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वो देश जहां लोग नौकरी छोड़ने के लिए ख़र्च करते हैं पैसे
- Author, फिलिप्पा फ़ोगार्टी
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
नौकरी पाना सबके लिए आसान नहीं, लेकिन कुछ लोग नौकरी छोड़ने के लिए परेशान रहते हैं. इसके लिए लिए वे कई अजीब हरकतें करते हैं.
नौकरी से छुटकारा पाने के लिए कुछ लोग अपने मरने की झूठी ख़बर भी फैला देते हैं.
कुछ लोग अपने बॉस से झूठ बोलने के लिए किराये पर आदमी लेते हैं. कुछ लोग बिना बताए ऑफ़िस से ग़ायब हो जाते हैं. इन तरकीबों में ख़तरे भी बहुत हैं.
युइशिरो ओकाज़ाकी और तोशियुकी निनो नौकरी छोड़ने में माहिर हैं. पिछले 18 महीनों में उन्होंने 1,500 नौकरियों से इस्तीफ़ा दिया है.
टोक्यो में रहने वाले इस जोड़े ने ख़ुद अपनी नौकरियां नहीं छोड़ी हैं. वे एक स्टार्ट-अप चलाते हैं जो नौकरी छोड़ने के लिए छटपटा रहे लोगों की मदद करती है.
ओकाज़ाकी कहते हैं, "ज़्यादातर लोग अपने बॉस से डरते हैं. वे जानते हैं कि उनके बॉस मना कर देंगे."
"जापान की संस्कृति में किसी काम को छोड़ना बुरा माना जाता है. जो लोग नौकरी छोड़ना चाहते हैं उनको लगता है कि वह ग़लत आदमी हैं."
एग्जिट (Exit) नाम की कंपनी ऐसे ही मौक़े पर काम आती है. 50 हज़ार येन (457 डॉलर या 353 पाउंड) फीस लेकर इसके एग्जीक्यूटिव अपने क्लाएंट के बॉस को फोन करते हैं और उनकी तरफ़ से इस्तीफ़ा दे देते हैं. कुछ मामलों में कई कॉल करने की ज़रूरत पड़ जाती है.
कई बार कंपनियां एग्जिट से समझौता नहीं करना चाहतीं और इस बात पर ज़ोर डालती हैं कि कर्मचारी ख़ुद आएं और अपनी बात कहें.
ख़ैर, जब काम बन जाता है तो क्लाइंट राहत की सांस लेते हैं.
ओकाज़ाकी कहते हैं, "एक बार मेरे एक क्लाइंट ने कहा कि आप तो मसीहा हो."
"वह आदमी 10 साल से नौकरी छोड़ना चाहता था. उस काम से उसे सचमुच बड़ी तकलीफ़ थी."
ओकाज़ाकी का अनुमान है कि जापान में क़रीब 30 कंपनियां इस तरह की सेवाएं दे रही हैं.
नौकरी छोड़ने की दुविधा
जापान में परंपरागत रूप से कर्मचारी पूरी ज़िंदगी एक ही नियोक्ता के साथ जुड़े रहते हैं, लेकिन हाल के वर्षों में ज़्यादा लोग नौकरियां बदल रहे हैं.
श्रमिकों की घटती संख्या ने जापान में नौकरी तलाशने वाले लोगों का काम आसान कर दिया है.
ओकाजाकी कहते हैं, "लोग बदल रहे हैं लेकिन संस्कृति नहीं बदल रही है. इसके अलावा कंपनियां भी नहीं बदल रही हैं. इसलिए लोगों को हमारी ज़रूरत पड़ती है."
बेशक, काम छोड़ने का नोटिस किसी और के हाथ में देना इस्तीफ़ा देने का सामान्य तरीक़ा नहीं है. लेकिन नौकरी कैसे छोड़नी है यह दुविधा बहुत से लोगों के सामने रहती है.
बॉस से बात करना अभी भी सबसे लोकप्रिय विकल्प है, लेकिन नौकरी छोड़ने की परिस्थितियों पर बहुत कुछ निर्भर करता है.
