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गुरुवार, 31 जनवरी, 2008 को 15:42 GMT तक के समाचार
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'अच्छा प्रदर्शन करने की भरपूर कोशिश करूँगा'
मनोज तिवारी
मनोज तिवारी को बांग्लादेश से बिना खेले वापस लौटना पड़ा था
ऑस्ट्रेलिया में रविवार से शुरू होने वाली त्रिकोणीय सीरिज में 17वें खिलाड़ी के तौर पर शामिल बंगाल के मध्यक्रम के बल्लेबाज़ मनोज तिवारी मानते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में पहली बार खेलना किसी भी बल्लेबाज के लिए एक बड़ी चुनौती है.

मनोज कहते हैं कि वे चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार हैं और खेलने का मौक़ा मिला तो वे बेहतर प्रदर्शन के प्रति आश्वस्त हैं.

वे कहते हैं कि इस महीने बंगलूर में डेव व्हाटमोर के निर्देशन में नेशनल क्रिकेट अकादमी की ओर से लगाए गए शिविर में उनको काफी कुछ सीखने को मिला है. उस शिविर में सीखी हुई चीजें इस दौरे पर काफी काम आएंगी.

मनोज को बीते साल बांग्लादेश दौरे के लिए भी टीम में चुना गया था लेकिन वे अपना पहला मैच खेलने के पहले ही घायल होकर स्वदेश लौट आए थे.

क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ़ बंगाल (सीएबी) की ओर से बुधवार को कोलकाता में आयोजित एक समारोह में मनोज को सम्मानित किया गया. इस सीजन में रणजी ट्रॉफी में बंगाल टीम के लिए 45.60 की औसत से 456 रन बना कर टॉप स्कोरर रहे मनोज गुरुवार को मेलबॉर्न के लिए रवाना हुए.

इससे पहले उन्होंने अपने कैरियर और इस दौरे की तैयारियों पर पीएम तिवारी से बातचीत की.

टीम में वापसी पर कैसा लग रहा है?

बहुत अच्छा. बीते साल बांग्लादेश दौरे से घायल होकर लौटने के बाद मैं कुछ निराश हो गया था. लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी. अपनी बल्लेबाज़ी और फिटनेस पर ध्यान देता रहा इसलिए मैं जल्दी ही मैदान में लौट सका. टीम में अतिरिक्त खिलाड़ी के तौर पर चुने जाने के बाद ही मुझे महसूस हो रहा था कि कभी भी जाना पड़ सकता है इसलिए मैंने अपनी तैयारियां शुरू कर दी थीं.

ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ उसी की ज़मीन पर खेलने के लिए आपने क्या तैयारियाँ की हैं?

मनोज ने रणजी ट्रॉफ़ी में सबसे अधिक रन बनाए

किसी भी युवा क्रिकेटर की तरह मैं भी किसी बड़ी टीम के खिलाफ अपने करियर की शुरूआत करना चाहता था. अब वहाँ अगर खेलने का मौका मिले तो मैं उसे हाथ से नहीं जाने दूंगा. दुनिया की नंबर एक टीम के खिलाफ बेहतर प्रदर्शन से आत्मविश्वास तो बढ़ता ही है, करियर को एक मजबूत शुरूआत भी मिलती है. मैंने वहां की पिचों को ध्यान में रखते हुए टेनिस की गीली गेंदों और सिंथेटिक गेंदों से खेलने का अभ्यास किया है. इसके साथ मैं गेंदबाजी में भी हाथ आजमाता रहा हूँ ताकि वक़्त पड़ने पर टीम के काम आ सकूँ. इसके अलावा डेव व्हाटमोर के सिखाए गुर वहाँ मेरे काफी काम आएँगे. अगर इस दौरे पर मुझे कोई मैच खेलने का मौका मिला तो उम्मीद है कि मेरा प्रदर्शन बेहतर रहेगा.

अपने करियर का पहला मैच भारत से दूर ऑस्ट्रेलिया में खेलने को लेकर तनाव या घबराहट?

नहीं, मैं मानसिक रूप से काफ़ी मजबूत हूँ और चाहता था कि किसी मजबूत टीम के खिलाफ ही करियर की शुरूआत करूं. मैं इस शृंखला में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह तैयार हूँ. मुझे चुनौतियां पसंद हैं. मैं सकारात्मक नजरिया अपनाते हुए आक्रामक खेल पर भरोसा रखता हूँ. यही मेरी सबसे बड़ी ताक़त है. मुझे ब्रेट ली और बाकी गेंदबाजों का सामना करने में कोई दिक्कत नहीं होगी. ऑस्ट्रेलिया टीम की गेंदबाजी बहुत अच्छी है, लेकिन इस बारे में सोचने से मानसिक दबाव बढ़ेगा. मैं दबावमुक्त होकर अपना प्राकृतिक खेल खेलना चाहता हूँ.

कंधे की चोट से उबरने के बाद आपने कैसा अभ्यास किया है?

उसके बाद मैं लगातार बल्लेबाजी करता रहा हूं. रणजी ट्राफी में मैंने कुछ बढ़िया पारियाँ भी खेली हैं लेकिन इस दौरान गेंदबाजी नहीं कर सका. अब मैं उस पर भी ध्यान दे रहा हूं. मुझे इस दौरे पर बेहतर प्रदर्शन का भरोसा है. अभी मैं यह नहीं जानता कि वहाँ खेलने का मौका मिलेगा या नहीं. लेकिन एक भी मौका मिला तो मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का प्रयास करूँगा.

बंगलौर में नेशनल क्रिकेट अकादमी में पाँच-दिवसीय शिविर से कितना फायदा हुआ है?

 ऑस्ट्रेलिया टीम की गेंदबाजी बहुत अच्छी है, लेकिन इस बारे में सोचने से मानसिक दबाव बढ़ेगा. मैं दबावमुक्त होकर अपना प्राकृतिक खेल खेलना चाहता हूँ

उस शिविर ने मेरा भरोसा बढ़ाया है. डेव व्हाटमोर ने वहां मेरी बल्लेबाजी की तकनीक में कुछ बदलाव सुझाए थे. उन्होंने सिखाया कि ऑस्ट्रेलिया की उछाल लेती पिचों पर बल्लेबाजी कैसे की जाती है. मुझे लगता है कि उनके सिखाए गुर मेरे काफी काम आएँगे.

किस खिलाड़ी से आपको प्रेरणा मिली है?

सौरभ गांगुली. उन्होंने हमेशा मेरा बल्लेबाजी को बेहतर बनाने के लिए सुझाव दिए हैं. मैं बचपन से उको खेलते देख कर बड़ा हुआ हूं. वे हमेशा हिम्मत बंधाते रहे हैं. इसके अलावा सचिन तेंदुलकर समेत कई सीनियर खिलाड़ी मेरी काफी हौसला-अफ़ज़ाई करते रहे हैं.

ऑस्ट्रेलिया के इस दौरे से आपको क्या उम्मीद है?

अपना प्राकृतिक खेल खेलूँगा. उम्मीद है कि वहां से मैं और बेहतर बल्लेबाज के तौर पर लौटूँगा. मैं भारतीय टीम के इस दौरे पर नज़दीकी निगाह रख रहा था. इससे मुझे अलग-अलग स्टेडियमों के पिचों का स्वभाव समझने में काफी सहूलियत हुई है. मैं इस दौरे को यादगार बनाने का प्रयास करूँगा.

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