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एक मुलाकात - शरद पवार के साथ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी हिंदी सेवा के विशेष कार्यक्रम 'एक मुलाक़ात' में हम भारत के जाने-माने लोगों की ज़िंदगी के अनछुए पहलुओं से आपको अवगत कराते हैं. इसी श्रंखला में इस रविवार हम आपकी मुलाकात करवा रहे हैं भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष और केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार से और हमने उनसे उनके निजी और सार्वजनिक जीवन के कुछ पहलुओं और क्रिकेट पर बातचीत की है. सवाल- सबसे पहले तो शरद पवार साहब यह बताइए कि आप मराठा होने पर फ़ख़्र महसूस करते हैं, मराठा में ऐसी क्या ख़ास बात होती है? जवाब- मराठा में! वह भी किसान है लड़ाकू है, खेती में उसकी दिलचस्पी है और वे अच्छे दोस्त होते हैं. संघर्ष करना तो बहुत डटकर संघर्ष करते हैं. ये सब ख़ासियतें हैं. मगर मराठा कोई ख़ास कौम - हम कभी नहीं मानते. जो मराठी भाषा बोलने वाले हैं उन सभी को हम मराठा बोलते हैं. सवाल- इतिहास में एक बात है कि मराठा ख़ासकर 17वीं,18वीं शताब्दी में बहुत ज़बर्दस्त शक्तिशाली कौम थी. देश के कोने-कोने में उनका राज होता था, दिल्ली में किसी की गद्दी हो उसमें उनकी ज़बर्दस्त भूमिका रहती थी, लेकिन दिल्ली पर कभी ख़ुद किसी मराठा ने राज नहीं किया, इसकी क्या वजह हो सकती है? जवाब- ये ग़लती हमेशा हो गई कि दूसरे को राज पर बैठाने का काम मराठों ने किया मगर, ख़ुद बैठ सकते हैं ये बात हमेशा नज़रअंदाज़ की. चाहे बादशाह का समय हो या जब मुग़लों का अंदरुनी संघर्ष चालू था तब मराठों ने यहाँ आकर उस संघर्ष को ख़त्म किया और यहाँ बादशाह की गद्दी सलामत रहेगी इसपर ध्यान दिया. जहाँ ये ज़िम्मेदारी ख़ुद ले लेने की आवश्यकता थी तब उन्होंने ज़िम्मेदारी ली नहीं. ये तो एक इतिहास का पन्ना है और ये आज तक चालू है.
सवाल- अभी भी एक मराठा है जिसकी लोग काफ़ी चर्चा करते हैं कि कहीं ये दिल्ली की गद्दी पर काबिज़ होगा की नहीं होगा? उस मराठा के बारे में आपकी क्या सोच है? जवाब- नहीं, उस मराठा के बारे में आप पूछते हैं, आप मेरी बात करते हैं. इस साल के पूरे होने के बाद राजनीति में और ख़ासतौर से संसदीय राजनीति में विधानसभा और लोकसभा में मेरे 40 साल पूरे हो जाएंगे. तिवारी जी के साथ गाना गाया सवाल- चालीस साल ऐसे पूरे हो जाएंगे पवार साहब जब आप एक भी चुनाव नहीं हारे हैं ये भी अपने आप में रिकॉर्ड है. जवाब- हो सकते हैं. क्योंकि मुझे याद नहीं है. हाँ संसद या विधानसभा में - मेरा कभी गैप नही रहा. चालीस साल पूरा होने के बाद अब ये मेरी ज़िम्मेदारी है कि अपनी पार्टी में, अपने राज्य में दूसरी पीढ़ी किस तरह से तैयार कर सकते हैं उस पर हमें ध्यान देना होगा. सवाल- पवार साहब ये सब बातें हम करेंगे कुछ ठहर कर लेकिन इस कार्यक्रम में हम आपसे जानना चाहेंगे कि एक गाना ऐसा कौन सा है जो आपको सबसे ज़्यादा पसंद है, जब कभी मन करता है सुनने का. जवाब- ज़िंदगी में कभी हमने गाना गाया ही नहीं. एक बार हमने गाना गाया था और आपको आश्चर्य होगा अकेले नहीं गाया और हमारे साथ नारायण दत्त तिवारी भी