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पाकिस्तान को मैच नहीं, पैसा चाहिए | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड अपने देश से वर्ष 2011 के विश्व कप के मैच हटाए जाने से उतना परेशान नहीं है जितना कि उसके कारण होने वाली एक करोड़ 40 लाख डॉलर आमदनी के महरूम रह जाने से है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संघ हर विश्व कप मैच के लिए अपनी टेलीविज़न और प्रायोजन राइट्स में से साढ़े सात लाख डॉलर मेज़बान देश को देता है. साथ ही स्थानीय आमदनी जिसमें 30 प्रतिशत स्टेडियम में लगे इश्तहार और टिकटों की बिक्री से प्रति मैच कोई ढ़ाई लाख डॉलर कमा ही लिए जाते हैं. यानी कि प्रति मैच 10 लाख डॉलर के हिसाब से पाकिस्तान अपने सभी 14 मैचों की भरपाई चाहता है. भले ही उसके लिए इन मैचों का आयोजन कर पाना किसी भी तरह मुमकिन नहीं था. मौजूदा सूरत-ए-हाल में पाकिस्तान में 2011 विश्व कप क्रिकेट मैचों के खेले जाने का सवाल ही नहीं था. इसी कारण आईसीसी ने समय रहते ही पाकिस्तान में होने वाले मैच भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश के बीच बाँट दिए. पाकिस्तान की नाराज़गी इस बात से नहीं है कि उसके मैच हटा दिए गए, पर इस बात से है कि बदले में उसे कुछ भी नहीं मिला. बस पाकिस्तान ने तुरंत 2011 विश्व कप को दक्षिण एशिया की बजाए ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में कराने का प्रस्ताव रखा पर आईसीसी भारत को नाराज़ नहीं करना चाहता है तो यह बात कुछ जमी नहीं. पाकिस्तान का अगला क़दम था आईसीसी के विरुद्ध क़ानूनी कार्रवाई, और इसमें आईसीसी के पूर्व अध्यक्ष एहसान मनी ने अपने बोर्ड की काफ़ी मदद की, पर यह रास्ता भी काफ़ी लंबा और जोखिम भरा था क्योंकि वहाँ कामयाबी मिलने की उम्मीद कम ही थी. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की कोशिश
फिर आई तीसरी और अंतिम चाल जहाँ पाकिस्तान को दूसरे देशों से समर्थन मिलने के ज़्यादा गुंजाइश नज़र आई. पाकिस्तान ने अपने हिस्से के मैच किसी तीसरे देश में आयोजित करने का प्रस्ताव रखा. जब आईसीसी से इस बात पर कुछ मदद की उम्मीद जगी तो तुरंत पाकिस्तान ने अबुधाबी और दुबई की पेशकश की. पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों का इन दोनों जगहों पर अनुभव ख़ट्टा-मीठा ही रहा था इस कारण फिर से बात नहीं बनी. अगली चाल बेहद कामयाब हो सकती है क्योंकि अब पाकिस्तान अपने हिस्से के 14 मैच आयरलैंड और स्कॉटलैंड में आयोजित करना चाहता है. इस बार इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड और मौजूदा आईसीसी अध्यक्ष डेविड मार्गान दोनों के आपत्ति करने का सवाल नहीं उठता. पर भारत ने जैसे ही कहा कि 2011 विश्व कप तो दक्षिण एशिया में खेला जाना तय हुआ. पाकिस्तान ने एक करोड़ 40 लाख डॉलर की सीधी माँग कर डाली. बात और ज़्यादा उलझे इससे पहले आईसीसी और भारत, दोनों इस मामले को दफ़न कर देना चाहते हैं. आईसीसी और पाकिस्तान क्रिकेट अधिकारी के बीच तीन जून को दुबई में होने वाली बैठक में 50 लाख डॉलर मुआवज़े की बात होगी. समझौता 75-80 लाख डॉलर पर होने की पूरी उम्मीद है. विवाद सुलझाने की कोशिश फिर बच जाएगी जून के अंतिम सप्ताह में लंदन में होने वाली आईसीसी कार्यकारणी की बैठक जहाँ इस समझौते को अमली जामा पहनाया जाएगा. भारत और आईसीसी इस विवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहते क्योंकि इससे उन्हें 2011 विश्व कप के लिए प्रायोजक खोजने में काफ़ी दिक़्क़तें आ सकती हैं. आख़िर कोई भी कंपनी ऐसी प्रतियोगिता से नहीं जुड़ना चाहेगी जो कोर्ट-कचहरी में घसीटी जा रही हो. बस, पाकिस्तान इसी बात का फ़ायदा उठाकर अपनी बात मनवा लेना चाहता है कि उसे बस पैसा चाहिए. मैच हों या नहीं हों. इससे पाकिस्तान को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. अभी तो पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड अपने खिलाड़ियों और कर्मचारियों की भी तनख़्वाह देने की स्थिति में नहीं हैं. हाँ उसे पाकिस्तान की न्यायपालिका से भी मदद मिली जब विश्व कप की आयोजन समिति के मुख्यालय को लाहौर से दूर किसी और देश ले जाने पर रोक लगा दी गई. हर मुश्किल का आसान हल है पैसा- पाकिस्तान किसी हालत में इस मौक़े को भुनाए बिना नहीं जाने देगा. |
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