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रविवार, 15 जुलाई, 2007 को 13:04 GMT तक के समाचार
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कंपनियों को भा रहा धोनी का धमाल

महेंद्र सिंह धोनी
धोनी का बाइक का शौकीन होना भी विज्ञापन के लिहाज से उनके पक्ष में जाता है
क्रिकेट के मैदान पर उपलब्धियों के मामले में महेंद्र सिंह धोनी भले ही सचिन तेंदुलकर से मीलों पीछे हों लेकिन विज्ञापन के मामले में वो उन्हें टक्कर देते नज़र आ रहे हैं.

मास्टर बल्लेबाज़ तेंदुलकर के बाद विज्ञापन होर्डिगों में इन दिनों धोनी का चेहरा सबसे ज़्यादा दिखाई देता है.

तेज़ मोटरसाइकिल चलाने और लंबे छक्के मारने वाली छवि ने वन-डे टीम के उपकप्तान धोनी को युवाओं के बीच लोकप्रियता हासिल करने में ख़ासी मदद की है. इसके चलते आज वे कॉरपोरेट ब्रांड के तौर पर कंपनियों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं.

विज्ञापन करार के मामले में भारतीय टीम की तिकड़ी सचिन, द्रविड़ और सौरभ अभी भी धोनी से आगे हैं लेकिन वे काफ़ी तेज़ी से इनके क़रीब पहुँचते जा रहे हैं.

पिछले एक दशक से भी ज़्यादा समय से सचिन विज्ञापनदाताओं के सबसे पसंदीदा चेहरे थे और कंपनियां हर बड़े ब्रांड को उनके साथ जोड़ना चाहती थीं.

वैसे सचिन आज भी सबसे ज़्यादा व्यस्त हैं लेकिन वे अब बहुत सारे विज्ञापन करार नहीं कर रहे हैं.

इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि उनके ज़्यादातर करार कम-से-कम पाँच साल की अवधि के लिए है और उनके हाथ बंधे हैं.

सचिन अब भी भारी

सचिन तेंदुलकर आज की तारीख़ 17 उत्पादों का विज्ञापन करते हैं और हर करार के लिए सालाना पाँच लाख डॉलर से साढ़े सात लाख अमरीकी डॉलर तक लेते हैं.

वहीं धोनी 12 उत्पादों के विज्ञापन में नज़र आते हैं. सचिन के विपरीत धोनी कम समय के लिए करार करना चाहते हैं और इसके लिए वे सालान ढाई लाख से 3 लाख 12 हज़ार 5 सौ अमरीकी डॉलर तक लेने के इच्छुक हैं.

ज़्यादातर कंपनियां को भी आजकल अपने उत्पादों के लिए ब्रांड एम्बेस्डर के रूप धोनी ख़ूब भा रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है यूथ आइकन वाली उनकी छवि.

भारत के सलामी बल्लेबाज़ वीरेंद्र सहवाग के ख़राब फॉर्म की वजह से भी धोनी पर लोगों का ध्यान गया है.

सहवाग की आतिशी बल्लेबाज़ी ने उन्हें भी ढेर सारे विज्ञापन करार दिलवाए थे लेकिन अब वे टीम में जगह गँवाने के साथ ही विज्ञापनदाताओं की नज़र से भी उतर गए हैं.

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या धोनी लंबी रेस का घोड़ा साबित होंगे. जानकारों का मानना है कि वन-डे टीम की उपकप्तानी मिलने के बाद धोनी विज्ञापन के लिहाज से और भी आकर्षक हो गए हैं.

भारतीय क्रिकेट बोर्ड की चयन समिति के प्रमुख दिलीप वेंगसरकर उन्हें कप्तान राहुल द्रविड़ के उत्तराधिकारी के रूप में लंबी रेस का घोड़ा मानते हैं.

वेंगसरकर कहते हैं कि चयनकर्ता धोनी को खेल के एक उत्सुक छात्र के रूप में देखते हैं. ज़ाहिर है कि धोनी का धमाल इसी तरह जारी रहा तो उन्हें अपने बैंक ख़ातों को देखने के लिए काफ़ी वक़्त निकालना पड़ेगा.

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