थे. एक इंटरनेशनल यूथ कॉन्फ्रेंस टोक्यो में थी. ये बात 1965-66 की होगी. वहाँ ऐसा सुझाव आया कि इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में मिलकर हर देश के प्रतिनिधियों को गाना गाना चाहिए. मैं और तिवारी जी और बाक़ी साथी क्या गाना गाते? फिर याद आ गया एक गाना नया दौर में था- साथी हाथ बढ़ाना. सामने बैठने वाले जापानी और बाक़ी देश के लोगों को कुछ समझ नहीं था इसलिए बड़े सुरक्षित ढ़ंग से हमें गाने में कोई तकलीफ नहीं हुई. कुछ सिनेमा के गाने हमेशा पसंद रहते थे. चाहे अंदाज हो, चाहे बरसात की रात हो, चाहे दीवार हो, महल हो या चाहे चोरी-चोरी हो. सवाल- ये तो था नए दौर का गाना था. आप उस दौर में भी थे और इस दौर में भी हैं. सियासत की दुनिया में भी बड़ी पकड़ रखते हैं. और अब एक-डेढ़ वर्ष से क्रिकेट की दुनिया में भी काफ़ी मज़बूत पकड़ है. तो बीसीसीआई के अध्यक्ष बनने की आपको क्या सूझी? जवाब- मैं खेल संगठनों में पिछले 30 साल से हूँ. महाराष्ट्र ओलंपिक संस्थान का 25 वर्ष से अध्यक्ष हूँ. कबड्डी खेल को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की ज़िम्मेदारी मेरे ऊपर थी, तब मैं नेशनल प्रेसीडेंट था, एशियन प्रेसीडेंट था. कई खेल ऐसे हैं जिसकी हमेशा ज़िम्मेदारी मैंने ली है. मेरी पूरी भागीदारी इसमें होती है कि काम करने वालों की अच्छी टीम का चुनाव करूँ और उनकी ठीक तरह से मदद करूँ और जब कोई समस्या उत्पन्न होती है तो उनको दूर करने के लिए ताक़त दूँ, मदद करूँ. ग्रेग चैपल का काम सवाल- पवार साहब अब कुछ बात समझ में आ रही है. आप कबड्डी एसोसिएशन से आए तभी जगमोहन डालमिया को ऐसी पटकनी दी और जो कई सालों से उनका राज था क्रिकेट की दुनिया पर वह एकदम से गायब ही हो गया. जवाब- नहीं, मैं मुंबई क्रिकेट संघ का कई सालों से अध्यक्ष रहा था. देश में क्रिकेट के बारे में हमेशा दिलचस्पी मुंबई वालों ने रखी है. मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ऐसी है कि एक ज़माने में आधी टीम वहाँ की रहती थी. कई लोगों ने कहा था कि कभी तो बीसीसीआई की ज़िम्मेदारी लीजिए. हमने चुनाव लड़ा, हम एसोसिएशन से जीते थे मगर तब हमें हराया गया. स्पोर्टस में रहने के बाद ये झगड़ा काहे के लिए करना. तब समस्या हमारी एक ही थी कि वहाँ बॉलर वही था और अंपायर भी वही था. और अंपायर-बॉलर का कंबिनेशन होने के बाद तो विकेट तो जाती है. तब हमारी विकेट गई. अगले चुनाव में हमने पूरी तैयारी की और जीते. और वहाँ जो अभी चुनाव हुआ है लोगों ने मुझे अनोपोज्ड चुनकर दे दिया. और यह कार्यकाल पूरा करने के बाद ये ज़िम्मेदारी फिर हम नहीं लेंगे. दो साल की ये जो कार्यकाल है, पूरा होने के बाद बाक़ी लोगों और संगठन को और अन्य खेल को मदद करेंगे. सवाल- 2008 के बाद आप उम्मीदवार नहीं होंगे? क्रिकेट की बात चल रही है तो क्रिकेट में आपका पसंदीदा खिलाड़ी कौन है? जवाब- बहुत सारे अच्छे खिलाड़ी हैं एक ही खलाड़ी नहीं. जिस तरह सचिन तेंदुलकर खेलते हैं. जिस तरह से हरभजन सिंह और अनिल कुंबले गेंदबाज़ी करते हैं, जिस तरह से गांगुली का जब फार्म था द्रविड़ जिस तरह से खेलते हैं, जो स्टेबल हैं. आज कई अच्छे खिलाड़ी हैं. पुराने