अंग्रेजी की मुश्किल स्पेलिंग से अब डर कैसा

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- Author, क्रिस्टीन रो
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
अंग्रेजी का "centre" अब "center" है और "labour" अब "labor" बनकर भी खुश है.
लोग अंग्रेजी शब्दों की मुश्किल वर्तनी के आसान रूप को अपनाने पर ज़ोर दे रहे हैं.
क्या आपको इससे कोई तकलीफ है? यदि हां तो आप सदियों पीछे चल रहे हैं.
जब से अंग्रेजी लिखी जा रही है, तभी से इसकी वर्तनी की जटिलता लोगों को परेशान करती रही है.
उनका कहना है कि असंगत वर्तनी के कारण अंग्रेजी बेवजह कठिन भाषा बन जाती है.
ब्रिटेन की 'इंग्लिश स्पीकिंग सोसाइटी' आसान वर्तनी की मांग कर रही है.
इस संगठन का तर्क है कि मुश्किल वर्तनी और बढ़ते अपराध के बीच संबंध है और निरक्षरता लोगों को अवैधता के जीवन में धकेलती है.
हो सकता है कि यह बात किसी के गले न उतरे, लेकिन इतना तो स्पष्ट है कि गैर-पारंपरिक वर्तनी बुरा प्रभाव पैदा करती है.

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जैसा बोलो वैसा लिखो
ब्रिटेन के मुक़ाबले अमरीकी वर्तनी आसान है और गैर-अंग्रेजी भाषी विदेशी भी उसे जल्दी सीख लेते हैं.
अमरीकी वर्तनी छोटी और ध्वन्यात्मक है, यानि शब्द जैसे बोले जाते हैं वैसे ही लिखे जाते हैं.
अंग्रेजी शब्दों की अमरीकी वर्तनियां, शब्दकोश निर्माता नोआ वेब्स्टर के आंदोलन की विरासत हैं.
वेब्स्टर ने वर्तनी को आसान बनाने का अभियान चलाया था. वह दोहरे और अनुच्चरित अक्षरों को वर्तनी से बाहर निकालना चाहते थे.
व्यावहारिक होने के साथ-साथ इसका राजनीतिक पहलू भी था. वेब्स्टर के मुताबिक आसान वर्तनी से न सिर्फ़ भाषा सीखने वालों को आसानी होती है, बल्कि यह ज़्यादा लोकतांत्रिक भी है.
यह अमरीकियों को अंध महासागर के उस पार रहने वाले पिछले औपनिवेशिक स्वामियों से अलग करने में मददगार है.

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वर्तनी की राजनीति
राजनीतिक विचारों से प्रेरित होकर वर्तनी सुधारने की कोशिशें सिर्फ़ अंग्रेजी भाषा में नहीं हुई हैं.
दूसरे विश्वयुद्ध के बाद रोमानियाई भाषा ने अपने स्वर वर्ण 'â' को आधिकारिक तौर पर 'î' से बदल दिया था.
ऐसा यह दिखाने के लिए किया गया कि रोमानिया की भाषा रूसी और अन्य स्लाविक भाषाओं के करीब है, लेकिन जैसे ही रोमानिया पर सोवियत प्रभाव कम हुआ, 'â' की वापसी हो गई.
इससे पहले रोमानिया ने अपने नाम की वर्तनी में "Rumania" और "Roumania" पर "Romania" को तरजीह दी थी ताकि प्राचीन रोम से इसके संबंध पर ज़ोर दिया जा सके.
अमरीका में वेब्स्टर अंग्रेजी शब्दों की वर्तनी में क्रांतिकारी सुधार का प्रस्ताव रखने वाले पहले या आख़िरी व्यक्ति नहीं थे.
सरल वर्तनी के प्रशंसकों में बेंजामिन फ्रैंकलिन का नाम भी शुमार है, जिन्होंने अंग्रेजी वर्णमाला से एक्स (X) को निकाल देने की वकालत की थी.
फोनिक्स (phoenix) को फ़ेनिक्स (fenix) में बदलने की सिफारिश करने के लिए थियोडोर रूजवेल्ट का मजाक उड़ाया गया था.
वेब्स्टर प्रभावशाली रहे, जबकि अन्य लोगों को नज़रअंदाज़ कर दिया गथा. उनके विचारों को अमरीका ने अपनाया और "labour" पर "labor" को और "centre" पर "center" को वरीयता मिली, हालांकि उनके सभी विचार मान्य नहीं हुए.

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बदलाव आसान नहीं
वर्तनी के मामले में अंग्रेजी इतनी अनियमित भाषा है कि इसकी सभी गांठों को खोलना नामुमकिन है.
अंग्रेजी का कोई भी रूप पूरी तरह ध्वन्यात्मक नहीं लिखा जाता. वर्तनी के किसी भी नये नियम में ढेर सारे अपवादों को ध्यान में रखना पड़ता है.
अंग्रेजी ने दुनिया भर की दूसरी भाषाओं से लाखों शब्द लिए हैं और उनकी वर्तनी पर भी इसकी छाप पड़ी है.
विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में अंग्रेज़ी बोलने वाले लोगों का लहज़ा भी अलग-अलग है. इससे यह भाषा समृद्ध भी होती है और इससे मानकीकृत और आसान वर्तनी को चुनौती भी मिलती है.
इसीलिए भाषाविदों या आम लोगों ने कभी भी एक साथ मिलकर बड़े पैमाने पर वर्तनी सुधार का समर्थन नहीं किया.

