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तो क्या, अब मोनालिसा की मुस्कान, इस जीत की मुस्कान है?
- Author, केली ग्रोवियर
- पदनाम, बीबीसी कल्चर
कुछ तस्वीरें ऐसी होती हैं, जो किसी बात की प्रतीक बन जाती हैं. कुछ पेंटिंग्स, किसी ख़ास आंदोलन की नुमाइंदगी करने लगती हैं. पर, क्या कोई ऐसी कलाकृति हो सकती है, जो किसी भी आंदोलन, किसी भी सिद्धांत को ज़ाहिर करने में इस्तेमाल की जाए?
पिछले दिनों पोलैंड में गर्भपात पर पाबंदी के नए क़ानून के ख़िलाफ़ बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे. पोलैंड में गर्भपात पर प्रस्तावित नए क़ानून के मुताबिक़ गर्भपात हर हाल में ग़ैरक़ानूनी होगा, भले ही उससे मां की जान बचाने के लिए ही क्यों न किया जाए.
देश के बहुत से लोगों को ये पाबंदी ग़ैरज़रूरी और निजी मामलों में दखल लगा. बहुत से लोग पोस्टर बैनर लेकर सड़कों पर उतरे. लोगों ने पोस्टर में लिख रखा था, 'मेरा गर्भाशय, मेरी पसंद'.
इन विरोध प्रदर्शनों में एक ख़ास बात और थी. लोगों ने लियोनार्डो दा विंची की मशहूर पेंटिंग 'मोनालिसा' का कट-आउट भी अपने साथ ले रखा था.
अब दुनिया भर में मोनालिसा की पेंटिंग अपनी राज़दाराना मुस्कान के लिए मशहूर है. इससे जुड़े और भी क़िस्से-कहानियां हैं. मगर, गर्भपात विरोधी क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन में भी इसका इस्तेमाल हो सकता है, ये किसी ने नहीं सोचा था.
तो आख़िर प्रदर्शनकारियों की इसके पीछे सोच क्या रही होगी?
वैसे इस पेंटिंग को जब जानकारों ने क़रीब से देखा तो वो इस नतीजे पर पहुंचे कि लिज़ा नाम की जिस महिला की ये पेंटिंग है, वो जब विंची के लिए मॉडल बनी थी, तो गर्भवती रही होंगीं. उन्होंने जो कपड़े पहन रखे हैं वो उस दौर में इटली की गर्भवती महिलाएं पहना करती थीं.
शायद यही वजह है कि पोलैंड में गर्भपात विरोधी क़ानून की मुख़ालफ़त करने वालों ने मोनालिसा की पेंटिंग का कट-आउट अपने प्रदर्शन में शामिल किया.
ये पेंटिंग पांच सदी से भी ज़्यादा पुरानी हो चुकी है. इटली के शहर फ्लोरेंस में बनी ये पेंटिंग जिस दौर की है, उस दौर में गर्भपात ग़ैरक़ानूनी नहीं था.
ख़ैर, मोनालिसा की इस पेंटिंग का पोलैंड में जिस तरह इस्तेमाल हुआ, उससे एक बात तो साफ़ है. लियोनार्डो दा विंची की रची ये कलाकृति, सिर्फ़ मुस्कान के लिए, या चोरी और नक़ल के लिए नहीं मशहूर है.
ये कई और चीज़ों की प्रतीक है. जिसे पोलैंड के प्रदर्शनकारियों ने साबित कर दिया. वो अपने मिशन में कामयाब भी हुए और पोलैंड की संसद, गर्भपात पर पूरी तरह पाबंदी के क़ानून पर फिर से विचार के लिए तैयार हो गई.
तो क्या, मोनालिसा की मुस्कान, अब इस जीत की मुस्कान है?
(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी पर उपलब्ध है.)
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