ज़माने की बात हो तो चाहे विजय मर्चेंट रहते थे, पॉली उमरीगर रहे उनका खेल हमने देखा है. क्रिकेट के साथ रिश्ता कई सालों से है. मैं जब कॉलेज में पढ़ता था तब क्रिकेट मैच देखने के लिए पूना से मुंबई आता था और वहाँ नॉर्थ स्टैंड में बैठकर पाँच-पाँच दिन का टेस्ट मैच देखता था. समय मिला तो कानपुर जाता था क्योंकि वहाँ मैचों का हमेशा निर्णय होता था. सवाल- क्रिकेट की राजनीति पर तो आपने पकड़ मजबूत कर ली है, टीम के प्रदर्शन को कैसे सुधारेंगे ? जवाब- वह तो सुधरना चाहिए, ज़्यादा से ज़्यादा एक्सपोजर मिलना चाहिए नए लड़के को. घरेलू क्रिकेट में सुधार की आवश्यकता है. सवाल- ये भी चर्चा है कि विश्व कप के बाद ग्रेग चैपल का अनुबंध बढ़ाया नहीं जाएगा क्योंकि कोच के रूप में वे फ़्लॉप हुए हैं. जवाब- कोच के रूप में अच्छा काम किया है इसका इंप्रेशन सभी खिलाड़ियों ने मुझे दिया है. मैंने कई बार सभी खिलाड़ियों के साथ बातचीत की और सभी ने कहा कि उनका प्रदर्शन अच्छा है क्योंकि खेल की क्वालिटी सुधारने में बहुत योगदान दिया है. उनके अनुबंध के बारे में आज कहना मुश्किल है क्योंकि अंततः इसका निर्णय बोर्ड करता है.
सवाल- गीतों की बात करें तो क्या जब आप चोरी-चोरी जैसी फ़िल्मों के पुराने गाने सुनते हैं तो बचपन और जवानी की किस तरह की यादें ताज़ा होती है? जवाब- मैं जल्दी में जब रहता हूँ या रोड से जाना होता है तो भीम सेन का शास्त्रीय संगीत सुनता हूँ. मेरे पास उनके कई प्राइवेट और पब्लिक कार्यक्रम के रिकॉर्ड्स हैं कैसेट हैं. सड़क यातायात ज़्यादा पसंद सवाल- क्या आप घूमने-फिरने के शौकीन हैं? जवाब- यात्रा तो बहुत करता हूँ यात्रा बहुत पसंद है. मेरी पत्नी और लड़की मुझसे कहते हैं कि आप सड़क से क्यों जाते हैं. क्योंकि सड़क से जाने में पता चलता है - फ़सल कैसी है, सड़क कैसी है जाते समय लोगों से मिलने का मौक़ा मिलता है. हेलिकॉप्टर से और प्लेन से जाने से ठीक है फ़ायदा है समय बचता है लेकिन आम जनता से जो जुड़ाव होना चाहिए उसके लिए गाड़ी का सफ़र अच्छा है और वह मैं करता हूँ. सवाल- सड़क से यात्रा करने पर जनता के नब्ज़ पर आपकी ऊंगली रहती है तो आपकी पसंदीदा जगह कौन सी है? जवाब- भारत में पूरा उत्तरी भारत - क्या लोग हैं, इतना सुंदर! मुझे सिक्किम में सबसे ज़्यादा सुकून मिलता है. बेहद विकसित है, खूबसूरत है. वहाँ से कचनजंगा भी देख सकते हैं और दूसरी बात है कि वहाँ के लोग देश की इज़्ज़त करने वाले लोग हैं. सिक्किम में आपकी गाड़ी पर राष्ट्रीय झंडा लगा हो तो आठ साल का बच्चा भी रुक कर राष्ट्रीय ध्वज को सलाम करेगा और 70 साल का वृद्ध व्यक्ति भी सड़क पर रुक जाएगा. राष्ट्रीय झंडे का इतना सम्मान देश में मैंने कहीं नहीं देखा जो सिक्किम में होती है. सवाल- आप सुबह उठकर सबसे पहले क्या करते हैं? जवाब- पहली चीज़ न्यूज पेपर यानि अख़बार है. आजकल कोशिश करता हूँ कि सुबह उठकर अशोका होटल में जिम है तो वहाँ जाने की कोशिश करूँ. 66-67 साल के हो गए हैं. अपने देश में सच्चे राजनीतिज्ञ तो 80 के बाद ही विकसित होते हैं ये बात बिल्कुल सच है.
