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विशुद्ध मनोरंजन है आईपीएल मैच देखना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अगर आप इंडियन प्रीमियर लीग के क्रिकेट मैचों में क्रिकेट देखने आ रहे हैं तो शायद आपको निराशा होगी क्योंकि यह विशुद्ध रुप से मनोरंजन है, तीन घंटे का जो़रदार तमाशा... उम्र 12 से 35 साल, ड्रेस-जींस और टी शर्ट, स्टाइल जो मन चाहे.. ये प्रोफ़ाइल है इंडियन प्रीमियर लीग के दर्शकों की लेकिन मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में तीन साल से लेकर 60 साल तक के बूढ़े भी विराजमान थे. क्रिकेट खिलाड़ियों से अधिक फ़िल्मी सितारों का जलवा और उससे भी अधिक चीयरलीडर्स यानी खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने और दर्शकों का मनोरंजन करने पहुंची अर्धनग्न लड़कियां. चीयरलीडर्स की बात चली तो यह बताना अनुचित नहीं होगा कि दर्शक दीर्घा में कई नौजवानों को इससे कोई मतलब नहीं था कि कौन-सी टीम जीत रही है या हार रही हैं, उनका पूरा ध्यान इन्हीं नाचने गाने वालों पर था. और हो भी क्यों नहीं. बंगलौर रॉयल चैलेंजर्स का उत्साह बढ़ाने आई विदेशी चीयरलीडर्स ने कपड़े ही इतने कम पहन रखे थे. उधर मैच इतना तेज़ कि अगर एक गेंद पर छक्का लगे तो दूसरी गेंद तक लोगों का हल्ला शांत नहीं होता है और तब तक दूसरी गेंद पर विकेट गिर जाता है..तीसरी गेंद पर चौका लग जाए तो फिर आवाज़ आपके कान फाड़ देती है. यह मालूम करना मुश्किल हो जाता है कि कौन खिलाड़ी आया और कौन गया. ट्वेंटी-20 का मज़ा दर्शकों के साथ मैच देखने का यही आनंद है ट्वेंटी-20 में. किसी को नहीं पता कि बाकी लोग क्यों शोर मचा रहे हैं लेकिन आपको भी शोर मचाना है क्योंकि बाकी लोग शोर कर रहे हैं. ढोल बाजे, सबकुछ उपलब्ध. ये न हो तो आयोजक गाना बजाते ही हैं... आप नाचिए-गाइए, तीन घंटे खुशी मनाकर घर जाइए.
आईपीएल के ये मैच कुछ-कुछ डब्ल्यूडब्ल्यूएफ़ की कुश्ती जैसे लगते हैं जहां मानो लगता है कि सबकुछ लोगों को खुश करने के लिए किया जा रहा हो. हां, अंतर है कि मैच फिक्स नहीं है लेकिन लोगों को अंतर भी नहीं पड़ता कि कौन हार रहा है और कौन जीत रहा है. अब इस जंग में खली (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ़ का भारतीय हीरो) कौन होगा, ये तो कुछ और मैचों के बाद मालूम पड़ेगा क्योंकि अब तक ब्रैंडन मैकुलम और मार्क हसी ने लोगों को सबसे अधिक प्रभावित किया है. आने वाले दिनों में ऐसी कई और पारियां देखने को मिलेंगी जिसके स्कोर शायद ही लोगों को याद रहे,... बस इतना याद रहेगा कि अमुक ने ज़बर्दस्त बल्लेबाज़ी की थी. लेकिन मुंबई इंडियंस और बंगलौर रॉयल चैलेंजर्स का स्कोर बता दिया जाए ताकि सनद रहे. मुंबई इंडियंस ने 165 रन बनाए जिसे रॉयल चैलेंजर्स ने पांच विकेट रहते ही पूरा कर दिया. यानी मुंबई इंडियंस हार गई. वाकई ज़माना बदल गया है. सबकुछ तेज़ी से हो रहा है. चाहे वो क्रिकेट हो या मनोरंजन और लगता है कि यंग इंडिया को ये पसंद आ रहा है. स्टेडियम जाने के रास्ते में और स्टेडियम में कई टिप्पणियां सुनने को मिलीं लेकिन एक मुझे याद रह गईं. कोई कह रहा था... अक्खी मुंबई की पब्लिक पागल हो गई है. तीन घंटे के मैच के लिए पगला रही है. सही ही तो है.. इन मैचों में क्रिकेट कम और मनोरंजन ही तो अधिक होता है और मनोरंजन में पगलाने से कौन इनकार करता है. | इससे जुड़ी ख़बरें पाँच विकेट से जीते रॉयल चैलेंजर्स20 अप्रैल, 2008 | खेल की दुनिया नाइट राइडर्स की लगातार दूसरी जीत20 अप्रैल, 2008 | खेल की दुनिया धोनी से परास्त हुए युवराज19 अप्रैल, 2008 | खेल की दुनिया दिल्ली की टीम ने राजस्थान को पीटा19 अप्रैल, 2008 | खेल की दुनिया इंडियन प्रीमियर लीग की टीमें17 अप्रैल, 2008 | खेल की दुनिया आईपीएल में लगा पैसा वापस कैसे होगा?18 अप्रैल, 2008 | खेल की दुनिया कोलकाता की टीम ने बंगलौर को रौंदा18 अप्रैल, 2008 | खेल की दुनिया इंडियन प्रीमियर लीग में ग्लैमर17 अप्रैल, 2008 | खेल की दुनिया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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