पांच हज़ार रुपये की कॉफ़ी में ख़ास क्या है?

कॉफ़ी बीन

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    • Author, एलेन ली
    • पदनाम, बीबीसी कैपिटल

अगले कुछ ही हफ़्तों में पनामा की पुरस्कार विजेता कॉफी के लिए बोली लगेगी तो सबकी निगाहें इस बात पर होंगी कि क़ीमतें कितनी ऊपर जाती हैं.

पिछले साल की नीलामी में रिकॉर्ड बना था. कॉफ़ी के बेहतरीन बीज के लिए 803 डॉलर (640 पाउंड) प्रति पाउंड (454 ग्राम) की बोली लगी थी.

कॉफ़ी की यह नस्ल एलिडा गीशा कहलाती है जिसे इस मध्य अमरीकी देश के पश्चिमी हिस्से में ज्वालामुखी संरक्षित वन के अंदर एक पारिवारिक बागान में उगाया जाता है.

नीलामी में केवल 100 पाउंड (क़रीब 45 किलो) कॉफ़ी रखी गई थी, जिसे ख़रीदने के लिए चीन, जापान और ताइवान के ख़रीदार मौजूद थे.

वहां अमरीका से भी एक ग्राहक था- लॉस एंजेल्स स्थित क्लैच कॉफी.

क्लैच ने 10 पाउंड कॉफ़ी ख़रीदी, उसका ख़ूब प्रचार किया और "दुनिया की सबसे महंगी कॉफ़ी" के लिए 75 डॉलर प्रति कप का रेट तय किया.

छोटे किसानों की मदद

एलायंस ऑफ़ कॉफ़ी एक्सीलेंस अमरीकी राज्य ओरेगॉन के पोर्टलैंड का एक अलाभकारी संगठन है जो दुनिया भर में छोटे किसानों को विशिष्ट कॉफ़ी उगाने में सहायता करता है.

इसके कार्यकारी निदेशक डैरिन डेनियल कहते हैं, "जब हम सबसे उम्दा वाइन या ब्रांडी के बारे में सोचते हैं, या और भी कई आनंददायक पेय हैं तो हम नहीं ठिठकते. उच्च स्तरीय कॉफ़ी को भी वही सम्मान मिलना चाहिए."

एक कप सामान्य कॉफ़ी की क़ीमत एक पाउंड से कम है. आपूर्ति बढ़ने से क़ीमतें गिरी हैं.

ब्राजील जैसे देशों में कॉफ़ी की बड़े पैमाने पर खेती होती है. यूरोपीय संघ के कुल आयात का 29 फीसदी हिस्सा ब्राज़ील का है.

छोटे किसानों के लिए उसकी चुनौती का मुक़ाबला करना या टिके रहना आसान नहीं है.

1990 के दशक के आख़िर में मंदी के मुश्किल दिनों में स्पेशियलिटी कॉफ़ी के लिए प्रतियोगिताएं और नीलामियां शुरू हुईं.

डेनियल का कहना है कि इसका मक़सद छोटे किसानों को पहचान दिलाना और उनके लिए एक मंच तैयार करना था जहां से वे अमरीका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के कॉफी ख़रीदारों से जुड़ सकें.

आज दर्जनों प्रतियोगिताएं और नीलामियां होती हैं. एलायंस ऑफ़ कॉफ़ी एक्सीलेंस द्वारा आयोजित "द कप ऑफ़ एक्सीलेंस" को "कॉफ़ी का ओलंपिक" भी कहा जाता है. इसमें 11 देशों के कॉफ़ी उत्पादक भाग लेते हैं.

"दि बेस्ट ऑफ़ पनामा" प्रतियोगिता, जिसमें एलिडा गीशा को ताज मिला था, उसमें भी अंतरराष्ट्रीय दिलचस्पी रहती है.

प्रतियोगिताओं में सबसे बेहतर स्कोर करने वाली कॉफ़ी भी एक डॉलर प्रति पाउंड में बिकती है- 803 डॉलर प्रति पाउंड का भाव ज़रूरी नहीं.

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कई बार भाव 100 डॉलर से लेकर 300 डॉलर तक भी जाता है.

सबका फ़ायदा

स्पेशियलिटी कॉफ़ी एसोसिएशन ऑफ़ अमरीका (SCAA) के पूर्व कार्यकारी निदेशक रिक रेनहार्ट कहते हैं, "यह किसानों और उपभोक्ताओं, दोनों के लिए फायदेमंद है."