क्या होगा यदि आपको तुरंत नौकरी छोड़ने की ज़रूरत हो या आपको लगे कि आपने जो सोचा था यह वैसी नौकरी नहीं है या यह काम आप कर ही नहीं सकते?
क्या होगा अगर इस बारे में उलझनभरी अजीब सी बातें करने की बजाय आप बस ग़ायब हो जाएं?
दफ्तरों में इस तरह के व्यवहार को घोस्टिंग (ghosting) कहते हैं. यह शब्द डेटिंग की दुनिया से निकला है जिसका मतलब होता है बिना कोई स्पष्टीकरण दिए या कारण बताए अचानक सारे संपर्क तोड़ लेना.
दफ्तरों में कर्मचारियों के ऐसे व्यवहार बढ़ रहे हैं.
पिछले साल अमरीकी फ़ेडरल रिज़र्व बैंक ने देश की आर्थिक स्थिति पर जारी अपनी रिपोर्ट (बेज बुक) में भी इसका ज़िक्र किया था.
मरने का बहाना
अमरीका के वर्जीनिया में वेब डिजाइन कंपनी चलाने वाले क्रिस योको के साथ कुछ अजीब सा वाक़्या हुआ था.
योको ने एक कांट्रैक्टर को एक डिजिटल प्रोजेक्ट पूरा करने का काम दिया था.
योको बताते हैं, "वह अच्छा आदमी लग रहा था. हमने अपने स्तर से एक साधारण सा प्रोजेक्ट उसे दिया था. वह राज़ी भी था. लेकिन दिन बीत गए और उसने कुछ नहीं किया."
योको ने कई ईमेल भेजे, कई फोन मैसेज किए लेकिन कोई जवाब नहीं आया.
वह आदमी प्रोजेक्ट के बारे में अगली मीटिंग में भी नहीं आया.
अंत में, जब उसकी ओर से पूरी तरह चुप्पी छाई रही तो काम किसी और को दे दिया गया.
कुछ समय बाद एक व्यक्ति ने ईमेल पर योको से संपर्क किया और ख़ुद को उस कांट्रैक्टर का दोस्त बताया.
उसने बताया कि कांट्रैक्ट लेने वाले व्यक्ति की एक कार हादसे में मौत हो गई थी.
शक होने पर योको ने उस कांट्रैक्टर के ट्विटर अकाउंट को चेक किया. सोशल मीडिया पर वह व्यक्ति ज़िंदा था.
एक पारिवारिक कार्यक्रम में शरीक होने के बारे में उसने अपने एक रिश्तेदार के ट्वीट का जवाब भी दिया था.
योको कहते हैं, "उसने हाथ में व्हिस्की लिए अपनी एक तस्वीर भी डाली थी और लिखा था कि मैं आ रहा हूं और साथ में यह भी ला रहा हूं."
"मैंने स्क्रीन शॉट लिया और ईमेल पर उसे फॉरवर्ड कर दिया कि देखो तुम्हारे लिए अच्छी ख़बर है. लगता है कि वह मज़े में है."
दूसरी नौकरी मिली तो पहली छोड़ दी
नौकरी छोड़ने के लिए मर जाने का बहाना करना यक़ीनन चरम उदाहरण है.
लेकिन ऑफ़िस से चले जाना और नियोक्ता के साथ सभी संपर्क काट लेना बढ़ रहा है.
ब्रिटेन के रिटेल सेक्टर में काम करने वाली एक मिडिल लेवल की मैनेजर (जो अपना नहीं बताना चाहती) ने बिना बताए नौकरी छोड़ दी.
उनके कांट्रैक्ट में 3 महीने का नोटिस पीरियड पूरा करने की शर्त थी, लेकिन उनको जो नई नौकरी मिली थी उसमें उनकी तुरंत ज़रूरत थी. इसलिए वह चली गईं.
यह उनके करियर की शुरुआत में हुआ था. उन दिनों मंदी चल रही थी.
उनका कहना है कि नौकरी छोड़ना आंशिक तौर पर उस अहसास से जुड़ा था कि नियोक्ता के साथ रिश्ता कितना असुरक्षित और अस्थिर हो सकता है.
