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बुज़ुर्ग बोझ नहीं, उनकी भी है आर्थिक अहमियत
- Author, मारी शिबाता
- पदनाम, बीबीसी वर्कलाइफ़
भविष्य युवाओं का है, लेकिन उसे बूढ़े परिभाषित कर रहे हैं.
2018 में पहली बार दुनिया में 65 साल से ज़्यादा उम्र के बूढ़ों की तादाद 5 साल से कम उम्र के बच्चों से अधिक हो गई.
2050 तक 80 साल से ज़्यादा उम्र के बुजुर्गों की तादाद मौजूदा 14.3 करोड़ से तीन गुना बढ़कर 42.6 करोड़ हो जाने की संभावना है.
20वीं सदी के मध्य से वैश्विक जन्म दर घट रही है और 65 साल से बड़े बुजुर्गों की आबादी किसी भी दूसरे समूह से ज़्यादा तेज़ी से बढ़ रही है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक अफ़्रीका को छोड़कर दुनिया के हर क्षेत्र में प्रजनन दर प्रतिस्थापन दर के क़रीब या उससे नीचे है.
प्रतिस्थापन दर उस दर को कहा जाता है जो आबादी के आकार को स्थिर रखने के लिए ज़रूरी होती है. ऊंची आमदनी वाले अधिकतर देशों में यह दर प्रति महिला 2.1 के क़रीब है.
उपभोक्ताओं का नया वर्ग
आबादी सिर्फ़ बूढ़ी नहीं हो रही. लोग ज़्यादा दिनों तक जी रहे हैं और सेहतमंद भी रहते हैं. बूढ़ों की तादाद बढ़ने से उपभोक्ताओं, कामगारों और अन्वेषकों का समूह भी बड़ा हो रहा है.
बुज़ुर्गों को 'सिल्वर इकॉनमी' से केवल सेवा की ज़रूरत नहीं है, बल्कि वे अर्थव्यवस्था के पूर्णकालिक सेवा भागीदार हैं.
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी एजलैब के निदेशक और "लॉन्जेविटी इकॉनमी: अनलॉकिंग द वर्ल्ड्स फ़ास्टेस्ट-ग्रोविंग, मोस्ट मिसअंडरस्टूड मार्केट" के लेखक डॉ. जोसेफ कफलिन कहते हैं, "अब हम जीवन के नये चरण के बारे में बात करते हैं जो वयस्क जीवन के बाद वाले हिस्से जितना ही लंबा है."
डॉ. कफलिन ज़िंदगी को बराबर-बराबर दिनों के हिस्सों में बांटते हैं, जैसे शून्य से 21 साल, 21 से 40 साल और 40 साल से रिटायरमेंट तक. इनमें से हर हिस्से में क़रीब 8,000 दिन होते हैं.
वह कहते हैं, "यदि आप 65 साल के हो चुके हैं तो आपके पास 50 फ़ीसदी और संभावना है कि आप 85 साल तक जिएं- मतलब 8,000 दिन और."
"यानी अब हम अपने वयस्क जीवन के तीसरे हिस्से को देख रहे हैं जहां कोई कहानी नहीं है, कोई यंत्र नहीं है, पुरस्कार या अपेक्षाएं नहीं हैं."
अब जबकि बुज़ुर्ग लंबी सेहतमंद ज़िंदगी जी रहे हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं तो इस बात की संभावनाएं बनी हैं कि उनका दीर्घायु जीवन समाज के काम आए.
2015 में 50 साल और उससे ज़्यादा उम्र के अमरीकियों ने क़रीब 8 ट्रिलियन डॉलर की आर्थिक गतिविधियां पैदा कीं.
बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप का अनुमान है कि 2030 तक घरेलू उपभोक्ता ख़र्चों में होने वाली कुल बढ़ोतरी का आधा हिस्सा 55 साल से बूढ़ी अमरीकी आबादी के कारण होगा.
जापान में यह हिस्सा 67 फ़ीसदी और जर्मनी में 86 फ़ीसदी हो गया है. वैश्विक आर्थिक गतिविधियों का बड़ा हिस्सा बुज़ुर्गों के पास होने से विकास के नये मौके खुल सकते हैं.