"किसान बेहतर जीवन जीते हैं और उपभोक्ता बेहतर उत्पाद का आनंद लेते हैं."

एलिडा गीशा पनामा के बोक़्वेटे में एक छोटे बागान से आता है, जिसे लेमास्टस परिवार पिछली चार पीढ़ियों से चला रहा है.

एलिडा इस परिवार की महिला मुखिया का नाम था जो इस खेत को संभालती थी. युवावस्था में ही पति के गुज़र जाने के बाद उन्होंने पूरे परिवार को संभाला था.

वैसे तो यह परिवार 100 साल से भी ज़्यादा समय से कॉफ़ी उगा रहा है, लेकिन एलिडा गीशा नई क़िस्म है.

लेमास्टस परिवार की चौथी पीढ़ी के कॉफ़ी उत्पादक विल्फ़ोर्ड लेमास्टस जूनियर का कहना है कि लंबे समय से इस पारिवारिक बागान को संघर्ष करना पड़ा था और नुक़सान भी हुआ था.

कॉफ़ी के अलावा वहां प्याज, बेरी और खरबूज़े की भी खेती होती है. वह कहते हैं, "सही दिमाग़ वाला कोई भी आदमी कहता- हमें घाटा हो रहा है, हमें यह काम छोड़ना होगा."

लेकिन इस परिवार ने कॉफ़ी का उत्पादन दोगुना करने का फ़ैसला किया.

विल्फ़ोर्ड के पिता ने स्पेशियलिटी कॉफी एसोसिएशन ऑफ़ पनामा के गठन में मदद की. उन्होंने दूसरे कॉफ़ी किसानों को जोड़ा और "बेस्ट ऑफ़ पनामा" प्रतियोगिता करायी.

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दुर्लभ क़िस्म

2004 में एक अहम मोड़ आया. एक दूसरे पारिवारिक बागान, हैसेंडा ला एस्मेराल्डा, को गीशा नामक एक दुर्लभ कॉफ़ी की क़िस्म मिली थी.

उस साल की प्रतियोगिता में वह कॉफ़ी सबसे अलग रही और उसे 21 डॉलर प्रति पाउंड का भाव मिला जो उस समय एक रिकॉर्ड था.

जल्द ही दूसरे किसान भी, जिसमें लेमास्टस परिवार शामिल था, उस क़िस्म की खेती करने लगे.

कॉफ़ी की इस क़िस्म को गेशा के नाम से भी जाना जाता है. 1930 के दशक में इसे सबसे पहले इथोपिया के गेशा इलाक़े में उगाया गया था.

1960 के दशक में इसके बीज कोस्टा रिका के रिसर्च सेंटर तक पहुंचे और फिर पनामा तक आए.

कॉफ़ी की यह क़िस्म जीवट थी और कुछ बीमारियों से भी बच सकती थी. लेकिन इसके पौधों में थोड़ी ही कॉफ़ी होती थी और उसका स्वाद अच्छा नहीं था.

सालों तक इसकी अनदेखी हुई. फिर हैसेंडा ला एस्मेराल्डा के पीटरसन परिवार ने अपने बागान के एक सर्वेक्षण के दौरान संयोग से इसे देखा.

उन्होंने पाया कि ऊंची जगह पर इसके पौधे लगाने से एक अनोखा स्वाद मिलता है.

फलों और फूलों का स्वाद

रेनहार्ट कहते हैं, "एक शानदार कॉफ़ी में कभी-कभी एक या दो (फूलों के और/या फलों के) नोट्स साथ मिलाने में आप पूरा जीवन बिता सकते हैं, लेकिन गीशा कॉफ़ी में आपको ऐसे नोट्स का पूरा गुलदस्ता मिलता है."

लेमास्टस परिवार ने पहली बार 2006 में इस क़िस्म के बीज ख़रीदे और उसे बोये.

कॉफ़ी के पौधे तैयार होने में 8 साल लग गए, जो कॉफ़ी की दूसरी प्रजातियों से बहुत ज़्यादा थे.

लेमास्टस परिवार के 20 फीसदी पौधे नर्सरी से स्थानांतरण के दौरान मर गए. ऊंची जगह पर ले जाने से भी कई पौधे मरे.

लेमास्टस परिवार के पास समृद्ध रोपण क्षेत्र है. वहां लावा से बनी मिट्टी खनिजों से भरी है.

