानवर क्यों इतने घुल-मिल जाते हैं कि पूरी तरह बेमेल लगते हैं? कई बार तो उनकी यारी बहुत ख़तरनाक भी लगती है.
यह सिर्फ़ कुदरत की विचित्रता है या इसके पीछे कुछ वैज्ञानिक कारण भी हैं?

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बच्चों का लालन-पालन
कार्डिनल चिड़ियों को रॉबिन पक्षी के बच्चों का लालन-पालन करने के लिए जाना जाता है. दूसरी प्रजातियों में भी बच्चों की परवरिश करने की प्रवृत्ति देखी गई है.
वन्यजीव अभयारण्य में सफेद बाघ के दो बच्चे- मित्रा और शिवा- जब अपनी मां से बिछुड़ गए तब अंजना नाम की दो साल की चिंपाजी ने उनकी देखरेख की.
समरसेट के संरक्षित वनक्षेत्र में ऊदबिलाव और बैजर (बिज्जू) के अनाथ बच्चों- ब्रुक और बंबल बी- के बीच असामान्य दोस्ती देखी गई है.
मोन्टेना में पीनट नाम के स्कंक को एक शेरनी ने अपने शावक एनाबेल के साथ पाल-पोसकर बड़ा किया.
शिकारी प्रजातियों में भी इस नर्म व्यवहार के कारण किसी बच्चे और उसे पालने वाली मां के बीच ममता का रिश्ता बन जाता है.
किसी अनाथ बच्चे को पालने और उसकी रक्षा करने की प्रवृत्ति प्रजातियों के बीच के अंतर और शिकारी प्रवृत्तियों को भी दबा देती है.

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साथ खेलना
गधा और कुत्ता सबसे अच्छे दोस्त बन जाएंगे, यह कल्पना से भी परे है.
फ्लोरिडा के एक वन्यजीव अभयारण्य में बी नाम के जिराफ को उसी बाड़े में रखा गया जहां विल्मा नाम का शुतुरमुर्ग रहता था.
पहले सोचा गया था कि दोनों जानवर आपस में दूरी बनाए रखेंगे, लेकिन ज़ल्द ही उनकी दोस्ती हो गई और दोनों साथ-साथ दिखने लगे.
सैन डिएगो के चिड़ियाघर में, एक टिंबर भेड़िया और दो बकरियों के बीच दोस्ती हो गई.
उनको अगल-बगल के बाड़े में रखा गया था. वे बाड़ के पास साथ-साथ दौड़ते और फिर आराम करते.
सामाजिक गतिविधियों के फायदे यदि अज्ञात के ख़तरे को दूर करते हों तो सामाजिक प्राणी दूसरी प्रजातियों के जानवरों से लगने वाले डर से पार पा लेते हैं.

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संरक्षण
मैसाचुसेट्स के खेत में लुलु नाम का सुअर बेबी नाम की एक अंधी गाय के लिए गाइड बन गया.
वह गाय को चारे तक ले जाता और यह सुनिश्चित करता कि वह किसी चीज़ से टकरा न जाए.
इसी राज्य के एक दूसरे फार्म में एक हंस और शेटलैंड घोड़े ने आपस में दोस्ती कर ली. घोड़ा जब बीमार पड़ा तो यह दोस्ती और मज़बूत हो गई.
घोड़े के इलाज के लिए उसके पास आने वाले किसी भी आदमी पर यह हंस पंख फड़फड़ाकर हमला करता.
ऐसी अनगिनत कहानियां हैं जिनमें ह्वेल और डॉल्फिन कठिनाइयों में पड़े लोगों और दूसरे जानवरों की मदद करती हैं.
दरअसल यह किसी को नहीं मालूम कि जानवर दूसरी प्रजाति के जानवरों की मदद करने के लिए आत्म-संरक्षण की प्रवृत्ति को क्यों छोड़ते हैं.
कुछ मामलों में निश्चित रूप से यह पहचान ग़लत होने का मामला हो सकता है.
कोई जानवर दूसरे जानवर को ग़लती से अपना समझ लेता है. लेकिन हंस और घोड़े के मामले में इसका औचित्य साबित करना मुश्किल है.
जानवरों पर इंसानी जज्बातों को लागू करना हमेशा ख़तरनाक होता है, लेकिन इनमें से कुछ मामलों में हमदर्दी के सबूत साफ-साफ दिखते हैं.

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दोनों का फायदा
शुतुरमुर्ग और ज़ेब्रा को साथ-साथ रहते देखा गया है. ये दोनों शिकारी जानवरों के लिए भोजन हैं.
शुतुरमुर्ग की नज़र कमज़ोर होती है, मगर ज़ेब्रा दूर तक अच्छे से देख लते हैं.
लेकिन ज़ेब्रा की सूंघने की ताक़त कमज़ोर होती है और शुतुरमुर्गों में इसकी क्षमता जबर्दस्त होती है. साथ होने पर वे एक-दूसरे को बहुत अधिक सुरक्षा देते हैं.
हनी बैजर (बिज्जू) यूं तो हनी गाइड चिड़ियों का नाश्ता करना पसंद करते हैं, लेकिन उन्हें अच्छा लगता है कि ये परिंदे उनको मधुमक्खी के छत्तों तक ले जाएं.
यह बिल्ली और बत्तख के बच्चों की दोस्ती जितना प्यारा भले न हो लेकिन जानवरों की दुनिया में इस तरह की विचित्र चीज़ें होती हैं.
वे जानते हैं कि दुश्मन से भी हाथ मिला लेना और साथ काम करने से दोनों को फायदा हो सकता है.

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हैरान करने वाला
बिल्लियों और परिंदों को अच्छा दोस्त नहीं माना जाता लेकिन सफ़ोक (इंग्लैंड) के एक खेत में बिल्ली ने एक चूजे को अपना लिया जो लोमड़ी के हमले में घायल हो गया था.
बिल्ली ने उसे नहलाया और उसकी देखरेख की जब तक कि उनके बीच पक्की दोस्ती न बन गई.
साइबेरिया के चिड़ियाघर में एक बाघ ने बकरे से दोस्ती कर ली जिसे उसके बाड़े में भोजन के लिए भेजा गया था.
इस बाघ ने खाने के लिए डाले गए दूसरे सभी बकरों को ख़ुशी-ख़ुशी खा लिया था, लेकिन इस एक बकरे से उसने दोस्ती कर ली. दोनों साथ-साथ रहने लगे.
बाघ के इस व्यवहार के पीछे एक तर्क यह दिया जाता है कि जब बकरे को बाघ के बाड़े में भेजा गया था तब उसे भूख से ज़्यादा अकेलापन सता रहा था इसलिए उसने बकरे को मारकर खाने की जगह उसे दोस्त बना लिया.
बकरे की किस्मत अच्छी थी कि वह सही समय पर सही जगह पहुंच गया. इससे ऐसा लगता है कि यदि जानवरों में एक आवेग दूसरे पर हावी हो जाए तो अप्रत्याशित चीज़ें भी हो जाती हैं.
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