बुढ़ापे को चुनौती
समाज में बुढ़ापा बढ़ने को आम तौर पर देश की आर्थिक सेहत के लिए नुक़सानदेह माना जाता है, क्योंकि इससे काम करने वाले घटते हैं और स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ बढ़ता है.
इस साल जापान में हुई जी-20 बैठक में पहली बार बुढ़ापे को चर्चा की प्राथमिकता सूची में रखा गया था.
बैंक ऑफ़ जापान के गवर्नर हारुहिको कुरोडा ने कहा कि बूढ़ी होती आबादी केंद्रीय बैंकों के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी कर सकती हैं.
संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट में भी चेतावनी दी गई थी कि आने वाले दशकों में कई देशों पर राजकोषीय दबाव बढ़ेगा क्योंकि उनको सार्वजनिक स्वास्थ्य, पेंशन और बुज़ुर्गों की सामाजिक सुरक्षा पर अधिक ख़र्च करना होगा.
जिन देशों में रिटायर लोगों को तादाद बढ़ रही है उन पर इसका विशेष प्रभाव पड़ेगा.
समाज पर बोझ या मौका
एमआईटी के कफलिन को लगता है कि बूढ़ों की आबादी बढ़ने के बावजूद आर्थिक अवसरों पर बुढ़ापे के असर को हावी होने नहीं दिया जा सकता.
बुढ़ापा एक सामाजिक विचार है और इससे यह पता नहीं चलता कि मध्य आयु के बाद लोग हक़ीक़त में कैसे रहते हैं.
कफलिन का कहना है कि व्यवसायों को बुज़ुर्गों की वास्तविक ज़रूरत के मुताबिक सेवा देनी चाहिए, न कि पारंपरिक सोच के मुताबिक. बूढ़े लोगों को भी कार चाहिए, मज़ा चाहिए, फ़ैशन चाहिए.
"यह उम्र के दायरे से बाहर होने के बारे में है- चीज़ें जो अधिक व्यक्ति केंद्रित हैं, खुशहाली पर केंद्रित हैं, सुख-सुविधाओं पर जिनका जोर है."
ऑन-डिमांड इकॉनमी का विकास युवाओं की मांग से जुड़ा माना जाता है, लेकिन इससे बूढ़े वयस्कों को फायदा हो रहा है. जो सचमुच बहुत बूढ़े हैं उनको जीने का सहारा मिल गया है.
बुज़ुर्गों की अर्थव्यवस्था के बारे में बहुत अधिक शोध उपलब्ध नहीं है, फिर भी इतना स्पष्ट है कि व्यवसायों ने बुढ़ाते उपभोक्ताओं की ज़रूरतें पूरी करने की तैयारी कर ली है, जो उनके लिए बड़ा मौका है. आख़िरकार यह समूह ख़र्च कर रहा है.
51 देशों के ऑनलाइन उपभोक्ताओं पर आधारित केपीएमजी 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक बेबी बूमर्स (55 से 75 साल) ऑनलाइन सौदों पर सबसे ज़्यादा 203 डॉलर प्रति सौदे ख़र्च करते हैं.
इनके मुक़ाबले मिलेनियल्स युवा सबसे कम ख़र्च करते हैं, औसत रूप से 173 डॉलर.
बुज़ुर्गों की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा बाज़ार जापान हो सकता है जो दुनिया में सबसे तेज़ी से बूढ़ा हो रहा है.
जापान में छोटी सुविधाओं (जैसे डाकघरों, बैंकों और होटलों में पढ़ने वाले लेंस) से लेकर बड़े संरचनात्मक सुधारों (जैसे पैदल सड़क पार करने वालों को ज़्यादा समय देने के लिए पुश बटन) में बुज़ुर्गों का ख़याल रखा जा रहा है.
जापान की कम से कम 20 फ़ीसदी आबादी 70 साल से ऊपर की है. स्थानीय स्विमिंग पूल से लेकर पैकेज होलीडे और व्यायाम कक्षाओं तक बुजुर्ग युवा पीढ़ी के साथ दिखते हैं.
