अंधेरा होते ही अनोखे ढंग से बदल जाता है समंदर

कोलंबिया के पास प्रशांत महासागर की तस्वीर.

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, कोलंबिया के पास प्रशांत महासागर की तस्वीर.
    • Author, मिशेल डगलस
    • पदनाम, बीबीसी अर्थ

समंदर दिन की रौशनी में जितना ख़ूबसूरत लगता है, उससे कहीं ज़्यादा हसीन रात के अंधेरे में लगता है.

पानी की बलखाती लहरों पर जब छन-छन कर चांद की किरणें पड़ती हैं, तो लगता है कोई क़ातिल हसीना अदाओं और ख़ूबसूरती से अपने आशिक़ को रिझा रही है.

समुद्र में रहने वाले बहुत से जीव जो दिन में नहीं निकलते, वो रात में बाहर आते हैं. पानी की लहरें जब उफान के साथ उठती हैं तो लगता है वो अपने साथ अनगिनत छोटी-छोटी नीली बत्तियां समेटे हुए हैं. सवाल ये है कि आख़िर समुद्र में ये नीली टिमटिम रौशनी आती कहां से है?

असल में ये क़ुदरती बिजली की चमक होती है. समंदर के बहुत से जीवों में ये ख़ूबी होती है कि उनके शरीर से चमक पैदा होती है.

नीली रोशनी छोड़ने वाले जीव

समुद्र में डाइनोफ्लैगलेट्स नाम के जीव पाए जाते हैं. ये रात के अंधेरे में नीले रंग की रौशनी छोड़ते हैं.

कैरेबियन देशों पुएर्तो रिको और जमैका के पास के समुद्री इलाक़ों में ये जीव बड़ी तादाद में पाए जाते हैं. रात के वक़्त अक्सर इनकी चमक देखी जाती है. ख़ास तौर से तब, जब कोई बड़ा जीव या जहाज़ उस इलाक़े से गुज़रता है.

डाइनोफ्लैगलेट्स

इमेज स्रोत, Naturepl.com/Doug Perrine

इमेज कैप्शन, समंदर किनारे चमकते डाइनोफ्लैगलेट्स

समुद्र के अंदर पाई जाने वाली घास और फफूंद में भी ये रौशनी पैदा करने की क्षमता होती है. जब पानी की लहरें उठतीं है तो यह घास हिलने लगती है. लगता है कि लहरों के बीच नीले बल्ब टिमटिमा रहे हों.

कभी-कभी डाइनोफ्लैगलेट्स की संख्या काफ़ी तेज़ी से बढ़ती है और ये दिन में भूरे लाल रंग के लगते हैं. इन्हें लाल ज्वार के नाम से भी जाना जाता है. इनमें से कुछ ज़हरीले भी होते हैं.

रात के अंधेरे में समुद्र कभी कभी दूधिया सफ़ेद भी नज़र आता है. इसे मिल्की-सी कहा जाता है. हालांकि ऐसा बहुत कम देखने को मिला है. 1915 के बाद कुछ बार ही समुद्र का ये नज़ारा देखा गया होगा. ये मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिमी हिंद महासागर में, जावा और इंडोनेशिया के पास के समुद्र में देखने को मिलता है.

छोटे जीव

इमेज स्रोत, Naturepl.com/Martin Dohrn

इमेज कैप्शन, इन छोटे जीवों की वजह से चमकती हुई नज़र आती है समदंर की सतह.

समुद्र के इस रूप के लिए डाइनोफ्लैगलेट्स ज़िम्मेदार नहीं होते हैं. बल्कि कहा जाता है कि रौशनी छोड़ने वाले बैक्टीरिया समुद्र की सतह पर जमा हो जाते हैं जिसके चलते सफ़ेद रंग नज़र आता है. जब ये बैक्टीरिया बहुत ज़्यादा संख्या में जमा हो जाते हैं, तो समुद्र बर्फ़ की चादर के समान लगने लगता है. क़ुदरत के इस फ़ितरी अमल की असल वजह क्या है, वैज्ञानिकों को इसे जानने का मौक़ा कम ही मिल पाया है.

2005 में रिसर्चरों ने मिल्की-सी की कुछ सैटेलाइट इमेज जमा की थी. समुद्र में ये नज़ारा लगातार तीन रातों तक बना रहा था फिर धीर-धीरे कम होने लगा.

अंधेरे में चमकने वाले जानवर

समुद्र की गहराई में जितने भी जीव पाए जाते हैं, उनमें से बहुतों में नीली रौशनी पैदा करने की क्षमता होती है. कुछ जीवों की दुम चमकती है तो कुछ का पूरा शरीर. बहुत सी मछलियां पूरी तरह से चमकती हैं, तो कुछ की सिर्फ़ आंखें चमकती है.

बॉबटेल स्क्विड

इमेज स्रोत, Naturepl.com/Jurgen Freund

इमेज कैप्शन, बॉबटेल स्क्विड

रात के अंधेरे में समुद्र की गहराई में रौशनी का ये इकलौता ज़रिया होती हैं. जिन मछलियों की आंखें चमकती हैं, वो ज़रूरत के हिसाब से अपनी आंख खोलती और बंद करती हैं. जहां उन्हें रौशनी की ज़रूरत होती है, वहीं अपनी आंख घुमाती हैं. इनकी रौशनी की मदद से दूसरे बैक्टीरिया भी घूमते हैं.

