|
इसे कहते हैं क्रिकेट का कमाल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जब भारतीय टीम बिना पूरे पचास ओवर खेले सिर्फ़ 162 रन बनाकर ऑल आउट हो गई तो हर किसी को लगने लगा कि अब तो हार से कोई नहीं बचा सकता. लेकिन भारतीय टीम ने यह मैच जीत लिया, इसे ही कहते हैं क्रिकेट का कमाल, क्रिकेट वाक़ई अनिश्चतताओं का खेल है. भारतीय बल्लेबाज़ी ख़राब रही इसमें कोई संदेह नहीं है, मुझे समझ में नहीं आता कि इतने बदलाव क्यों किए जा रहे हैं, मुझे पता नहीं चल रहा कि राहुल द्रविड़ पारी की शुरूआत क्यों कर रहे हैं? पिछले कई मैचों से सहवाग ठीक तरीक़े से स्कोर नहीं कर पा रहे हैं, वे जब भी मैदान पर जाते हैं टीम एक तरह से दबाव में आ जाती है. महेंद्र सिंह धोनी का खेल भी पिछले कुछ समय से गड़बड़ चल रहा है, आज उन्होंने बड़ी उम्मीद बँधाई थी और उन्होंने बहुत ही धुआँधार बल्लेबाज़ी करते हुए 18 रन बनाए लेकिन जल्दी ही आउट हो गए. बहरहाल, सबसे बड़ी बात है मैच का परिणाम और इस जीत के साथ अब भारत टूर्नामेंट में बना हुआ है यही सबसे अहम बात है. आज सभी भारतीय गेंदबाज़ों ने बेहतरीन लेंथ-लाइन के साथ बॉलिंग की, किसी भी गेंदबाज़ ने कमज़ोर गेंदबाज़ी नहीं की. हरभजन, अगरकर, श्रीसंत और मुनाफ़ सबने इस बात का ख़याल रखा कि स्कोर कम है इसलिए कसी हुई गेंदबाज़ी की जाए. यह तो मानना पड़ेगा कि बहुत कम रन बनाने के बाद भी भारतीय टीम ने जिस जज़्बे से फ़ील्डिंग की, जिस तरह से गेंदबाज़ी की वह काबिले तारीफ़ है. इस मैच में जीत का श्रेय पूरी भारतीय टीम को जाता है लेकिन मैन ऑफ़ द मैच हरभजन सिंह ने वाक़ई बेहतरीन प्रदर्शन किया उन्होंने न सिर्फ़ तीन विकेट लिए बल्कि सचिन के साथ महत्वपूर्ण साझीदारी की. आज सचिन ने काफ़ी अच्छा खेल दिखाया ख़ास तौर पर जब टीम को उनकी ज़रूरत थी, सचिन ने पहले मैच में शतक लगाया और आज वे 65 रन बनाकर बहुत ही अजीब तरीक़े से आउट हुए. सिर्फ़ बॉलिंग और फ़ील्डिंग ही नहीं बल्कि विकेटकीपर महेंद्र सिंह धोनी ने भी अच्छी विकेटकीपिंग की, उन्होंने हरभजन की गेंद पर ब्रावो जैसे ख़तरनाक खिलाड़ी को शानदार तरीक़े से स्टंप कर दिया. |
इससे जुड़ी ख़बरें 'रनों के साथ जीत भी होती तो अच्छा था'14 सितंबर, 2006 | खेल भारत-वेस्ट इंडीज़ मैच का स्कोर कार्ड14 सितंबर, 2006 | खेल भारत वेस्टइंडीज़ से 29 रनों से हारा14 सितंबर, 2006 | खेल सचिन की वापसी, कुंबले फिर नहीं20 जुलाई, 2006 | खेल पूरी तरह फ़िट हैं मास्टर ब्लास्टर18 जुलाई, 2006 | खेल 'तेज़ गेंदबाज़ों की एक और खेप तैयार'15 जुलाई, 2006 | खेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||