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आपकी शिकायतें कंपनियों को ऐसे मालदार बना रही हैं
- Author, पैडरेग बेल्टन
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
बात कुछ महीनों पहले की है. चार बरस का बच्चा रॉबिन बीमार था और बीन्स-ऑन-टोस्ट खाने की ज़िद कर रहा था. उसके पिता ने बीन्स निकालने के लिए किचेन की अल्मारी खोली. उन्होंने देखा कि बीन्स के सारे डिब्बे जो वो ख़रीद कर लाए थे, वो टूटे हुए थे.
रॉबिन के पिता मैथ्यू कैम्पबेल हिल कहते हैं कि वो बीमार बेटे को खुले हुए डिब्बे से बीन्स खिलाने का जोखिम नहीं ले सकते थे.
तो, उन्होंने ट्विटर पर वो बीन्स बनाने वाली कंपनी को लेकर अपनी शिकायत लिखी. ब्रिटेन के कॉर्नवाल के रहने वाले मैथ्यू ने लिखा कि, "4 बरस के दुखी बच्चे के लिए बीन्स नहीं हैं".
मैथ्यू ने हैशटैग #Heartstrings के साथ ट्वीट किया ताकि उनके ट्वीट का असर ज़्यादा से ज़्यादा हो.
अगली सुबह बीन्स बनाने वाली कंपनी हाइंज ने मैथ्यू कैम्पबेल हिल से संपर्क किया. कंपनी ने टूटे हुए डिब्बों के लिए माफ़ी मांगते हुए रॉबिन के लिए ख़ास तोहफ़ा भेजा. फिर रॉबिन के जन्मदिन पर उसे कंपनी की तरफ़ से एक स्पेशल कार्ड मिला, जिस पर लिखा हुआ था,
'रॉबिन:बेक्ड बीन्स का नंबर वन फैन'
शिकायत से कमाई पर असर
एक शिकायत देखते-देखते बीन्स के शौक़ीन के लिए ख़ुशनुमा बन गई थी.
हम सब रोज़मर्रा की ज़िंदगी में लोगों के रोने-झींकने से लेकर शिकायतों तक से जूझते हैं. सोशल मीडिया की वजह से आज दुखड़ा रोना और भी आसान हो गया है. TripAdvisor जैसी वेबसाइट की मदद से आज ग्राहक खुलकर अपनी शिकायतें बयां कर सकते हैं.
प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक़, अमरीका में 50 साल से कम उम्र के ज़्यादातर लोग रेटिंग और ऑनलाइन रिव्यू देखकर ही सामान ख़रीदते हैं.
और ये रोना-झींकना कंपनियों की माली हालत पर गहरा असर डाल सकता है.
ऑनलाइन रेटिंग कंपनी Yelp पर हर स्टार रेटिंग से किसी भी कंपनी का कारोबार 5-9 फ़ीसद तक बढ़ जाता है. ये बात माइकल लूका के रिसर्च से सामने आई है. माइकल, हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल में अर्थव्यवस्था पर डिजिटाइज़ेशन के असर पर रिसर्च कर रहे हैं.
तो, ग्राहकों को ख़ुश करने के बारे में एक्सपर्ट क्या सलाह देते हैं?
सुनने वालों के हिसाब से शिकायत
अमरीका की क्लेमसन यूनिवर्सटी में पढ़ाने वाले रॉबिन कोवाल्सकी कहते हैं कि हम सब शिकायत करते हैं. लेकिन, इसकी वजहें अलग हो सकती हैं. कभी सामाजिक वजह होती है, जो अजनबियों में राब्ता करा सकती है.
फ़र्ज़ कीजिए कि आप ट्रेन में बैठे हैं और सियासी हालात पर शिकायती लहज़े में बात करने लगते हैं. वहां बैठे तमाम लोग इस बातचीत में शामिल हो जाते हैं. अजनबी लोग आपस में बेहद अपनेपन से बातें करने लगते हैं. मोबाइल कंपनी की ख़राब सेवाओं के बारे में शिकायत करें, तो बहुत से अजनबी आप के साथ खड़े होंगे.
कुछ लोग किसी पार्टी में शराब की क्वालिटी की शिकायत कर के लोगों को ये बता सकते हैं कि मेहमानों के साथ भेदभाव किया जा रहा है.
रॉबिन कोवलास्की कहते हैं कि जो लोग रणनीति बनाकर शिकायत करते हैं, वो अक्सर बहुत कामयाब होते हैं. ऐसे लोग कुछ ख़ास लोगों के बीच हल्के-फ़ुल्के अंदाज़ में अपनी शिकायत रखते हैं.
अब कोई किसी भी बात पर शिकायत कर रहा हो, उसका असर कम करने का सबसे अच्छा तरीक़ा है कि उसके प्रति तेज़ी दिखाई जाए.
मैं तुरंत आपकी शिकायत का समाधान करूंगा
ऑनलाइन रेटिंग वेबसाइट Yelp के डार्नेल हैलोवे कहते हैं कि अगर आप किसी शिकायत पर 24 घंटे के अंदर प्रतिक्रिया देते हैं, तो इस बात की संभावना 33 फ़ीसद बढ़ जाती है कि वो शख़्स जाकर बेहतर रेटिंग दे.
किसी भी शिकायत पर फौरन प्रतिक्रिया देना आसान है. फिर भी डार्नेल कहते हैं कि बहुत सी कंपनियां शिकायतों पर तुरंत ध्यान नहीं देतीं, या बिल्कुल ही नहीं देतीं.
वो कहते हैं कि बहुत से लोग ख़राब फीडबैक पढ़कर खीझते हैं, लेकिन कुछ करते नहीं.