सवाल- रात को सोने से पहले आख़िरी काम क्या करते हैं? जवाब- कुछ सीरियस दूसरे दिन के काम का कागज पढ़ता हूँ. अगले दिन के बैठक का एजेंडा पूरा करता हूँ और फिर सोता हूँ. सबसे पसंदीदा दिलीप कुमार सवाल- आपके पसंदीदा अभिनेता और अभिनेत्री कौन से है? जवाब- पुराने ज़माने में सबसे पसंदीदा अभिनेता दिलीप कुमार थे और बहुत सालों से व्यक्तिगत मित्र भी. तो हमेशा उन्हें देखने में मज़ा आता था. मुग़ले आजम, शहीद, अंदाज़ और सभी पुरानी फ़िल्में. युसूफ भाई की आमतौर पर सभी फ़िल्में मैंने देखी होंगी. जहाँ तक अभिनेत्री की बात है उस ज़माने की जो पुरानी अभिनेत्री थीं - नाम था लीला नायडू. उनका प्रदर्शन बहुत अच्छा होता था. बाद में मुझे सामाजिक मुद्दों पर आधारित फ़िल्मों में स्मिता पाटिल और शबाना आज़मी का कार्य पसंद आता था. दोनों से मेरे व्यक्तिगत अच्छे रिश्ते हैं हालाँकि स्मिता पाटिल तो अब नहीं हैं लेकिन इनके परिवार और मेरे परिवार के अच्छे रिश्ते हैं. शबाना आज़मी के साथ दिन भर रहने का, इधर-उधर रहने का, बातचीत करने का मौक़ा मिलता है. उनके साथ बातचीत करने में मज़ा आता है. सवाल- दिलीप कुमार की कौन सी फ़िल्म सबसे ज़्यादा याद आती है. जवाब- अंदाज़. सवाल- अगर हम फ़िल्मों की चर्चा जारी रखे तो वहीदा रहमान, मधुबाला, नर्गिस... जवाब- वे भी अच्छे ही थे. टैलेंटेड कलाकार थे इसमें कोई दो राय नहीं है. आज के कलाकार अच्छे काम तो करते ही हैं मगर उस समय में बड़ी विकट स्थिति में उनको काम करना पड़ता था और उनका प्रदर्शन उनका मेहनत था. आपने ये नाम लिए इन सभी का प्रदर्शन अच्छा था और ये देश के ट्रेज़र थे. सवाल- अभी किसको देश का ट्रेज़र मानते हैं? जवाब- अभी की बात मत पूछिए, मैं नाम नहीं लेना चाहता. एक रोज़ अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोह के उदघाटन के लिए मुंबई में मुझे बुलाया था... तो वहाँ जो लड़की लेंप लेकर आई थी उन्होंने मुझे मराठी में कुछ कहा..मैंने कहा कि आप मराठी जानती हैं क्योंकि अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोह में मैं समझा कि हिंदी या तो अंग्रेज़ी (संजीव- आप ज़रूर माधुरी दीक्षित की बात कर रहे हैं) बिल्कुल. मैं सौ प्रतिशत सच बोलता हूँ कि सुनने और देखने के बाद मेरे घर में मुझे पिटाई हो गई. (संजीव- आप भी कुछ उस समय एक्टिंग कर रहे थे) इस बुढापे में एक्टिंग काहे का करें. (संजीव- माधुरी दीक्षित तो कितने दिलों की धक-धक थीं.) आजकल के सिने वर्ल्ड के साथ हमारे कोई रिश्ते नहीं और हम दिलचस्पी भी नहीं लेते, इसलिए सवाल पैदा नहीं होता, जानते नहीं. सवाल- माधुरी दीक्षित आपको कैसी लगी? जवाब- मालूम नहीं. एक दो बार व्यक्तिगत मुलाक़ात हुई है तो बड़ी कमिटेड लगीं. सवाल- आपके जीवन का ग्रेटेस्ट लव क्या है? जवाब- कड़ी मेहनत. (संजीव-यह बहुत उबाउ है) यह हक़ीकत है. कोई भी ज़िम्मेवारी लीजिए उसमें कड़ी मेहनत कीजिए. करना है तो ऐसी चीज़ जो सौ साल दो सौ साल रहती है और सौ-दो सौ साल रहने वाली चीज़ को बनाने का मौक़ा मिला तो इस तरह से बनाना चाहिए कि हमेशा लोगों को ख़ुशी मिले. सवाल- कहीं मन में यह भी रहता है कि शरद पवार का नाम भी सौ दो सौ साल बाद भी लोग याद रखें. जवाब- आज की स्थिति में सौ-दो सौ साल शायद ही किसी का नाम रहता