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वर्तनी और डिस्लेक्सिया
वर्तनी आसान हो तो डिस्लेक्सिया से पीड़ित लोगों की मदद हो सकती है.
भाषायी रूप से अंग्रेजी अपारदर्शी है, यानि इसके मौखिक और लिखित रूप में तारतम्य नहीं है.
आप जो पढ़ते हैं और आप जो लिखते हैं उसमें भारी अंतर हो सकता है. इसके मुक़ाबले फ़िनिश और स्पेनिश पारदर्शी भाषाएं हैं.
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की न्यूरोसाइंटिस्ट लियरी फ़र्न-पोलाक कहती हैं, "अंग्रेजी सीखने वाले बच्चे स्पेनिश, इतालवी, चेक और जर्मन जैसी पारदर्शी भाषाएं सीखने वाले बच्चों के मुक़ाबले धीमी गति से सीखते हैं."
डिस्लेक्सिया तंत्रिका संबंधी बीमारी है. इससे प्रभावित व्यक्ति फिनलैंड में पैदा हो या इंग्लैंड में, उसे यह बीमारी रहेगी ही.
लेकिन फ़र्न-पोलाक का कहना है कि इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति अगर इंग्लैंड में रहे तो उसकी बीमारी की पहचान आसानी से होगी, क्योंकि यहां वह वर्तनी से जूझता दिखेगा.
उनका मानना है कि अगर डिस्लेक्सिया से पीड़ित बच्चे ध्वन्यात्मक वर्तनियों को पढ़ना शुरू करें तो यह उनके लिए अधिक मददगार होगा.
कुछ दूसरी भाषाओं में ऐसा होता है. मिसाल के लिए, हिब्रू में कुछ वर्णों के लिए डैश जैसे चिह्न हैं जो स्वर वर्ण की तरह काम करते हैं, भले ही मानकीकृत भाषा स्वर वर्णों के बिना लिखी जाती है.
बच्चे जब इस भाषा को चिह्नों के साथ सीखते हैं जो उनके बड़े होने पर धीरे-धीरे हटा लिए जाते हैं.
अंग्रेजी सीखने वाले बच्चों के लिए भी यह तरकीब काम आ सकती है.

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इंटरनेट के युग में अंग्रेजी
इंटरनेट के नये युग में वेब्स्टर के विचार शायद फिर से प्रासंगिक हो गए हैं, क्योंकि आईटी की भाषा और इंटरनेट, दोनों अंग्रेजी लिखने के तरीके को प्रभावित कर रहे हैं.
वैश्विक स्तर पर गूगल अमरीकी वर्तनी के लिए ज़्यादा परिणाम दिखाता है.
कंप्यूटर की भाषा में "programme" के मुक़ाबले "program" अधिक स्वीकार्य है.
टेक्स्ट संदेशों और सोशल मीडिया पोस्ट में छोटे शब्दों का चलन है. सर्च इंजन अमरीकी वर्तनी को तरजीह देते हैं.
इंटरनेट के गूगलीकरण की वजह से थाई सीखने वाले अमरीकी वर्तनियों को पसंद करते हैं.
इंटरनेट लोगों को एक शब्द की कई वर्तनियां भी दिखाता है. ओह्यो स्टेट यूनिवर्सिटी की भाषाविद लॉरेन स्क्वायर्स कहती हैं, "ट्विटर और इंस्टाग्राम पर लोग वर्तनी से अपनी बोलियों का प्रतिनिधित्व करते हैं."
स्क्वायर्स का मानना है कि लोग अब वर्तनी के विभिन्न रूपों को लेकर पहले से अधिक सहज हो रहे हैं, भले ही वे मानते हों तो कोई एक वर्तनी ही सही हो सकती है.

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नये शब्द
इंटरनेट के शुरुआती दिनों में वेब्स्टर की तरह अंग्रेजी की वर्तनियों को तर्कसंगत बनाने की कोशिशें हुई थीं.
इससे "LOL", "Luv U" और "cuz" जैसे संक्षिप्त शब्द निकले, हालांकि "hi school" जैसे सभी प्रयोग नहीं चल पाए.
ऑनलाइन संचार में लिखित अंग्रेजी के एक पहलू की काट-छांट हो रही है, वह है विराम चिह्न.
त्वरित छोटे संदेशों में फुलस्टॉप गायब होता जा रहा है. ऐसे संदेशों में फुलस्टॉप ठंडेपन या खोटेपन का संकेत करते हैं.
त्वरित संदेशों में लिखे जाने वाले छोटे वाक्यों और वाक्यांशों ने फुल स्टॉप को गैरज़रूरी बना दिया है.
इसी तरह लिखित अंग्रेजी के कुछ हिस्सों में अपोस्ट्रॉफी एस ('s या 'es) ख़त्म होते जा रहे हैं. उनको गैरज़रूरी और समय की बर्बादी माना जाता है.
अनौपचारिक लेखन में वे ऑक्सफोर्ड कॉमा के रास्ते पर जा रहे हैं.
लोग उनका इस्तेमाल तभी करते हैं जब भ्रम से बचने की ज़रूरत हो, जैसे- उसकी बहन के पैसे (his sister's money) और उसकी बहनों के पैसे (his sisters' money).
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