कैरिबियाई सागर और प्रशांत महासागर के बीच के क्षेत्र में स्थित उनके बागान को ऊंचाई पर होने का भी फायदा है.

कॉफ़ी के बीजों को चुनने और उसे संवर्धित करने में बहुत ध्यान देने की ज़रूरत होती है ताकि उसके स्वाद को बढ़ाया जा सके.

65 हेक्टेयर के बागान के लगभग 20 फीसदी हिस्से में गीशा कॉफ़ी की खेती होती है. इसे बढ़ाया जा रहा है.

2018 में लेमास्टस परिवार की एलिडा गीशा को अपनी कैटेगरी में जीत मिली.

इस साल यह परिवार दो बात जीता- एलिडा गीशा नैचुरल और एलिडा गीशा वाश्ड के लिए.

इस साल जुलाई के मध्य में होने वाली ऑनलाइन नीलामी के लिए दोनों क़िस्मों की 100-100 पाउंड कॉफ़ी उपलब्ध होगी.

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सबसे उम्दा स्वाद

क्लैच के रोस्टमास्टर माइकल पेरी पिछले साल के "बेस्ट ऑफ़ पनामा" प्रतियोगिता के निर्णायकों में से एक थे.

अंतरराष्ट्रीय जूरी ने कॉफ़ी की क़िस्म का नाम जाने बिना उसे चखा था और 100 अंकों के पैमाने पर अंक दिए थे.

पेरी ने एलिडा गीशा नैचुरल को 97 अंक दिए थे.

पेरी कहते हैं, "अब तक मैंने जितनी कॉफ़ी पी है उनमें यह सबसे अच्छी थी." हालांकि पेरी इस बात की संभावना भी रखते हैं कि हो सकता है कि भविष्य में इससे भी बेहतर कोई कॉफ़ी मिले.

पेरी ने बाद में ताइवान के ब्लैक गोल्ड जैसे ख़रीदारों के समूह के साथ मिलकर कॉफ़ी के लिए बोली लगाई.

टाइम ज़ोन में अंतर के कारण ऑनलाइन नीलामी देर रात तक चलती रही, लेकिन पुरस्कार विजेता कॉफ़ी को ख़रीद लेने के बाद ही वह सोने के लिए गए.

कॉफ़ी के बीजों को पनामा से अमरीका लाने और उसे तैयार करने की लागत को जोड़ने के बाद पेरी का अनुमान है कि प्रति पाउंड लागत 1,000 डॉलर के क़रीब पहुंचती है.

एक पाउंड कॉफ़ी के बीजों से क़रीब 80 कप कॉफ़ी तैयार होती है.

क्लैच ने इसे एक अनुभव में बदल दिया. निजी पार्टियां में ग्राहक न सिर्फ़ इस दुर्लभ कॉफ़ी का आनंद ले सकते हैं, बल्कि वे इसकी उत्पत्ति के बारे में भी जान सकते हैं.

क्लैच की वाइस-प्रेसिडेंट और SCAA की प्रेसिडेंट हीदर पेरी कहती हैं, "कॉफ़ी के लिए पैसे चुकाने वाले लोग भी नहीं जानते कि वे क्यों इतनी ऊंची क़ीमत दे रहे हैं."

"मैंने भी इसे चखा है"

डेनियल वाल्श क्लैच के ग्राहकों में से एक हैं और उन्होंने एलिडा गीशा का स्वाद चखने के लिए भुगतान किया है.

वाल्श कॉफ़ी के शौक़ीन हैं. वह अपने साथ निजी ग्राइंडर और कॉफ़ी के बीज लेकर चलते हैं ताकि हर सुबह अपने लिए कॉफ़ी का कप तैयार कर सकें.

वह कहते हैं, "हर रोज़ तो आप एक कप के लिए 75 डॉलर नहीं चुका सकते. लेकिन आप उम्दा वाइन या व्हिस्की ख़रीदते हैं. घड़ियों या जूतों के लिए आप ढेर सारे पैसे ख़र्च करते हैं."

"मैं कॉफ़ी पसंद करता हूं और मैं चाहता था कि मैं यह कह सकूं कि हां मैंने भी इसे चखा है."

वाल्श ने फलों और फूलों के अद्भुत संयोजन का ज़ायक़ा लेते हुए इसे चखा. इतने पैसे ख़र्च करने का उनका फ़ैसला सही था.

वह कहते हैं, "आप रोज़ाना की कॉफ़ी में यह स्वाद नहीं पा सकते."

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