है. मौक़ा मिला तो अच्छी तरह से काम करो. पहला प्यार सवाल- आपने भीम सेन जोशी पसंदीदा गायक बताए उसके सिवा पॉपुलर संगीत में कौन गायक आपके पसंदीदा रहे? जवाब- कई हैं, मालिनी बाई राव अदुलकर जो बहुत अच्छा मालखौंद गाती हैं. मेरे घर पर एक कायर्क्रम हुआ था जब लता बाइ को भारत रत्न मिला था तब दिल्ली स्थित निवास पर एक डिनर का आयोजन किया गया था. लता जी और उनके परिवार वाले ग्वालियर घराने की थीं और मालनी बाई भी ग्वालियर घराने से थीं. लता जी ने कभी मालनी बाइ अदुलकर को सुना नहीं था, ऐसा मुझे पता लगा, तब मैंनें हैदराबाद से उनको यहाँ बुलाया था. जिस तरह से उन्होंने मालखौंद गाया वो रात, लता जी ने सुबह-सुबह कहा कि मैंने कई लोगों को सुना है लेकिन मालनी बाई को सुना तो मुझे बहुत ख़ुशी हुई. क्लासिकल म्यूजिक में ग़लत जगह पर ठेका लगाने पर गायक बहुत दुखी होते हैं और हमारे क्षेत्र के जो लोग हैं उनको कब अच्छा कहना चाहिए (कब वाह-वाह कहनी चाहिए, कब दाद देनी चाहिए) यह समझना मुश्किल होता है. संसद के अंदर कई ऐसे लोग हैं जो क्लासिकल म्यूजिक के बारे में अच्छी दिलचस्पी लेते हैं. सवाल- आपके जीवन में पहला प्यार क्या आपकी पत्नी से हुआ था या किसी और से? जवाब- यह कहना बड़ा मुश्किल है राजनीति में. सच बताऊँ तो इस क्षेत्र में मेरा कभी ध्यान नहीं रहा क्योंकि मैं हमेशा दूसरे काम में तन्मय रहता था. पत्नी प्रतिभा जी से यह एरेंज्ड शादी थी. कॉमर्स गर्ल्स स्कूल पूना में उस ज़माने में कुल मिलाकर 25 लड़कियाँ रहती थीं. इनमें ज्यादा से ज़्यादा लड़कियाँ पारसी रहती थीं, उस ज़माने में हमारा अंग्रेज़ी ठीक नहीं था हम गाँव से आए थे. पारसी लड़कियों को अंग्रेज़ी छोड़कर दूसरी भाषा नहीं आती था तो इनके साथ कौन अंग्रेज़ी बोलता, दूर ही रहना फ़ायदे की बात थी. सवाल- पुत्री सुप्रिया के साथ आपके कैसे रिश्ते हैं? जवाब- हमारी अकेली पुत्री हैं. हम लोगों ने उन्हें ट्रेनिंग लड़के की तरह दी. और अगर कोई ज़िम्मेदारी लेने की ज़रूरत हुई तो बड़ी मज़बूती से लेंगी. मेरे और उनके रिश्ते बिल्कुल दोस्ताना हैं. हम आपस में चर्चा करते हैं, हम दोनों की कमिटमेंट आपस में बहुत है. मगर बेबाक राय देने में कभी हिचकती नहीं हैं. सवाल- आपको खाने का शौक है? जवाब- खाने का शौक है, अच्छा बना हुआ हो तो पसंद आता है, ख़ासतौर पर सी फूड बहुत पसंद आता है. अलग-अलग तरह की मछली, क्रैब मेरी पत्नी को पसंद आते हैं. सवाल- एक सवाल जो हमेशा सबके मन में रहता है कि गाँधी परिवार के साथ आपके रिश्ते खट्टे-मीठे रहे हैं, ज़्यादा खट्ठे-कम मीठे, इस समय लगता है ज़्यादा मीठे कम खट्टे. उस परिवार के 20-30 साल के रिश्ते के बारे में आपका क्या कहना है. जवाब- मुझे राज्य की राजनीति में वाईबी चव्हाण और राष्ट्रीय राजनीति में पंडित जवाहरलाल नेहरू के प्रति आकर्षण था. उन्होंने देश के लोकतांत्रिक ढांचे को मज़बूत करने में बहुत बड़ा योगदान दिया और साइंटिफिक टेंपर जताने का उन्होंने बहुत बड़ा काम किया, उनकी एक सोच थी. इंदिरा गाँधी का व्यक्तित्व, जनता में उनकी पकड़ हमेशा अच्छी लगी. जब आपातकाल आया तो हम दुखी हुए थे क्योंकि नेहरू जी का लोकतांत्रिक ढांचे के बारे