रिसर्च बताते हैं कि जिन जीवों में रोशनी पैदा करने की क्षमता नहीं होती, उनका इस ख़ूबी वाले जीवों से अच्छा रिश्ता होता है.

चांदनी रात का असर

चांदनी रात का कवियों और शायरों ने ख़ूब ज़िक्र किया है. कभी माशूका की याद में, तो कभी उसकी ख़ूबसूरती बयां करने के लिए चांद की मिसालें दी गई हैं.

चांदनी रात में इक नशा सा होता है. इसका असर सिर्फ़ इंसानों पर पड़ता है, ऐसा नहीं है.

ऑस्ट्रेलिया की मशहूर मूंगे की चट्टान, यानी ग्रेट बैरियर रीफ़ में चांदनी रात का संबंध क़ुदरत की बुनियादी क्रिया यानी सेक्स होता है. मूंगे की क़रीब 130 प्रजातियां चांदनी रात में यौन क्रिया करती हैं. मूंगे की ये नस्लें एक ही वक़्त में एकसाथ अंडे देती हैं.

मूंगे

इमेज स्रोत, Credit: Naturepl.com/Jurgen Freund

क़रीब आधे से एक घंटे के भीतर इनके बीच सेक्स होता है. पानी में घुलने से पहले ये कुछ वक़्त के लिए ये वहीं जमा रहते हैं, और किसी ख़ूबसूरत चट्टान की तरह नज़र आते हैं. लेकिन ये नज़ारा सिर्फ़ चांदनी रात में ही देखने को मिलता है.

रिसर्चरों के मुताबिक़ समुद्र का ये अद्भुत नज़ारा देखने लायक होता है. ये मंज़र पूरी तरह से रूहानी लगता है. चांद की रौशनी शायद इन्हें एक साथ जमा होने का सिग्नल देती है. माना जाता है कि मूंगे के पास फोटोरिसेप्टर होता है जो चांद की रौशनी के अलग-अलग रूप को पकड़ता रहता है. इससे ही उसे अंडे और स्पर्म रिलीज़ करने में मदद मिलती है.

तारों की रोशनी भी आती है काम

चांद की रौशनी मूंगे के लिए जितनी मुफ़ीद है, सील मछली के लिए उतनी ही ख़तरनाक है. ख़ास तौर से सर्दी के मौसम में चांदनी रातें इनके लिए सबसे मुश्किल वाली होती हैं. क्योंकि शार्क जैसी ख़तरनाक मछलियां इन्हें अपना शिकार बना लेती हैं. कई बार ये भी देखा गया है कि सूरज निकलते समय भी शार्क ने सील पर हमला किया है.

ग्रेट वाइट शार्क

इमेज स्रोत, Naturepl.com/Chris & Monique Fallows

माना जाता है कि चांद और उगते सूरज की मिली-जुली रौशनी शार्क की हमला करने की शक्ति को कम कर देती है. और इस वक़्त में सील मछली की ताक़त बढ़ जाती है. शार्क, चांद की रौशनी में ज़्यादा तेज़ी से काम करती है, जबकि सील सिर्फ़ तारों की रौशनी से भी अपना काम चला लेती है.

कुछ रिसर्च ये भी बताती हैं कि सुबह और शाम की मद्धम रौशनी में भी सील अपने खाने की जगह और साहिल दोनों को देख सकती है.

हर रात सतह पर आते हैं कुछ जीव

दिन में समुद्र की तलहटी में रहने वाला जम्बो स्क्विड रात के अंधेरे में खाना तलाशता हुआ समुद्र की सतह पर खुद को छुपा लेता है. सूरज के डूबने के साथ ही ये ऊपर आते हैं और सूरज निकलने के साथ ही वापस गहरे पानी में चले जाते हैं.

स्क्विड

इमेज स्रोत, Naturepl.com/Franco Banf

इमेज कैप्शन, स्क्विड की कुछ प्रजातियां रात को समंदर की सतह पर आती हैं.

स्क्विड हर शाम करीब हज़ार मीटर की दूरी तय करके समुद्र की सतह पर आते हैं. जम्बो स्क्विड की लंबाई 5 फीट से लेकर 13 मीटर तक हो सकती है. इनका रंग चमकीला लाल होता है, इसीलिए इन्हें रेड डेविल के नाम से भी जाना जाता है. चारों और निकली अपनी भुजाओं से ये शिकार को कसकर पकड़ लेता है, और उसे फाड़ डालता है.

लेकिन ये इंसान पर बहुत कम हमला करता है. वैसे देखा जाए तो किसी भी जानवर से इंसान को कम बल्कि इंसान से उस को ख़तरा ज़्यादा है.

बहरहाल समुद्र के अंदर की दुनिया बहुत हसीन, रंगीन और ख़ूबसूरत है. चांद इसकी ख़ूबसूरती में और चार चांद लगा देता है.

(बीबीसी अर्थ पर इस स्टोरी को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. आप बीबीसी अर्थ को फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)