शिकायत सुनने के बाद कुछ न करना घातक हो सकता है. रिव्यू करने वाली वेबसाइट TripAdvisor ने 14,000 यूज़र्स पर सर्वे किया. कंपनी ने पाया कि अगर ग्राहक को उसकी शिकायत पर फ़ौरी रिस्पॉन्स मिल जाता है, तो वो अपने लिखे ख़राब रिव्यू को सुधारने की कोशिश करता है.
झगड़ा न करें
किसी भी शिकायत को जंग का मैदान न बनाएं. TripAdvisor के जेम्स के कहते हैं कि उनके सर्वे में शामिल हुए 69 फ़ीसद लोगों ने कहा कि अगर उनके साथ अच्छा बर्ताव नहीं होता, तो वो किसी कंपनी या होटल के पास दोबारा नहीं जाते.
डेनमार्क की कस्टमर केयर कंपनी ज़ेंडेस्क के मिक्केल स्वान कहते हैं कि कभी भी किसी शिकायत करने वाले को ये जवाब नहीं देना चाहिए कि तुम ग़लत हो और मैं सही हूं.
कंपनी से छल-प्रपंच करने वाले लोग बहुत कम होते हैं. ज़्यादातर लोगों की शिकायत वाजिब होती है. ऐसे में ये सोचना कि कोई शख़्स झूठ बोल रहा है, अपने बिज़नेस को नुक़सान पहुंचाना होगा.
मिक्केल स्वान कहते हैं कि हर कंपनी को चाहिए कि वो शिकायत करने की प्रक्रिया आसान बनाए. पहले ग्राहक अगर ई-मेल से शिकायत करना चाहते हैं, तो उन्हें फ़ोन करने के लिए मजबूर करना ग़लत होगा. उनकी नाराज़गी बढ़ जाएगी. फिर अगर कॉल होल्ड कर दी, तो समझिए कि मामला बिगड़ ही गया.
वैसे, ग्राहक भगवान है, ये बात हमेशा से नहीं थी. 1926 में सोवियत संघ के वाणिज्य मंत्रालय ने हर ख़ुदरा स्टोर में शिकायती रजिस्टर रखना अनिवार्य कर दिया. ये बात रेड स्क्वॉयर स्थित मशहूर मेन यूनिवर्सल स्टोर पर भी लागू की गई. इस डिपार्टमेंटल स्टोर के ग्राहक इसकी सेवाओं से कभी ख़ुश नहीं रहते थे.
एक बार जब एक आदमी ने शिकायत में लिखा कि वो स्टोर बंद होने से 15 मिनट पहले ख़रीदारी नहीं कर सका, तो स्टोर के कर्मचारियों ने उसे हुड़दंगी करार दे दिया. वहीं स्टोर के एक ग्राहक ने जब चीनी ख़राब होने की शिकायत की, तो स्टोर कर्मचारी ने कहा कि किसी न किसी को तो उसे लेना होगा.
बार-बार फीडबैक लें
लोगों से लगातार फीडबैक लेते रहने से शिकायतों का अंबार नहीं लगता. हीथ्रो हवाई अड्डे और सैन फ्रैंसिस्को के 49 नर्स स्टेडियम में चार बटन लगे हुए हैं. वहां आने वालों को बस ख़ुश या उदास होने वाले इमोजी के बटन दबाने होते हैं.
फीडबैक का ये सिस्टम तैयार करने वाली फिनलैंड की कंपनी हैप्पीऑरनॉट के विल लेवानिमेनी कहते हैं कि इससे तुरंत फीडबैक मिल जाता है. किसी समस्या का फ़ौरन समाधान हो जाता है.
ऐसे हवाई अड्डों से इकट्ठे किए गए आंकड़े बताते हैं कि एयरपोर्ट पर सबसे ज़्यादा ख़ुश लोग सुबह 9 बजे होते हैं. वहीं रात के 10 बजे आने वाले सबसे ज़्यादा दुखी होते हैं. रविवार को एयरपोर्ट आने वाले लोग सबसे ज़्यादा दुखी होते हैं.
सुनिए और सीखिए
शिकायतों को समझने का सबसे अच्छा तरीक़ा है कि आप उन्हें जानकारी का अच्छा ज़रिया समझें. लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स के एलेक्स गिलेस्पी कहते हैं कि ये शिकायतें बहुत अच्छे आंकड़े हैं.
एलेक्स, शिकायती आंकड़ों की अनदेखी के नुक़सान के तौर पर दो मिसालें देते हैं. वेल्स फार्गो कंपनी के खातों में 2016 में सामने आया फ़र्ज़ी वाड़ा और लंदन के ग्रेनफेल टॉवर में 2017 में लगी आग.
एलेक्स बताते हैं कि इन दोनों के बारे में पहले शिकायतें की गई थीं. मगर उनकी अनदेखी की गई. ग्रेनफेल टॉवर की सुरक्षा को लेकर शिकायत करने वाले एक शख़्स को तो केंसिग्टन काउंसिल ने मानहानि और परेशान करने का मुक़दमा करने की धमकी तक दी.
हालांकि एलेक्स गिलेस्पी इस बात पर राहत की सांस लेते हैं कि शिकायतों को अच्छे आंकड़ों के तौर पर देखने वाली कंपनियों की तादाद बढ़ रही है. वो बताते हैं कि कुछ अस्पतालों से सीईओ रोज़ सुबह शिकायती रजिस्टर पढ़ते हैं.
तो, कुल मिलाकर ये कहें कि अगर आप अपने ग्राहकों की शिकायत को उसी तरह निपटाते हैं, जैसे कि बीन्स बनाने वाली कंपनी ने रॉबिन के साथ किया, तो ज़्यादा फ़ायदे में रहेंगे.
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