में विचारधारा थी वह हमारे अंदर बैठी हुई थी और हमें लगा कि हम बाहर जा रहे हैं. नेतृत्व के मुद्दे पर झगड़ा हुआ और हमने पहली दफ़ा काँग्रेस छोड़ दी. व्यक्तिगत रूप से राजीव गाँधी से मेरे बहुत अच्छे रिश्ते थे. मेरी लड़की सुप्रिया की शादी में भी बारामती आए थे. हम लोग साथ काम करने के लिए एक साथ आ गए. राजीव गांधी विज़नरी थे. वे भी पंडित जी की तरह आधुनिक विज्ञान और तकनीक को स्वीकार करने वाले थे. आज जो देश में सूचना तकनीक, टेलीकॉम या आटो मोबाइल इंडस्ट्री में परिवर्तन हुए हैं इसमें पूरा योगदान राजीव गाँधी का है और हम हमेशा उसे स्वीकार करते हैं. मगर कई मुद्दों पर अलग-अलग राय होती थी हम बोलते थे. कांग्रेस में नेतृत्व के विचार को छोड़कर दूसरा विचार रखना कई लोगों को पसंद नहीं आता था, तो हम वो पसंद करते थे. लेकिन इससे व्यक्तिगत रिश्ते ख़राब होते ऐसा नहीं मानते थे. मेरे सार्वजनिक जीवन में सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं के साथ व्यक्तिगत रिश्ते अच्छे हैं और अच्छे रहेंगे, क्योंकि मैं व्यक्तिगत रिश्तों और राजनीति को मिलाना नहीं चाहता. सवाल- सोनिया गाँधी के बारे में आपके क्या विचार हैं? व्यक्ति कैसी हैं राजनितिक नेता की बात नहीं कर रहा हूँ? जवाब- ये कहें कि जिस तरह से उन्हें आघात लगा और सब लोग कहते थे कि वे देश छोड़कर जाने वाली हैं, तब जिस तरह से वे देश में अपने बच्चों को लेकर रहीं और काँग्रेस पार्टी का मज़बूती से साथ देने की आवश्यकता थी इसे स्वीकार कर उन्होंने जो योगदान दिया उसे तो स्वीकार करना पड़ेगा. इतने बड़े देश में कई ऐसे मुद्दे थे, यहाँ की संस्कृति, यहाँ के इतिहास सबके बारे में, देश चलाने की ज़िम्मेदारी की परिस्थिति जब पैदा होती तब क्या रास्ता होता - इसकी आशंका हमारे जैसे कई लोगों के मन में तब थी और हम लोगों ने बोलकर इसे व्यक्त किया और इसकी क़ीमत बाहर जाकर चुकाई. सवाल- वे व्यक्तिगत तौर पर कैसी हैं. अकेले जब मिलती हैं तो कुछ बात करती हैं, हँसती हैं या कुछ कहती हैं? जवाब- जब आप उन्हें मिलते हैं तो नेहरू परिवार, इंदिरा जी के परिवार का एक तरीका है कि अपने पास आने वाले लोगों को बड़े अच्छे तरह से व्यक्तिगत व्यवहार करते हैं और वो परंपरा वो भी चलाती हैं. सवाल-आगे की क्या योजना है? जवाब-अगली पीढ़ी को मज़बूती से तैयार करना और जिस क्षेत्र में अपनी दिलचस्पी है - घूमने, देश देखने, दुनिया देखने, पढने - इसके लिए समय मिले तो मुझे खुशी होगी. | इससे जुड़ी ख़बरें अभ्यास मैच में भारत 96 रनों से जीता09 दिसंबर, 2006 | खेल डेमियन मार्टिन का चौंकाने वाला संन्यास08 दिसंबर, 2006 | खेल गांगुली ने की टीम में बेहतरीन वापसी07 दिसंबर, 2006 | खेल शोएब और आसिफ़ पर लगा प्रतिबंध हटा05 दिसंबर, 2006 | खेल ज़्यादा अपील के कारण ली पर जुर्माना04 दिसंबर, 2006 | खेल आख़िरी वनडे मैच में भी इज़्ज़त नही बची03 दिसंबर, 2006 | खेल 'खिलाड़ियों को ही रास्ता निकालना होगा'03 दिसंबर, 2006 | खेल भारत ने दक्षिण अफ़्रीका को हराया01 दिसंबर, 2006 | खेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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