"मेरे कुछ सहकर्मी थे जिनकी नौकरी साल के अंत में होनी वाली समीक्षा में जाने वाली थी. वे कभी वापस नहीं आए क्योंकि उनको टीम से काट दिया गया था."
वह कहती हैं, "आप देखिए कि नियोक्ता कितने बेरुखे हो सकते हैं. एक कर्मचारी के रूप में आपको यह सोचना है कि कल वास्तव में मुझे आने की जरूरत नहीं है."
शायद वह सही कह रही हैं. सिर्फ़ कर्मचारी बिना बताए ग़ायब नहीं होते.
अधिकांश लोगों का अनुभव रहा होगा कि संभावित नियोक्ता को नौकरी के भेजे गए आवेदन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. आमने-सामने के इंटरव्यू के बाद कई लोगों को जवाब नहीं मिलते.
नियोक्ता जवाब नहीं देते
एक व्यक्ति ने बीबीसी को बताया कि संभावित नियोक्ता ने उनसे रणनीतिक डॉक्यूमेंट लिखवाए, लिखित परीक्षा ली और तीन राउंड का इंटरव्यू भी लिया, लेकिन फिर उनको भुला दिया गया.
रिक्रूटमेंट कंपनी मैनपावर यूके के प्रबंध निदेशक क्रिस ग्रे का कहना है कि कामगार वर्ग का अपने हिसाब से फ़ैसले लेना विकसित देशों में जॉब मार्केट सुधरने का संकेत है.
"अमरीका और ब्रिटेन में बेरोज़गारी कम होने का अर्थ है कि एक नौकरी छोड़कर दूसरी नौकरी में जाना उनके लिए आसान हो गया है."
ग्रे मानते हैं कि अगर कोई कर्मचारी कहीं छिप गया है तो कुछ नहीं किया जा सकता.
"आपने ग़ायब हुए व्यक्ति को नौकरी पर रखने और काम समझाने में ही बहुत समय ख़र्च कर दिया है. अब आप उसे ढूंढ़ने में और वक़्त बर्बाद नहीं करना चाहेंगे."
ग्रे इस तरह की चीज़ों के असर को कम करने के लिए टैलेंट पूल बनाने की सलाह देते हैं. वह कहते हैं कि जितना संभव हो उतने संबंध बनाएं. अपनी ज़रूरत से पहले लोगों को जानें.
कर्मचारियों के लिए हो सकता है कि तात्कालिक ज़रूरत को देखते हुए उनका निकल जाना सही लगता हो, लेकिन उनको इसके दीर्घकालिक परिणाम के बारे में भी सोचना चाहिए.
अलविदा कहकर जाइए
क्योंकि डेटिंग की दुनिया की तरह, कोई भी व्यक्ति ऐसे किसी आदमी के बारे में अच्छे विचार नहीं रखता जिसने जाते समय अलविदा नहीं कहा हो.
अमरीका में रोज़गार के बारे में सलाह देने वाली संस्था रॉबर्ट हाफ़ की डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट डॉन फ़े इस व्यवहार को ग़ैरपेशेवर क़रार देती हैं.
"मैं किसी को भी, चाहे वह नियोक्ता हो या कर्मचारी हो, कभी भी यह सलाह नहीं दूंगी कि वह बिना कुछ बताए ग़ायब हो जाए."
फ़े इसके पीछे के कारणों को स्वीकारती हैं. कुछ लोग संघर्ष नहीं चाहते या दूसरों को नीचा नहीं दिखाना चाहते, जबकि कुछ लोग लंबी भर्ती प्रक्रिया में रुचि खो देते हैं.
कंपनियां भर्ती प्रक्रिया में तेज़ी लाकर और आवेदकों के साथ स्पष्ट संवाद करके अपने हिस्से का काम कर सकती हैं. लेकिन घोस्टिंग आपको परेशान कर सकता है.
"यह कुछ ऐसा है जो आपके करियर के बाद के हिस्से में आपको परेशान करने के लिए वापस आ सकता है."
"आप कभी नहीं जान पाते कि लोग कहां जा रहे हैं और वे कब आपसे दोबारा मिल जाएं. इसलिए ख़ुद को पेशेवर के रूप में संभालकर रखिए, चाहे कुछ भी हो."
(मूल लेख अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)
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