मैचिंग ड्रेस पहनकर सफ़र करने वाले और तस्वीरें साझा करने वाले बॉन एंड पॉन जैसे ऑनलाइन समूह इस बात की मिसाल है कि कैसे जापान की बुज़ुर्ग पीढ़ी युवाओं की तरह ज़िंदगी का आनंद ले रही है.
बुज़ुर्ग कब तक करें काम?
लंबी उम्र तक सेहतमंद रहने से काम करने की आज़ादी बढ़ गई है.
काम करने वाले लोग तंदुरुस्त हों, लंबी उम्र तक जीते हों तो पुराने कर्मचारी आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने में सक्षम होते हैं. कंसल्टेंसी फ़र्म डेलॉइट इसे "लॉन्जिविटी डिवेडेंड" कहती है.
जर्मनी में उम्रदराज श्रमिकों को नौकरी पर रखना राष्ट्रीय आर्थिक स्थिरता का विषय है. वहां की 21 फ़ीसदी आबादी 65 साल से अधिक की है.
क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज़ का कहना है कि बूढ़ी होती आबादी जर्मनी की आर्थिक ताक़त के लिए ख़तरा है.
यदि जर्मनी अपनी AAA क्रेडिट रेटिंग कभी खोएगा तो उसका संभावित कारण अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों पर जनसांख्यिकीय बदलाव का असर होगा.
OECD के मुताबिक सेहत और ज़िंदगी कितनी चलेगी इसकी संभावना सुधरने से जर्मनी के 65 साल के बुजुर्गों को अगले 20 साल और ज़िंदा रहने की उम्मीद रहती है.
लेकिन विनिर्माण उद्योग में शारीरिक दमखम की ज़रूरत होती है, इसलिए कारखानों में श्रमिकों को रिटायरमेंट की उम्र तक रखना एक चुनौती बनी रहेगी.
बुजुर्गों के लिए समायोजन
कुछ जर्मन कंपनियां बूढ़े होते श्रमिकों को समायोजित करने और उनको सक्रिय रखने के लिए नई टेक्नोलॉजी का सहारा ले रही हैं.
लीपज़िग में पोर्श के कारखाने में शिफ़्ट में काम करने वाले मजदूरों की सहायता के लिए एर्गोनॉमिक्स की मदद ली जा रही है.
श्रमिकों को पूरे दिन एक काम से दूसरे काम में लगाया जाता है ताकि शरीर के सभी अंग सुचारू रूप से काम करते रहें.
पूरी फैक्ट्री में ट्रैफिक लाइट सिस्टम की तरह संकेत लगाए गए हैं और मैनेजर इस बात का ध्यान रखते हैं कि किसी श्रमिक का कोई भी अंग ज़्यादा न थक जाए.
पोर्श के लीपज़िग प्लांट की एर्गोनॉमिक्स विशेषज्ञ एलीसा फ्रे कहती हैं, "इसका मकसद प्रतिक्रिया करना नहीं, बल्कि निवारक उपाय करना है."
मैन्युफैक्चरिंग के विभिन्न चरणों में रोटेशन से शरीर के किसी हिस्से पर बोझ बढ़ने से रोका जा सकता है. इसके अलावा प्रक्रिया, बल सीमा और मशीनों की ऊंचाई को समायोजित करके शरीर का ख़याल रखा जा सकता है.
लेकिन बुजुर्गों का दीर्घायु होना समाज पर बोझ है या फायदा, यह इस चुनौती के लिए निपटने की तैयारियों पर निर्भर करता है.
कफलिन कहते हैं, "बेबी बूमर्स ने एक नई पीढ़ी तैयार की है. उनसे अपेक्षा है कि भले ही वे युवा न हों, लेकिन चिरयुवा की तरह महसूस करें."
"न सिर्फ़ उनकी अपेक्षाएं हैं, बल्कि कई मामलों में वे नये उत्पादों, नई सेवाओं और नये अनुभवों की मांग भी करते हैं ताकि जीवन का हर चरण पहले से थोड़ा बेहतर हो."
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