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बच्चों की ज़िंदगी में रंग घोलने वाली ये लड़की..
- Author, एना टेरा आथेद
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
ब्राज़ील में 4 साल से लेकर 17 साल तक के लगभग सभी बच्चों की शिक्षा तक पहुंच है. लेकिन 4 साल से छोटे बच्चों के लिए डे-केयर की सुविधा नहीं है.
ब्राज़ील के सिर्फ़ एक तिहाई बच्चे ही नर्सरी में जा पाते हैं, जिससे उनको स्कूली पढ़ाई से पहले की ट्रेनिंग नहीं मिल पाती.
इस दक्षिण अमरीकी देश में सरकारी डे-केयर मुफ़्त है, लेकिन वहां दाखिले के लिए इंतज़ार बहुत लंबा है और शहरों के बाहर डे-केयर सेंटर भी बहुत कम हैं.
नतीजन ब्राज़ील में 4 साल से कम उम्र के लगभग 70 फ़ीसदी बच्चे किंडरगार्टेन से बाहर हैं. संख्या के हिसाब से देखें तो करीब 20 लाख बच्चे डे-केयर से वंचित हैं.
ऐसे ही बच्चों की ज़िंदगी में खुशियां लाने का काम करती हैं एलिसा मंसूर.
वह कहती हैं, "रियो डि जनेरो भारी असमानताओं से भरा महानगर है. ये असमानताएं ही मुझे समाज के लिए कुछ करने के लिए प्रेरित करती हैं."
चार साल सबसे अहम
ज़िंदगी के पहले 4 साल बच्चों के विकास के लिए बहुत अहम होते हैं. इसी उम्र में वे कुछ बुनियादी बातें सीखते हैं जो उम्र भर उनके साथ रहती हैं.
एलिसा कहती हैं, "किंडरगार्टन की कमी देश के लिए बहुत बुरी है. बच्चों पर ख़र्च किए गए एक डॉलर पर आपको 4 से 9 डॉलर का रिटर्न मिलता है."
ब्राज़ील की कई महिलाओं ने अपने घर में ही डे-केयर सेंटर शुरू किया है. ये महिलाएं "कम्युनिटी मदर्स" कहलाती हैं.
ज़्यादातर कम्युनिटी मदर्स निम्न-आय वर्ग की हैं और ऐसे ही आय-वर्ग के लोगों के मोहल्लों में रहती हैं.
इन महिलाओं के पास सरकारी सहायता या संसाधनों की कमी है और डे-केयर के बारे में नियमन का भी अभाव है.
27 साल की उद्यमी एलिसा मंसूर ख़ुद के लिए रोजगार तलाशती इन महिलाओं की मदद करती हैं.
मंसूर के स्टार्ट-अप का नाम है- "मोपी" यानी मूवमेंट फ़ॉर एजुकेशन. यह एलिसा के जुनून और उनकी चाहत को पूरा करने का जरिया है.
शिक्षा का विस्तार करना एलिसा का जुनून है. वह लोगों को शिक्षित करना और इस तरह देश के विकास में योगदान करना चाहती हैं.
वह घर से डे-केयर सेंटर चलाने वाली कम्युनिटी मदर्स के काम को पेशेवर शक्ल दे रही हैं.
छोटी मदद, बड़े फ़ायदे
मोपी इन महिलाओं को ट्रेनिंग, संसाधन और सहायता उपलब्ध कराती है जिससे वे बच्चों की देखरेख बेहतर तरीके से कर पाएं.
एलिसा ऐसे ही एक डे-केयर सेंटर पर पहुंचती हैं. उनके हाथों में बच्चों के खेलने के कुछ खिलौने, गेम्स और पज़ल हैं.
वह कम्युनिटी मदर का शुक्रिया अदा करती हैं कि वह किंडरगार्टन की कमी पूरी कर रही हैं.
एलिसा उन्हें बच्चों के लिए प्ले-किट देती हैं. किट के हर बॉक्स की थीम अलग होती है.
कुछ खिलौने और पज़ल बच्चों की तार्किक क्षमता बढ़ाने के लिए होते हैं और कुछ बच्चों की रचनात्मकता बढ़ाने के लिए.
एलिसा कम्युनिटी मदर्स को ट्रेनिंग देती हैं और उनको संगठन तैयार करना भी सिखाती हैं.
वह डे-केयर सेंटर के लिए रोज़ाना के शेड्यूल बनाती हैं. मोपी कामकाज और गुणवत्ता के आधार पर ऐसे केंद्रों को रेटिंग देती है.
इस तरह एलिसा बच्चों की औपचारिक शिक्षा शुरू होने से पहले उनको बुनियादी ट्रेनिंग देने में मदद कर रही हैं.
इसके साथ ही वह ब्राज़ील की महिलाओं के लिए रोजगार के नये दरवाज़े भी खोल रही हैं.
बिना किसी प्रशिक्षण के चल रहे डे-केयर केंद्रों का मानकीकरण करने के लिए "मोपी" को 2018 में वर्ल्ड बैंक यूथ समिट में प्रोजेक्ट कंपटीशन पुरस्कार मिला था.
बदलाव का प्रशिक्षण
एलिसा कहती हैं, "मेरी इच्छा सामाजिक प्रभाव को बढ़ावा देने की है जो मुझे मेरी परवरिश और माता-पिता से मिली है."
एलिसा के माता-पिता दोनों डॉक्टर थे और उन्होंने हमेशा यह सीख दी कि दूसरों की मदद करनी चाहिए.
"मेरी दादी ने मुझे काम करने और उस पर विश्वास रखने के लिए प्रेरित किया. वह मुझे कई कहानियां सुनाती थीं."
"मुझे लगता है कि यह मेरी ज़िम्मेदारी है कि मैं अपने देश के बच्चों के लिए ऐसे मौके तैयार करूं और खेल-खेल में उनको कुछ पढ़ाने में योगदान कर पाऊं."
एलिसा के पास दोहरी डिग्री है- एक हार्वर्ड कैनेडी स्कूल की और दूसरी एमआईटी स्लोन स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट की.
एलिसा और उनके दो पार्टनर 2020 तक मोपी को ब्राज़ील में निम्न आय वाले 10 समुदायों तक पहुंचाना चाहते हैं.
रोलर कोस्टर
वह कहती हैं, "उद्यमशीलता के बारे में बताने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि इसे रोलर कोस्टर की तरह समझें."
"आप एक सुबह जगते हैं और सोचते हैं कि मैं दुनिया बदल रही हूं. मैं बदलाव ला रही हूं और मुझे बहुत से लोगों की ज़िंदगी बदलनी है."
"अगली सुबह आप जगते हैं और सोचते हैं कि मैं यहां क्या कर रही हूं."
एलिसा का कहना है कि वह नहीं जानतीं कि उनका अगला कदम क्या होगा या वह अगला फ़ैसला कैसे करेंगी.
"लेकिन मेरे क़रीब के लोग इस सपने में यकीन करते हैं और उनकी राय मेरे लिए बहुत मायने रखती है."
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